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दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी घोषित अपराधियों और व्यक्तियों के नाम ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए मीटिंग प्रस्तावित करने का आह्वान किया

Shahadat
5 Aug 2022 5:16 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी घोषित अपराधियों और व्यक्तियों के नाम ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करने के लिए मीटिंग प्रस्तावित करने का आह्वान किया
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दिल्ली हाईकोर्ट ने इंटरनेट पर यूजर के अनुकूल पोर्टल पर सभी घोषित अपराधियों और व्यक्तियों के नाम शामिल करने के तौर-तरीकों पर काम करने के लिए मीटिंग बुलाई है।

जस्टिस तलवंत सिंह ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) को 16 अगस्त से 30 अगस्त के बीच मीटिंग आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि इसमें दिल्ली पुलिस के डीसीपी-लीगल, डीसीपी-क्राइम, इंटर -संचालित आपराधिक न्याय प्रणाली (आईसीजेएस), राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी), कम से कम तीन जिलों के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट, एक अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश और एक विशेष न्यायाधीश, सीबीआई के जिम्मेदार अधिकारी भी शामिल हों।

अदालत ने निर्देश दिया,

"उक्त टीम इंटरनेट यूजर्स के अनुकूल पोर्टल पर सभी घोषित अपराधियों (पीओ) और व्यक्तियों (पीपी) के नाम रखने के तौर-तरीकों पर काम करने के लिए पखवाड़े में कम से कम एक बार मीटिंग करेगी।"

इसमें कहा गया,

"उक्त पीओ और पीपी के बारे में पुलिस के पास उपलब्ध डेटा के साथ-साथ एएसजे/विशेष न्यायाधीशों/सीएमएम/एमएम के न्यायालयों के पास उपलब्ध डेटा, विशेष रूप से एनआई अधिनियम की धारा 138 और आईपीसी अपराधों के तहत शिकायती मामलों में जांच की जाए। पहले चरण में वर्ष 2000 से डेटा अपलोड किया जाएगा।"

अदालत ने इससे पहले विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी, जिसमें व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के तरीकों का सुझाव दिया गया था ताकि पुलिस द्वारा विभिन्न मामलों में और साथ ही शिकायती मामलों में घोषित अपराधी या व्यक्तियों के नाम और विवरण को सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित किया जाए ताकि ऐसे व्यक्तियों को संबंधित न्यायालयों के समक्ष मुकदमों का सामना करने के लिए लाने के लिए और कदम उठाए जा सके।

न्यायालय के समक्ष दायर अनुपालन रिपोर्ट के अनुसार, यह सुझाव दिया गया कि घोषित अपराधियों की घोषणा के संबंध में आईसीजेएस में आवश्यक प्रावधानों को शामिल किया जा सकता है। इसके बाद आवश्यक अद्यतन किए जा सकते हैं।

यह भी कहा गया कि अद्यतन सूची सार्वजनिक डोमेन में प्रकाशित की जा सकती है। वर्तमान में चार्जशीट, एफआईआर, गिरफ्तारी ज्ञापन, जांच अधिकारियों, आरोपी, पीड़ित (ओं) आदि के विवरण की स्कैन की गई प्रतियां, जो पहले से ही दिल्ली पुलिस द्वारा सीसीटीएनएस में अपलोड की गई हैं, आईसीजेएस में दिखाई देती हैं।

यह भी सुझाव दिया गया कि न्यायिक अधिकारियों, पुलिस अधिकारियों और एनआईसी की आईसीजेएस टीम की समिति का गठन किया जा सकता है, जो इस प्रक्रिया की व्यापक परिप्रेक्ष्य में जांच कर सकती है। साथ ही त्रुटि मुक्त तरीके से इसके कार्यान्वयन की जांच कर सकती है।

न्यायालय को यह भी सूचित किया गया कि समिति का गठन इस कारण से आवश्यक है कि घोषित अपराधियों के रिकॉर्ड को सार्वजनिक डोमेन में रखना बहुत ही संवेदनशील मामला है। विवरण प्रकाशित करने में छोटी-सी त्रुटि और किसी भी सरकारी एजेंसियों या जनता द्वारा कोई अनुवर्ती कार्रवाई की जा सकती है। इससे गंभीर कानूनी प्रभाव के साथ-साथ नकारात्मक प्रचार भी हो सकता है।

मीटिंग बुलाते हुए कोर्ट ने यह भी कहा कि टीम द्वारा उन घोषित अपराधियों और घोषित व्यक्तियों के नाम को हटाने के लिए सिस्टम भी तैयार किया जाना चाहिए, जिनके खिलाफ धारा 82 और 83 के तहत कार्यवाही की जा रही है।

अदालत ने आदेश दिया,

"इन मीटिंग के कार्यवृत्त प्रत्येक बैठक के बाद इस न्यायालय को भेजे जाएं। 28.10.2022 को इस न्यायालय के समक्ष समेकित अनुपालन रिपोर्ट दायर की जाए, जिसमें अब तक की गई कार्रवाई और भविष्य की कार्रवाई का विवरण दिया गया हो।"

न्यायालय ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश (मुख्यालय) से यह सुनिश्चित करने का भी अनुरोध किया कि संबंधित न्यायालयों के रिकॉर्ड रूम के पास उपलब्ध डेटा की तलाशी ली जाए और घोषित अपराधियों और व्यक्तियों की जिलेवार समेकित सूची को प्रस्तावित पोर्टल पर अपलोड करने के लिए अधिकारियों को दिया जाए।

मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को होगी।

केस टाइटल: नीतू सिंह बनाम एनसीटी ऑफ दिल्ली

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