हाईकोर्ट
BCI ने तदर्थ समिति की शक्ति सीमित करने वाले केरल हाईकोर्ट के आदेश पर दोबारा विचार की मांग की
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने केरल हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर की है जिसमें यशवंत शेनॉय बनाम केरल बार काउंसिल और अन्य बनाम केरल कोर्ट ने स्टेट बार काउंसिल द्वारा एडवोकेट यशवंत शेनॉय (अपीलकर्ता) के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को रद्द कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि उसके पास ऐसी कार्यवाही शुरू करने की कोई शक्ति नहीं है।फैसले में, न्यायालय ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ केरल का वर्तमान कोरम एक निकाय था जो कानून का उल्लंघन कर रहा था क्योंकि इसके सदस्यों की अवधि समाप्त हो गई थी और उसके बाद,...
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कॉल इंटरसेप्शन वैध, अपराध की आर्थिक गंभीरता 'सार्वजनिक सुरक्षा' की कसौटी पर खरी उतरनी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा कॉल और संदेशों को इंटरसेप्ट करने के खिलाफ एक आरोपी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि भ्रष्टाचार का देश की अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। जस्टिस अमित महाजन ने आकाश दीप चौहान द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120 बी के तहत उनके खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी, जिसे भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 9 के साथ पढ़ा जाए। ...
आयात/निर्यात चूक में कोई नरमी नहीं; बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के आयात क्लियर करने वाली कूरियर एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने बिना अनुमति के आयातों को मंजूरी देने के लिए एक कूरियर एजेंसी के लाइसेंस को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है। न्यायालय ने कहा कि इस तरह की उदारता दिखाने से लोगों को कूरियर एजेंसियों की सेवाओं का सहारा लेकर अपराध करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस जितेन्द्र जैन की पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता ने 1998 के विनियमों के तहत अपने दायित्व को पूरा करने में लापरवाही बरती है। ये दायित्व अधिकृत कूरियर पर डाले गए हैं, क्योंकि याचिकाकर्ता आयात और निर्यात की मंजूरी...
दिल्ली दंगों को पांच साल हो गए, किसी व्यक्ति को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है? तस्लीम अहमद की जमानत पर याचिका हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से पूछा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को दिल्ली पुलिस से पूछा कि 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों को पांच साल हो गए, तो किसी आरोपी को कितने समय तक जेल में रखा जा सकता है?जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने दंगों के लिए बड़ी साजिश का आरोप लगाने वाले UAPA मामले में आरोपी तस्लीम अहमद की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस के एसपीपी अमित प्रसाद से यह सवाल पूछा।अहमद की ओर से पेश हुए एडवोकेट महमूद प्राचा द्वारा मुकदमे में देरी के आधार पर दलीलें दिए जाने के बाद यह सवाल...
लक्ष्मी पुरी मानहानि मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने साकेत गोखले के माफ़ीनामे पर आपत्ति जताई, नए सिरे से दाखिल करने को कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद साकेत गोखले द्वारा संयुक्त राष्ट्र में भारत की पूर्व सहायक महासचिव लक्ष्मी पुरी को बदनाम करने के लिए दायर माफ़ीनामे को रिकॉर्ड पर लेने से इनकार किया।जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रेणु भटनागर की खंडपीठ ने कहा कि हलफ़नामे की कुछ सामग्री रिकॉर्ड पर नहीं ली जा सकती।जजों ने गोखले के वकील सीनियर एडवोकेट अमित सिब्बल से कहा,"ऐसा नहीं किया जा सकता... आप पहले इस हलफ़नामे को वापस लें, फिर हम आपकी बात सुनेंगे।"पुरी ने गोखले के ट्वीट पर...
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दिव्यांग व्यक्तियों को 'निम्न-मानक जीवन' शब्द देने वाले विनियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर मांगा जवाब
पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (IRDAI) स्वास्थ्य बीमा विनियम, 2016 में दिव्यांग व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता का वर्णन करने के लिए "निम्न-मानक जीवन" शब्द के प्रयोग को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।विनियम 8(बी) और 8(सी) में यह अनिवार्य किया गया कि दिव्यांग व्यक्तियों को स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाएगा। विनियमन के खंड (बी) में कहा गया कि नीति में न केवल मानक जीवन बल्कि "निम्न-मानक जीवन" के लिए भी स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान...
IPL टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने चिन्नास्वामी भगदड़ के लिए CAT के आदेश के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया
IPL क्रिकेट टीम रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश के खिलाफ कर्नाटक हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास हुई भगदड़ के लिए टीम को दोषी ठहराया गया है जिसमें 11 लोगों की जान चली गई।यह दुर्घटना टीम द्वारा आईपीएल में अपनी 2025 की जीत का जश्न चिन्नास्वामी स्टेडियम में मनाने की घोषणा से पहले हुई।CAT के अनुसार घोषणा अचानक की गई, जिससे पुलिस को तीन से पांच लाख लोगों की भीड़ के लिए तैयार होने का समय नहीं मिला।"प्रथम दृष्टया ऐसा प्रतीत होता है कि...
राज्य को धोखाधड़ी करने वाली फर्म को उसके साथ अनुबंधात्मक संबंध बनाने से रोकने के लिए वैधानिक शक्ति की आवश्यकता नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने एक फैसले में कहा कि ठेकेदार को काली सूची में डालने की शक्ति अनुबंध आवंटित करने वाले पक्ष में निहित है, जबकि कानून द्वारा ऐसी शक्ति प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है। धोखाधड़ी करने वाली फर्म को काली सूची में डालना संविदात्मक कानून के लिए विदेशी अवधारणा नहीं है। कानून में विशेष रूप से किसी भी फर्म को किसी पक्ष के साथ आगे के व्यावसायिक संबंधों में प्रवेश करने से रोकने का प्रावधान है, यदि पाया जाता है कि उसने दूसरे पक्ष के साथ धोखाधड़ी की है, तो यह माना जाता है। जस्टिस रेखा...
फेयर प्राइस शॉप लाइसेंस विवाद: आदेश की प्रति देना अनिवार्य, आवेदक को विधिक उपचार का अधिकार : राजस्थान हाईकोर्ट
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की कार्यशैली को गंभीर लापरवाही और अवैध करार देते हुए जिला आपूर्ति अधिकारी को निर्देश दिया कि वह उस आदेश की प्रति याचिकाकर्ता को एक सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराएं, जिसके तहत फेयर प्राइस शॉप का लाइसेंस निजी प्रतिवादी को दिया गया।जस्टिस मुनुरी लक्ष्मण की एकल पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को राजस्थान खाद्यान्न एवं अन्य आवश्यक वस्तुएं (वितरण का विनियमन) आदेश 1976 के तहत कानूनी उपाय लेने का अधिकार है और बिना उस आदेश की प्रति के, वह ऐसा करने में असमर्थ है।मामले में याचिकाकर्ता...
कर्नाटक हाईकोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में जन-औषधि केंद्र बंद करने के सरकारी आदेश पर रोक लगाई
कर्नाटक हाईकोर्ट ने 18 याचिकाकर्ताओं के लिए राज्य के स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी सरकारी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी, जिसमें सरकारी अस्पतालों के परिसर में संचालित सभी जन औषधि केंद्रों (JAK) को बंद करने का निर्देश दिया गया।जस्टिस एम आई अरुण ने केंद्रों के मालिकों द्वारा दायर याचिकाओं के एक समूह में यह आदेश पारित किया, जिसमें कहा गया,"याचिकाकर्ता को प्रतिवादी नंबर 4-अस्पताल में जन औषधि केंद्र (फार्मेसी शॉप) चलाने की दी गई रियायत अगली सुनवाई की तारीख तक समाप्त नहीं की जाएगी।"याचिकाकर्ताओं ने...
दहेज उत्पीड़न नहीं, परिवार में छोटी-मोटी कलह: पत्नी के खुद को आग लगाने और दहेज उत्पीड़न मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने पति को बरी करने का फैसला बरकरार रखा
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में दहेज हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति और उसके परिजनों को बरी करने का फैसला बरकरार रखा, जिसमें पत्नी ने खुद को आग लगाने के बाद आत्महत्या कर ली थी।ट्रायल कोर्ट ने 2014 में पति और उसके परिजनों को बरी कर दिया था, जिन पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए (क्रूरता), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 304बी (दहेज हत्या) और दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।ऐसा करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के मृत्यु पूर्व बयान में दहेज की...
नौकरी के बदले घूस घोटाला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने दागी उम्मीदवारों को नई भर्ती प्रक्रिया से किया बाहर
कलकत्ता हाईकोर्ट ने कैश फॉर जॉब्स स्कैम के तहत नौकरी गंवा चुके दागी उम्मीदवारों को आगामी SSC भर्ती प्रक्रिया से बाहर कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जिन उम्मीदवारों की नियुक्तियां सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की थीं वे नई भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।जस्टिस सौगता भट्टाचार्य ने आदेश देते हुए कहा,"दिनांक 30 मई, 2025 की भर्ती अधिसूचना के तहत शुरू हुई चयन प्रक्रिया को संबंधित प्राधिकारी आगे बढ़ाएं लेकिन उसमें दागी उम्मीदवारों को भाग लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यदि किसी दागी उम्मीदवार ने आवेदन किया...
छोटी-मोटी पारिवारिक कलह दहेज उत्पीड़न नहीं: गुजरात हाईकोर्ट ने पति को दहेज उत्पीड़न के मामले में बरी करने के फैसले को बरकरार रखा, मामले में पत्नी ने खुद को आग लगा ली थी
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में दहेज हत्या और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में पति और उसके परिजनों को बरी करने के फैसले को बरकरार रखा, जिसमें पत्नी ने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। ट्रायल कोर्ट ने 2014 में पति और उसके परिजनों को बरी कर दिया था, जिन पर आईपीसी की धारा 498ए (क्रूरता), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना), 304बी (दहेज हत्या) और दहेज निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।ऐसा करते हुए, हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के मरने से पहले दिए गए बयान में कथित दहेज की मांग के...
बिरकेनस्टॉक को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ी राहत, जॉन डो आदेश जारी – नकली माल की जांच के लिए लोक आयुक्तों की नियुक्ति
दिल्ली हाईकोर्ट ने मशहूर फुटवियर ब्रांड बिरकेनस्टॉक के पक्ष में जॉन डो आदेश (John Doe Order) पारित करते हुए नकली उत्पाद बेचने वाले दुकानदारों और वितरकों के ठिकानों की जांच के लिए लोक आयुक्तों (Local Commissioners) की नियुक्ति का आदेश दिया।जस्टिस सौरभ बनर्जी की एकल पीठ ने प्रतिवादी दुकानदारों, वितरकों, विक्रेताओं, आयातकों, निर्यातकों और फ्रेंचाइज़ियों को Birkenstock ट्रेडमार्क या उसके ट्रेड ड्रेस के तहत किसी भी उत्पाद को बेचने प्रचारित करने या व्यवसाय में लाने से अंतरिम रूप से रोक दिया।यह आदेश...
NEET-UG 2025: बिजली कटौती और अन्य गड़बड़ियों को लेकर पुनः परीक्षा या बोनस अंकों की मांग हाईकोर्ट में खारिज
राजस्थान हाईकोर्ट ने NEET-UG 2025 परीक्षा के दौरान बिजली कटौती और खराब मौसम जैसी समस्याओं के आधार पर पुनः परीक्षा कराने या बोनस अंक देने की मांग को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं सीकर जिले के 31 परीक्षार्थियों द्वारा दायर की गई थीं। जस्टिस समीर जैन की एकल पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि यह मामला "de minimis non curat lex" के सिद्धांत के अंतर्गत आता है यानी कानून तुच्छ बातों की परवाह नहीं करता।कोर्ट ने माना कि सीकर में कुल 98 परीक्षा केंद्र थे, जिनमें से लगभग 15 केंद्रों पर बिजली कटौती की समस्या आई,...
मद्रास हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: अब आयुर्वेदिक दवाओं के आयात पर भी जरूरी होगा लाइसेंस, नियमों में बदलाव की सिफारिश
मद्रास हाईकोर्ट ने आयुर्वेदिक दवाओं के आयात को लेकर अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयात से जुड़े मौजूदा कानून सिर्फ एलोपैथिक दवाओं तक सीमित नहीं हैं बल्कि आयुर्वेदिक दवाएं भी इन्हीं नियमों के दायरे में आती हैं। हाईकोर्ट ने मौजूदा नियमों में स्पष्टता की कमी को गंभीर बताया और आयुर्वेदिक दवाओं के लिए अलग फॉर्म व मानक निर्धारित करने की सिफारिश की है।जस्टिस सेंथिलकुमार राममूर्ति की एकल पीठ ने कहा,“ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट और उसके तहत बने नियम सभी प्रकार की दवाओं पर लागू होते हैं, जिनमें...
325 दिन की देरी पर फटकार: गंभीर अपराधों में अपील में देरी पीड़ितों के न्याय के अधिकार पर कुठाराघात- दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में राज्य सरकार द्वारा अपील दाखिल करने में की गई देरी विशेषकर तब जब पीड़ित समाज के हाशिए या आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग से आता हो, उसके निष्पक्ष न्याय के अधिकार को नुकसान पहुंचाती है।जस्टिस स्वराणा कांता शर्मा की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा,“पीड़ितों के पास स्वतंत्र रूप से कानूनी उपाय अपनाने के साधन नहीं होते और वे राज्य प्रणाली पर न्याय के लिए निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर राज्य समय पर अपील नहीं करता तो यह केवल प्रक्रियात्मक चूक नहीं...
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत पति से निर्माणाधीन फ्लैट के लिए किश्तें भरने को नहीं कहा जा सकता, न ही इसे 'साझा घर' कहा जा सकता है: बॉम्बे हाईकोर्ट
बंबई हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि निर्माणाधीन फ्लैट, भले ही पति-पत्नी के नाम पर संयुक्त रूप से रजिस्टर्ड हो, उसे घरेलू हिंसा से महिलाओं के संरक्षण अधिनियम (PwDV) 2005 के तहत 'साझा घर' नहीं कहा जा सकता। इसलिए पति को ऐसे फ्लैट की किश्तें भरने का निर्देश नहीं दिया जा सकता।जस्टिस मंजूषा देशपांडे ने कहा कि विचाराधीन फ्लैट अभी भी निर्माणाधीन है और दंपति अभी तक उसमें नहीं रह रहे हैं।हाईकोर्ट ने 4 जुलाई के अपने आदेश में कहा,"वर्तमान मामले में कथित 'साझा घर' का कब्ज़ा अभी तक नहीं सौंपा गया, किश्तों का...
अतिक्रमण की गई वन भूमि का मात्र उपयोग करना किसी व्यक्ति को मालिक द्वारा दायर बेदखली कार्यवाही में आवश्यक पक्ष नहीं बनाता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि जो व्यक्ति किसी वन भूमि पर बने पथ या सड़क का मात्र उपयोग करते हैं, उनके पास अतिक्रमणकारियों के विरुद्ध बेदखली आदेश को चुनौती देने का अधिकार नहीं है।जस्टिस ज्योत्सना रेवल दुआ:"याचिकाकर्ता कलेक्टर वन के समक्ष लिस में आवश्यक पक्ष नहीं है। कलेक्टर वन द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने के लिए उनके पास कोई अधिकार नहीं है। अतिक्रमण की गई/टूटी हुई वन भूमि पर अतिक्रमण का मात्र उपयोग करना किसी व्यक्ति को भूमि के मालिक द्वारा दोषियों के विरुद्ध दायर बेदखली कार्यवाही में...
BNSS की धारा 360 के तहत अभियोजन वापस लेने की सहमति देने से इनकार करने पर आरोपी ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दे सकता है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोई आरोपी ट्रायल कोर्ट के उस 'मनमाने और तर्कहीन' आदेश को चुनौती दे सकता है, जिसमें भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 360/ CrPC की धारा 321 के तहत उसके खिलाफ अभियोजन वापस लेने के लिए राज्य को सहमति देने से इनकार किया गया, भले ही राज्य ने ऐसे आदेशों को चुनौती न देने का विकल्प चुना हो।यह आदेश जस्टिस कौसर एडापागथ ने पारित किया।मामले की पृष्ठभूमियह मामला दो पुनर्विचार याचिकाओं से उत्पन्न हुआ, जिसमें से एक में कई आरोपी शामिल थे, जिन पर IPC, आर्म्स एक्ट,...




















