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दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
'भ्रष्टाचार जांच में 10 साल की अस्पष्टीकृत देरी, चार्जशीट अभी भी प्राधिकारी से मंजूरी का इंतजार कर रहा': दिल्ली हाईकोर्ट ने सीनियर डॉक्टर के खिलाफ एफआईआर रद्द की

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 2012 और 2013 में एक सीनियर डॉक्टर के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक शाखा द्वारा दर्ज की गई तीन एफआईआर को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि जांच पूरी करने में 10 साल की अस्पष्टीकृत देरी और चार्जशीट अभी भी उपयुक्त प्राधिकारी से मंजूरी का इंतजार कर रहा है।एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 और भारतीय दंड संहिता, 1860 के विभिन्न प्रावधानों के तहत थीं।जस्टिस जसमीत सिंह ने दिल्ली में पूर्व निदेशक स्वास्थ्य सेवा डॉ सर्बेश भट्टाचार्जी द्वारा उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द...

हाईकोर्ट ऑफ कर्नाटक
अभियुक्त की दलील दर्ज करते समय शिकायतकर्ता की उपस्थिति आवश्यक नहींः कर्नाटक हाईकोर्ट ने धारा 138 एनआई एक्ट के तहत शिकायत बहाल की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत द्वारा एनआई एक्ट की धारा 138 के तहत आरोपी की दलीलें दर्ज करते समय शिकायतकर्ता की गैर-मौजूदगी पर बरी करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता है। जस्टिस पीएन देसाई की एकल पीठ ने नागराज द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश के समक्ष अभियोजन बहाल कर दिया।बेंच ने कहा,"सुनवाई की प्रत्येक तिथि पर शिकायतकर्ता के उपस्थित न होने के कारण मामले में बरी करने का आदेश पारित नहीं किया जा सकता है।न्यायालय को मामले के चरण और अभियुक्त और...

विवाह भंग हो चुका है, 498A की चार्जशीट बिना किसी सार के: कर्नाटक हाईकोर्ट ने कार्यवाही रद्द की
'विवाह भंग हो चुका है, 498A की चार्जशीट बिना किसी सार के': कर्नाटक हाईकोर्ट ने कार्यवाही रद्द की

कर्नाटक हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा पूर्व पति और ससुराल वालों के खिलाफ धारा 498-ए (दहेज प्रताड़ना) के तहत दर्ज मामले को खारिज करते हुए कहा कि सर्वव्यापी और सामान्य आरोपों के आधार पर दायर आरोप पत्र बिना किसी सार के है।जस्टिस हेमंत चंदनगौदर की एकल पीठ ने डॉ शाहुल हमीद वालवूर और अन्य द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया और आईपीसी की धारा 498 ए सहपठित धारा 34 और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत दर्ज अभियोजन को रद्द कर दिया।अभियोजन पक्ष के अनुसार, जोड़े ने 2009 में इस्लामी रीति-रिवाजों...

दिल्ली हाईकोर्ट, दिल्ली
धारा 326ए आईपीसी| 'एसिड' में वे सभी पदा‌र्थ शामिल, जिसमें जलाने की प्रकृति, केवल वे ही नहीं, जिन्हें क्लासिक रूप से एसिड कहा जाता है: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 326 ए में शामिल 'एसिड' शब्द केवल उन पदार्थों तक सीमित नहीं है, जिन्हें क्लासिक या वैज्ञानिक रूप से एसिड कहा जाता है, बल्कि इसमें वे सभी पदार्थ भी शामिल हैं जिनमें अम्लीय, संक्षारक या जलाने की प्रकृति होती है और वे विरूपता, अस्थायी या स्थायी विकलांगता पैदा करने में सक्षम हैं।उल्लेखनीय है संहिता की धारा 326ए के तहत एसिड अटैक के लिए सजा का प्रावधान किया गया है। इसमें कहा गया है कि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति के शरीर के किसी हिस्से को एसिड...

Consider The Establishment Of The State Commission For Protection Of Child Rights In The UT Of J&K
एनडीपीएस एक्ट| वैधानिक अवधि के भीतर एफएसएल रिपोर्ट संलग्न ना करना चार्जशीट को दोषपूर्ण नहीं बनाती, यह डिफॉल्ट जमानत का आधार नहीं: जेएंडके एंड एल हाईकोर्ट

जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि केवल इसलिए कि एफएसएल रिपोर्ट प्रस्तुति के समय चार्जशीट के साथ नहीं थी, यह नहीं कहा जा सकता है कि चार्जशीट अधूरी या दोषपूर्ण थी।जस्टिस संजय धर ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए य‌ह टिप्पणी की। याचिकाकर्ता ने जम्मू-कश्मीर सीआरपीसी की धारा 439 के तहत न्यायालय के अधिकार क्षेत्र के इस्तेमाल का आह्वान किया था। उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन, श्रीगुफवाड़ा, कश्मीर नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट की धारा 8/15, 18 के तहत अपराध...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
विवाह कैजुअल किस्म की बात नहीं; यह पश्चिमी व्यवस्था नहीं हैं जहां आप आज विवाह करें और कल तलाक ले लें: सुप्रीम कोर्ट

एक पत्नी की ओर से अपने विवाह को बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एक स्थानांतरण याचिका में गुरुवार बहुत ही नाटकीय मोड़ आ गया।मामले की सुनवाई के दरमियान जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका की बेंच ने विवाह पर कुछ महत्वपूर्ण टिप्‍पणियां कीं और कहा कि कैसे किसी को अपने पार्टनर से असंभव की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, बल्कि पति और पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों को भी देखना चाहिए।सुनवाई के दरमियान पत्नी ने बेंच को बताया कि वह अपनी वैवाहिक जीवन को दोबारा शुरु करना चाहती है, जबकि पति ने...

बेंगलुरु कंज्यूमर फोरम ने 2019 एयर शो के दौरान नष्ट हुए निजी वाहन के लिए रक्षा मंत्रालय के खिलाफ दावा खारिज किया
बेंगलुरु कंज्यूमर फोरम ने 2019 एयर शो के दौरान नष्ट हुए निजी वाहन के लिए रक्षा मंत्रालय के खिलाफ दावा खारिज किया

बेंगलुरु में कंज्यमर फोरम ने गौतम बीसी द्वारा दायर शिकायत खारिज कर दी, जिसमें 2019 के एयर शो के दौरान येलहंका में वायु सेना स्टेशन में पार्क किए गए अपने पुराने वाहन के बाद नया वाहन खरीदने के लिए केंद्रीय रक्षा मंत्रालय से मुआवजे की मांग की गई।अध्यक्ष के एस बिलगी के नेतृत्व वाले फोरम ने 3 अक्टूबर को अपने आदेश में कहा कि भारतीय वायु सेना केवल परिधि के भीतर अग्नि सुरक्षा का प्रबंधन कर रही है और बाहर की अग्नि सुरक्षा राज्य सरकार द्वारा प्रदान की जानी है।उन्होंने कहा,"निश्चित रूप से आग लगने की घटना...

ताहिर हुसैन
[दिल्ली दंगे] 'हिंदुओं को मारने की साजिश रची, उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए': कोर्ट ने ताहिर हुसैन के खिलाफ आरोप तय किए

दिल्ली की एक अदालत (Delhi Court) ने 2020 के उत्तर पूर्वी दिल्ली दंगों (Delhi Riots) के एक मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन (Tahir Hussain), उनके भाई शाह आलम और चार अन्य लोगों के खिलाफ आरोप तय किए।कोर्ट ने कहा कि भीड़ ने हिंदुओं को मारने और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की साजिश रची थी। और इसी के साथ ही एक अजय झा नाम के व्यक्ति को बंदूक की गोली के चोट आई थी।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पुलस्त्य प्रमाचला ने ताहिर हुसैन, शाह आलम, गुलफाम, तनवीर मलिक, नाजिम और कासिम के खिलाफ आईपीसी...

केवल इसलिए कि सीआरपीसी की धारा 482 परिसीमा अवधि निर्धारित नहीं करती, इसका मतलब यह नहीं कि पक्षकार अत्यधिक देरी से अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
केवल इसलिए कि सीआरपीसी की धारा 482 परिसीमा अवधि निर्धारित नहीं करती, इसका मतलब यह नहीं कि पक्षकार अत्यधिक देरी से अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद ब्रांच ने कहा कि कोई भी पक्षकार सीआरपीसी की धारा 482 के तहत अपनी मर्जी से हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है, क्योंकि यह प्रावधान किसी परिसीमा अवधि को निर्धारित नहीं करता।जस्टिस विभा कंकनवाड़ी और जस्टिस राजेश एस पाटिल की खंडपीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत याचिकाकर्ता को किस समय अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए, यह मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर निर्भर करता है। हालांकि, ऐसा समय उचित होना चाहिए।खंडपीठ ने कहा,"उचित समय का अर्थ होगा विवेकपूर्ण वादी द्वारा दिए गए...

यूपी कोर्ट ने 2015 में अखलाक लिंचिंग के बाद निषेधाज्ञा के उल्लंघन के लिए बीजेपी नेता संगीत सोम पर 800 रुपए का जुर्माना लगाया
यूपी कोर्ट ने 2015 में अखलाक लिंचिंग के बाद निषेधाज्ञा के उल्लंघन के लिए बीजेपी नेता संगीत सोम पर 800 रुपए का जुर्माना लगाया

उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर की एक अदालत ने बुधवार को दादरी-मोहम्मद अखलाक लिंचिंग मामले में वर्ष 2015 में सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन करने के लिए भारतीय दंड संहिता की धारा 188 के तहत भाजपा नेता संगीत सोम को दोषी ठहराया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (2) प्रदीप कुमार कुशवाहा ने सजा के तौर पर उन पर 800 रुपए का जुर्माना लगाया। सोम ने अखलाक के बिसाहड़ा गांव में स्थानीय प्रशासन द्वारा लगाए गए सीआरपीसी की धारा 144 का उल्लंघन किया था।अखलाक को वर्ष 2015 में गौतमबुद्धनगर के दादरी इलाके में भीड़...

सुप्रीम कोर्ट, दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने गलत तरीके से मुकदमा चलाने, निर्दोष को जेल में रखने के खिलाफ दिशा-निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने दुर्भावनापूर्ण, गलत तरीके से मुकदमा चलाने और निर्दोष व्यक्तियों को जेल में रखने के खिलाफ दिशा-निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दिया।मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस यूयू ललित और जस्टिस हेमंत गुप्ता की पीठ ने की।शुरुआत में, सीजेआई ललित ने टिप्पणी की कि याचिका में व्यापक प्रार्थनाएं शामिल हैं और गलत तरीके से मुकदमा चलाने, निर्दोष को जेल में रखने के मामले में कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से आना एक बेहतर तरीका होगा। इसके याचिका खारिज कर दी गई।याचिका में सभी अधीनस्थ...

मोटर दुर्घटना मुआवजे के दावे के मामलों में दावा की गई राशि से अधिक उचित मुआवजा दिया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना मुआवजे के दावे के मामलों में दावा की गई राशि से अधिक उचित मुआवजा दिया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजे के दावों के मामलों में दावा की गई राशि से अधिक 'उचित मुआवजा' दिया जा सकता है। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस जेके माहेश्वरी की बेंच ने कहा कि ट्रिब्यूनल / कोर्ट को 'न्यायसंगत' मुआवजा देना चाहिए, जो रिकॉर्ड पर पेश किए गए सबूतों के आधार पर उचित हो।मामलामौजूदा मामले में एक बारह साल के बच्चे को अपने घर के सामने खेलते समय कमांडर जीप ने टक्कर मार दी थी और अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गयी। मृतक बच्चे की मां ने मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 171...

ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 25 के तहत गवर्मेंट एनालिस्ट की रिपोर्ट का विरोध करने का अधिकार अक्षम्य अधिकार है: हिमाचल हाईकोर्ट
ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 25 के तहत गवर्मेंट एनालिस्ट की रिपोर्ट का विरोध करने का अधिकार अक्षम्य अधिकार है: हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 25 के तहत गवर्मेंट एनालिस्ट की रिपोर्ट तथ्यों का निर्णायक सबूत है, जब तक कि जिस व्यक्ति से नमूना लिया गया है, वह इसकी प्रति प्राप्त होने के 28 दिनों के भीतर सूचित नहीं करता।जस्टिस सत्येन वैद्य ने कहा कि रिपोर्ट का विरोध करने का ऐसा अधिकार अभियुक्त का अक्षम्य अधिकार है।उन्होंने कहा,"अधिनियम की धारा 25(4) के तहत अधिकार मूल्यवान और अक्षम्य अधिकार है, जिसे आसानी से छीना नहीं जा सकता। आपराधिक अभियोजन में अपनी रक्षा करने का...

विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर पुनर्मूल्यांकन आदेश पारित करने में विफल रहा: दिल्ली हाईकोर्ट
विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर पुनर्मूल्यांकन आदेश पारित करने में विफल रहा: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कारण बताओ नोटिस और पुनर्मूल्यांकन आदेश को रद्द कर दिया, क्योंकि विभाग निर्धारित समय सीमा के भीतर पुनर्मूल्यांकन आदेश पारित करने में विफल रहा।जस्टिस मनमोहन और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने कहा कि विभाग याचिकाकर्ता / निर्धारिती को 2 जून, 2022 को अधिनियम की असंशोधित धारा 148 और धारा 148 ए (बी) के तहत 31 मार्च, 2021 को नोटिस जारी करने और तामील करने के बाद एक और नोटिस जारी नहीं कर सकता।अदालत ने कहा कि आशीष अग्रवाल के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश उन...

कोर्ट ऑर्गनाइजेशन द्वारा वैकेंसी के विज्ञापन में  निर्धारित आवश्यक योग्यताओं पर अपना दृष्टिकोण प्रतिस्थापित नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
कोर्ट ऑर्गनाइजेशन द्वारा वैकेंसी के विज्ञापन में निर्धारित आवश्यक योग्यताओं पर अपना दृष्टिकोण प्रतिस्थापित नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पोस्ट पर वैकेंसी का विज्ञापन देते समय अदालतें किसी ऑर्गेनाइजेशन द्वारा निर्धारित योग्यता आवश्यकताओं के लिए अपने दृष्टिकोण को प्रतिस्थापित नहीं कर सकती।जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा:"यह ऑर्गेनाइजेशन के लिए अपनी वैकेंसी का विज्ञापन करते समय योग्यता निर्धारित करने के लिए खुला है, जो उक्त पद पर नियुक्ति के लिए ऑर्गेनाइजेशन की दृष्टि में उपयुक्त हो सकता है। न्यायालय ऑर्गेनाइजेशन द्वारा निर्धारित आवश्यकताओं के लिए अपने दृष्टिकोण को...

जब स्वामित्व पर विवाद हो तो स्वामित्व विलेख म्यूटेशन ऑर्डर का आधार नहीं हो सकताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट
जब स्वामित्व पर विवाद हो तो स्वामित्व विलेख म्यूटेशन ऑर्डर का आधार नहीं हो सकताः आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट

आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट ने नगर आयुक्त, तिरुपति द्वारा पारित म्यूटेशन (Mutation) आदेश और म्यूटेशन कार्यवाही खिलाफ दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि म्यूटेशन आदेश कब्जे के आधार पर किए जाने चाहिए न कि स्वामित्व विलेख (Title deed) के आधार पर, जब स्वामित्व पर ही विवाद हो।याचिकाकर्ता ने आयुक्त के समक्ष हुई आक्षेपित म्यूटेशन कार्यवाही को अवैध बताया था और उसे रद्दकर रिट ऑफ सर्टिओरी जारी करने के लिए याचिका दायर की थी। साथ ही आयुक्त को जारी किए गए म्यूटेशन आदेश को रद्द करने और संबंधित रिकॉर्ड में...

दिल्ली विधानसभा चुनाव: कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, प्रकाश जारवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज की
दिल्ली विधानसभा चुनाव: कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल, प्रकाश जारवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग वाली याचिका खारिज की

दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 के संबंध में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के नेता गोपाल राय और प्रकाश जरवाल और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग को लेकर सीआरपीसी की धारा 156 (3) के तहत दायर आवेदन खारिज कर दिया।अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश वृंदा कुमारी ने 1000 रुपये के जुर्माना लगाते हुए शिकायत खारिज कर दी। कोर्ट ने आवेदन खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता ने किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा नहीं किया।न्यायाधीश ने 27 सितंबर के आदेश में कहा,"एफआईआर दर्ज करने...

छात्रों के हित पर किसी के आराम को प्राथमिकता देना निंदनीय: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक की अनुकूल जगह ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका खारिज की
छात्रों के हित पर किसी के आराम को प्राथमिकता देना निंदनीय: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने शिक्षक की अनुकूल जगह ट्रांसफर करने की मांग वाली याचिका खारिज की

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में 48 वर्षीय शिक्षक की याचिका खारिज कर दी, जिसमें अनुकूल जगह पर ट्रांसफर की मांग की गई थी।जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस वीरेंद्र सिंह की खंडपीठ ने कहा कि यह निंदनीय है कि उसे सरकारी नौकरी प्रदान करने के लिए ईश्वर का आभारी होने के बजाय याचिकाकर्ता आराम पाने की कोशिश कर रही है।पीठ ने कहा कि शिक्षा विभाग उसके सामने सबसे बड़े वादियों में से एक है और इनमें से अधिकांश रिट याचिकाएं केवल शिक्षकों के स्थानांतरण और समायोजन से संबंधित हैं।खंडपीठ ने कहा,"शिक्षक बनना...

इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीड़िता से शादी करने, बच्ची को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार करने की शर्त पर पोक्सो के आरोपी को जमानत दी

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने हाल ही में नाबालिग लड़की (17 वर्ष) के साथ रेप मामले में पोक्सो आरोपी को इस शर्त पर जमानत दी कि वह एक महीने की अवधि के भीतर उससे शादी करेगा और पत्नी को सभी अधिकार देगा। साथ ही बच्ची को अपनी बेटी के रूप में स्वीकार करेगा।जमानत देते हुए जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की खंडपीठ ने अभियोजक और उसके पिता के रुख को ध्यान में रखा, जिन्होंने कहा कि अगर आरोपी को जमानत पर रिहा किया जाता है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।अदालत ने इस तथ्य को भी नोट किया कि लड़की ने पहले ही...