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हिरासत में मौत के मामले की प्राथमिकी में जोड़ी हत्या की धारा, कोर्ट ने सेवानिवृत्त डीजीपी की अग्रिम ज़मानत निरस्त की
हिरासत में मौत के मामले की प्राथमिकी में जोड़ी हत्या की धारा, कोर्ट ने सेवानिवृत्त डीजीपी की अग्रिम ज़मानत निरस्त की

मोहाली के एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने मंगलवार को 1991 की हिरासत में मौत के एक मामले में राज्य के पूर्व पुलिस महानिदेशक एस.एस.सैनी की अग्रिम जमानत अर्जी निरस्त कर दी, क्योंकि उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी में पिछले दिनों ही हत्या की धारा भी जोड़ दी गई है। 11 मई को एक अन्य समतुल्य अदालत ने प्रारंभिक एफआईआर में सैनी को अग्रिम जमानत दे दी थी क्योंकि उस समय प्राथमिकी में हत्या की धारा नहीं जोड़ी गई थी।एएसजे रजनीश गर्ग ने कहा कि यह दोनों पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया मामला है कि शुरू में आवेदक-अभियुक्त...

अपीलकर्ताओं के खोए हुए वर्षों को वापस नहीं किया जा सकता, उडीसा हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 34 साल पूर्व सुनाई सजा और दोषसिद्धि को रद्द किया
'अपीलकर्ताओं के खोए हुए वर्षों को वापस नहीं किया जा सकता', उडीसा हाईकोर्ट ने निचली अदालत द्वारा 34 साल पूर्व सुनाई सजा और दोषसिद्धि को रद्द किया

उड़ीसा हाईकोर्ट ने मंगलवार (1 सितंबर) को एक मामले में 34 साल पूर्व निचली अदालत द्वारा सुनाई गयी सजा और दोषसिद्धि को रद्द करते हुए यह टिप्पणी की कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करती है। न्यायमूर्ति एस. के. साहू की पीठ ने इस बात को भी रेखांकित किया कि स्पीडी ट्रायल का अधिकार एक मौलिक अधिकार है। और कोई भी अपीलकर्ताओं के खोए हुए वर्षों को पुनर्स्थापित नहीं कर सकता है। मामले की पृष्ठभूमि अपीलार्थी नित्या @ नित्यानंद बेहेरा और मधिया @ माधबा बेहेरा ने न्यायालय के विद्वान सत्र न्यायाधीश,...

भूषण पर जजमेंंट के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट ने कहा, भारत में अवमानना कानून की समीक्षा की जाए
भूषण पर जजमेंंट के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट ने कहा, भारत में अवमानना कानून की समीक्षा की जाए

अधिवक्ता प्रशांत भूषण को आपराधिक अवमानना के लिए दोषी ठहराते हुए सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले पर चिंता व्यक्त करते हुए ,इंटरनेशनल कमीशन ऑफ ज्यूरिस्ट (आईसीजे) ने देश में आपराधिक अवमानना​कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया है।सुप्रीम कोर्ट द्वारा 14 अगस्त (दोषी करार देना) और 31 अगस्त (सजा देना) को पारित निर्णयों का हवाला देते हुए आयोग ने इस फैसले को उन अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ असंगत माना है ,जो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को सीमित करने के दायरे को ही सीमित करते हैं। वहीं यह फैसला इस...

गुजरात हाईकोर्ट ने 14 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से प्रत्यक्ष (फ़िज़िकल) सुनवाई शुरू करने का फैसला किया
गुजरात हाईकोर्ट ने 14 सितंबर से चरणबद्ध तरीके से प्रत्यक्ष (फ़िज़िकल) सुनवाई शुरू करने का फैसला किया

गुजरात हाईकोर्ट ने 14 सितंबर से प्रत्यक्ष (फ़िज़िकल)सुनवाई को चरणबद्ध तरीके से शुरू करने का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश, उच्‍च न्यायालय द्वारा जारी प्रशासनिक आदेश में सूचित किया गया है कि साप्ताहिक रनिंग बोर्ड (कॉज़ लिस्ट) में मामलों को उठाने के लिए निम्नलिखित पीठों का गठन किया जाएगा: -जेल की सजा में अपीलों के लिए एक खंडपीठ, जिनमें अपीलकर्ता दोषी वर्तमान में जेल में बंद हैं; -जेल की सजा में अपीलों के लिए दो या तीन एकल जज पीठ, जिनमें अपीलकर्ता दोषी (वर्तमान में) जेल में बंद हैं; -पुराने...

सीआरपीसी की धारा 436-ए का लाभ केवल अंडरट्रायल को दिया जा सकता है, न कि एक दोषी को, जिसने अपनी सजा को चुनौती दी हैः बॉम्‍बे हाईकोर्ट (पूर्ण पीठ)
सीआरपीसी की धारा 436-ए का लाभ केवल अंडरट्रायल को दिया जा सकता है, न कि एक दोषी को, जिसने अपनी सजा को चुनौती दी हैः बॉम्‍बे हाईकोर्ट (पूर्ण पीठ)

बॉम्बे हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने माना है कि दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 436-ए के तहत लाभ केवल विचाराधीन कैदी को ही दिया जा सकता है, न कि एक दोषी को, जिसने सीआरपीसी की धारा 374 के तहत अपनी सजा को चुनौती दी हो। उच्‍च न्यायालय की नागपुर स्‍थ‌ित पीठ में मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति आरके देशपांडे और न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे ने उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ द्वारा उठाए गए एक सवाल का जवाब दिया, जिसमें पीठ ने कहा था कि मामले में आपराधिक मामलों में अक्सर पूछे जाने वाले सामान्य प्रश्न शामिल...

एक ही मामले में 2 जमानत याचिकाओं का दायर होना गंभीर चिंता का विषय, रजिस्ट्री ऐसे मामलों से बचने के लिए सॉफ्टवेर विकसित करे: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
एक ही मामले में 2 जमानत याचिकाओं का दायर होना गंभीर चिंता का विषय, रजिस्ट्री ऐसे मामलों से बचने के लिए सॉफ्टवेर विकसित करे: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार (31 अगस्त) को एक मामले में यह कहा कि एक याचिकाकर्ता द्वारा एक ही प्राथमिकी (FIR) से उत्पन्न होने वाली दो जमानत याचिकाओं को दायर किया जाना गंभीर चिंता का विषय है। दरअसल, न्यायमूर्ति ज्योत्स्ना रेवल दुवा की पीठ के समक्ष दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 439 के तहत दो अलग-अलग जमानत याचिकाओं को दो अलग-अलग वकीलों के माध्यम से एक ही याचिकाकर्ता, यानी सुनील कुमार द्वारा दाखिल किया गया था। इस स्थिति का संज्ञान लेते हुए, जो कि तत्काल मामले में उत्पन्न हुई और भविष्य में...

अनुच्छेद 21 के तहत बलात्कार, पीड़िता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन : गुवाहाटी हाईकोर्ट
अनुच्छेद 21 के तहत बलात्कार, पीड़िता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन : गुवाहाटी हाईकोर्ट

संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत बलात्कार, पीड़िता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। यह कहते हुए गुवाहाटी हाईकोर्ट ने एक बीस वर्षीय लड़की से बलात्कार करने के मामले में दोषी करार दिए एक व्यक्ति की तरफ से दायर अपील को खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति रूमी कुमारी फुकन ने कहा कि बलात्कार महिला के श्रेष्ठ सम्मान के लिए एक गंभीर आघात है और इसी तरह पूरे समाज के खिलाफ भी एक अपराध है। नासीरउद्दीन अली को आईपीसी की धारा 376 के तहत दोषी ठहराया गया था और ट्रायल कोर्ट ने उसे 9 (नौ) साल की अवधि के लिए सश्रम कारावास की...

एक ही व्यक्ति के दो आधार कार्ड, जन्म-तिथ‌ियां अलग-अलग: गुजरात हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को प्रामाणिकता सत्यापित करने का निर्देश दिया
एक ही व्यक्ति के दो आधार कार्ड, जन्म-तिथ‌ियां अलग-अलग: गुजरात हाईकोर्ट ने यूआईडीएआई को प्रामाणिकता सत्यापित करने का निर्देश दिया

गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस एन वंजारिया की खंडपीठ ने गुरुवार को बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) को एक ही महिला के दो आधार कार्ड की वैधता की जांच करने और यह रिपोर्ट करने कि दोनों कार्डों में से कौन सा प्रामाणिक है, का निर्देश दिया। जस्टिस सोनिया गोकानी और जस्टिस एन वंजारिया की खंडपीठ ने महिला के मामा द्वारा दायर याचिका पर विचार किया। याचिकाकर्ता / महिला के मामा ने ने भारतीय दंड संहिता की धारा 363 और 366 के तहत दंडनीय...

मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के बाद CrPC की धारा 156 (3) के तहत अन्वेषण का आदेश नहीं दिया जा सकता, J&K हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों के प्रशिक्षण का आदेश दिया
'मजिस्ट्रेट के संज्ञान लेने के बाद CrPC की धारा 156 (3) के तहत अन्वेषण का आदेश नहीं दिया जा सकता', J&K हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेटों के प्रशिक्षण का आदेश दिया

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने सोमवार (31 अगस्त) को एक फैसला सुनाया है जिसमे यह साफ़ किया कि एक बार मजिस्ट्रेट द्वारा अपराध का संज्ञान ले लिया जाए, उसके बाद दण्ड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 156 (3) के तहत अन्वेषण का आदेश नहीं दिया जा सकता है। न्यायमूर्ति अली मुहम्मद माग्रे की पीठ ने कहा कि एक बार जब कोई मजिस्ट्रेट अपराध का संज्ञान लेता है, तो उसके बाद उसे धारा 156 (3) के तहत अन्वेषणका आदेश देने से रोक दिया जाता है। यही नहीं, पीठ ने निदेशक, न्यायिक अकादमी को साथ ही यह निर्देश भी दिया कि वे...

बिना किसी गलती के छात्र परेशान नहीं होने चाहिए : बाॅम्बे हाईकोर्ट का एनटीए को निर्देश, बाढ़/परिवहन/ संचार की परेशानी के कारण JEE में उपस्थित न हो पाने वाले छात्रों के आवेदन पर विचार करें
''बिना किसी गलती के छात्र परेशान नहीं होने चाहिए'' : बाॅम्बे हाईकोर्ट का एनटीए को निर्देश, बाढ़/परिवहन/ संचार की परेशानी के कारण JEE में उपस्थित न हो पाने वाले छात्रों के आवेदन पर विचार करें

मंगलवार से शुरू हुए JEE Main Exam से पहले, बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार सुबह विदर्भ क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित इलाकों में रहने वाले छात्रों के लिए उक्त परीक्षा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालाँकि, न्यायालय ने कहा है कि यदि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का कोई भी छात्र परीक्षा में शामिल नहीं हो पाता है, तो वह श्रम्म् डंपद म्गंउपदंजपवद के सर्वोच्च निकाय के समक्ष अपना अभ्यावेदन या ज्ञापन प्रस्तुत कर सकता है। जिस पर उक्त निकाय को 15 दिनों के भीतर फैसला करना होगा।नागपुर पीठ के न्यायमूर्ति आरके देशपांडे और...

डॉ कफील खान का भाषण घृणा या हिंसा को बढ़ावा नहीं देता, यह राष्ट्रीय अखंडता और नागरिकों की एकता का आह्वान करता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
'डॉ कफील खान का भाषण घृणा या हिंसा को बढ़ावा नहीं देता, यह राष्ट्रीय अखंडता और नागरिकों की एकता का आह्वान करता है': इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डॉ कफील खान पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के आरोपों को रद्द कर दिया है और उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि 13 दिसंबर, 2019 को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में दिया गया डॉ कफील खान का भाषण, जिसके कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और बाद में उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के कड़े प्रावधानों के तहत हिरासत में लिया गया, "नफरत या हिंसा को बढ़ावा देने के किसी भी प्रयास का खुलासा नहीं करता है।"डॉ. कफील खान के खिलाफ एनएसए के तहत लगाए गए आरोप रद्द...

1500 से अधिक लाॅ के नए छात्रों के लिए एक सितम्बर से ऑनलाइन क्लास शुरू करने वाला JGLS बना पहला लाॅ स्कूल
1500 से अधिक लाॅ के नए छात्रों के लिए एक सितम्बर से ऑनलाइन क्लास शुरू करने वाला JGLS बना पहला लाॅ स्कूल

जिंदल ग्लोबल लॉ स्कूल (जेजीएलएस) ने अपने शैक्षणिक सत्र 2020-21 को आज से, अर्थात् 1 सितंबर 2020 से ऑनलाइन मोड में शुरू कर दिया है। विशेष रूप से, जेजीएलएस 1,500 से अधिक नए छात्रों (25 विभिन्न राज्यों और भारत के केंद्र शासित प्रदेशों और अंतर्राष्ट्रीय छात्रों से) के साथ इस शैक्षणिक सत्र के लिए कक्षाएं शुरू करने वाला पहला अग्रणी स्कूल बन गया है। इन छात्रों ने लाॅ स्कूल के यूजी और पीजी,दोनों स्तर के छह अलग-अलग शैक्षणिक डिग्री प्रोग्राम में दाखिला लिया है। ऐसा तब हुआ है जब देश में अधिकांश कानून...

(बलात्कार का प्रयास) निर्धारित साठ दिन की अवधि के भीतर अंतिम रिपोर्ट दायर न करने पर आईपीसी की धारा 511 रीड विद 376 का आरोपी बन जाता है वैधानिक जमानत का हकदार :  केरल हाईकोर्ट
(बलात्कार का प्रयास) निर्धारित साठ दिन की अवधि के भीतर अंतिम रिपोर्ट दायर न करने पर आईपीसी की धारा 511 रीड विद 376 का आरोपी बन जाता है वैधानिक जमानत का हकदार : केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने माना है कि साठ दिनों की अवधि के भीतर अंतिम रिपोर्ट दायर न करने पर बलात्कार के प्रयास (धारा 511 रीड विद 376) का आरोपी वैधानिक जमानत का हकदार बन जाता है।अदालत इस मामले में बलात्कार के प्रयास के आरोपी एक व्यक्ति की तरफ से दायर जमानत याचिका पर विचार कर रही थी। आरोपी ने तर्क दिया था कि वह सीआरपीसी की की धारा 167 (2) (ए) (ii) के तहत वैधानिक जमानत का हकदार है क्योंकि उसे 19 जून 2020 को गिरफ्तार किया गया था और साठ दिन की हिरासत की अवधि खत्म हो गई है।दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 167...

पीड़ित गरीब और रूढ़िवादी तबके की है, जहां अविवाहित महिला का यौन उत्पीड़न कलंक है: पंजाब और हरियाणा उच्‍च न्यायलय ने 7 महीने की देरी के बावजूद आरोपी को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने से इनकार किया
पीड़ित गरीब और रूढ़िवादी तबके की है, जहां अविवाहित महिला का यौन उत्पीड़न कलंक है: पंजाब और हरियाणा उच्‍च न्यायलय ने 7 महीने की देरी के बावजूद आरोपी को बलात्कार के आरोप में गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने से इनकार किया

पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने गुरुवार को माना कि बलात्कार की घटना की रिपोर्ट करने में 7 महीने की देरी आरोपी को अग्रिम जमानत का हकदार नहीं बनाएगी। जस्टिस एचएस मादान ने कहा, "... याचिकाकर्ता की ओर से पेश विद्वान वकील ने दावा किया है कि पुलिस के पास आने और इस मामले की रिपोर्ट करने में लगभग 7 महीने की देरी हुई है, जो अभियोजन के मामले की सत्यता पर संदेह पैदा करता है ... लेकिन इस प्रकार की दलीलें गिरफ्तारी पूर्व जमानत देने के लिए एक याचिका का फैसला करते समय बहुत प्रासंगिक नहीं हैं।" सिंगल जज का...

धार्मिक स्थलों के भीतर मुहर्रम से जुडी धार्मिक रस्में अदा करें, तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बीबीका आलम जूलुस ले जाने की प्रार्थना वाली याचिका खारिज की
'धार्मिक स्थलों के भीतर "मुहर्रम" से जुडी धार्मिक रस्में अदा करें', तेलंगाना उच्च न्यायालय ने "बीबीका आलम जूलुस" ले जाने की प्रार्थना वाली याचिका खारिज की

तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार (26 अगस्त) को एक रिट याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें अल्वा बीबी से शुरू होने वाले जुलूस "बीबिका आलम जूलूस" को अनुमति देने की अनुमति मांगी गई थी। न्यायमूर्ति टी. विनोद कुमार की एकल पीठ ने देखा, "हालांकि धर्म का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, लेकिन यह एक पूर्ण अधिकार नहीं है, क्योंकि अनुच्छेद के शुरुआती शब्द ही यह स्पष्ट करते हैं कि इस तरह का अधिकार "सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता और स्वास्थ्य" प्रतिबंध के अधीन हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 (2) के तहत, किसी भी...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
'बेंच हंटिंग' और सवालों से सामना होने पर सुनवाई स्थगित करने की मांग करना बार के लिए स्वस्थ परम्परा नहीं : इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बगैर किसी उचित कारण के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत कोर्ट के समक्ष रिट याचिका दायर करने वाले हापुड़ के याचिकाकर्ता को शुक्रवार को कड़ी फटकार लगायी।न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने सख्त टिप्पणी की, "इस तरह से बेंच का आखेट करने (बेंच हंटिंग) और सवाल पूछे जाने पर सुनवाई स्थगित करने की बार द्वारा मांग किये जाने की परम्परा स्वस्थ परिपाटी नहीं है।"एकल पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब याचिकाकर्ता अपने किसी मौलिक अधिकार के हनन का कोई आधार नहीं बता सका, जिससे कि कोर्ट अपने...

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूछा, क्या अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए जारी किया गया सरकारी अनुदान लोन के रूप में दिया जा सकता है?
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पूछा, क्या अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए जारी किया गया सरकारी अनुदान लोन के रूप में दिया जा सकता है?

आंध्र प्रदेश ने वकील समुदाय के कल्याण के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए गए 25 करोड़ रुपए अनुदान के संवितरण के लिए महाधिवक्ता की अध्यक्षता में गठित विशेष समिति को यह विचार करने का निर्देश दिया है कि क्या उक्त राशि को ऋण के रूप में वितरित किया जा सकता है, ब्याज लगाया जा सकता है और पुनर्भुगतान भी प्राप्त किया जा सकता है। एडवोकेट सैयद जियाउद्दीन आंध्र प्रदेश की बार काउंसिल की 10 अगस्त की कार्यवाही को चुनौती दी है, जिसमें राज्य सरकार द्वारा जारी राशि को जरूरतमंद अधिवक्ताओं को पुनर्भुगतान और ब्याज के...