मुख्य सुर्खियां
राजेश जोशी, गौतम मल्होत्रा को जमानत देते समय ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई टिप्पणियों पर अन्य अभियुक्तों द्वारा भरोसा नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को कहा कि कथित आबकारी नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में राजेश जोशी और गौतम मल्होत्रा को जमानत देते समय निचली अदालत द्वारा की गई टिप्पणियों पर किसी अन्य सह-आरोपी द्वारा किसी भी कार्यवाही में भरोसा नहीं किया जा सकता।पिछले सप्ताह जोशी और मल्होत्रा को जमानत देने वाले विशेष न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को चुनौती देने के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अदालत का रुख किया, जिसके बाद जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने यह आदेश पारित किया।अदालत ने जमानत रद्द करने की जांच एजेंसी...
दिल्ली हाईकोर्ट ने मनीष सिसोदिया के मानहानि केस में भाजपा सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा दायर मानहानि के मामले में भाजपा सांसद मनोज तिवारी के खिलाफ निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी और आदेश दिया कि इस मामले में उनके खिलाफ कोई और कदम न उठाया जाए।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने मानहानि के मामले में तिवारी की याचिका पर नोटिस जारी किया और इसे 20 नवंबर को अगली सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।सिसोदिया ने 2019 में भाजपा नेताओं मनोज तिवारी, हंस राज हंस, मनजिंदर सिंह सिरसा, परवेश साहिब सिंह वर्मा, हरीश खुराना और विजेंद्र...
2013 मुजफ्फरनगर दंगा: बेटे की गर्दन पर चाकू रख मां का किया था गैंगरेप, कोर्ट ने 20-20 साल की सजा सुनाई
तारीख 27 अप्रैल 2013। जगह यूपी का जिला मुजफ्फरनगर। इसी जिले के कवाल गांव में 3 लोगों की हत्या हुई थी। इसके बाद 7 सितंबर 2013 को सांप्रदायिक दंगा भड़क उठा था। दंगे में 40 लोगों की जान चली गई थी। और 50 हजार से अधिक लोग पलायन कर गए थे. पीड़िता उन 7 महिलाओं में शामिल थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि दंगों के दौरान उनका रेप हुए। हालांकि, धमकियों और डर की वजह से 6 महिलाओं ने केस को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया। जिसके चलते आरोपी बरी हो गए। अब बचा एक मामला जिसपर यूपी की निचली अदालत ने 9 मई यानी मंगलवार...
किशोर उम्र के प्रेम को अदालतों द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता, पॉक्सो मामलों में न्यायाधीशों को जमानत देने या अस्वीकार करने में सावधान रहना होगा: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि "किशोर उम्र के प्रेम" को अदालतों द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता और न्यायाधीशों को प्रत्येक मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर ऐसे मामलों में जमानत खारिज या मंजूर करते समय सावधान रहना होगा।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने यह देखते हुए कि किशोर जो "फिल्मों और उपन्यासों की रोमांटिक संस्कृति की नकल करने की कोशिश करते हैं" कानूनों और सहमति की उम्र के बारे में अनजान रहते हैं, कहा,"यह अदालत यह भी देखती है कि शुरुआती प्रेम संबंधों विशेष रूप से किशोर उम्र के प्रेम के...
एनडीपीएस कोर्ट में मामलों की हाई पेंडेंसी, समयबद्ध तरीके से उनका निपटान करना मानवीय रूप से असंभव: कर्नाटक हाईकोर्ट ने केन्याई नागरिक को जमानत देने से इनकार करते हुए कहा
कर्नाटक हाईकोर्ट ने हाल ही में विशेष एनडीपीएस कोर्ट के समक्ष लंबित मामलों की भारी संख्या पर विचार करते हुए केन्याई नागरिक को जमानत देने से इनकार कर दिया, जिसे दो साल पहले अधिनियम के तहत विदेशी मार्गों से देश में ड्रग्स की तस्करी करने का प्रयास करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।जस्टिस एम जी उमा की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा कि 1 अप्रैल, 2023 को ट्रायल कोर्ट के समक्ष 1,308 विशेष मामले लंबित है।उन्होंने टिप्पणी की,"उन सभी मामलों को समयबद्ध तरीके से निपटाना मानवीय रूप से असंभव है, क्योंकि इन सभी...
ओडिशा के जिलों में 100 और कोर्ट अगले 3 महीनों के भीतर पेपरलेस हो जाएंगे: चीफ जस्टिस मुरलीधर
उड़ीसा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस डॉ. एस. मुरलीधर ने घोषणा की कि अगले तीन महीनों के भीतर ओडिशा के विभिन्न जिलों में 100 और पेपरलेस कोर्ट खोले जाएंगे। पिछले साल सितंबर में तत्कालीन सीजेआई यूयू ललित ने ओडिशा के सभी 30 जिलों में 34 पेपरलेस कोर्ट का उद्घाटन किया था।वह डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट और ई-पहल पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के समापन समारोह में बोल रहे थे, जिसमें जस्टिस ए.एस. बोपन्ना और जस्टिस कृष्ण मुरारी, सुप्रीम कोर्ट के जज भी शामिल थे।देश के सभी हाईकोर्ट के न्यायाधीशों और न्यायिक अधिकारियों...
मद्रास हाईकोर्ट ने लॉ ग्रेजुएट्स के लिए हाई इनरोलमेंट फीस के मुद्दे पर बीसीआई, स्टेट बार काउंसिल से जवाब मांगा
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु और पुडुचेरी की बार काउंसिल को पांचवें वर्ष के लॉ स्टूडेंट मणिमारन की उस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है, जिसमें लॉ ग्रेजुएट्स से उसके द्वारा लिए जाने वाली इनरोलमेंट फीस को चुनौती दी गई है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा और जस्टिस भरत चक्रवर्ती की पीठ ने प्रथम दृष्टया इस बात पर सहमति जताई कि यह राशि बहुत अधिक है और याचिका पर नोटिस जारी किया। बार काउंसिल ऑफ इंडिया और राज्य सरकार को भी कोर्ट ने नोटिस जारी किया।मणिमारन ने तर्क दिया कि राज्य बार काउंसिल अनुसूचित...
हर साल एआईबीई शेड्यूल या टाइम टेबल की घोषणा करने पर विचार करें: दिल्ली हाईकोर्ट ने बीसीआई से कहा
दिल्ली हाईकोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को हर साल अखिल भारतीय बार परीक्षा (एआईबीई) के आयोजन के लिए पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम या टाइम टेबल की घोषणा करने पर विचार करने का निर्देश दिया है। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह ने कहा कि प्रत्येक वर्ष कैलेंडर के हिस्से के रूप में एक पूर्व-निर्धारित कार्यक्रम या वार्षिक टाइम टेबल उम्मीदवारों की सहायता करने और आवश्यक व्यवस्था करने में एक लंबा रास्ता तय करेगी।अदालत ने कहा,“बीसीआई प्रत्येक कैलेंडर वर्ष में उन महीनों की अग्रिम घोषणा करने पर विचार करेगा जिनमें एआईबीई...
पश्चिम बंगाल सरकार के प्रतिबंध के खिलाफ 'द केरला स्टोरी' के निर्माता पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
विवादित फिल्म 'द केरला स्टोरी' के निर्माताओं ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने के पश्चिम बंगाल सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि फिल्म तमिलनाडु में 'शेडो' प्रतिबंध का सामना कर रही है और दक्षिणी राज्य में फिल्म की स्क्रीनिंग के लिए सुरक्षा की मांग कर रही है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को "घृणा और हिंसा की किसी भी घटना से बचने और राज्य में शांति बनाए रखने के लिए" फिल्म के प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाने के निर्णय की घोषणा...
[OXXII R4 CPC] मृत व्यक्ति के पक्ष में पारित डिक्री शून्य: एमपी हाईकोर्ट
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि एक मृत व्यक्ति के पक्ष में पारित डिक्री शून्यत है और इस प्रकार निष्पादन योग्य नहीं है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की खंडपीठ ने ऑर्डर XXII रूल 4 सीपीसी के तहत एक आवेदन की सुनवाई के दरमियान उक्त अवलोकन किया, जिसे उत्तरदाताओं द्वारा उन्हें उस व्यक्ति के कानूनी प्रतिनिधियों के रूप में रिकॉर्ड पर लाने के लिए दायर किया गया था, जो उनके पक्ष में डिक्री पारित होने से पहले गुजर गया था।मामले के तथ्य यह थे कि डिक्री धारक की उसके पक्ष में फैसला आने से पहले ही मृत्यु...
जन सुरक्षा अधिनियम | निवारक हिरासत गिरफ्तारी नहीं, 24 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेशी की आवश्यकता नहीं: जम्मू एंड कश्मीर एंड लद्दाख हाईकोर्ट
जम्मू एंड कश्मीर एंउ लद्दाख हाईकोर्ट ने हाल ही में एक फैसले में कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिए जाने को दंड कानून के तहत अपराध करने के लिए गिरफ्तारी नहीं माना जा सकता है।कोर्ट ने कहा, यह हिरासत में लिए गए व्यक्ति की पृष्ठभूमि के आधार पर उसके किसी भी संभावित हानिकारक कार्य से बचने के लिए एक निवारक उपाय है और इसलिए, 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के समक्ष हिरासत में लिए गए व्यक्ति को पेश करने की कोई आवश्यकता नहीं है,चीफ जस्टिस कोटेश्वर सिंह और जस्टिस पुनीत गुप्ता ने एक एलपीए की...
धारा 73, साक्ष्य अधिनियम | विवादित हस्तलिपि से तुलना करने से पहले नमूना दस्तावेज को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया जाना चाहिए: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 के तहत विवाद में शामिल सभी पक्षों को पहले एक नमूना दस्तावेज स्वीकार करना चाहिए, फिर विवादित हस्ताक्षर या दस्तावेज की हस्तलिपि की तुलना उससे की जानी चाहिए।उक्त प्रावधान में निर्धारित आवश्यकताओं की व्याख्या करते हुए जस्टिस विभु प्रसाद राउत्रे की एकल न्यायाधीश पीठ ने कहा,“भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 73 अदालत को नमूना या स्वीकृत दस्तावेजों के साथ लेखन की तुलना करने का अधिकार देती है। धारा 73 में प्रयुक्त वाक्यांश 'स्वीकृत या...
बिहार में जाति-आधारित सर्वेक्षण पर रोक| पटना हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई जल्दी करने की राज्य सरकार की याचिका खारिज की
पटना हाईकोर्ट ने राज्य में जाति आधारित सर्वेक्षण के खिलाफ दायर रिट याचिकाओं पर जल्द सुनवाई करने की बिहार सरकार की अर्जी आज खारिज कर दी।गौरतलब है कि 4 मई को उक्त दलीलों पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने जाति आधारित सर्वेक्षण पर अंतरिम रोक लगाते हुए मामले को 3 जुलाई को सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया था।इस मामले में शीघ्र सुनवाई की मांग करते हुए, बिहार सरकार ने पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के समक्ष एक अंतरिम आवेदन दायर किया था, जिसमें कहा गया था कि हालांकि हाईकोर्ट का 4 मई का आदेश प्रकृति में अंतरिम है, फिर भी...
2013 मुजफ्फरनगर दंगा: यूपी कोर्ट ने गैंगरेप के एक मामले में दो को दोषी ठहराया
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की एक निचली अदालत ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान एक महिला से सामूहिक बलात्कार के मामले में 2 आरोपियों को आईपीसी की धारा 376(2)(जी), 376-डी और 506 के तहत दोषी ठहराया है।अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अंजनी कुमार सिंह ने आरोपी महेशवीर और सिकंदर को दोषी ठहराया है। एक अन्य आरोपी कुलदीप की सुनवाई के दौरान मौत हो गई। सजा का ऐलान जल्द ही होने की संभावना है।पीड़िता उन 7 महिलाओं में शामिल थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि 2013 के दंगों के दौरान उनके साथ बलात्कार किया...
क्या अक्ल दाढ़ से उम्र का पता लगाया जा सकता है?
बॉम्बे हाईकोर्ट में Protection of Children from Sexual Offences यानी POCSO से जुडा एक केस आय़ा। हाईकोर्ट ने अक्ल दाढ़ यानी Wisdom Teeth को पुख्ता सबूत न मानते हुए आरोपी को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि केवल अक्ल दाढ़ का न होना पीड़िता के नाबालिग होने का निर्णायक सबूत नहीं है।जस्टिस अनुजा प्रभुदेसाई की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा कि अक्ल दाढ़ का होना ज्यादा से ज्यादा ये साबित कर सकता है कि व्यक्ति की आयु 17 साल या उससे अधिक है, लेकिन अक्ल दाढ का न होना ये साबित नहीं करता है कि...
गुजरात हाईकोर्ट ने आयु मानदंड से उम्र एक दिन कम होने पर एडमिशन से वंचित स्टूडेंट को राहत दी
गुजरात हाईकोर्ट ने छह साल की आयु के मानदंड से उम्र केवल एक दिन कम होने के कारण एडमिशन से वंचित रहे स्टूडेंट को राहत देते हुए निर्देश दिया कि उक्त स्टूडेंट के मामले को एडमिशन के लिए माना जाए और केवल इस आधार पर इनकार न किया जाए।स्टूडेंट ने 01.06.2023 को 6 वर्ष की आयु पूरी नहीं की थी।जस्टिस संगीता के विशन द्वारा उपरोक्त निर्णय राज्य द्वारा नए नियमों की शुरूआत के बाद आया है, जिसमें कहा गया कि कोई भी प्राथमिक स्कूल ऐसे बच्चे को पहली कक्षा में एडमिशन नहीं देगा, जिसने शैक्षणिक वर्ष के 1 जून को 6 वर्ष...
एमवी एक्ट की धारा 166 | खड़े वाहन से दुर्घटना होने पर भी मुआवजा दिया जा सकता है: उड़ीसा हाईकोर्ट
उड़ीसा हाईकोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि मोटर वाहन अधिनियम (एमवी एक्ट) की धारा 165 के तहत नियोजित अभिव्यक्ति "मोटर वाहनों का उपयोग" में आपत्तिजनक वाहन के कारण होने वाली दुर्घटना शामिल है, जब वह गतिमान नहीं है और स्थिर/खड़ी स्थिति में है।जस्टिस विभु प्रसाद राउत्रे की एकल पीठ ने मोटर वाहन दावा ट्रिब्यूनल के विपरीत कहा,“…वाहन के चालक-सह-मालिक द्वारा मृतक को आमंत्रित किया गया, जिससे वह वाहन को खाई से निकालने में मदद कर सके और इस तरह की वापसी के क्रम में दुर्घटना तब हुई जब अपराधी ट्रक मृतक पर पलट...
गैर-न्यायिक मुकदमे में कोर्ट फीस वापस करने से इनकार करने से वादी न्याय वितरण प्रणाली के पास जाने से कतराएगा : दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने पाया कि लिस्ट में कोर्ट फीस वापस करने से इनकार करना, जो कि न्यायोचित नहीं रहा और वादी से इसे फिर से भुगतान करने की उम्मीद करना, वादी को न्याय वितरण प्रणाली से संपर्क करने से हतोत्साहित करेगा।जस्टिस राजीव शकधर और जस्टिस गिरीश कप्थ्लिया की खंडपीठ ने कहा,"डॉकेट बहिष्करण का ऐसा रूप किसी भी सभ्य समाज के लिए अत्यधिक प्रतिकूल होगा।"अदालत ने वाणिज्यिक मुकदमे में वादी की अपील को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की, जिसमें जिला न्यायाधीश द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई, जिसमें कोर्ट फीस की...
'बीमार व्यक्ति को पर्याप्त उपचार का अधिकार है': दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में पी सरथ चंद्र रेड्डी को जमानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय राजधानी की अब रद्द की जा चुकी आबकारी नीति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पी सरथ चंद्र रेड्डी को मेडिकल आधार पर नियमित जमानत दे दी। कोर्ट ने रेड्डी को यह देखते हुए जमानत दी कि बीमार व्यक्ति को पर्याप्त और प्रभावी इलाज पाने का अधिकार है।हाईकोर्ट ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार में स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार शामिल है।जस्टिस दिनेश कुमार शर्मा ने उक्त तथ्य को देखते हुए कहा,"हालांकि जेल और नामित अस्पताल अच्छा बुनियादी उपचार...
बाल यौन उत्पीड़न मामलों में सुनवाई करते समय न्यायाधीशों के पास न केवल 'संवेदनशील दिल' बल्कि 'सतर्क दिमाग' भी होना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि गवाहों के बयान दर्ज करते समय और बच्चों के साथ यौन उत्पीड़न के मामलों में सुनवाई करते समय प्रत्येक न्यायाधीश का कर्तव्य न केवल "संवेदनशील दिल" बल्कि "सतर्क दिमाग" भी होना चाहिए।जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि हालांकि राज्य और प्रशासन न्यायाधीशों को "आवश्यक और आधुनिक बुनियादी ढांचा" प्रदान कर सकते हैं, जिसमें कमजोर गवाह बयान शामिल हैं, "यह न्यायाधीश के दिल में संवेदनशीलता पैदा नहीं कर सकता।"अदालत ने कहा कि देश के नागरिकों के लिए शपथ और सेवा से बंधे रहने के अपने...










![[OXXII R4 CPC] मृत व्यक्ति के पक्ष में पारित डिक्री शून्य: एमपी हाईकोर्ट [OXXII R4 CPC] मृत व्यक्ति के पक्ष में पारित डिक्री शून्य: एमपी हाईकोर्ट](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2023/04/24/500x300_469769-madhya-pradesh-high-court-jabalpur-bench.jpg)






