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26/11 मुंबई आतंकी हमले में जीवित बचे व्यक्ति ने आवास आवंटन की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया

Shahadat
5 Aug 2022 4:33 AM GMT
26/11 मुंबई आतंकी हमले में जीवित बचे व्यक्ति ने आवास आवंटन की मांग को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया
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बॉम्बे हाईकोर्ट में 26/11 के मुंबई आतंकी हमलों की सबसे कम उम्र की उत्तरजीवी देविका रोटावन ने आवास आवेदन की मांग को लेकर आवेदन दायर किया है। रोटावन का यह दूसरा आवेदन है।

रोटावन ने इससे पहले 2020 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उस वक्त अदालत ने राज्य सरकार को उसके आवेदन पर विचार करने के निर्देश के साथ उसकी याचिका का निपटारा किया था।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद राज्य सरकार ने रोटावन की याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद उसने पिछले महीने फिर से अदालत का दरवाजा खटखटाया।

जस्टिस एस वी गंगापुरवाला और जस्टिस एम एस कार्णिक की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को रोटावन की याचिका सुनवाई के लिए आई।

राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कहा कि अक्टूबर, 2020 के आदेश के अनुसार, रोटावन को अनुकंपा के आधार पर पहले ही 13.26 लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।

केंद्र सरकार की ओर से पेश एडवोकेट आर बुबना ने कहा कि रोटावन को हमले के बाद सरकार की नीति के अनुसार 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। रोटावन के पास अब और राहत मांगने का 'अधिकार' नहीं है।

अदालत ने हालांकि मामले को 12 अक्टूबर तक के लिए स्थगित कर दिया, क्योंकि रोटावन के वकील सुनवाई के लिए मौजूद नहीं थे।

2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमले के वक्त रोटावन महज नौ साल की थी। वह अपने पिता और भाई के साथ छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) रेलवे स्टेशन पर थी, जब दस में से दो पाकिस्तानी आतंकवादियों ने गोलियां चला दीं।

उसने कहा कि घटना के दौरान उसके पैर में गोली लगी थी और उसके भाई और पिता को भी चोटें आई थीं। चोटों के कारण पिता और भाई काम करने में असमर्थ हो गए। वे घर चलाने में उनका सहयोग नहीं कर सकते।

रोटावन ने अंत में कहा कि हमलों के बाद केंद्र और राज्य सरकार के कई अधिकारियों ने उसके घर का दौरा किया था। उस वक्त उन्होंने उन्हें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) कोटे के तहत आवास का आश्वासन दिया था।

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