मुख्य सुर्खियां
बैंक गारंटी के विस्तार मात्र से ही दावा अवधि नहीं बढ़ जाती : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक गारंटी का आह्वान बैंक गारंटी की शर्तों के अनुसार ही होगा, अन्यथा यह खुद ही अमान्य हो जाएगी।जस्टिस वी कामेश्वर राव की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि बैंक गारंटी की शर्तें अनुबंध में प्रदान की गई दोष देयता अवधि की समाप्ति की तारीख से 90 दिनों की अवधि प्रदान करती हैं, ऐसी अवधि की समाप्ति के बाद बैंक गारंटी का आह्वान किया जाता है तो इसकी केवल बैंक गारंटी के विस्तार के काणर अनुमति नहीं है।पीठ ने कहा,"यह कहना अलग बात है कि अनुबंध समाप्त कर दिया गया है, दूसरी बात यह है कि...
सीआरपीसी की धारा 438 यह नहीं कहती है कि एक घोषित अपराधी को अग्रिम जमानत याचिका दायर करने से रोक दिया जाएगा: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 438 यह नहीं कहती है कि एक घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) को ऐसी याचिका दायर करने से रोक दिया जाएगा। इसका अर्थ हुआ यह हुआ कि कोर्ट ने संकेत दिया कि एक भगोड़ा अपराधी भी अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) याचिका दायर कर सकता है।जस्टिस राजेश सिंह चौहान की पीठ ने आगे कहा कि सीआरपीसी की धारा 82 (भगोड़ा व्यक्ति के लिए उद्घोषणा) घोषित अपराधी द्वारा अग्रिम जमानत आवेदन दाखिल करने में न तो कोई शर्त पैदा लगाता है और न ही कोई प्रतिबंध...
जब वैधानिक प्रावधानों के अनुसार 'पूर्व अनुमति' प्राप्त किए बिना ड्यूटी की जाती है तो उच्च वेतनमान का दावा नहीं किया जा सकताः कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को उच्च वेतनमान से इनकार करने के आदेश की आलोचना करते हुए एक रिट याचिका में कहा कि जब प्रासंगिक अनिवार्य वैधानिक प्रावधानों के उचित अनुपालन के बिना कर्तव्यों का पालन किया जाता है तो वेतन वृद्धि का दावा नहीं किया जा सकता है।याचिकाकर्ता नियुक्ति के बाद एक सहायक शिक्षक के रूप में काम कर रहा था। उसने मास्टर्स ऑफ कॉमर्स की परीक्षा 1990 उत्तीर्ण की थी। याचिकाकर्ता को पांचवीं से दसवीं कक्षा के लिए वर्क एजुकेशन टीचर के रूप में नियुक्त किया गया था। शिक्षकों की कमी के कारण...
"पहले हम यह सुनिश्चित करें कि महाराष्ट्र के गांवों को पानी मिले": बॉम्बे हाईकोर्ट ने क्रिकेटर द्वारा सार्वजनिक मैदानों में पानी की आपूर्ति की मांग वाली जनहित याचिका पर कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को जिला स्तरीय क्रिकेट खिलाड़ी को फटकार लगाई, जिसने जनहित याचिका दायर कर मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (एमसीए), बीसीसीआई और नगर निकायों के खिलाफ सभी सार्वजनिक मैदानों पर शौचालय, पानी और मेडिकल सहायता जैसी स्वच्छता सुविधाओं के लिए निर्देश देने की मांग की गई थी।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ ने कहा कि "क्रिकेट हमारा खेल नहीं है" और गांवों में पानी सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए।जनहित याचिका पर फैसला सुनाते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता से यह बताने को...
कारण है न्याय की आत्मा, न्यायिक या प्रशासनिक शक्तियों का प्रयोग करने वाले प्राधिकरण को सकारक आदेश पारित करना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कारण को न्याय की आत्मा मानते हुए कहा है कि कोई भी आदेश पारित किया गया है, भले ही वह न्यायिक या प्रशासनिक शक्तियों के प्रयोग में निहित हो, सकारक होना चाहिए। जस्टिस चंद्रधारी सिंह ने कहा कि किसी आवेदन के निपटारे के आदेश में आदेश में प्राप्त निष्कर्षों के समर्थन में कारणों को दर्ज करना आवश्यक है और कारण बताने में विफलता न्याय से इनकार करने के समान है।उन्होंने कहा,"वास्तव में, कारणों की रिकॉर्डिंग पर जोर नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने के लिए है, और विशेष रूप से यह...
कामगार मुआवजा अधिनियम | जब पिछली बीमारी का कोई संकेत ना हो तो अचानक मौत को काम के तनाव के रूप में माना जाए: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने एक बीमा अपील द्वारा एक अपील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि काम की प्रकृति के बारे में आयुक्त के निष्कर्ष - श्रमिक मुआवजा अधिनियम और चोट की धारा 30 के तहत अपील द्वारा चुनौती के लिए खुले नहीं हैं।न्यायालय ने अधिनियम की लाभकारी प्रकृति को ध्यान में रखते हुए इसकी उदार व्याख्या पर जोर दिया। यह माना गया कि किसी भी अचानक हुई मौत को तनाव और काम के तनाव के रूप में माना जाएगा, जब पिछली बीमारी के बारे में कोई संकेत नहीं है।यह अपील कामगार मुआवजा आयुक्त और श्रम-1 के सहायक...
पुलिस अधिकारी के पास ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का कोई अधिकार नहीं, केवल लाइसेंसिंग प्राधिकरण ही ऐसा कर सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट (Calcutta High Court) ने कहा कि एक पुलिस अधिकारी (Police Officer) को मोटर वाहन अधिनियम (MV Act), 1988 के तहत किसी व्यक्ति के ड्राइविंग लाइसेंस (Driving Licence) रद्द करने का कोई अधिकार नहीं है, और केवल लाइसेंसिंग प्राधिकरण को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और निलंबित करने का अधिकार है।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य की खंडपीठ ने प्रिया भट्टाचार्य द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया, जिसमें सहायक पुलिस आयुक्त, यातायात विभाग, कोलकाता द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करने की...
पुलिस अधिकारी को ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का अधिकार नहीं, केवल लाइसेंसिंग प्राधिकरण ही ऐसा कर सकता है: कलकत्ता हाईकोर्ट
कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पुलिस अधिकारी को मोटर वाहन अधिनियम, 1988 के तहत किसी व्यक्ति को अयोग्य घोषित करने या उसका ड्राइविंग लाइसेंस रद्द करने का कोई अधिकार नहीं है, केवल लाइसेंसिंग प्राधिकरण को ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने और उसे सस्पेंड करने का अधिकार है।जस्टिस मौसमी भट्टाचार्य की खंडपीठ ने प्रिया भट्टाचार्य द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए उक्त टिप्पणी की। याचिका में सहायक पुलिस आयुक्त, यातायात विभाग, कोलकाता द्वारा पारित आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें अधिक खर्च...
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने पुलिस द्वारा 'हस्तक्षेपकारी निगरानी' के खिलाफ उडथु सुरेश मामले का हवाला देते हुए राउडी शीट्स को खारिज किया
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने उदथू सुरेश बनाम आंध्र प्रदेश राज्य में हालिया सामान्य आदेश के मद्देनजर मामले की योग्यता पर विचार किए बिना रिट याचिकाओं के एक बैच में कई राउडी शीट्स, संदिग्ध शीट्स और हिस्ट्र शीट्स को रद्द कर दिया।उदथू सुरेश में हाईकोर्ट की एकल पीठ ने पाया था कि पुलिस की कार्रवाई निजता के अधिकार का उल्लंघन है, जिसे कानून और केएस पुट्टस्वामी बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में तय योग्यताओं पर विचार किए बिना के प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है।आंध्र प्रदेश पुलिस नियमावली या आंध्र प्रदेश पुलिस स्थायी...
वैधानिक जनादेश के अनुपालन के अनुसार एक बार धान के खेत में बदलाव हो जाने के बाद, तहसीलदार को कर का पुनर्मूल्यांकन करना होगाः केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि वैधानिक जनादेश के अनुपालन के अनुसार एक बार धान के खेत में बदलाव हो जाने के बाद, तहसीलदार को कर का पुनर्मूल्यांकन करना होगा और केरल कंजर्वेशन पैडी लैंड एंड वेट लैंड एक्ट एक्ट की धारा 27 सी के अनुसार राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक प्रविष्टियां करनी होंगी।जस्टिस एन नागरेश ने पाया कि याचिकाकर्ता द्वारा पुनः दावा की गई भूमि धान की भूमि थी और इसलिए, उसे उस मामले के लिए इसे गैर-अधिसूचित भूमि के रूप में मानने या राजस्व मंडल अधिकारी से संपर्क करने के लिए मजबूर नहीं किया जा...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने विदेशी मुद्रा नियमों के कथित उल्लंघन पर स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके निदेशकों पर 25 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाने का ईडी का आदेश रद्द किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने पब्लिक लिमिटेड कंपनी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और उसके निदेशकों को राहत देते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के विशेष निदेशक द्वारा पारित लगभग 14 साल पुराने आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कंपनी पर 20 करोड़ रुपये और इसके प्रमोटर अनिल अग्रवाल और तीन अन्य निदेशकों पर 5.20 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।ईडी ने 21 नवंबर, 2008 को पारित इस आदेश से नीदरलैंड स्थित मोंटे सेलो बीवी में 100% हिस्सेदारी हासिल करते हुए विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 (फेमा) के तहत उल्लंघन का आरोप लगाया था,...
"यह अंतहीन रूप से नहीं चल सकता, हमें एक निर्णय की आवश्यकता है": बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोविंद पानसरे हत्या की जांच महाराष्ट्र एटीएस को स्थानांतरित करने करने की मांग वाली याचिका पर सरकार से जवाब मांगा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को महाराष्ट्र सरकार से कहा कि वह मारे गए कम्युनिस्ट नेता गोविंद पानसरे की हत्या की जांच एसआईटी से महाराष्ट्र एटीएस को स्थानांतरित करने की मांग करने वाली याचिका पर जल्द जवाब दे।खंडपीठ की अध्यक्षता कर रही जस्टिस रेवती मोहिते डेरे ने कहा,"हम आपको पहली तारीख तक का समय देंगे, लेकिन हम उम्मीद करते हैं कि कुछ निर्णय लिया जाएगा। हम अंतहीन इंतजार नहीं कर सकते। हम चाहते हैं कि कुछ निर्णय लिया जाए।"अदालत ने राज्य को एक अगस्त, 2022 तक समय यह तय करने के लिए दिया है कि वह जांच...
महाधिवक्ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की नियुक्ति सार्वजनिक रोजगार नहीं, ऐसी प्रोफेशनल नियुक्तियों के लिए आरक्षण नहीं: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में महाधिवक्ता कार्यालय में विधि अधिकारियों की नियुक्ति में आरक्षण की मांग वाली याचिका को खारिज करने के अपने फैसले को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नियुक्ति राज्य सरकार द्वारा एक पेशेवर शुल्क के लिए एक पेशेवर की नियुक्ति है, जबकि संविधान के अनुच्छेद 16(4) के तहत उल्लिखित आरक्षण सार्वजनिक रोजगार/सेवाओं/पदों के लिए उनके आवेदन में सीमित हैं।जस्टिस शील नागू और जस्टिस एके शर्मा ने रिट कोर्ट के फैसले से सहमति जताई और यह माना कि यह भारत के संविधान के अनुच्छेद 16...
"पेशेवर गतिविधियों पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध": मुंबई कोर्ट ने गिरफ्तार वकील को प्रतिनिधित्व करने के लिए दायर मुवक्किल की याचिका खारिज की
ग्रेटर बॉम्बे में विशेष पीएमएलए अदालत ने क्लाइंटर द्वारा दायर उस आवेदन को खारिज कर दिया, जिसमें अनुरोध किया गया था कि गिरफ्तार वकील को हाईकोर्ट में उसका प्रतिनिधित्व करने की अनुमति दी जाए। उक्त वकील को गिरफ्तारी के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।विशेष न्यायाधीश एम.जी. देशपांडे ने यह कहते हुए आवेदन को खारिज कर दिया,"एक बार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया जाता है और न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाता है तो उसकी पेशेवर गतिविधियों पर पूर्ण कानूनी प्रतिबंध होता है।"आवेदक सुरेश हेडाऊ बॉम्बे...
'आतंक के आरोपियों के लिए टेलीफोन कॉल की सुविधा नहीं': वीडियो कॉलिंग सुविधा की मांग वाली गौतम नवलखा की याचिका पर महाराष्ट्र राज्य जेल विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा
वीडियो कॉलिंग (Video Calling) सुविधा के लिए पत्रकार गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) की याचिका का विरोध करते हुए महाराष्ट्र राज्य के जेल विभाग ने बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) को सूचित किया कि यूएपीए, मकोका, देशद्रोह और नक्सलवाद के तहत आतंक से संबंधित अपराधों के तहत कैद विचाराधीन कैदी के लिए नियमित टेलीफोन कॉल सुविधा उपलब्ध नहीं है।हालांकि, आरोपी पत्र लिखना जारी रख सकता है और परिवार के सदस्यों और कानूनी सलाहकार से शारीरिक रूप से मिल सकता है।इसके अलावा, मौत की सजा पाने वाले कुछ अपराधी अपने...
आयकर रिटर्न दाखिल करने में विफलता| उपयुक्त प्राधिकारी की स्वीकृति के बिना आईटी एक्ट की धारा 276CC के तहत अभियोजन की अनुमति नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली ने स्पष्ट किया कि प्रधान आयुक्त/उपयुक्त प्राधिकारी की मंजूरी के बिना किसी व्यक्ति पर आयकर अधिनियम की धारा 276-सीसी (आय की रिटर्न प्रस्तुत करने में विफलता) के तहत अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस आशा मेनन की सिंगल जज बेंच ने कहा,"चूंकि कानून कहता है कि आईटी अधिनियम की धारा 278 बी के तहत मंजूरी के बिना विभाग आईटी अधिनियम की धारा 276 सीसी के तहत अपराध के लिए मुकदमा चलाने के लिए उत्तरदायी पाए गए व्यक्ति के खिलाफ आगे नहीं बढ़ सकता। याचिकाकर्ता पर मुकदमा चलाने के लिए विशिष्ट मंजूरी...
"15-16 वर्ष या 18 वर्ष से कम उम्र किसी भी जोड़े की शादी की उम्र नहीं, दु:ख होता है कि बच्चे इस तरह के संबंधों में लिप्त हैं": इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप मामले (Rape Case) में आरोपी व्यक्ति को जमानत देते हुए कहा,"15-16 वर्ष या 18 वर्ष से कम उम्र किसी भी युवा जोड़े की शादी की उम्र नहीं है।"कोर्ट ने कहा कि आपसी सहमति से पैदा हुए बच्चे के हितों को ध्यान में रखें।जस्टिस राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि जमानत आदेश को किसी अन्य मामले में एफआईआर के रूप में उद्धृत नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि जमानत वर्तमान मामले के अजीबोगरीब तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए...
राज्यसभा सांसद विल्सन ने केंद्रीय मंत्री को पत्र लिखकर TDSAT की रीज़नल बेंच की स्थापना की मांग की
राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने हाल ही में संचार इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना तकनीक मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखा। इस पत्र में विल्सन ने दूरसंचार विवाद निपटान और अपीलकर्ता न्यायाधिकरण (TDSAT) की क्षेत्रीय पीठों की स्थापना की मांग की।पत्र में पी. विल्सन ने दावा किया कि TDSAT का गठन ट्राई अधिनियम के तहत लाइसेंसकर्ता और लाइसेंसधारी दो या अधिक सेवा प्रदाताओं और उपभोक्ताओं के समूह के बीच उत्पन्न होने वाले "किसी भी विवाद" का न्याय के लिए विशेष अपीलीय न्यायाधिकरण बनाने के लिए किया गया था। इस प्रकार, TDSAT...
सीआरपीसी की धारा 245(2)| मामले के "किसी भी पिछले चरण में" आरोपी को बरी करने की मजिस्ट्रेट की शक्ति का अर्थ है जिस स्तर पर कोर्ट द्वारा संज्ञान लिया गया है: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 245(2) के तहत आरोपी को बरी करने की कोर्ट की शक्ति पर विचार करते हुए हाल ही में कहा है कि प्रावधान में प्रयुक्त शब्द "किसी भी पिछले चरण में" का अर्थ उस चरण से होगा जब मजिस्ट्रेट मामले का संज्ञान लेता है।कोर्ट ने इस प्रकार विशेष न्यायालय (सीमा शुल्क) के न्यायिक मजिस्ट्रेट के बरी आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि मजिस्ट्रेट ने "चेक एंड कॉल ऑन" के चरण में आरोपमुक्त करने संबंधी याचिका की अनुमति दी थी।जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने निम्न टिप्पणी की:"मामले के किसी भी...
20 साल पुराने अतिक्रमण को हटाने की कार्यवाही प्रशंसनीय लेकिन दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी सुनिश्चित करें: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी सरकार से कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने यूपी सरकार (UP Government) से कहा कि 20 साल पुराने कथित अतिक्रमण को हटाने की उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यवाही प्रशंसनीय है, लेकिन राज्य सरकार को उन अधिकारियों के दायित्व / अपराध का भी पता लगाना होगा जिन्होंने यह सुनिश्चित नहीं किया कि गांव सभा की संपत्ति अतिक्रमण नहीं किया गया है।जस्टिस अब्दुल मोइन की पीठ अनिवार्य रूप से महेश कुमार अग्रवाल की याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें सहायक कलेक्टर/तहसीलदार, सीतापुर द्वारा पारित एक आदेश को रद्द करने की मांग की...



















