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अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए: J&K HC ने अन्वेषण एजेंसी को दिए निर्देश

SPARSH UPADHYAY
4 Sep 2020 3:45 AM GMT
अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए: J&K HC ने अन्वेषण एजेंसी को दिए निर्देश
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जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट ने गुरूवार (3 सितंबर) को दिए एक आदेश में जांच/अन्वेषण एजेंसी को यह सुनिश्चित करने के लिए एक निर्देश जारी किया है कि अन्वेषण के दौरान जब्त की गई तस्वीरों और वीडियो-छवियों को सोशल मीडिया पर लीक और अपलोड नहीं किया जाए।

न्यायमूर्ति संजय धर की पीठ ने यह आदेश याचिकाकर्ता-महिला की उस प्रार्थना पर दिया जिसके अंतर्गत उसने अदालत से यह मांग की थी कि पुलिस को यह निर्देशित किया जाए कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता के वीडियो और छवियों को प्रसारित न किया जाए।

मामले की पृष्ठभूमि

याचिकाकर्ता ने त्वरित याचिका दायर करते हुए धारा 367-डी, 506, 509, 120-बी आईपीसी और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत अपराध के लिए पुलिस स्टेशन लर्नू, कोकेरनाग में दर्ज एफआईआर संख्या 25/2020 में शामिल उत्तरदाताओं/आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए संबंधित पुलिस के लिए एक दिशा-निर्देश की मांग की।

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष पुलिस से उन आरोपियों को गिरफ्तार करने के लिए एक दिशा-निर्देश की मांग की, जिन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया है और इसके अलावा एक और निर्देश की मांग की कि पुलिस द्वारा को सोशल मीडिया पर याचिकाकर्ता के वीडियो और छवियों को प्रसारित न किया जाए।

न्यायालय का अवलोकन

अदालत ने देखा कि जहाँ तक किसी मामले के अन्वेषण का संबंध है, वह जांच एजेंसी का एकमात्र विशेषाधिकार और डोमेन है। अन्वेषण का तरीका और प्रक्रिया, आपराधिक प्रक्रिया संहिता के प्रासंगिक प्रावधानों के अनुसार होना चाहिए।

अदालत ने आगे कहा,

"किसी मामले में किसी संदिग्ध को गिरफ्तार करने की आवश्यकता है या नहीं और किसी संदिग्ध के खिलाफ पर्याप्त सामग्री है या नहीं, अपराध में उसकी जटिलता को देखते हुए यह सब प्रश्न, विशेष रूप से अन्वेषण एजेंसी के डोमेन के भीतर के हैं। हालांकि, इन मुद्दों पर निर्णय लेते समय अन्वेषण एजेंसी से निष्पक्ष होने की उम्मीद की जाती है। यह अन्वेषण एजेंसी का भी कर्तव्य है कि वह किसी अपराध के गवाहों को पर्याप्त सुरक्षा कवच प्रदान करे, विशेषकर किसी महिला के यौन उत्पीड़न से जुड़े अपराध के मामले में।"

अदालत ने आगे कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच और अपराधों के पीड़ितों की सुरक्षा के पूर्वोक्त उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए, इस याचिका का निपटारा जांच एजेंसी को करने के लिए सभी उपलब्ध उपायों को लेने के निर्देश देकर किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उन अपराधियों को बुक किया जाए और जिन्हें बुक किया जाना है और जिन्हें गिरफ्तार किया जाना आवश्यक है उन्हें गिरफ्तार किया जाए।

अदालत ने साथ ही यह निर्देश भी दिया कि याचिकाकर्ता और उसके परिवार के सदस्यों को उनके जीवन और संपत्ति के लिए खतरे की धारणा के आकलन के बाद पर्याप्त सुरक्षा प्रदान की जाए।

उपरोक्त निर्देशों के साथ रिट याचिका का निपटारा किया गया।

मामले का विवरण:

केस का शीर्षक: रेहाना अख्तर बनाम केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर एवं अन्य

केस नं .: CRM(M) No. 135/2020

कोरम: न्यायमूर्ति संजय धर

आदेश की प्रति डाउनलोड करें



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