हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने अस्थिर साक्ष्य का हवाला देते हुए घर में जबरन घुसने के मामले में हत्या के प्रयास की दोषसिद्धि 22 साल बाद पलटी
पटना हाईकोर्ट ने 'अस्थिर' साक्ष्य का हवाला देते हुए घर में जबरन घुसने के मामले में हत्या के प्रयास की दोषसिद्धि 22 साल बाद पलटी

पटना हाईकोर्ट ने एक व्यक्ति की दोषसिद्धि को पलट दिया है, जिसे 2003 में घर में घुसकर हत्या के प्रयास के एक मामले में निचली अदालत ने सात साल की सज़ा सुनाई थी। न्यायालय 2023 में निचली अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सज़ा के आदेश के खिलाफ दायर एक अपील पर विचार कर रहा था, जिसके तहत अपीलकर्ता को भारतीय दंड संहिता की धारा 324 (खतरनाक हथियारों से जानबूझकर चोट पहुंचाना), 307 (हत्या का प्रयास), 452 (चोट पहुंचाने, हमला करने या गलत तरीके से रोकने की तैयारी के बाद घर में घुसना) और शस्त्र अधिनियम के...

विवादित जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट
'विवादित' जल निकायों की पहचान विशेषज्ञ करें, केवल राजस्व रिकॉर्ड प्रविष्टियां सत्यापन के लिए पर्याप्त नहीं: राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने विवादित जल निकायों की पहचान और संरक्षण के लिए तकनीकी विशेषज्ञ मूल्यांकन की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि केवल राजस्व अभिलेख प्रविष्टियाँ ही पर्याप्त नहीं हैं, क्योंकि ज़मीनी हकीकत का सत्यापन सक्षम विशेषज्ञ प्राधिकारी द्वारा किया जाना आवश्यक है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसमें याचिकाकर्ता के आवंटित खनन क्षेत्र में जाने के अधिकार को राज्य सरकार ने इस आधार पर खारिज कर दिया था कि संबंधित भूमि चारागाह होने के साथ-साथ एक जल निकाय भी है।यह देखते हुए...

लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट
लाभकारी निजी प्रैक्टिस में बिताई गई निलंबन अवधि को अवकाश माना जाएगा; कर्मचारी वेतन पाने का हकदार नहीं: जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर हाईकोर्ट के जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की खंडपीठ ने कहा कि जिस निलंबन अवधि के दौरान कर्मचारी निजी प्रैक्टिस में लाभप्रद रूप से लगा हुआ था, उसे अवकाश माना जाना चाहिए और कर्मचारी ऐसी अवधि के लिए वेतन पाने का पात्र नहीं है। तथ्यप्रतिवादी अनंतनाग जिला अस्पताल में सर्जरी में बी-ग्रेड विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत था। 16.08.2006 को उसने एक महिला मरीज की पित्ताशय की थैली की सर्जरी की। दुर्भाग्य से उसी शाम उसकी मृत्यु हो गई। अधिकारियों ने 19.08.2006 के आदेश द्वारा चिकित्सीय...

राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया
राजस्थान हाईकोर्ट ने अनियमितताओं के कारण 2021 SI भर्ती रद्द की; RPSC में प्रणालीगत कदाचार का स्वतः संज्ञान लिया

राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा उप-निरीक्षकों के पदों पर 2021 में की गई भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर दिया है। इस भर्ती प्रक्रिया में व्यवस्थागत अनियमितताएं - पेपर लीक, परीक्षा के दौरान नकल, फर्जी उम्मीदवारों का इस्तेमाल - सामने आई थीं। अदालत ने कहा कि ऐसी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया जाना चाहिए और यह रद्दीकरण "सार्वजनिक भर्ती परीक्षाओं के संचालन में राज्य की अखंडता को बनाए रखने के लिए आवश्यक है"। ऐसा करते हुए, अदालत ने राज्य में RPSC के भीतर "व्यवस्थागत कदाचार" का स्वतः...

दृष्टि से परे न्याय; दृष्टिबाधित कानून के छात्र के नज़रिए से न्यायालयों और कानूनी विद्यालयों की सुगम्यता पर आलोचनात्मक दृष्टि
दृष्टि से परे न्याय; दृष्टिबाधित कानून के छात्र के नज़रिए से न्यायालयों और कानूनी विद्यालयों की सुगम्यता पर आलोचनात्मक दृष्टि

न्याय के पवित्र कक्ष समानता का आश्रय स्थल माने जाते हैं, जहां कानून की निष्पक्षता का वादा सभी के लिए स्पष्ट है। फिर भी, कई दिव्यांग व्यक्तियों के लिए, यही कक्ष दृश्य और अदृश्य, दोनों तरह की बाधाओं का एक दुर्जेय घेरा हैं। एक ऐसी न्यायिक प्रणाली का विरोधाभास, जो अधिकारों की रक्षा तो करती है, लेकिन अक्सर एक वास्तविक सुलभ वातावरण प्रदान करने में विफल रहती है, एक ऐसी वास्तविकता है जिससे मैं, एक दृष्टिबाधित विधि छात्र के रूप में, प्रतिदिन जूझता हूं। मेरी व्यक्तिगत यात्रा ने यह उजागर किया है कि...

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI को लिखी चिट्ठी, जजों के बार-बार तबादले पर जताई चिंता
दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने CJI को लिखी चिट्ठी, जजों के बार-बार तबादले पर जताई चिंता

दिल्ली हाईकोर्ट बार एसोसिएशन (DHCBA) ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस (CJI) और अन्य कोलेजियम सदस्यों को पत्र लिखकर दिल्ली हाईकोर्ट के जजों के लगातार तबादलों को लेकर चिंता जाहिर की।बार एसोसिएशन ने कहा कि नियुक्ति और तबादले की प्रक्रिया में पारदर्शिता और परामर्श बढ़ाने से न केवल वकीलों का न्यायपालिका पर विश्वास मजबूत होगा बल्कि जनता का भरोसा भी बढ़ेगा।पत्र में कहा गया,“बार यह मानता है कि नियुक्ति और तबादले का अधिकार पूरी तरह से कोलेजियम के पास है, लेकिन यह भी सच है कि न्याय व्यवस्था में बार बराबर का...

चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्यवाही से छूट देने वाले प्रावधान को पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में दी चुनौती
चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्यवाही से छूट देने वाले प्रावधान को पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने शुक्रवार (29 अगस्त) को पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की उस याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें एवं कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 16 को चुनौती दी।धारा 16 में यह प्रावधान किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त या अन्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल के दौरान लिए गए किसी भी निर्णय, कार्रवाई या कथन के संबंध में उनके विरुद्ध कोई भी दीवानी या फौजदारी कार्यवाही किसी भी न्यायालय में नहीं चलाई जाएगी।अमिताभ ठाकुर...

महिला क्लाइंट्स को बिना सुरक्षा इंतज़ाम ट्रेनिंग देना गंभीर चिंता का विषय: इलाहाबाद हाईकोर्ट
महिला क्लाइंट्स को बिना सुरक्षा इंतज़ाम ट्रेनिंग देना गंभीर चिंता का विषय: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में जिम में महिला क्लाइंट्स को पुरुष ट्रेनर्स द्वारा बिना पर्याप्त सुरक्षा इंतज़ाम के ट्रेनिंग देने पर गंभीर चिंता जताई।जस्टिस शेखर कुमार यादव की बेंच एक जिम ट्रेनर की अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिस पर आरोप है कि उसने एक महिला क्लाइंट के साथ जातिसूचक टिप्पणी की उसे धक्का दिया और अभद्र भाषा का प्रयोग किया।महिला ने अपने बयान (धारा 164 दं.प्र.सं. के तहत) में यह भी आरोप लगाया कि आरोपी ट्रेनर ने उसकी सहेली के अश्लील वीडियो बनाए और उन्हें भेजा भी।इन आरोपों को देखते हुए कोर्ट...

परिसीमा अधिनियम की धारा 5 बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम के तहत पुनरीक्षण याचिकाओं पर लागू होती है: पटना हाईकोर्ट
परिसीमा अधिनियम की धारा 5 बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम के तहत पुनरीक्षण याचिकाओं पर लागू होती है: पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि परिसीमा अधिनियम की धारा 5, बिहार लोक निर्माण संविदा विवाद मध्यस्थता अधिनियम, 2008 (BPWCDA एक्ट) की धारा 13 के अंतर्गत संशोधनों पर लागू होती है, जिसका अर्थ है कि BPWCDA अधिनियम के अंतर्गत पारित पंचाटों को चुनौती देने में हुई देरी को परिसीमा अधिनियम की धारा 5 के अंतर्गत क्षमा किया जा सकता है। जस्टिस रमेश चंद मालवीय की पीठ ने फैसले में माना कि चूंकि उक्त बिंदु पर पटना हाईकोर्ट के मत परस्पर विरोधी थे, इसलिए मामले को एक बड़ी पीठ को भेज दिया...

कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को अग्रिम ज़मानत
कलकत्ता हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: पति की आत्महत्या मामले में पत्नी को अग्रिम ज़मानत

कलकत्ता हाईकोर्ट ने उस महिला को अग्रिम ज़मानत दी, जिस पर अपने अलग रह रहे पति की आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया गया। यह आरोप पति की मां ने लगाया, जब उनके बेटे ने पत्नी के वैवाहिक घर न लौटने पर फांसी लगाकर जान दे दी थी।जस्टिस जय सेनगुप्ता ने आदेश देते हुए कहा,“अंततः यह अदालत पर निर्भर करेगा कि इस मामले में आत्महत्या के लिए उकसावे का कोई तत्व है या नहीं। लेकिन केस डायरी में उपलब्ध सामग्री और याचिकाकर्ता पर लगाए गए कथित आरोपों को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि इस मामले में हिरासत में पूछताछ की...

घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट
घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान खोलना संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 का उल्लंघन : राजस्थान हाईकोर्ट

राजस्थान हाईकोर्ट ने घनी आबादी वाले बाज़ार में शराब की दुकान आवंटन को संविधान के अनुच्छेद 21 और 47 के प्रावधानों के खिलाफ़ करार दिया। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा है और साथ ही संयम नीति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।मामला जयपुर के किशनपोल बाज़ार का है, जहां वर्ष 2021-22 की आबकारी नीति के तहत एक महिला को शराब की दुकान आवंटित की गई। लेकिन 13 अगस्त 2025 को आबकारी विभाग ने जन आक्रोश का हवाला देते हुए दुकान को किसी आपत्तिहीन क्षेत्र में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया। इसी...

झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक हुई हिरासत में मौतों का ब्योरा पेश करने का निर्देश
झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से अब तक हुई हिरासत में मौतों का ब्योरा पेश करने का निर्देश

झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य में हिरासत में होने वाली मौतों के मामलों को लेकर गंभीर रुख अपनाया। कोर्ट ने राज्य के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव को व्यक्तिगत हलफ़नामा दाख़िल करने का आदेश दिया।इस हलफ़नामे में वर्ष 2018 से अब तक हुई सभी हिरासत में मौतों का ब्योरा देना होगा। यह भी स्पष्ट करना होगा कि क्या इन मौतों की सूचना संबंधित मजिस्ट्रेट को जांच के लिए दी गई थी।चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में मांग की गई कि 2018 से अब...

समय से पहले इस्तीफे के लिए प्रतिबंधात्मक प्रसंविदाओं की संविदात्मक वैधता का कानूनी विश्लेषण
समय से पहले इस्तीफे के लिए प्रतिबंधात्मक प्रसंविदाओं की संविदात्मक वैधता का कानूनी विश्लेषण

14 मई 2025 को दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय में, भारत के सुप्रीम कोर्ट ने विजया बैंक एवं अन्य बनाम प्रशांत बी. नारनवारे, 2025 लाइवलॉ (SC ) 565 ("विजया बैंक मामला") में रोजगार अनुबंधों में, विशेष रूप से समय से पहले त्यागपत्र के मामलों में, परिसमाप्त क्षतिपूर्ति प्रावधानों की प्रवर्तनीयता को स्पष्ट किया। न्यायालय ने कहा कि किसी कर्मचारी को न्यूनतम कार्यकाल पूरा करने से पहले रोजगार छोड़ने के लिए पूर्व-निर्धारित राशि का भुगतान करने की आवश्यकता वाले प्रावधान भारतीय अनुबंध अधिनियम, 1872 ("आईसीए") की...

वायु सेना के उड़ान पदों में केवल पुरुषों के लिए आरक्षण अनुचित; योग्य महिलाओं की नियुक्ति होनी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
वायु सेना के उड़ान पदों में 'केवल पुरुषों के लिए' आरक्षण अनुचित; योग्य महिलाओं की नियुक्ति होनी चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को वायु सेना पायलट के पद पर महिला उम्मीदवार की नियुक्ति करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि अब वह दौर नहीं रहा जब सशस्त्र बलों में प्रवेश के लिए पुरुष और महिला उम्मीदवारों के बीच भेदभाव किया जा सके।जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि भर्ती के लिए पदों का विज्ञापन देते समय अधिकारियों को नियम व शर्तें, योग्यताएं और अन्य शर्तें शामिल करने की छूट है, जिन्हें पूरा करने पर ही उम्मीदवार प्रवेश के लिए योग्य हो सकता है।न्यायालय ने कहा कि...

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में JCA भर्ती से बाहर किए गए उम्मीदवारों की याचिकाएं खारिज कीं
दिल्ली हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में JCA भर्ती से बाहर किए गए उम्मीदवारों की याचिकाएं खारिज कीं

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार (29 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट में जूनियर कोर्ट असिस्टेंट (JCA) के पद के लिए इच्छुक उम्मीदवारों द्वारा भर्ती प्रक्रिया से बाहर किए जाने के विरोध में दायर कई याचिकाएं खारिज कीं।इस साल फरवरी में सुप्रीम कोर्ट के जनरल सेक्रेटरी द्वारा JCA के 241 रिक्त पदों का विज्ञापन दिया गया था।याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि टाइपिंग स्पीड टेस्ट पास करने के बावजूद, उन्हें भर्ती के अगले चरण, यानी वर्णनात्मक परीक्षा से बाहर कर दिया गया।जस्टिस प्रतीक जालान ने शुरुआत में कहा कि हालांकि...

अगर किसी और ने अपराध किया और आपने कुछ नहीं किया, तो IPC की धारा 34 लागू होगी: दिल्ली हाईकोर्ट
अगर किसी और ने अपराध किया और आपने कुछ नहीं किया, तो IPC की धारा 34 लागू होगी: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि जब कोई अन्य व्यक्ति अपने सामान्य इरादे के आगे अपराध करता है तो केवल गार्ड खड़े रहना या कार्रवाई करने से चूक करना आईपीसी की धारा 34 के तहत दायित्व को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त होगा।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी ने कहा, 'आईपीसी की धारा 34 के तहत अपराध के लिए आरोपित प्रत्येक व्यक्ति को उसे उत्तरदायी बनाने के लिए किसी न किसी रूप में अपराध में भाग लेना चाहिए. मौके पर वास्तविक झटका या यहां तक कि भौतिक उपस्थिति देना आवश्यक नहीं है। जब कोई और अपने सामान्य इरादे को आगे बढ़ाते हुए...