दिल्ली हाईकोर्ट
जांच का आदेश देने से पहले लोकपाल को सरकारी कर्मचारी की बात सुननी होगी: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि भारत का लोकपाल, लोकपाल और लोकायुक्त एक्ट 2013 के तहत अपनी शक्तियों के अनुसार, किसी सरकारी कर्मचारी को सुनवाई का मौका दिए बिना उसके खिलाफ जांच का आदेश नहीं दे सकता।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की डिवीजन बेंच ने कहा,“सेक्शन 20 का कानूनी ढांचा इस बात में कोई शक नहीं छोड़ता कि जांच से पहले और जांच के बाद सुनवाई का मौका देना ज़रूरी है।”इसमें आगे कहा गया,“सेक्शन 20(3) में साफ तौर पर यह कहा गया कि जानकार लोकपाल संबंधित सरकारी कर्मचारी को सुनवाई का मौका...
'गंभीर सामाजिक खतरा': दिल्ली हाईकोर्ट ने इंटर-स्टेट चाइल्ड ट्रैफिकिंग के आरोप में गिरफ्तार महिलाओं की बेल कैंसिल की
दिल्ली हाईकोर्ट ने दो महिलाओं की बेल कैंसिल की, जिन पर आरोप है कि वे बड़े पैमाने पर इंटर-स्टेट चाइल्ड ट्रैफिकिंग रैकेट में शामिल थीं, जो पैसे के फायदे के लिए नए जन्मे बच्चों की खरीद-फरोख्त में मदद करती थीं।जस्टिस अजय दिगपॉल ने कहा,“कथित अपराध गंभीर और घिनौने हैं, जिनमें नए जन्मे बच्चों की ट्रैफिकिंग शामिल है, जो न केवल बच्चों के अधिकारों और सम्मान को खतरे में डालता है, बल्कि सामाजिक ताने-बाने को भी कमजोर करता है। ऐसे अपराधों को पब्लिक ऑर्डर और समाज की नैतिक सोच के लिए गंभीर खतरा माना जाता...
पत्नी के देर से लगाए गए क्रिमिनल आरोप, पति के लगातार क्रूरता के सबूतों से ज़्यादा भारी नहीं हो सकते: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि पत्नी के देर से लगाए गए क्रिमिनल आरोप, पति के लगातार क्रूरता के सबूतों को कम नहीं कर सकते या उनसे ज़्यादा भारी नहीं हो सकते।जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस रेणु भटनागर की डिवीजन बेंच ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द कर दिया, जिसमें पत्नी की क्रूरता के आधार पर शादी तोड़ने की पति की अर्जी खारिज कर दी गई थी।उसका मामला यह था कि पत्नी ने उसके साथ क्रूरता की, यह दावा करते हुए कि— वह उसके बूढ़े माता-पिता से अलग रहने पर ज़ोर देती थी, अपने नाम पर एक नया घर मांगती थी, अपनी सास के...
सिविल केस में मिली राशि को चेक बाउंस मुआवजे में समायोजित किया जा सकता है: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में दोषी ठहराए गए एक व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए यह स्पष्ट किया है कि सिविल मुकदमे में वसूली गई रकम को आपराधिक कार्यवाही में देय मुआवजे के खिलाफ समायोजित किया जा सकता है, बशर्ते दोनों कार्यवाही एक ही चेक dishonour से संबंधित हों।जस्टिस मनोज कुमार ओहरी की एकल-न्यायाधीश खंडपीठ ने कहा कि जैसे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 357(5) आपराधिक मुकदमे में दी गई राशि को बाद की सिविल कार्यवाही में समायोजित करने की अनुमति देती है, वैसे ही इसका उल्टा भी किया जा सकता...
S. 319 CrPC | कॉग्निजेंस स्टेज पर जिस संदिग्ध को समन नहीं किया गया, उसे उसी मटेरियल के आधार पर बाद में समन नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ किया कि एक बार जब किसी अपराध का कॉग्निजेंस ले लिया जाता है और चार्जशीट के कॉलम नंबर 12 (संदिग्ध) में रखे गए आरोपी को समन नहीं किया जाता है तो उसे रिकॉर्ड पर कोई अतिरिक्त सबूत न होने पर बाद में समन नहीं किया जा सकता।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा,“CrPC की धारा 319 कोर्ट को कॉलम नंबर 12 में रखे गए आरोपी को बाद में समन करने का अधिकार देता है लेकिन सवाल यह है कि यह पावर किस स्टेज पर और किन परिस्थितियों में इस्तेमाल की जा सकती है। कोर्ट CrPC की धारा 319 के तहत अपनी पावर का...
व्यापार के लिए उपयोग की गई संपत्ति पर विवाद, आवासीय क्षेत्र में होने के बावजूद व्यावसायिक विवाद माना जाएगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि अगर कोई संपत्ति वास्तव में व्यापार या दुकान चलाने के लिए इस्तेमाल हो रही है, तो उस संपत्ति से जुड़ा विवाद कॉमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 के तहत व्यावसायिक विवाद माना जाएगा—भले ही वह जगह नगरपालिका रिकॉर्ड में आवासीय क्षेत्र में आती हो।मामले में TCNS क्लोदिंग कंपनी ने महिपालपुर में एक जगह रिटेल गारमेंट शो-रूम चलाने के लिए लीज पर ली थी। जगह को 2018 में नगर निगम ने अनधिकृत व्यावसायिक उपयोग बताकर सील कर दिया, जिसके बाद कंपनी ने लीज खत्म कर ₹7.6 लाख की सुरक्षा राशि वापस...
दिल्ली हाईकोर्ट ने राज शमानी के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए जॉन डो ऑर्डर पास किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉडकास्टर राज शमानी के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक जॉन डो ऑर्डर पास किया। कोर्ट ने कहा कि वह भारत में, खासकर कंटेंट क्रिएशन के क्षेत्र में जाना-माना चेहरा हैं।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि शमानी ने अपने सफल करियर में अच्छी पहचान और इज्जत कमाई है और पहली नज़र में उन्हें अपनी पर्सनैलिटी से जुड़े पब्लिसिटी राइट्स मिले हुए हैं, जो उनका एक कीमती अधिकार है।कोर्ट ने कहा,"पहली नज़र में वादी नंबर 1 की पर्सनैलिटी की खासियतें और/या उसके हिस्से, जिसमें वादी का नाम,...
नियर-मेजॉरिटी आधारित रिश्तों के लिए अदालतें अपवाद नहीं बना सकतीं, POCSO में नाबालिग की सहमति अप्रासंगिक: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अदालतें तथाकथित नियर-मेजॉरिटी सहमति आधारित रिश्तों के लिए कोई जज-निर्मित अपवाद नहीं बना सकतीं, क्योंकि POCSO कानून में 18 वर्ष से कम आयु वाले व्यक्ति की सहमति का कोई महत्व नहीं है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद ने 18 वर्ष की आयु तय करके यह तय कर दिया कि इससे कम उम्र का व्यक्ति यौन सहमति देने में सक्षम नहीं माना जाएगा।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि POCSO ACT और उस समय लागू भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं के तहत 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति के साथ किया गया कोई...
अवैध निर्माण के लिए बुक की गई प्रॉपर्टीज़ को सील होने तक बिजली सप्लाई पर कोई रोक नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने नेशनल कैपिटल में बिजली डिस्ट्रीब्यूशन के लिए ज़िम्मेदार BSES यमुना पावर लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह अवैध निर्माण के लिए बुक की गई प्रॉपर्टीज़ को तब तक बिजली सप्लाई करे, जब तक MCD उन प्रॉपर्टीज़ के खिलाफ असल में कार्रवाई नहीं करता।जस्टिस मिनी पुष्करणा ने देखा कि अक्सर डिमोलिशन ऑर्डर पास होने के बावजूद MCD ज़रूरी कार्रवाई नहीं करता। इस बीच बिजली सप्लाई बंद करने से बिजली चोरी हो सकती है और कभी-कभी लोगों की सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।बेंच BSES द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर...
'भेदभाव नहीं कर सकते': दिल्ली हाईकोर्ट का स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री को आदेश, मूक-बधिर खिलाड़ियों को खेल रत्न के लिए अप्लाई करें
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह साफ़ कर दिया कि चलने-फिरने में अक्षमता वाले लोगों और सुनने में अक्षम लोगों के बीच कोई भेदभाव नहीं किया जा सकता।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा,“दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकार एक्ट, 2016 को उसके शेड्यूल के साथ पढ़ने पर सुनने में अक्षम लोगों और शारीरिक/चलने-फिरने में अक्षम लोगों के बीच भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं है।”यह बात केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्रालय द्वारा बनाई गई 'मेडल विजेताओं के लिए कैश अवॉर्ड की स्कीम' को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए कही गई, जिसके तहत 'मेजर...
आर्थिक अपराधी की मेडिकल वजहों से विदेश जाने की अर्ज़ी तब सही नहीं है, जब भारत में इलाज आसानी से मिल रहा हो: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने माना कि एक आर्थिक अपराधी की मेडिकल वजहों का हवाला देकर विदेश जाने की अर्ज़ी तब सही नहीं है, जब भारत में सही इलाज आसानी से मिल रहा हो।जस्टिस रविंदर डुडेजा ने कहा,“यह कोर्ट आर्टिकल 21 के तहत पर्सनल लिबर्टी के प्रिंसिपल्स को जानता है। हालांकि, इन अधिकारों को पब्लिक इंटरेस्ट के साथ बैलेंस करना होगा ताकि यह पक्का हो सके कि गंभीर आर्थिक अपराधों के आरोपी लोग कानूनी प्रोसेस के लिए तैयार रहें।”यह बेंच एक ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया की अर्ज़ी पर विचार कर रही थी, जिसके खिलाफ Net4 नेटवर्क...
गंभीर तथ्य छुपाने पर दिल्ली हाई कोर्ट ने पोपी सीड्स तस्करी मामले में याचिकाकर्ता पर ₹5 लाख जुर्माना लगाया
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में एक कंपनी के पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर पर ₹5 लाख का भारी जुर्माना लगाया, जिस पर अफीम (poppy seeds) और सुपारी जैसी प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी में शामिल होने का संदेह था।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता ने यह तथ्य छुपाया कि कस्टम विभाग द्वारा लगाए गए पेनल्टी आदेश के खिलाफ उसकी चुनौती पहले भी हाई कोर्ट द्वारा खारिज की जा चुकी है। कोर्ट ने टिप्पणी की— “याचिकाकर्ता के वकील का दायित्व था कि वह इस याचिका में सभी संबंधित तथ्य और...
फिल्म '120 बहादुर' की रिलीज़ को हाईकोर्ट की मंजूरी, निर्माता बोले- सभी सैनिकों के नाम क्रेडिट्स में शामिल
दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को फरहान अख्तर की आगामी फिल्म “120 बहादुर”, जो 1962 के रेज़ांग ला युद्ध पर आधारित है, की देशभर में थिएटर रिलीज़ की अनुमति दे दी।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस शैल जैन की खंडपीठ ने फिल्म निर्माता के उस बयान पर ध्यान दिया कि युद्ध में शामिल सभी 120 शहीद सैनिकों के नाम फिल्म के अंत में श्रेय (credits) के रूप में शामिल किए गए हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह भाटी के शौर्य पर आधारित है, जिन्हें 1962 के रेज़ांग ला युद्ध में वीरता के लिए परम वीर चक्र से सम्मानित किया गया था।...
खेल मंत्रालय किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी संस्था को NSF मान्यता देने के लिए रबर स्टैंप की तरह काम नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि केंद्रीय खेल मंत्रालय किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी संस्था या बॉडी को नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) की मान्यता देने के लिए सिर्फ़ "रबर स्टैंप" की तरह काम नहीं कर सकता।जस्टिस सचिन दत्ता ने कहा,"साफ़ है कि किसी NSF की मान्यता किसी भी इंटरनेशनल फेडरेशन के आदेश/मर्जी/निर्देश पर नहीं हो सकती। MYAS से यह उम्मीद नहीं की जाती कि वह सिर्फ़ रबर स्टैंप की तरह काम करे और इंटरनेशनल फेडरेशन द्वारा चुनी गई किसी भी बॉडी/संस्था को मान्यता दे (भले ही उस बॉडी से...
दिल्ली हाईकोर्ट ने हिट एंड रन केस में व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए कनाडा सरकार की रिक्वेस्ट पर मजिस्ट्रियल जांच को सही ठहराया
दिल्ली हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें उसने केंद्र सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी। इसमें कनाडा सरकार की उस रिक्वेस्ट पर मजिस्ट्रियल जांच शुरू करने का आदेश दिया गया था, जिसमें एक कथित हिट-एंड-रन मामले में पैदल चलने वाले व्यक्ति की मौत हो गई थी और उसके प्रत्यर्पण की मांग की गई थी।जस्टिस संजीव नरूला ने कहा कि पवन मलिक ने प्रत्यर्पण अधिनियम की धारा 5 के तहत विदेश मंत्रालय द्वारा दर्ज की गई संतुष्टि में कोई कमी नहीं दिखाई।कोर्ट ने कहा कि जो बात मायने रखती है, वह मलिक...
COVID लॉकडाउन में मास्क न पहनने पर वकील के खिलाफ दर्ज FIR रद्द: हाईकोर्ट ने दिया यह निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने अप्रैल, 2020 के COVID-19 लॉकडाउन के दौरान अपने घर के बाहर बिना मास्क खड़े होने पर एक वकील के खिलाफ दर्ज FIR रद्द की।जस्टिस संजीव नरूला ने वकील की ओर से दिए गए इस बयान को स्वीकार किया कि वह बिना किसी दोष-स्वीकारोक्ति के नागरिक दायित्व के रूप में दिल्ली पुलिस वेलफेयर फंड में 10,000 रुपए जमा करने को तैयार हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि राशि चार सप्ताह के भीतर जमा की जाए और इसकी रसीद एक सप्ताह के भीतर जांच अधिकारी को सौंपी जाए।वकील भूपेंद्र लाकड़ा ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा...
पैरोल के लिए एक साल की सजा की शर्त अनिवार्य नहीं, SLP दाखिल करने पर मिल सकती है छूट: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि दिल्ली जेल नियमावली के तहत पैरोल के लिए निर्धारित न्यूनतम एक वर्ष की कैद की शर्त बिल्कुल कठोर नहीं है और विशेष परिस्थितियों में इसे ढीला किया जा सकता है। ऐसे मामलों में, जब नियमों का सख़्त पालन किसी कैदी के मौलिक या वैधानिक अधिकारों को बाधित कर दे, यह शर्त लागू नहीं होगी।जस्टिस रविंद्र दुदेजा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में दोषसिद्धि के खिलाफ SLP (विशेष अनुमति याचिका) दायर करना ऐसी ही एक 'विशेष परिस्थिति' है, जिसके लिए नियमों में लचीलेपन की आवश्यकता है। यह आदेश उस...
न्याय के पहियों में घर्षण: 38 साल पुराने वसीयत विवाद का निपटारा करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने जताई निराशा, जारी किए प्रशासन पत्र
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में 38 साल पुराने वसीयत विवाद का निपटारा करते हुए टिप्पणी की कि यह मामला न्याय के पहियों में उस घर्षण का उदाहरण है, जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने यशपाल जैन बनाम सुशीला देवी और अन्य मामले में चेतावनी दी थी।जस्टिस पुरुशैन्द्र कुमार कौरव ने कहा कि इस विवाद का फैसला करने में 38 साल लंबा समय लगा। इस बीच अधिकांश मूल पक्षकारों की मृत्यु हो गई और अनगिनत वकीलों को बदला गया।जज ने टिप्पणी की,"न्याय वितरण प्रणाली बार, पीठ और पक्षकारों के बीच आपसी विश्वास पर कार्य करती है। प्रत्येक...
पासओवर/स्थगन को वकील का अधिकार न समझें, यह सिर्फ अदालत की शिष्टाचार-भर सुविधा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अदालत द्वारा वकीलों को दिया जाने वाला पासओवर (pass over) या स्थगन (adjournment) किसी भी स्थिति में उनका अधिकार नहीं है, बल्कि यह केवल अदालत की ओर से दी गई एक शिष्टाचार-आधारित सुविधा है।जस्टिस गिरिश काथपालिया ने यह टिप्पणी उस समय की जब अदालत 2006 से लंबित एक सिविल मुकदमे में बचाव पक्ष के गवाह की जिरह करने का अधिकार बंद किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता की ओर से यह दावा किया गया कि ट्रायल कोर्ट ने उचित अवसर नहीं दिया और 1...
निजी समझौते से मकान-मालिक अपने कानूनी अधिकार नहीं छोड़ सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा है कि दिल्ली रेंट कंट्रोल एक्ट, 1958 के तहत मकान-मालिक को मिले अधिकार किसी भी निजी समझौते या कॉन्ट्रैक्ट से खत्म नहीं किए जा सकते।जस्टिस अनुप जयराम भांभानी ने कहा कि अगर कोई कॉन्ट्रैक्ट किसी व्यक्ति को कानून में दिए गए अधिकारों या उपायों का इस्तेमाल करने से रोकता है, तो वह कॉन्ट्रैक्ट कानून के हिसाब से बिल्कुल अवैध है।किरायेदारों का दावा क्या था? किरायेदारों ने कहा कि मकान-मालिक के पूर्वजों ने पहले ही एक समझौता कर दिया था, जिसमें उन्होंने DRC Act के तहत अपने अधिकार...




















