दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष किशोर पुलिस इकाइयों में रिक्तियों को भरने की याचिका पर नोटिस जारी किया

  • दिल्ली हाईकोर्ट ने विशेष किशोर पुलिस इकाइयों में रिक्तियों को भरने की याचिका पर नोटिस जारी किया

    दिल्ली हाईकोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत हर जिले में सभी विशेष किशोर पुलिस इकाइयों (Special Juvenile Police Units) में रिक्त पदों को भरने के लिए एक याचिका पर नोटिस जारी किया है।

    चीफ़ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेदेला की खंडपीठ ने उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा और मामले को 30 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

    याचिका एक वकील- अल्फा फिरिस दयाल द्वारा दायर की गई है। दिल्ली पुलिस से रिक्त पदों को भरने के बाद प्रत्येक जिले में एसजेपीयू की स्थिति के बारे में अद्यतन स्थिति रिपोर्ट प्रदान करने के लिए एक और निर्देश की मांग की गई है।

    यह याचिका एडवोकेट रॉबिन राजू, आंचल बंब और हेम राज के माध्यम से दायर की गई है।

    यह प्रस्तुत किया गया है कि दिल्ली के कई जिलों में, एसजेपीयू जेजे अधिनियम की धारा 107 के तहत निर्धारित तरीके से काम नहीं कर रहे हैं।

    याचिका में कहा गया "यह बताने की आवश्यकता नहीं है कि एसजेपीयू की जेजे अधिनियम के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए बच्चों से संबंधित मामलों को उठाने की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसमें अधिनियम के तहत संस्थानों की स्थापना और रखरखाव, बच्चों के संबंध में सक्षम अधिकारियों की अधिसूचना और उनके पुनर्वास और संबंधित विभिन्न आधिकारिक और गैर-आधिकारिक एजेंसियों के साथ समन्वय और ऐसे अन्य कार्यों का निर्वहन करना शामिल है।"

    इसमें कहा गया है कि विशेष रूप से नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि और दिल्ली पुलिस के एक अध्ययन के मद्देनजर एसजेपीयू की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, जिससे पता चलता है कि दिल्ली में किए जा रहे अपराधों में नाबालिगों की भागीदारी बढ़ रही है।

    Praveen Mishra

    प्रवीण मिश्रा Law Graduate हैं और लाइव लॉ हिंदी से जुड़े हैं। वे सुप्रीम कोर्ट, उच्च न्यायालयों, उपभोक्ता आयोगों और अन्य न्यायिक मंचों के महत्वपूर्ण फैसलों एवं कानूनी घटनाक्रमों पर लेखन करते हैं। उनका उद्देश्य जटिल कानूनी विषयों और न्यायिक निर्णयों को सरल, सटीक और तथ्यपरक भाषा में हिंदी पाठकों तक पहुंचाना है।

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