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Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई से पूछा, हाईकोर्ट के समक्ष एजेंसी का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार आखिर एक ही वकील को क्यों दिया गया है?

सीबीआई की ओर से न्यायालय की सहायता के लिए कोई भी वकील उपलब्ध न होने के मामले को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उप-कानूनी सलाहकार, सीबीआई, लखनऊ जोन को निर्देश दिया है कि वह व्यक्तिगत हलफनामा दायर करें, जिसमें बताया जाए कि हाईकोर्ट के समक्ष लंबित सभी मामलों में बहस करने के लिए केवल एक वकील को क्यों नियुक्त किया गया है?न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह की पीठ ने कहा कि,''यह बहुत अजीब है कि सीबीआई ने मामलों पर बहस करने के लिए केवल एक अधिवक्ता को रखा हुआ है और एएसजी की सहायता के लिए कोई भी...

ऑनलाइन कक्षाएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा, स्कूलों को ट्यूशन फीस से वंचित नहीं किया जा सकता, 70% ट्यूशन फीस 3 किस्तों में लेने की अनुमति दी
ऑनलाइन कक्षाएं: राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा, स्कूलों को ट्यूशन फीस से वंचित नहीं किया जा सकता, 70% ट्यूशन फीस 3 किस्तों में लेने की अनुमति दी

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक प्रथम दृष्टया अवलोकन में कहा है कि ऑनलाइन कक्षाओं के संबंध में स्कूलों को छात्रों के शिक्षण शुल्क से वंचित नहीं किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि हालांकि इस समय स्कूल की परिचालन लागत सामान्य समय की तुलना में कम है। एकल पीठ ने एक अंतरिम आदेश पारित किया, जिसमें स्कूलों को मार्च 2020 से छात्रों के लिए ट्यूशन फीस का 70% तीन किश्तों में लेने की अनुमति दी गई। पहली किस्त 30.9.2020 या उससे पहले जमा की जाएगी, जबकि दूसरी किस्त 30.11.2020 तक और तीसरी किस्त 31.1.2021 तक अदा करनी...

24 अगस्त को आयोजित परीक्षा में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को उपलब्ध कराए गए स्क्रिब्स का विवरण प्रस्तुत करे केपीएससी : कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया निर्देश
24 अगस्त को आयोजित परीक्षा में दृष्टिबाधित उम्मीदवारों को उपलब्ध कराए गए स्क्रिब्स का विवरण प्रस्तुत करे केपीएससी : कर्नाटक हाईकोर्ट ने दिया निर्देश

कर्नाटक हाईकोर्ट ने सोमवार को कर्नाटक लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया है कि वह इस बात का विवरण उपलब्ध कराएं कि 24 अगस्त को राजपत्रित परिवीक्षाधीन पद के लिए आयोजित प्रारंभिक परीक्षा में उपस्थित होने वाले कितने उम्मीदवार दृष्टिहीन थे और उनमें से कितने को स्क्रिब्स या लेखक की सुविधा प्रदान की गई थी। वहीं इन लेखकों की योग्यता क्या थी? याचिकाकर्ता, द नेशनल फेडरेशन ऑफ द ब्लाइंड की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जयना कोठारी ने कहा कि''अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए निर्देशों के अनुसार, प्रति घंटे के हिसाब से...

पैरोल एक सुधारात्मक प्रक्रिया है, केवल फरार होने की आशंका पर पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट
पैरोल एक सुधारात्मक प्रक्रिया है, केवल फरार होने की आशंका पर पैरोल से इनकार नहीं किया जा सकता : पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहराया है कि पैरोल एक ''सुधारात्मक प्रक्रिया'' है और किसी दोषी को केवल इस आशंका के आधार पर पैरोल देने से मना नहीं किया जा सकता है कि वह फरार हो जाएगा या आगे फिर अपराध करेगा।न्यायमूर्ति जीएस संधवालिया की पीठ ने कहा कि,''यह विवादित नहीं है कि रिहाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कैदी अपने परिवार के सदस्यों और आम जनता के साथ मिल सकें। यह एक सुधारकारी प्रक्रिया है, जिसके तहत एक अपराधी का सामान्य जीवन से पुन-मिलान करवाया जाता है। इस प्रकार, एक आवेदक को उक्त लाभ...

कलकत्ता हाईकोर्ट ने लापरवाही से इकबालिया बयान दर्ज करने पर जताई नाराजगी, लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश
कलकत्ता हाईकोर्ट ने लापरवाही से इकबालिया बयान दर्ज करने पर जताई नाराजगी, लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ जांच का आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने इकबालिया बयानों की रिकॉर्डिंग पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं हैं। हाईकोर्ट ने जांच प्राधिकरण द्वारा एक अभियुक्त के मुख्य बयान को दर्ज किए जाने के "उदासीन और संवेदनाहीन तरीके" पर गंभीर नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त टिप्पाण‌ियां की हैं। जस्ट‌िस सुव्रा घोष और जॉयमल्या बागची की खंडपीठ ने कहा कि "अपराध का सच्‍चा और पूरा खुलासा इकबालिया बयान की आत्मा है," जबकि वर्तमान मामले में, अभियुक्त का तथाकथित मुख्य बयान "रहस्य से ‌घिरा" है और अदालत के भरोसा को पैदा नहीं कर पा रहा है।...

गुजरात की अदालत ने 2002 दंगों में मौत के लिए हर्जाने के सूट से प्रतिवादी के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम हटाया
गुजरात की अदालत ने 2002 दंगों में मौत के लिए हर्जाने के सूट से प्रतिवादी के तौर पर नरेंद्र मोदी का नाम हटाया

गुजरात के एक सिविल कोर्ट ने शनिवार को 2002 के दंगों के दौरान तीन ब्रिटिश नागरिकों की हत्या के लिए हर्जाना मांगने वाले सिविल सूट में पहले प्रतिवादी के रूप में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नाम को हटा दिया।साबरकांठा जिले के प्रांतिज के प्रमुख सिविल जज ने मोदी की ओर से वकील एस एस शाह की दायर अर्जी पर उनके नाम को हटाने की अनुमति दे दी, यह देखते हुए कि वे मामले में "आवश्यक या उचित पक्ष" नहीं थे। स्थानीय अदालत में कुछ ब्रिटिश नागरिकों द्वारा 2004 में मोदी, तत्कालीन गृह राज्य मंत्री गोरधन जडफिया और 12...

किसी अन्य NLU ने अपना स्वतंत्र  एडमिशन टेस्ट आयोजित करने की योजना नहीं बनाई : एनएलयू कंसोर्टियम
किसी अन्य NLU ने अपना स्वतंत्र एडमिशन टेस्ट आयोजित करने की योजना नहीं बनाई : एनएलयू कंसोर्टियम

एनएलयू कंसोर्टियम ने सर्वसम्मति से प्रोफेसर सुधीर कृष्णस्वामी, कुलपति, एनएलएसआईयू, बैंगलोर को तत्काल प्रभाव से कंसोर्टियम के सचिव-कोषाध्यक्ष के रूप में उनके कार्यों से विमुक्त कर दिया है।यह निर्णय एनएलएसआईयू के हाल ही में CLAT 2020 के स्कोर को स्वीकार करने से इनकार करने और शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए अपने पांच वर्षीय B.A LL.B (ऑनर्स) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए एक अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के फैसले की पृष्ठभूमि में आया है।कंसोर्टियम ने स्पष्ट किया है कि NLSIU को छोड़कर कोई अन्य लॉ...

किशोरी माता और उसके बच्चे को पारिवारिक भूमि में हिस्सा दें, गुजरात हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण कार्यवाही में एक अभूतपूर्व आदेश दिया
'किशोरी माता और उसके बच्चे को पारिवारिक भूमि में हिस्सा दें', गुजरात हाईकोर्ट ने बंदी प्रत्यक्षीकरण कार्यवाही में एक अभूतपूर्व आदेश दिया

बंदी प्रत्यक्षीकरण कार्यवाही में एक अभूतपूर्व आदेश देते हुए गुजरात उच्च न्यायालय ने मंगलवार (01 सितंबर) को एक युगल (लड़के के माता-पिता) को एक किशोरी के पक्ष में पारिवारिक भूमि का एक हिस्सा देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति सोनिया गोकानी एवं न्यायमूर्ति एन. वी. अंजरिया की पीठ ने यह आदेश उस मामले में दिया जिसमे युवती/किशोरी, युगल (लड़के के माता-पिता) के बेटे के साथ कथित तौर पर भाग गयी थी और उसने एक बच्चे को भी जन्म दिया था। दरअसल किशोरी के पिता, लड़के के माता-पिता के साथ समझौता करने के...

गुड्स/सर्विस के मूल्य के बदले किए गए भुगतान के आधार पर तय होती है उपभोक्ता फोरम की पेक्यूनिएरी ज्यूरिस्डिक्शन-एनसीडीआरसी
गुड्स/सर्विस के मूल्य के बदले किए गए 'भुगतान' के आधार पर तय होती है उपभोक्ता फोरम की पेक्यूनिएरी ज्यूरिस्डिक्शन-एनसीडीआरसी

एक महत्वपूर्ण आदेश में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) ने माना है कि उपभोक्ता फोरम के विशेष अधिकार क्षेत्र या पेक्यूनीएरी ज्यूरिस्डिक्शन का निर्धारण करने के लिए, केवल वस्तुओं/सेवाओं के मूल्य के बदले किए गए 'भुगतान' पर विचार किया जाना चाहिए, न कि 'खरीदी' गई वस्तु/सेवा के मूल्य पर। यह आदेश न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल (अध्यक्ष) और डॉ एसएम कांतिकर (सदस्य) की खंडपीठ ने कोलकाता स्थित कारखाने की ओर से दायर एक उपभोक्ता शिकायत पर सुनवाई करते हुए दिया है। यह शिकायत बीमा कंपनी नेशनल...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
'अपीलकर्ता और शिकायतकर्ता-महिला विवाह करने के लिए तैयार हैं', मध्य प्रदेश HC ने महिला से शादी करने के लिए अभियुक्त को 2 महीने की जमानत दी

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय (इंदौर खंडपीठ) ने बुधवार (02 सितंबर) को एक व्यक्ति (अपीलकर्ता) को अस्थायी तौर पर 2 महीने की जमानत दी, ताकि इस अवधि के दौरान अपीलकर्,ता अभियोजक पक्ष/शिकायतकर्ता-महिला के साथ विवाह कर सके। न्यायमूर्ति एस. के. अवस्थी की पीठ अपीलार्थी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने न्यायाधीश देवास, जिला द्वारा दिनांकित 25.05.2020 के आदेश (Bail No.217/2020) से व्यथित महसूस होते हुए, SC / ST (PA) अधिनियम, 1989 की धारा 14-A (2) के तहत हाई कोर्ट के समक्ष अपील दायर की। विशेष रूप से,...

क्या यह राज्य का क्रूर हाथ है, जो काम कर रहा है? , उत्तराखंड HC ने राजद्रोह के आरोपी पत्रकार को अंतरिम जमानत देते हुए गंभीर सवाल उठाये
'क्या यह राज्य का क्रूर हाथ है, जो काम कर रहा है? ', उत्तराखंड HC ने राजद्रोह के आरोपी पत्रकार को अंतरिम जमानत देते हुए गंभीर सवाल उठाये

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने गुरुवार (03 सितंबर) को, राज्य सरकार के समक्ष विस्तृत और गंभीर सवालों की एक श्रृंखला प्रस्तुत की और यह निर्देश दिया कि राज्य की ओर से उन सवालों के संबंध में जवाबी हलफनामा दाखिल किया जाए और तब तक जमानत के आवेदक को अंतरिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति रवींद्र मैथानी की पीठ एक राजेश शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जो 2020 की प्राथमिकी संख्या 265 में धारा 420, 467, 468, 469, 471, 120-बी, 124-ए आईपीसी, पुलिस स्टेशन नेहरू कॉलोनी, जिला देहरादून के तहत जमानत की मांग कर रहा...

[गैंग रेप केस] इलाहाबाद HC ने 2 महीने की अंतरिम जमानत पर यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर रिहा किया
[गैंग रेप केस] इलाहाबाद HC ने 2 महीने की अंतरिम जमानत पर यूपी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति को मेडिकल ग्राउंड पर रिहा किया

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (03 सितंबर) को उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रदेश प्रजापति को उसके खिलाफ दर्ज एक सामूहिक बलात्कार मामले में जमानत दे दी। प्रजापति के खिलाफ धारा 376 (D), 354A (I), 504, 506, 509 I.P.C और POCSO अधिनियम, 2012 की धारा 5 और 6 के तहत दिनांक 18.02.2017 के केस क्राइम नंबर 29 ऑफ़ 2017 के अंतर्गत पुलिस स्टेशन गौतमपल्ली, जिला लखनऊ में मामला पंजीकृत किया गया। न्यायमूर्ति वेद प्रकाश वैश्य की पीठ ने प्रजापति को उसकी चिकित्सा स्थिति को ध्यान में रखते हुए अंतरिम...

अभियुक्तों की चोटों को समझाना अभियोजन के लिए है आवश्यक, इसकी अनुपस्थिति आवेदक को जमानत का अधिकार देती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अभियुक्तों की चोटों को समझाना अभियोजन के लिए है आवश्यक, इसकी अनुपस्थिति आवेदक को जमानत का अधिकार देती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार (3 सितंबर) को एक आदेश में यह साफ़ किया है कि अभियुक्तों की चोटों को समझाना अभियोजन पक्ष के लिए लाज़मी है, और यदि अभियोजन पक्ष के मामले में यह व्याख्या (चोटों के विषय में) शामिल न हो तो आवेदकों को जमानत का अधिकार मिल सकता है। न्यायमूर्ति बी. अमित स्थालेकर एवं न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने यह आदेश मौजूदा मामले में अपीलकर्ता सूरज भान, जोमदार, महेश, शिशुपाल @ ऋषि पाल, सुरेन्द्र और सतेंद्र द्वारा दायर आपराधिक अपील पर सुनाया। मामले की पृष्ठभूमि वर्ष 2009 के सत्र...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने युवा वकील के यौन उत्पीड़न के आरोपी सरकारी वकील को अंतरिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने युवा वकील के यौन उत्पीड़न के आरोपी सरकारी वकील को अंतरिम जमानत दी

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (03 सितंबर) को एक युवा वकील द्वारा दर्ज बलात्कार के मामले में एक सरकारी वकील को अंतरिम जमानत दे दी।उक्त मामले के संबंध में अपनी गिरफ्तारी से बचने के लिए सरकारी वकील की याचिका पर सुनवाई करते हुए लखनऊ में जस्टिस चंद्र धारी सिंह की एकल पीठ ने कहा,"आवेदक एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता है और इस न्यायालय में पिछले 29 वर्षों से बिना किसी आपराधिक मामले के अभ्यास/वकालत कर रहा है। आवेदक, राज्य सरकार और विभागों और निगमों के लिए अतिरिक्त मुख्य स्थायी वकील था। आवेदक के खिलाफ पूरे...

Writ Of Habeas Corpus Will Not Lie When Adoptive Mother Seeks Child
'यह कल्याणकारी राज्य की तस्वीर नहीं', मध्य प्रदेश HC ने सेवानिवृत्त कर्नल की अनावश्यक गिरफ्तारी पर EOW और उनकी जमानत अर्जी खारिज करने पर ट्रायल कोर्ट को फटकार लगायी

भारतीय सेना के एक सेवानिवृत्त कर्नल को जमानत देते हुए, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने हाल ही में EOW (आर्थिक अपराध शाखा, भोपाल) को मामले में गिरफ्तारी करने (जबकि इसकी आवश्यकता नहीं थी) और आवेदक की जमानत याचिका खारिज करने के लिए निचली अदालत को फटकार लगायी। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन की पीठ सीआरपीसी की धारा 439 के तहत दायर एक अर्जी पर सुनवाई कर रही थी। दरअसल याचिकाकर्ता के खिलाफ, आईपीसी की धारा 120 बी के साथ 420, 467, 468, 471, 472, 474 के तहत अपराध के लिए और अपराध क्रमांक 995 / 2020 पंजीकृत,...

NLSIU ने CLAT 2020 स्वीकार करने से इनकार किया,  वर्ष 2020-21 के लिए एडमिशन अलग से होने वाले टेस्ट के आधार पर होंगे
NLSIU ने CLAT 2020 स्वीकार करने से इनकार किया, वर्ष 2020-21 के लिए एडमिशन अलग से होने वाले टेस्ट के आधार पर होंगे

एक महत्वपूर्ण कदम में,भारत की प्रमुख लॉ यूनिवर्सिटी, लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (एनएलएसआईयू), बैंगलोर ने शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के 5 ईयर इंटिग्रेटिड बी.ए एलएल.बी (ऑनर्स) में प्रवेश के लिए कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) के स्कोर स्वीकार न करने का निर्णय लिया है।विश्वविद्यालय की तरफ से जारी एक संशोधित प्रवेश अधिसूचना में कहा गया है कि- ''विश्वविद्यालय शैक्षणिक वर्ष 2020-21 में प्रवेश के लिए CLAT 2020 के स्कोर को स्वीकार नहीं करेगा।''शैक्षणिक वर्ष 2020-21 के लिए प्रवेश विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित...

अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए: J&K HC ने अन्वेषण एजेंसी को दिए निर्देश
अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए: J&K HC ने अन्वेषण एजेंसी को दिए निर्देश

जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने गुरूवार (3 सितंबर) को दिए एक आदेश में जांच/अन्वेषण एजेंसी को यह सुनिश्चित करने के लिए एक निर्देश जारी किया है कि अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो-छवियों को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए। न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता-महिला की उस प्रार्थना पर दिया जिसके अंतर्गत उसने अदालत से यह मांग की थी कि पुलिस को यह निर्देशित किया जाए कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता के वीडियो और छवियों को प्रसारित न किया जाए। मामले की...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
'योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए पर्याप्त दिशानिर्देश शामिल हैं', इलाहाबाद हाईकोर्ट ने MPLAD योजना के तहत जारी निधि के उपयोग की जांच करने से किया इनकार

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने गुरुवार (03 सितंबर) को फैसला सुनाया कि न्यायालय, संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीएलएडीएस) के तहत जारी किए गए धन के उपयोग के संबंध में जांच करने का निर्देश नहीं दे सकता है। जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने कहा कि इस योजना को निष्पादित करने के लिए और कार्य में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्कीम में पर्याप्त दिशानिर्देश मौजूद हैं और किसी भी शिकायत को, उचित प्रशासनिक अधिकारियों के समक्ष उठाया जा सकता है। उल्लेखनीय रूप से,...

Allahabad High Court expunges adverse remarks against Judicial Officer
अतिरिक्त महाधिवक्ता की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सोमवार को उस जनहित याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि राज्य में केवल एक ही महाधिवक्ता हो सकता है और अतिरिक्त महाधिवक्ता की नियुक्ति संविधान के तहत अनुज्ञेय है। जस्टिस पंकज कुमार जायसवाल और जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि राज्य की ओर से न्यायालय की उचित/सुचारू सहायता सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता की नियुक्ति आवश्यक है। पीठ ने स्पष्ट किया कि एक अतिरिक्त महाधिवक्ता केवल महाधिवक्ता के कार्यालय के ''तत्काल और नियमित कार्य'' का निर्वहन करता है...

सुशांत सिंह-रिया मामला : मुंबई पुलिस के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाने के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी बाॅम्बे हाईकोर्ट पहुंचे,  क्राइम रिपोर्टिंग के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग
सुशांत सिंह-रिया मामला : ''मुंबई पुलिस के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण अभियान चलाने'' के मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी बाॅम्बे हाईकोर्ट पहुंचे, क्राइम रिपोर्टिंग के लिए दिशा-निर्देश बनाने की मांग

महाराष्ट्र के कुल आठ पूर्व डीजीपी और पुलिस आयुक्तों ने बॉम्बे हाईकोर्ट के समक्ष एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में मुंबई पुलिस के खिलाफ अनुचित, दुर्भावनापूर्ण और फर्जी मीडिया अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है। पूर्व डीजीपी पीएस पारसीचा, के सुब्रमण्यम, डी शिवानंदन, संजीव दयाल और एससी माथुर व साथ में पूर्व आयुक्त एमएन सिंह, डीएन जाधव और केपी रघुवंशी की तरफ से यह याचिका दायर की गई है। जिसमें मांग की गई है कि भारतीय संघ, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया, न्यूज ब्रॉडकास्टर...