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पॉक्सो एक्ट: राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूलों में सेक्स एजुकेशन अनिवार्य करने की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया
राजस्थान हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस एसएस शिंदे और जस्टिस अनूप कुमार ढांड की पीठ ने हाल ही में उस जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के तहत गठित विशेष न्यायालयों की स्थिति की जांच के लिए समिति बनाने की मांग की गई है।कुणाल रावत द्वारा दायर जनहित याचिका में यह भी प्रार्थना की गई कि नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों की समस्या को रोकने के लिए राज्य भर के स्कूलों और आंगनवाड़ियों में यौन स्वास्थ्य के बारे में शिक्षा अभियान चलाया जाए।याचिकाकर्ता ने...
केरल हाईकोर्ट ने नाबालिग लड़के का 8 साल तक यौन शोषण करने के आरोपी ट्यूशन टीचर को जमानत दी
केरल हाईकोर्ट ने बुधवार को आठ साल से अधिक समय तक अपने स्टूडेंट का यौन उत्पीड़न करने के आरोपी व्यक्ति को जमानत पर रिहा कर दिया। कोर्ट ने इस आधार पर जमानत याचिका स्वीकार की कि आरोपी व्यक्ति एक महीने से अधिक समय से न्यायिक हिरासत में है।जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस ने कहा कि हालांकि प्रथम दृष्टया इस बात के सबूत हैं कि याचिकाकर्ता अपराध में शामिल था, मामले के लिए उसकी निरंतर कैद आवश्यक नहीं है।उन्होंने कहा,"केस डायरी के अवलोकन से पता चलता है कि प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता को अपराध से जोड़ने के लिए रिकॉर्ड...
जब अभियोजन स्वयं किसी मकसद से प्रभावित होता है, तो कोर्ट हस्तक्षेप कर सकता है और कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग रोकने के लिए उसे रद्द भी कर सकता है: मद्रास हाईकोर्ट
नशीले पदार्थ रखने और तमिलनाडु निषेध अधिनियम 1937 की धारा 4 (1) (ए) के तहत आरोपित एक व्यक्ति के खिलाफ अंतिम रिपोर्ट रद्द करते हुए, मद्रास हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन दुर्भावनापूर्ण था।आरोपी के पास से एक कार में 96 आईएमएफएल रम की बोतलें मिलीं। कार को रोक लिया गया और जांच अधिकारी ने रम की बोतलें जब्त कर लीं। अपराध 10.07.2021 को दर्ज किया गया था और अंतिम रिपोर्ट अगले दिन 11.07.2021 को दर्ज की गई थी। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि अभियोजन कुछ और नहीं, बल्कि कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग है और आरोपी के...
'विडंबना यह है कि हम सभी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों का जश्न मनाते हैं लेकिन उनके सम्मान के लिए थोड़े भी चिंतित नहीं हैं': रेप के बढ़ते मामलों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने रेप के बढ़ते (Rape Case) मामलों पर कहा,"सामान्य रूप से महिलाओं के खिलाफ अपराध और विशेष रूप से बलात्कार के मामले बढ़ रहे हैं। यह एक विडंबना है कि जब हम सभी क्षेत्रों में महिलाओं के अधिकारों का जश्न मना रहे हैं, हम उनके सम्मान के लिए बहुत कम या कोई चिंता नहीं दिखाते हैं। यौन अपराधों की पीड़ितों की मानवीय गरिमा के उल्लंघन के प्रति समाज की उदासीन रवैया एक दुखद प्रतिबिंब है। "जस्टिस संजय कुमार सिंह की पीठ ने इस प्रकार देखा क्योंकि उसने एक अय्यूब खान उर्फ...
'जीवन और मृत्यु का मामला': दिल्ली हाईकोर्ट ने NEET-PG एडमिशन के लिए न्यूनतम परसेंटाइल मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका खारिज की
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने पोस्ट ग्रेजुएशन में एडमिशन के लिए अनिवार्य रूप से NEET में न्यूनतम 50 परसेंटाइल के मानदंड को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दी।जस्टसि सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि डॉक्टरों या विशेषज्ञों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता क्योंकि इसमें मानव जीवन के लिए जोखिम शामिल है।अदालत ने कहा,"यह कोर्ट इस बात पर जोर देता है कि चिकित्सा शिक्षा के मानकों को कम करने से बड़े पैमाने पर समाज पर कहर बरपाने की संभावना है,...
ग्वालियर निवासी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ कथित तौर पर गलत चुनावी हलफनामा दाखिल करने के लिए FIR दर्ज करने की मांग की; हाईकोर्ट ने वैधानिक उपाय प्राप्त करने का निर्देश दिया
ग्वालियर निवासी द्वारा ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) के खिलाफ कथित तौर पर गलत चुनावी हलफनामा दाखिल करने के लिए एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने दंड प्रक्रिया संहिता के तहत वैधानिक उपाय प्राप्त करने का निर्देश दिया।70 वर्षीय गोपी लाल भारती ने आरोप लगाया कि सिंधिया ने चुनाव आयोग को यह नहीं बताया कि उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है, सिंधिया ने शपथ के तहत गलत बयान दिया।याचिकाकर्ता ने आईपीसी की धारा 177, 181, 182 (झूठी...
आरक्षित श्रेणी में खाली महिला सीटों का बैकलॉग उसी श्रेणी के पुरुष उम्मीदवारों द्वारा भरा जा सकता है: हाईकोर्ट ने बैंगलोर विश्वविद्यालय को निर्देश दिया
कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा है कि राज्य सरकार का आदेश, जिसमें कहा गया है कि यदि आरक्षित श्रेणी के पद के तहत पात्र महिला आवेदक उपलब्ध नहीं हैं तो ऐसे पदों को उसी श्रेणी के पात्र पुरुष उम्मीदवारों द्वारा भरा जा सकता है, यह विशेष भर्ती नियमावली के अंतर्गत बैकलॉग रिक्तियों के संबंध में सामान्य भर्ती नियम या भर्ती के तहत जारी की गई भर्ती अधिसूचनाओं पर लागू होता है।जस्टिस एस सुनील दत्त यादव की सिंगल बेंच ने दयावप्पा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया, और बैंगलोर विश्वविद्यालय को 22-11-2002 के सरकारी...
अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम की धारा 14ए में 1989 अधिनियम के तहत आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर रोक लगाने की कोई सीमा अवधि नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 14ए, अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक आदेश के खिलाफ अपील दायर करने पर कोई सीमा नहीं रखती है।चीफ जस्टिस राजेश बिंदल, जस्टिस अजय कुमार श्रीवास्तव- I और जस्टिस सौरभ लावानिया की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा 1989 के अधिनियम की धारा 14A की उप-धारा (3) के दूसरे प्रावधान को संदर्भ में: अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) संशोधन अधिनियम, 2015 की धारा 14A का प्रावधान में...
पुलिस गिरफ्तारी की शक्ति का उपयोग दंडात्मक उपकरण के रूप में न करें, सीआरपीसी की धारा 41 के तहत अनिवार्य सुरक्षा उपायों का पालन करें: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट (Kerala High Court) ने फैसला सुनाया कि राज्य और पुलिस किसी व्यक्ति को दंडात्मक उपकरण या उत्पीड़न से निपटने के साधन के रूप में गिरफ्तार करने के लिए अपनी शक्ति का उपयोग नहीं कर सकते हैं और उनका कर्तव्य है कि वे सीआरपीसी की धारा 41 के तहत प्रदान किए गए सुरक्षा उपायों का पालन करें।जस्टिस एके जयशंकरन नांबियार और जस्टिस मोहम्मद नियास की खंडपीठ ने अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के खिलाफ गिरफ्तारी का आरोप लगाने वाली एक याचिका में यह आदेश...
यदि प्रतिवादी लिखित बयान दर्ज करने के बाद साक्ष्य नहीं पेश कर सका तो डिक्री प्रकृति में एकतरफा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक डिक्री और निर्णय को रद्द कर दिया जो प्रकृति में एकतरफा था, क्योंकि प्रतिवादी ने खराब स्वास्थ्य के कारण परीक्षण के दौरान सबूत पेश नहीं कर सका था।कोर्ट ने कहा, "आक्षेपित डिक्री और निर्णय केवल प्रकृति में एकपक्षीय हैं क्योंकि इस मामले में प्रतिवादी के साक्ष्य पेश नहीं किए गए थे और वह अदालत में उपस्थित होने में विफल रहे ... हालांकि ट्रायल कोर्ट ने एक विस्तृत निर्णय दिया। उस विचार में भी हमें लगता है कि प्रतिवादी को एक अवसर दिया जाना चाहिए...।"संक्षिप्त...
'क्लाइंट के चरित्र को लेकर एडवोकेट का मज़ाक उड़ाना अनुचित है' : पी एंड एच बार काउंसिल
पंजाब एंड हरियाणा बार काउंसिल ने हाल ही में सीनियर एडवोकेट और बार के सदस्यों का उनके द्वारा प्रतिनिधित्व किए जाने वाले क्लाइंट के मज़ाक की प्रथा के बीच इस तरह की प्रथाओं की निंदा करते हुए सर्कुलर जारी किया। बार काउंसिल के चेयरमैन सुवीर सिद्धू की मुहर के तहत जारी सर्कुलर में कहा गया कि वकील को क्लाइंट के चरित्र से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।वकील का क्लाइंट के साथ संबंध केवल उस सीमा तक है जब वह अदालतों में उसके हित का प्रतिनिधित्व करता है। इसे क्लाइंट के साथ व्यक्तिगत संबंध होने के रूप में नहीं माना...
धारा 226 - 228 सीआरपीसी का उद्देश्य आपराधिक मामले का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करना, पार्टियों को देरी की रणनीति अपनाने से बचना चाहिए: गुजरात हाईकोर्ट
गुजरात हाईकोर्ट ने हाल ही में हत्या और हमले के एक मामले से बरी करने के लिए सीआरपीसी की धारा 227 के तहत याचिकाकर्ता-आरोपी द्वारा दायर आवेदन पर पुनर्विचार की मांग वाली एक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस समीर दवे की खंडपीठ ने कहा कि सह-अभियुक्त के साथ याचिकाकर्ता द्वारा कई आवेदन दायर करने के कारण आरोप और आरोप तय करना बार-बार टाला गया है, जिससे अंततः ट्रायल लंबा खिंच गया।कोर्ट ने कहा,"वर्तमान याचिका कुछ और नहीं बल्कि देरी की एक रणनीति है क्योंकि ऐसा लगता है कि आवेदन कई मौकों पर स्थगित...
'DNA Test कराने का निर्देश व्यक्ति की निजता का उल्लंघन है': मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने संपत्ति विवाद मामले में बल्ड टेस्ट की अनुमति देने से इनकार किया
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) की ग्वालियर खंडपीठ ने हाल ही में निचली अदालत के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें संपत्ति विवाद मुकदमे में किसी व्यक्ति को डीएनए टेस्ट (DNA Test) कराने के लिए मजबूर करने के आवेदन को खारिज कर दिया गया था।कोर्ट ने माना कि साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की धारा 112 के तहत प्रदान की गई धारणा खंडन योग्य है और याचिकाकर्ता को मुकदमे के दौरान उक्त अनुमान का खंडन करने का अवसर मिलेगा।इसके अलावा, किसी व्यक्ति के डीएनए टेस्ट के आदेश देने वाले न्यायालयों की...
हाईकोर्ट ने मुंबई कलेक्टर को हवाई अड्डे के आसपास बनी 48 "ऑब्सट्रक्शन" को तोड़ने के लिए कहा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को कलेक्टर (मुंबई उपनगरीय) को ऑब्स्ट्रक्शन को दूर करने के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उन्हें हवाई अड्डे के आसपास बनी 48 ऑब्स्ट्रक्शन को ध्वस्त करने के लिए तत्काल कदम उठाने का निर्देश दिया।इन ऑब्स्ट्रक्शन में ऊंची इमारतों की कुछ मंजिलें शामिल हैं। इन इमारतों का विध्वंस विमान नियम 1994 के नियम 8 के तहत किया जाएगा।चीफ जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एमएस कार्णिक की खंडपीठ एडवोकेट यशवंत शेनॉय की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता जयराम रमेश, पवन खेरा और नेट्टा डिसूजा को स्मृति ईरानी और उनकी बेटी के खिलाफ सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) द्वारा उनके और उनकी बेटी के खिलाफ लगाए गए कुछ आरोपों के संबंध में 2 करोड़ रुपये के दीवानी मानहानि मुकदमे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश, पवन खेरा और नेट्टा डिसूजा को समन जारी किया।जस्टिस मिनी पुष्कर्ण ने कहा कि ईरानी ने प्रथम दृष्टया मामला बनाया है और सुविधा का संतुलन उनके पक्ष में और प्रतिवादी नेताओं के खिलाफ है।कोर्ट ने आदेश दिया,"मैं सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स/यूट्यूब/फेसबुक/इंस्टाग्राम और ट्विटर से प्रेस...
कोर्ट फीस के भुगतान में छूट राज्य का विषय और कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम के तहत इसकी गारंटी नहीं: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने माना कि कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 12 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति सहित उसमें निर्दिष्ट व्यक्तियों को कोर्ट फीस के भुगतान में छूट प्रदान नहीं करती है। कोर्ट फीस में छूट के लिए स्टेट कोर्ट फीस एक्ट के प्रावधानों को लागू करना होगा।अपनाई जाने वाली प्रक्रिया के बारे में बताते हुए, जस्टिस सी प्रवीण कुमार और जस्टिस वेंकटेश्वरलु निम्मगड्डा की खंडपीठ ने कहा,"एक व्यक्ति केवल इस अभ्यावेदन पर कि वह अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित है या...
इंटरसेक्स शिशुओं, बच्चों पर चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक सेक्स-चयनात्मक सर्जरी पर प्रतिबंध लगाने के लिए डीसीपीसीआर की सिफारिश पर निर्णय लें: दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) की ओर से इंटरसेक्स शिशुओं और बच्चों पर, खतरानाक जीवन स्थितियों को छोड़कर चिकित्सकीय रूप से अनावश्यक, लिंग-चयनात्मक सर्जरी पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा करने के लिए दी गई सिफारिश पर उचित निर्णय लेने के लिए आठ सप्ताह का समय दिया है।चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की खंडपीठ ने सृष्टि मदुरै एजुकेशनल रिसर्च फाउंडेशन नामक एक ट्रस्ट की ओर से दायर जनहित याचिका का निस्तारण किया, जिसमें उन शर्तों को...
चार्जशीट की फोटोस्टेट कॉपी होने पर भी इसे डिफ़ॉल्ट जमानत के लिए 'अधूरी' नहीं कहा जा सकता: जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि चार्जशीट के रूप में चार्जशीट की फोटोस्टेट कॉपी को रिकॉर्ड में पेश करने पर उसे डिफॉल्ट जमानत देने के लिए अपूर्ण चार्ज-शीट नहीं कहा जा सकता। कोर्ट ने कहा कि इस कारण से कि मूल दस्तावेजों को न्यायालय की अनुमति से रिकॉर्ड में लाया जा सकता है और अन्यथा साक्ष्य की रिकॉर्डिंग के दौरान उनकी स्वीकार्यता को भी चुनौती दी जा सकती है।जस्टिस अली मोहम्मद मागरे और जस्टिस एमए चौधरी की पीठ एनआईए अधिनियम 2008 सपठित एनआईए (संशोधन अधिनियम) 2019 की धारा...
देशद्रोह मामला: दिल्ली हाईकोर्ट ने शरजील इमाम की अंतरिम जमानत की मांग वाली याचिका पर जारी नोटिस किया, स्टेटस रिपोर्ट मांगी
दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ दिल्ली के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और जामिया इलाके में कथित भड़काऊ भाषण से संबंधित राजद्रोह मामले (Sedition Case) (एफआईआर 22/2020) में शरजील इमाम (Sharjeel Imam) द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया।ट्रायल कोर्ट ने पिछले हफ्ते इमाम की अंतरिम जमानत याचिका खारिज कर दी, जो हाल ही में शीर्ष अदालत के आदेश के मद्देनजर दायर की गई थी, जिसमें केंद्र सरकार द्वारा प्रावधान पर पुनर्विचार करने तक राजद्रोह कानून को स्थगित...
आत्महत्या के लिए उकसाना | कार्यस्थल पर बिना किसी विशिष्ट कृत्य केवल दबाव बनाने का आरोप आईपीसी की धारा 306 को आकर्षित नहीं करेगा: आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 306 के तहत आरोपी को अग्रिम जमानत दे दी।जस्टिस सुब्बा रेड्डी सत्ती ने जियो वर्गीस बनाम राजस्थान राज्य (2021) में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भरोसा करते हुए दोहराया कि बिना किसी सकारात्मक कार्य के केवल दबाव या उत्पीड़न का आरोप आईपीसी की धारा 306 की सामग्री को आकर्षित करने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।मामले के संक्षिप्त तथ्यअभियोजन का मामला यह है कि मृतक की पत्नी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसका पति यानी मृतक नौ साल से प्राथमिक कृषि...


















