मुख्य सुर्खियां
दिल्ली हाईकोर्ट ने न्यूजलॉन्ड्री के खिलाफ मानहानि और कॉपीराइट उल्लंघन के मुकदमे में टीवी टुडे को अंतरिम राहत देने से इनकार किया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने न्यूज पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री (Newslaundry), उसके सीईओ अभिनंदन सेखरी और अन्य के खिलाफ दायर मुकदमे में टीवी टुडे नेटवर्क (TV Today Network) को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।दरअसल, इंडिया टुडे और आज तक चैनलों के मालिक टीवी टुडे नेटवर्क ने न्यूज पोर्टल न्यूजलॉन्ड्री के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में कॉपीराइट उल्लंघन और मानहानि का मुकदमा दायर किया था। पोर्टल के एंकरों, प्रबंधन और कर्मचारियों के खिलाफ दायर मुकदमे में दो करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की गई थी।जस्टिस...
संपत्ति की प्रकृति पैतृक है या स्वयं-अर्जित, यह केवल ट्रायल के बाद ही तय किया जा सकता है: कर्नाटक हाईकोर्ट ने वाद में संशोधन की अनुमति दी
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने कहा कि संपत्ति की प्रकृति पैतृक है या स्वयं-अर्जित, यह केवल ट्रायल के बाद ही तय किया जा सकता है और इसलिए ऐसी संपत्तियों को शामिल करने के लिए प्री-ट्रायल स्टेज में वादी में संशोधन की अनुमति है।जस्टिस सचिन शंकर मगदुम की एकल पीठ ने के दुर्गा प्रसाद शेट्टी द्वारा दायर एक याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 16 नवंबर, 2021 के एक आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके द्वारा ट्रायल कोर्ट ने मूल वादी डॉ शशिकला और अन्य द्वारा आदेश VI, नियम 17 के तहत दायर आवेदन को अनुमति दी...
यदि पूर्वाग्रह से कार्य न किया गया तो कारण बताओ नोटिस 'अनावश्यक औपचारिकता': आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने लीज टर्मिनेशन का विरोध करने वाली रिट याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करने के पीछे पूर्वाग्रह नहीं है।जस्टिस आर. रघुनंदन राव ने यूपी राज्य बनाम सुधीर कुमार सिंह (2020) में निर्धारित निम्नलिखित सिद्धांत पर भरोसा किया:"न्यायपालिका के हाथों में प्राकृतिक न्याय लचीला है, जो कई मामलों में अन्याय को दूर करने के लिए उपयुक्त है। ऑडी अल्टरम पार्टेम नियम का उल्लंघन अपने आप में इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकता कि पूर्वाग्रह का कार्य बनता...
यह आवश्यक नहीं कि सभी 100 पेज के फैसलों में मामले के हर पहलू पर अच्छी तरह से विचार किया गया हो : बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता ने सहज तरीके से टिप्पणी करते हुए संकेत दिया कि किसी फैसले की लंबाई उसके अधिकार को तय नहीं करती। उन्होंने कहा कि 100 पेज के सबबी निर्णयों में यह आवश्यक नहीं कि मामले के प्रत्येक पहलू पर अच्छी तरह विचार किया गया हो।सीजे ने कहा कि फैसले की लंबाई अपने आप में इस बात का स्पष्ट संकेत नहीं होगी कि यह अच्छी तरह से तर्कसंगत है।सीजे ने कहा,"मिस्टर एजी, सभी 100- पेज के निर्णयों पर अच्छी तरह से विचार नहीं किया जाता है।"सीजे ने एजी की टिप्पणी के जवाब में यह...
सहायक शिक्षक भर्ती: कलकत्ता हाईकोर्ट ने उम्मीदवार के मूल स्कोर को बदलने के लिए राज्य की निंदा की, उचित लाभ के साथ नियुक्ति का आदेश दिया
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को राज्य सरकार को "दुर्भावनापूर्ण" और "मनमाने ढंग से" 2012 में सहायक शिक्षक के पद के लिए भर्ती परीक्षा में उपस्थित होने वाले उम्मीदवार के मूल स्कोर को बदलने के लिए फटकार लगाई।एकल पीठ ने चयन प्रक्रिया में पर्सनैलिटी टेस्ट के लिए कॉल नहीं मिलने से याचिकाकर्ता-उम्मीदवार के "गंभीर अन्याय" का सामना करने पर उक्त टिप्पणी की।जस्टिस अनिरुद्ध रॉय ने आदेश दिया कि याचिकाकर्ता को 1.4.2015 से अंतिम उम्मीदवार को संबंधित जिले में सहायक शिक्षक के रूप में नियुक्ति किया जाएगा। यह...
मध्यस्थ संस्था को संदर्भित करने के लिए मामले को मेंशन करना पर्याप्त; मध्यस्थ के नाम के लिए पार्टी की आवश्यकता नहीं: कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने फैसला सुनाया कि एक पार्टी द्वारा जारी एक नोटिस, जिसमें कहा गया है कि मामला वास्तुकला परिषद को भेजा जाएगा, मध्यस्थता खंड के आह्वान के उद्देश्य के लिए पर्याप्त है, क्योंकि मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 का अर्थ में वास्तुकला परिषद एक मध्यस्थ संस्था है।जस्टिस सूरज गोविंदराज की एकल पीठ ने कहा कि यह पर्याप्त है यदि मामले को मध्यस्थता के लिए संस्था को संदर्भित करने के लिए उल्लेख किया गया है और कोई विशेष आवश्यकता नहीं है कि एक पक्ष को मध्यस्थ का...
सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 68 वर्षीय वकील को वाहनों को नुकसान पहुंचाने, लोक सेवकों पर हमला करने के आरोप में अग्रिम जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 2019 में सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट के दौरान वाहनों को नुकसान पहुंचाने और लोक सेवकों पर हमला करने के आरोपी दो वकीलों को गिरफ्तारी से पहले अग्रिम जमानत दे दी। जस्टिस राज बीर सिंह की पीठ ने 68 वर्षीय वाजिद खान (वकील के रूप में 40 साल से प्रैक्टिस कर रहे हैं ) को जमानत दे दी। कोर्ट ने एक अन्य वकील को भी जमानत दे दी, जिनकी उम्र 60 साल है।आवेदकों के खिलाफ 2 दिसंबर, 2019 को हुई एक घटना के संबंध में कई एफआईआर दर्ज हैं, जिसमें उन पर लगभग 250-300 लोगों की भीड़ का नेतृत्व करने...
आरोपी को एससी/एसटी एक्ट 3 (2) (वी) के तहत बिना इस सबूत के दोषी नहीं ठहराया जा सकता कि पीड़ित की जाति के आधार पर अपराध हुआ : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत किए गए अपराध के लिए किसी व्यक्ति पर मुकदमा चलाने के लिए यह दिखाने के लिए सबूत होना चाहिए कि आरोपी ने इस आधार पर अपराध किया कि व्यक्ति/पीड़ित अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य है।उल्लेखनीय है कि अधिनियम की धारा 3 (2) (v) अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं होने वाले व्यक्ति को भारतीय दंड संहिता के तहत दस साल या उससे अधिक की अवधि के कारावास से दंडित करता है। किसी व्यक्ति या संपत्ति के खिलाफ...
मद्रास हाईकोर्ट ने फर्जी पासपोर्ट मामले में आईपीएस अधिकारी डेविडसन देवाशिर्वथम को क्लीन चिट दी
मद्रास हाईकोर्ट ने हाल ही में मदुरै के पूर्व पुलिस आयुक्त एस. डेविडसन देवाशिर्वथम को जाली दस्तावेजों का उपयोग करके श्रीलंकाई और भारतीय नागरिकों को फर्जी पासपोर्ट जारी करने से संबंधित मामलों में क्लीन चिट दे दी।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन की पीठ ने कहा कि सत्यापन प्रक्रिया में क्षेत्र जांच पुलिस अधिकारी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और नोडल अधिकारी के पास पैसा रुक जाता है। मामले में उक्त रैंक से ऊपर के अधिकारियों की भागीदारी नहीं हो सकती है।जस्टिस जीआर स्वामीनाथन ने टिप्पणी की:मैं एस डेविडसन...
जज उत्तम आनंद मर्डर केस: झारखंड में सीबीआई की विशेष अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया
झारखंड में एक विशेष केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने जज उत्तम आनंद मर्डर केस में दोनों आरोपियों को दोषी ठहराया।कोर्ट ने दोनों आरोपियों राहुल कुमार वर्मा और लखन कुमार वर्मा को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302, 201 और 34 के तहत दोषी पाया।अब सजा की मात्रा पर सुनवाई छह अगस्त को होगी। गौरतलब है कि ठीक एक साल पहले 28 जुलाई को धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के पद पर तैनात एएसजे उत्तम आनंद को सुबह की सैर के दौरान वाहन ने टक्कर मार दी थी।घटना के सीसीटीवी दृश्य सोशल मीडिया पर सामने...
[दिल्ली दंगे] उमर खालिद की व्हाट्सएप ग्रुप की मेंबरशिप उसे आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जमानत के लिए तर्क
दिल्ली हाईकोर्ट ने 2020 के दंगों में बड़ी साजिश का आरोप लगाते हुए यूएपीए के आरोपों से जुड़े मामले में ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाले छात्र कार्यकर्ता उमर खालिद द्वारा दायर अपील पर गुरुवार को सुनवाई जारी रखी।जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और जस्टिस रजनीश भटनागर की विशेष पीठ से उमर खालिद की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट त्रिदीप पेस ने कहा कि जैसा कि अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया है, केवल व्हाट्सएप ग्रुप की मेंबरशिप खालिद को आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं बना सकता है।अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि उमर खालिद...
यस बैंक एक निजी संस्था, रिट क्षेत्राधिकार के लिए उत्तरदायी नहीं: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने माना है कि यस बैंक लिमिटेड एक निजी बैंक है और संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट अधिकार क्षेत्र के लिए जवाबदेह नहीं है।जस्टिस वैभवी डी नानावती की एकल पीठ ने कहा कि निजी वित्तीय संस्थान, जो वाणिज्यिक गतिविधियां या व्यवसाय करते हैं, अनुच्छेद 12 के तहत परिभाषित 'राज्य' के दायरे में नहीं आएंगे, हालांकि, वे सार्वजनिक कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं। फैसले में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि निजी वित्तीय संस्थानों को सरकार से कोई वित्तीय सहायता नहीं मिलती है और ऐसे संस्थानों को कोई राज्य...
सत्येंद्र जैन मनी लॉन्ड्रिंग मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को एलएनजेपी अस्पताल द्वारा 'आप' मंत्री की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने से रोका
दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को शहर के राउज एवेन्यू कोर्ट को आम आदमी पार्टी (आप) के मंत्री सत्येंद्र जैन के एलएनजेपी अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर विचार करने से रोक दिया। सत्येंद्र जैन वर्तमान में प्रवर्तन निदेशालय द्वारा जांच की जा रही मनी लॉन्ड्रिंग मामले में न्यायिक हिरासत में है।जस्टिस जसमीत सिंह ने ईडी द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें एलएनजेपी अस्पताल के बजाय स्वतंत्र अस्पताल से जैन की मेडिकल जांच कराने की मांग की गई है। एलएनजेपी अस्पताल सीधे दिल्ली सरकार के नियंत्रण में है,...
विभागीय कार्यवाही में निर्दोष पाया गया कर्मचारी पेंशन भुगतान में देरी पर ब्याज का हकदारः पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में हरियाणा विद्युत प्रसार निगम लिमिटेड के पूर्व कर्मचारी को राहत दी, जो सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त करने के बाद सेवानिवृत्त हो चुका था, लेकिन उसके पेंशन लाभ को प्रतिवादियों ने रोक दिया था।कोर्ट ने कहा," ..... एक बार याचिकाकर्ता को निर्दोष पाया जाता है और प्रतिवादी-विभाग के कार्यों के कारण उसे पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ता है..वह ..विलंबित भुगतानों पर ब्याज अनुदान का हकदार हो जाता है, जो कानून के स्थापित सिद्धांत के अनुरूप है।"जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी की पीठ...
यदि माता-पिता ने जमा नहीं किया हो तो अनुकंपा नियुक्त प्राप्त आदिवासी को जाति प्रमाण पत्र जरूर प्रस्तुत करना होगा: बॉम्बे हाईकोर्ट
बॉम्बे हाईकोर्ट की एक पूर्ण पीठ ने फैसला सुनाया है कि आरक्षित श्रेणी के पद के लिए अनुकंपा पर नियुक्त प्राप्त व्यक्ति को जाति वैधता प्रमाण पत्र जमा करने से छूट नहीं दी जाएगी, खासकर यदि पद के मूल धारक ने अपने जीवनकाल में जाति प्रमाण पत्र प्रस्तुत नहीं किया हो।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस रविंद्र घुगे और जस्टिस विभा कंकनवाड़ी ने दो रिट याचिकाओं को खारिज कर दिया, जिसमें याचिकाकर्ताओं को जाति प्रमाण पत्र पेश करने से छूट देने के लिए ग्रामीण विकास विभाग को निर्देश देने की मांग की गई थी क्योंकि उनकी...
आदेश 6 नियम 4 सीपीसी को लिखित बयान में संशोधन के लिए लागू नहीं किया जा सकता: जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू और कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश VI नियम 4 के प्रावधानों के तहत दायर एक आवेदन को गलत बयानी, धोखाधड़ी या जानबूझकर चूक के आरोपों के विवरण के उदाहरण के लिए विशिष्ट होना चाहिए और इस प्रावधान को लिखित बयान में संशोधन तक बढ़ाया नहीं जा सकता है।जस्टिस मोक्ष खजूरिया काज़मी की पीठ एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें याचिकाकर्ताओं (मूल प्रतिवादियों) ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें याचिकाकर्ताओं के आदेश VI नियम 4 के तहत आवेदन को...
अस्पष्ट आधार पर अदालत निष्पादन से पहले निवारक निरोध आदेश में हस्तक्षेप कर सकती है : गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने दोहराया कि यदि कोई आदेश अस्पष्ट और अप्रासंगिक आधारों पर पारित किया जाता है तो निवारक निरोध आदेशों को निष्पादन से पहले के चरण में यानी आरोपी व्यक्ति को हिरासत में लेने से पहले आदेश में हस्तक्षेप किया जा सकता है।याचिकाकर्ता ने वर्तमान आवेदन दायर किया है, क्योंकि उसे निषेध अधिनियम की धारा 65AE, 81 और 98 (2) के तहत दंडनीय अपराधों के लिए एफआईआर में असामाजिक गतिविधि की रोकथाम अधिनियम (Prevention of Anti-Social Activities Act (PASA अधिनियम)) के तहत हिरासत में लिया गया है। उसने चुनाव...
परमादेश की रिट निजी गलतियों के खिलाफ उपचार नहीं, कोर्ट निजी निकाय के आंतरिक प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि परमादेश की रिट निजी गड़बड़ियों के खिलाफ उपचार नहीं है, कहा कि इस तरह की रिट का दायरा निजी अथॉरिटी के खिलाफ है, जो इस प्रकार के सार्वजनिक कर्तव्य के प्रवर्तन तक सीमित एक सार्वजनिक कर्तव्य का पालन कर सकता है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने यह भी कहा कि एक परमादेश की रिट में अदालत एक निजी निकाय के आंतरिक प्रबंधन में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।कोर्ट ने कहा, "यह अच्छी तरह से तय है कि परमादेश की रिट केवल सार्वजनिक या वैधानिक...
आंसर की की शुद्धता पर संदेह की स्थिति में एग्जाम अथॉरिटी को लाभ दिया जाना चाहिए न कि उम्मीदवार को: त्रिपुरा हाईकोर्ट
त्रिपुरा हाईकोर्ट ने हाल ही में परीक्षा नियंत्रक द्वारा दायर अपील की अनुमति देते हुए कहा कि आंसर की की शुद्धता पर संदेह की स्थिति में लाभ उम्मीदवार के बजाय एग्जाम अथॉरिटी को जाना चाहिए।चीफ जस्टिस इंद्रजीत महंती और जस्टिस एसजी चट्टोपाध्याय की खंडपीठ ने टिप्पणी की:"मौजूदा मामले में बहुविकल्पीय प्रश्नों में दिए गए विकल्पों में से कोई भी स्पष्ट रूप से गलत प्रतीत नहीं होता है। इस प्रकार, रण विजय सिंह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य (2018) 2 एससीसी 357 (सुप्रा) में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किया...
"6 महीने के भीतर अनुकंपा नियुक्ति आवेदनों पर विचार करें और निर्णय लें": मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी अधिकारियों को निर्देश दिए
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने सरकारी अधिकारियों को नीति के अनुसार अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए दायर आवेदनों पर 6 महीने के भीतर विचार करने और निर्णय लेने का निर्देश दिया है।जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की पीठ ने आगे कहा कि कई मामलों में, अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन समय पर नहीं होते हैं और वर्षों तक एक साथ लंबित रहते हैं।अदालत ने टिप्पणी की,"परिणामस्वरूप, कई मामलों में आवेदकों को अपने आवेदनों पर विचार करने के लिए परमादेश की रिट मांगने के लिए इस न्यायालय का...











![[दिल्ली दंगे] उमर खालिद की व्हाट्सएप ग्रुप की मेंबरशिप उसे आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जमानत के लिए तर्क [दिल्ली दंगे] उमर खालिद की व्हाट्सएप ग्रुप की मेंबरशिप उसे आपराधिक रूप से उत्तरदायी नहीं बना सकती: दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष जमानत के लिए तर्क](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2022/07/28/500x300_427910-umarkhalidanddelhihc.jpg)







