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दिल्ली हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों के पीड़ितों की गोपनीयता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
दिल्ली हाईकोर्ट ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों के पीड़ितों की गोपनीयता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपनी रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए हैं कि फाइलिंग में अभियोजन पक्ष या पीड़ित या यौन अपराधों की पीड़ित की गुमनामी और गोपनीयता को सख्ती से बनाए रखा जाए। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने रजिस्ट्री को यौन अपराधों से संबंधित सभी फाइलिंग की "सावधानीपूर्वक जांच" करने का निर्देश देते हुए कहा कि नाम, पितृत्व, पता, सोशल मीडिया क्रेडेंशियल्स और पीड़िता या पीड़िता की तस्वीरों का खुलासा नहीं किया जाना चाहिए, जिसमें पक्षों के मेमो भी शामिल हैं। .अदालत ने यह कहते हुए आदेश...

इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा फैमिली कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए द कॉन्सेप्ट एंड टेक्निक्स ऑफ मेडिएशन पर ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन
इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा फैमिली कोर्ट के न्यायाधीशों के लिए 'द कॉन्सेप्ट एंड टेक्निक्स ऑफ मेडिएशन' पर ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 और 16 अप्रैल को फैमिली कोर्ट के जजों के लिए 'द कॉन्सेप्ट एंड टेक्निक्स ऑफ मेडिएशन' पर 2 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य पारिवारिक विवादों को निपटाने में जजों के कौशल को बढ़ाना था। इस वर्कशॉप का आयोजन फैमिली कोर्ट मामलों की संवेदीकरण समिति, इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर, जस्टिस सुनीता अग्रवाल, जस्टिस डीके उपाध्याय, जस्टिस संगीता चंद्रा, जस्टिस अजय भनोट, जस्टिस मंजू रानी चौहान और जस्टिस साधना...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 मामलों में आजीवन कारावास की सजा पाए दोषी को छूट देने के सरकार के आदेश को रद्द किया
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2 मामलों में आजीवन कारावास की सजा पाए दोषी को छूट देने के सरकार के आदेश को रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुधवार को उत्तर प्रदेश सरकार के एक आदेश, जिसके जर‌िए दो आपराधिक मामलों में आजीवन कारावास की सजा पाए एक दोषी को छूट प्रदान की गई थी, को रद्द कर दिया। राज्य सरकार ने यह आदेश 2019 में दिया ‌था।कोर्ट ने माना कि दोषी मान सिंह का मामला राज्य सरकार की छूट नीति के अनुसार निषेध संख्या (x) के अंतर्गत आता है, इसलिए वह छूट का हकदार नहीं है। ज‌स्टिस विवेक कुमार बिड़ला और जस्टिस सुरेंद्र सिंह- I की खंडपीठ ने दोषी को 30 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करने और सजा के शेष हिस्से को भुगतने का...

अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर से अवगत होने के कारण देश से भागे व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं: केरल हाईकोर्ट
अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर से अवगत होने के कारण देश से भागे व्यक्तियों को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि उन परिस्थितियों में अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा, जहां अभियुक्त अपने खिलाफ दर्ज गैर-जमानती अपराध से पूरी तरह वाकिफ होने के कारण देश से भाग गया हो।अदालत ने यह भी कहा कि एक अभियुक्त जो विदेश में है, उसकी ओर से दायर जमानत आवेदन पर विचार करते समय, अदालतों को यह शर्त लगाने पर विचार करना चाहिए कि जब भी आवश्यक हो, अभियुक्त पुलिस अधिकारी द्वारा पूछताछ के लिए उपलब्ध होगा और अभियुक्त न्यायालय की पूर्व अनुमति के बिना भारत से बाहर नहीं जाएगा।जस्टिस अलेक्जेंडर थॉमस और...

यौन अपराधों की पीड़िता को हर स्तर पर सुनवाई का अधिकार, लेकिन उसे प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट
यौन अपराधों की पीड़िता को हर स्तर पर सुनवाई का अधिकार, लेकिन उसे प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने माना है राज्य या आरोपी की ओर से शुरू की गई किसी भी आपराधिक कार्यवाही में कि यौन अपराधों के पीड़ित को पक्ष के रूप में शामिल करने की कोई कानूनी आवश्यकता नहीं है।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने जगजीत सिंह और अन्य बनाम आशीष मिश्रा @ मोनू और अन्य में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला दिया और कहा कि एक पीड़ित के पास सभी आपराधिक कार्यवाहियों में शामिल होने का "स्वच्छंद अधिकार" है, मगर यह पीड़ित को मामले में पक्षकार बनाने का अपने आप में कोई कारण नहीं है, जब तक कि दंड प्रक्रिया संहिता...

कर्नाटक संशोधन, जिसके तहत कार्यकारी प्राधिकरण को विलंबित जन्म/मृत्यु पंजीकरण पर निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की गई, अल्‍ट्रा वायर्सः कर्नाटक हाईकोर्ट
कर्नाटक संशोधन, जिसके तहत कार्यकारी प्राधिकरण को विलंबित जन्म/मृत्यु पंजीकरण पर निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की गई, अल्‍ट्रा वायर्सः कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने कर्नाटक जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) नियम, 2022, जिसके जरिए जन्म और मृत्यु नियम, 1999 के नियम 9 में संशोधन किया गया है और राजस्व अधिकारियों को जन्म और मृत्यु के विलंबित पंजीकरण के लिए आवेदन पर निर्णय लेने की शक्तियां प्रदान की गई हैं, को अल्ट्रा वायर्स घोषित कर दिया है।राज्य सरकार ने नियम 9 के उप-नियम (3) में संशोधन के जर‌िए "एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट या एक प्रेसिडेंसी मजिस्ट्रेट" को "एक सहायक आयुक्त (उप-मंडल मजिस्ट्रेट)" से प्रतिस्‍थापित कर दिया था। राज्य सरकार ने...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 से अलग रहने के दावे के बावजूद अपील अवधि के दौरान पुनर्विवाह करने वाली तलाकशुदा महिला को राहत देने से इनकार किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2013 से अलग रहने के दावे के बावजूद अपील अवधि के दौरान पुनर्विवाह करने वाली तलाकशुदा महिला को राहत देने से इनकार किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने तलाक के फैसले के खिलाफ पति की तरफ से दायर अपील को खारिज करने की मांग करने वाली उस महिला को राहत देने से इनकार कर दिया है,जिसने अपनी अंतरिम अर्जी में कहा था कि वह पहले ही किसी और से शादी कर चुकी है,इसलिए उसके पति की अपील को खारिज कर दिया जाए।अदालत ने कहा कि ‘‘अपील अवधि (90 दिनों की) के भीतर पति द्वारा दायर की गई फैमिली कोर्ट की अपील को, आवेदक (पत्नी) द्वारा दूसरी शादी करने और वह भी अपील की अवधि के दौरान, निष्फल नहीं माना जाएगा।’’ हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 15 पति-पत्नी को उस...

श्रद्धा वाकर मर्डर केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने समाचार चैनलों को चार्जशीट की सामग्री प्रसारित करने से रोका
श्रद्धा वाकर मर्डर केस: दिल्ली हाईकोर्ट ने समाचार चैनलों को चार्जशीट की सामग्री प्रसारित करने से रोका

दिल्ली हाईकोर्ट ने सभी समाचार चैनलों को श्रद्धा वाकर हत्याकांड के संबंध में चार्जशीट की सामग्री दिखाने या प्रदर्शित करने से रोक दिया है। जस्टिस रजनीश भटनागर ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें समाचार चैनलों को अभी तक एकत्र की गई चार्जशीट की सामग्री को प्रदर्शित करने से रोकने की मांग की गई थी।अदालत ने भारत संघ को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि सामग्री तक पहुंच रखने वाला कोई भी चैनल याचिका के निस्तारण तक इसे प्रदर्शित न करे। यह मामला अब 3 अगस्त को सुनवाई के लिए...

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को डॉक्टरों के गले के चारों ओर फंदे के रूप में इस्तेमाल ना किया जाए, जिससे वे महत्वपूर्ण क्षणों में पेशेवर फैसला लेने से आशंकित हों : एनसीडीआरसी
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को डॉक्टरों के 'गले के चारों ओर फंदे' के रूप में इस्तेमाल ना किया जाए, जिससे वे महत्वपूर्ण क्षणों में पेशेवर फैसला लेने से आशंकित हों : एनसीडीआरसी

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, नई दिल्ली ने कहा है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम को डॉक्टरों के 'गले के चारों ओर फंदे' के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए, जिससे वे महत्वपूर्ण क्षणों में पेशेवर फैसला लेने से आशंकित हों।पीठासीन सदस्य डॉ एस.एम. कांतिकर मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, दिल्ली के डॉक्टरों की ओर से चिकित्सा लापरवाही का आरोप लगाने वाली एक शिकायत पर विचार कर रहे थे जिसमें 20.33 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग की गई हैआयोग ने विभिन्न मिसालों, सी पी श्रीकुमार (डॉ.), एमएस (ऑर्थो)...

लिस्टिंग के लिए याचिका को अनुमति देने के लिए जांच अधिकारी की ओर से की जाने वाली जांच का दायरा क्या है? दिल्ली हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार से पूछा
लिस्टिंग के लिए याचिका को अनुमति देने के लिए जांच अधिकारी की ओर से की जाने वाली जांच का दायरा क्या है? दिल्ली हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार से पूछा

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने रजिस्ट्रार (लिस्टिंग) को एक याचिका को लिस्टिंग के लिए अनुमति देने के ल‌िए जांच अधिकारी की ओर से की जाने वाली आवश्यक जांच के दायरे को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने रजिस्ट्रार से यह भी पूछा कि क्या ऐसे कोई सामान्य निर्देश या न्यायिक आदेश हैं, जिनके लिए जांच अधिकारी को "प्रथम दृष्टया राय" बनाने की आवश्यकता है, कि क्या अदालत के समक्ष प्रार्थना विचार योग्य है या नहीं।अदालत ने मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष लंबित एक आपराधिक शिकायत में कार्यवाही को...

सब-डीविजनल ऑफिसर से उम्‍मीद की जाती है कि वह सीआरपीसी की धारा 145 के तहत न्यायिक आदेश पूरे तर्क और चर्चा के साथ पारित करेगा : पटना हाईकोर्ट
सब-डीविजनल ऑफिसर से उम्‍मीद की जाती है कि वह सीआरपीसी की धारा 145 के तहत न्यायिक आदेश पूरे तर्क और चर्चा के साथ पारित करेगा : पटना हाईकोर्ट

पटना हाईकोर्ट ने सब-डीविजनल ऑफिसर, नरकटियागंज के एक आदेश को रद्द कर दिया था। हाईकोर्ट ने कहा कि धारा 145 सीआरपीसी के तहत पार‌ित प्राधिकरण का आदेश न न्यायिक प्रकृति का है और न ही प्रशासनिक आदेश है।जस्टिस डॉ अंशुमन की बेंच ने कहा,"इस न्यायालय को यह पता चला है कि इस प्रकार का आदेश पारित करना मूल रूप से एक प्रशासनिक आदेश है। अधिकारी यानी उप-विभागीय अधिकारी नरकटियागंज भले ही कार्यकारी पद पर हों, लेकिन सीआरपीसी की धारा 145 के तहत कार्यवाही तय करने के समय वह एक अर्ध-न्यायिक प्राधिकरण थे और माना जाता था...

हाईकोर्ट ने मनसा देवी मंदिर परिसर क्षेत्र को पवित्र घोषित करने, इसके आसपास मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगाई
हाईकोर्ट ने मनसा देवी मंदिर परिसर क्षेत्र को 'पवित्र' घोषित करने, इसके आसपास मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगाई

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा राज्य के पंचकुला जिले में स्थित माता मनसा देवी मंदिर में मांस और मांस उत्पादों की बिक्री और खरीद पर प्रतिबंध लगाने के हरियाणा सरकार के आदेश पर रोक लगाई।जस्टिस विनोद एस. भारद्वाज की पीठ ने प्रभावित मांस विक्रेताओं की तरफ से दायर याचिका पर निम्नलिखित आदेश पारित किया,"इस बीच, दिनांक 21.12.2022 की विवादित अधिसूचना (अनुलग्नक P-1) का संचालन सुनवाई की अगली तारीख तक स्थगित रहेगा।"गौरतलब है कि 21 दिसंबर, 2022 को हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव, शहरी स्थानीय...

प्राइवेट स्कूलों को अपनी पसंद से छात्रों को एडमिशन देने का अधिकार उचित और पारदर्शी मानदंडों के आधार पर होना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट
प्राइवेट स्कूलों को अपनी पसंद से छात्रों को एडमिशन देने का अधिकार उचित और पारदर्शी मानदंडों के आधार पर होना चाहिए: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट में प्राइवेट स्कूल में एक छात्र के एडमिशन से जुड़ा एक केस आया। कोर्ट ने कहा कि प्राइवेट स्कूलों को अपनी पसंद से छात्रों को एडमिशन देने का अधिकार एक उचित और पारदर्शी मानदंड के आधार पर होना चाहिए।जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच मामले की सुनवाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि जनरल कोटा के तहत एडमिशन के मामलों में एक स्कूल की स्वायत्तता होती है। इसके लिए वो अपने मानदंड तैयार कर सकता है। लेकिन ये मानदंड भेदभावपूर्ण नहीं होने चाहिए। मानदंड उचित, निष्पक्ष और न्यायसंगत होने चाहिए।आगे कहा,“निजी...

दिल्ली दंगे: हाईकोर्ट के एक और जज ने आसिफ इकबाल तनहा के ज़ी न्यूज़ के ख़िलाफ़ मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया
दिल्ली दंगे: हाईकोर्ट के एक और जज ने आसिफ इकबाल तनहा के ज़ी न्यूज़ के ख़िलाफ़ मामले की सुनवाई से खुद को अलग किया

जस्टिस अनूप जयराम भंभानी के बाद, दिल्ली हाईकोर्ट के एक और जज ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से संबंधित बड़ी साजिश में मीडिया को अपने कथित कबूलनामे के बयान को लीक करने के खिलाफ आसिफ इकबाल तन्हा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है।जस्टिस अमित शर्मा ने आज मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा के आदेशों के अधीन इसे 24 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। जस्टिस अमित शर्मा को पिछले साल अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था...

‘सुनिश्चित करें कि सीआईएस पंजीकरण औपचारिकताओं के कारण जमानत आवेदन में देरी नहीं हुई है’: गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेटों को कहा
‘सुनिश्चित करें कि सीआईएस पंजीकरण औपचारिकताओं के कारण जमानत आवेदन में देरी नहीं हुई है’: गुजरात हाईकोर्ट ने न्यायिक मजिस्ट्रेटों को कहा

गुजरात हाईकोर्ट ने जनवरी में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन के लिए राज्य के सभी मजिस्ट्रेट न्यायालयों को एक सर्कुलर जारी किया है।जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस अभय एस. ओका की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने ज़मानत देने के लिए एक व्यापक नीतिगत रणनीति जारी करने के उद्देश्य से शुरू की गई एक स्वत: संज्ञान रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए विचाराधीन कैदियों के मुद्दे पर 7 निर्देशों का एक सेट जारी किया जो जमानत आदेश या अन्यथा में निर्धारित शर्तों को पूरा करने में असमर्थता के कारण जमानत का लाभ दिए...

प्रथम दृष्टया वन अधिकारी तय प्रक्रिया का पालन किए बिना तडोबा टाइगर रिजर्व के पास आदिवासियों को बेदखल करना चाहते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट
प्रथम दृष्टया वन अधिकारी तय प्रक्रिया का पालन किए बिना तडोबा टाइगर रिजर्व के पास आदिवासियों को बेदखल करना चाहते हैं: बॉम्बे हाईकोर्ट

बॉम्बे हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि प्रथम दृष्टया वन विभाग के अधिकारी उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना महाराष्ट्र में प्रसिद्ध ताडोबा टाइगर रिजर्व की सीमाओं पर रहने वाले आदिवासी को बेदखल करना चाहते हैं, राज्य द्वारा दायर नागरिक संशोधन आवेदन खारिज कर दिया।जस्टिस एमएस जावलकर ने कहा कि आदिवासी को सुनवाई दिए बिना चार हेक्टेयर भूमि पर उनका दावा खारिज कर दिया गया और उन्हें आदेश भी नहीं बताया गया।पीठ ने कहा,"...यह उम्मीद की जाती है कि आदिवासियों को सबूत पेश करने का अवसर दिया जाना चाहिए और पारित करने के...

हिंदू उत्तराधिकार एक्ट की धारा 6 (1) के अपवाद न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन में हस्तांतरित संपत्तियों पर लागू नहीं होता: कर्नाटक हाईकोर्ट
हिंदू उत्तराधिकार एक्ट की धारा 6 (1) के अपवाद न्यायालय के आदेशों के उल्लंघन में हस्तांतरित संपत्तियों पर लागू नहीं होता: कर्नाटक हाईकोर्ट

कर्नाटक हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिंदू उत्तराधिकार एक्ट की धारा 6 (1) के तहत किए गए अपवाद का लाभ उस व्यक्ति द्वारा उठाया जा सकता है, जिसने कानूनी रूप से संपत्तियों को हस्तांतरित किया है और यदि अलगाव अदालत के उल्लंघन में किया गया है तो लाभ नहीं बढ़ाया जा सकता है।एक्ट की धारा 6 (1) को वर्ष 2005 में संशोधित किया गया और यह 20 दिसंबर 2004 से पहले की गई संपत्ति के अलगाव के अपवाद के साथ पूर्वव्यापी रूप से हिंदू पुरुष की बेटी को सहदायिक का दर्जा प्रदान करता है।धारवाड़ खंडपीठ में बैठे जस्टिस अनंत...

शिलांग ट्रैफिक समस्या: मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश, कहा- कोई योजना लागू होती नजर नहीं आ रही है
शिलांग ट्रैफिक समस्या: मेघालय हाईकोर्ट ने राज्य को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश, कहा- कोई योजना लागू होती नजर नहीं आ रही है

मेघालय हाईकोर्ट ने सोमवार को राज्य सरकार को राजधानी शहर शिलांग में यातायात की भीड़ को कम करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में एक हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया।ये आदेश चीफ जस्टिस संजीब बनर्जी और जस्टिस डब्ल्यू डेंगदोह की पीठ ने शहर में बढ़ती यातायात भीड़ के बारे में चिंता जताने वाली एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।अपने आदेश में, पीठ ने कहा कि कई महीने पहले, राज्य सरकार ने संकेत दिया था कि शहर में स्कूल जाने वाले बच्चों के अधिकांश माता-पिता अपने बच्चों को बस से स्कूल ले जाने का...

ट्रायल कोर्ट का कर्तव्य है कि वह 10 साल के बच्चे का इंटरव्यू करे और उसकी इच्छा को समझे: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता को कस्टडी देने का आदेश रद्द किया
ट्रायल कोर्ट का कर्तव्य है कि वह 10 साल के बच्चे का इंटरव्यू करे और उसकी इच्छा को समझे: बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिता को कस्टडी देने का आदेश रद्द किया

बॉम्बे हाईकोर्ट ने बच्चे की इच्छा का पता लगाने के लिए उसका इंटरव्यू करने में निचली अदालत की विफलता का हवाला देते हुए कस्टडी आदेश रद्द कर दिया।नागपुर खंडपीठ की जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के ने मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए निचली अदालत में वापस भेज दिया और कहा कि मामले का फैसला करने से पहले निचली अदालत को बच्चे का बंद कमरे में इंटरव्यू करना चाहिए।अदालत ने कहा,"यह ट्रायल कोर्ट का कर्तव्य है कि वह नाबालिग बच्चे को अदालत के सामने पेश करे और पर्याप्त समझ के साथ कथित रूप से बच्चे के बारे में जानने...