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बहुविवाह, निकाह-हलाला को सती और मानव बलि की तरह अपराध घोषित करने की गुहार लेकर पीड़ित महिला सुप्रीम कोर्ट पहुँची [याचिका पढ़े]
बहुविवाह, निकाह-हलाला को सती और मानव बलि की तरह अपराध घोषित करने की गुहार लेकर पीड़ित महिला सुप्रीम कोर्ट पहुँची [याचिका पढ़े]

बहुविवाह की पीड़ित एक एक्टिविस्ट और तीन बच्चों की माँ ने बहुविवाह और निकाह-हलाला को भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक घोषित करने और मुस्लिम निजी क़ानून (शरीयत) की धारा 2 को असंवैधानिक कर देने की मांग की है क्योंकि यह इस निर्दय प्रथा को वैधता प्रदान करता है।दक्षिण दिल्ली की रहने वाली 40 साल की समीना बेगम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। समीना ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि कैसे उसके पति ने तीन तलाक का सहारा लिया जब उसने अपने ऊपर हो रहे अत्याचार की बात उठाई और उसके दूसरे पति, जो पहले से ही...

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, केंद्र चुनावी सुधार की जरूरत से अवगत; कहा, यह एक सतत और लंबी प्रक्रिया है [जवाबी हलफ़नामा पढ़े]
केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, केंद्र चुनावी सुधार की जरूरत से अवगत; कहा, यह एक सतत और लंबी प्रक्रिया है [जवाबी हलफ़नामा पढ़े]

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को कहा कि उसके साथ साथ चुनाव आयोग भी चुनाव सुधारों की आवश्यकता और समय समय पर इससे जुड़े क़ानूनों में सुधार करने की जरूरत को समझता है।सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अश्विनी कुमार उपाध्याय की याचिका पर दायर अपने जवाबी हलफनामे में केंद्र ने उक्त बातें कही। इस याचिका में चुनाव सुधार के बारे में केंद्र और चुनाव आयोग को निर्देश देने की मांग की गई है। उपाध्याय ने गत वर्ष सितम्बर में जनहित याचिका दायर की थी और संसद, विधान सभाओं और स्थानीय चुनावों के लिए एक ही चुनाव सूची के प्रयोग के...

बॉम्बे HC ने पति के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसने वैवाहिक मामले में पत्नी पर अतिरिक्त-विवाह संबंधों के झूठे आरोप लगाए [निर्णय पढ़ें]
बॉम्बे HC ने पति के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया, जिसने वैवाहिक मामले में पत्नी पर अतिरिक्त-विवाह संबंधों के झूठे आरोप लगाए [निर्णय पढ़ें]

 बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में निर्देश दिया कि पुलिस जांच के दौरान झूठा साबित होने के बावजूद पति द्वारा अग्रिम जमानत याचिका पर अपनी पत्नी के खिलाफ झूठे आरोप लगाने पर कार्रवाई शुरु की जाए।जस्टिस ए.एस. गडकरी आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 192 (सरकारी कर्मचारियों के वैध प्राधिकार अवमानना के लिए मुकदमा चलाने) के साथ धारा 340 के तहत दायर एक अर्जी  सुन रहा था। यह अर्जी पत्नी के पिता अहमद कुरैशी ने दायर की थी जो कि मामले में पहले सूचनाकर्ता भी थे, जिसमें आरोप था कि उनकी बेटी दहेज के लिए परेशान थी।...

SC ने हलफनामा दाखिल किए बिना मामले की सुनवाई स्थगित कराने के लिए केरल सरकार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]
SC ने हलफनामा दाखिल किए बिना मामले की सुनवाई स्थगित कराने के लिए केरल सरकार पर 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने  हलफनामा दाखिल किए बिना मामले की सुनवाई कई बार  स्थगित कराने के लिए केरल सरकार पर  1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यायमूर्ति मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ केरल उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य की अपील पर विचार कर रही है जिसमें राज्य द्वारा राज्य में सीबीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर पारित आदेशों के संबंध में स्कूलों के पक्ष में फैसला सुनाया था।दिसंबर 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य से निम्नलिखित को स्पष्ट करने के लिए एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था:...

कोर्ट वकीलों के मौखिक आश्वासन पर पक्षकारों को पंचाट के पास नहीं भेज सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कोर्ट वकीलों के मौखिक आश्वासन पर पक्षकारों को पंचाट के पास नहीं भेज सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने केएसईबी बनाम कुरियन ई कलाथिल  मामले में कहा कि मध्यस्थता समझौता की अनुपस्थिति में कोर्ट पक्षकारों को पंचाट में जाने को तभी कह सकता है जब पक्षकार इसके लिए लिखित में अपनी सहमति दें या इस बारे में संयुक्त अपील या आवेदन दें। उनके वकीलों की मौखिक सहमति पर ऐसा नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और आर बनुमथी की पीठ ने केएसईबी की एक अपील पर गौर करते हुए यह बात कही। इस अपील में हाई कोर्ट में उठे इस सवाल को चुनौती दी गई कि क्या पक्षकारों को उनकी लिखित सहमति के बिना वकीलों की मौखिक...

कुछ बेईमान मुकदमेबाज और अनैतिक वकील पूरी न्यायिक प्रणाली को बदनाम करते हैं : बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुकदमेबाज पर लगाया दस लाख का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]
कुछ बेईमान मुकदमेबाज और अनैतिक वकील पूरी न्यायिक प्रणाली को बदनाम करते हैं : बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुकदमेबाज पर लगाया दस लाख का जुर्माना [निर्णय पढ़ें]

यह परेशानी ध्यान देने वाली है कि ऐसे अधिवक्ताओं ने अपने ग्राहकों को अनैतिक दुविधाओं की सुविधा प्रदान की है, जो अक्सर अपने ग्राहकों की बेईमान प्रथाओं को प्रोत्साहित करती है, जिससे न्यायपालिका को गंभीर तनाव हो जाता है और दुर्भाग्य से पूरी न्यायिक प्रणाली के लिए बदनामी लाता है, अदालत ने कहा।इस समय न्यायपालिका बहुत ही गंभीर प्रकृति की चुनौतियों में फंसी हुई है, शायद पहले कभी नहीं, ये कहते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट  ने टिप्पणी की कि कुछ याचिकाकर्ता और उनके वकील कोर्ट में झूठे और गलत बयानों को दाखिल करने...

पद्मश्री लालजी की मृत्य के बाद एडवोकेट ने हवाईअड्डों पर चिकित्सा सुविधा को लेकर नागर विमानन मंत्रालय को भेजा नोटिस
पद्मश्री लालजी की मृत्य के बाद एडवोकेट ने हवाईअड्डों पर चिकित्सा सुविधा को लेकर नागर विमानन मंत्रालय को भेजा नोटिस

पद्मश्री लालजी सिंह के बेटे द्वारा लिखे गए पत्र के बाद एक एडवोकेट ने नागर विमानन मंत्रालय के उपसचिव को कानूनी नोटिस भेजकर देश के सभी हवाईअड्डों पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है। लालजी सिंह देश में “डीएनए फिंगरप्रिंटिंग के जनक” कहे जाते हैं और उत्तर प्रदेश के एक हवाईअड्डे पर उनको दिल का दौरा पड़ा जिससे उनकी मौत हो गई।एडवोकेट गुरमीत सिंह ने यह नोटिस टीएन द्विवेदी को भेजा है जिसमें उन्होंने हवाईअड्डों पर चिकित्सा सुविधा नहीं होने की बात का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा पूछा है कि हवाईअड्डों...

कोट और गाउन के साथ लगेज गुम करने के दोषी एयर इंडिया से उपभोक्ता अदालत ने वकीलों को दिलाया 2-2 लाख का मुआवजा [आर्डर पढ़े]
कोट और गाउन के साथ लगेज गुम करने के दोषी एयर इंडिया से उपभोक्ता अदालत ने वकीलों को दिलाया 2-2 लाख का मुआवजा [आर्डर पढ़े]

पश्चिम बंगाल उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एयर इंडिया को उन दो वकीलों में से प्रत्येक को 2-2 लाख रुपए का मुआवजा देने का निर्देश दिया जिनके कोट और गाउन व अन्य जरूरी फाइलों वाला उनका लगेज उनको नहीं मिला। इस वजह से वे सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दिन पेश नहीं हो पाए।दिबाकर भट्टाचार्जी और संजोय पंडित ने पश्चिम बंगाल उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया और एयर इंडिया के खिलाफ शिकायत की जिसने उनका वह लगेज गुम कर दिया जिसमें उनके गाउन और कोट एवं मामले से जुड़ी जरूरी फाइलें थीं। ये लोग एयर इंडिया...

माता-पिता की शादी को भंग करने पर 10 वर्षीय लड़के ने SC पीठ को ‘धन्यवाद नोट’ सौंपा [निर्णय पढ़ें]
माता-पिता की शादी को भंग करने पर 10 वर्षीय लड़के ने SC पीठ को ‘धन्यवाद नोट’ सौंपा [निर्णय पढ़ें]

20 फरवरी को वैवाहिक विवाद से संबंधित अपील का निपटारा कर रही न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति मोहन एम.शांतनगौदर की सुप्रीम कोर्ट की पीठ के सामने एक दस वर्षीय लड़का पहुंचा। ये लड़का उस दंपति  के बच्चों में से एक था जो वैवाहिक मुकदमे लड रहा था। मध्यस्थता प्रयासों में असफल होने के बाद बेंच ने दोनों के बीच शादी के विघटन का आदेश दिया था। तब लड़के ने बेंच को एक हस्तलिखित नोट सौंपा जिसमें लिखा था,: "ईश्वर के पास हमेशा तुम्हारे लिए कुछ है: हर समस्या के लिए एक कुंजी, हर छाया के लिए एक प्रकाश,...

चेक बाउंस मामलों में सम्मन भेजने में ईमेल या टेक्स्ट मैसेज के प्रयोग को गुजरात हाई कोर्ट दे रहा है प्रोत्साहन [निर्णय पढ़ें]
चेक बाउंस मामलों में सम्मन भेजने में ईमेल या टेक्स्ट मैसेज के प्रयोग को गुजरात हाई कोर्ट दे रहा है प्रोत्साहन [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर अमल करते हुए चेकों के बाउंस होने के मामले को शीघ्रता से निपटाने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने हाल में निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे आरोपी को धन की राशि सीधे शिकायतकर्ता के खाते में डालने की अनुमति दें और कोर्ट को इसकी जानकारी ईमेल के माध्यम से दें।कोर्ट राकेश सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। इस याचिका में वडोदरा के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती दी गई जिसमें आरोपी को बरी कर दिया गया था जिस पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट,...

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 17 जजों को स्थाई नियुक्ति मिली; कलकाता हाई कोर्ट में 3 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 17 जजों को स्थाई नियुक्ति मिली; कलकाता हाई कोर्ट में 3 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति

बुधवार को एक नोटिस जारी कर केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 17 जजों की नियुक्ति स्थाई कर दी. ये सभी 17 जजों के नाम निम्नलिखित हैं: अतुल श्रीधरन सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी  विवेक रसिया आनंद पाठक जगदीश प्रसाद गुप्ता अनुराग कुमार श्रीवास्तव   हौसला प्रसाद सिंह  अशोक कुमार जोशी विवेक अग्रवाल नंदिता दूबे राजीव कुमार दूबे  अंजुली पालो  वीरेंदर सिंह  सुनील कुमार अवस्थी विजय कुमार शुक्ल   गुरपाल सिंह अहलुवालिया  सुबोध अभयंकरएक अन्य अधिसूचना कलकत्ता हाई कोर्ट में दो सालों के लिए तीन अतरिक्त जजों...

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो उच्च न्यायालयों के लिए 5 अतिरिक्त जजों की स्थाई नियुक्ति की अनुशंसा की
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने दो उच्च न्यायालयों के लिए 5 अतिरिक्त जजों की स्थाई नियुक्ति की अनुशंसा की

सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में चार अतिरिक्त जजों की स्थाई रूप से नियुक्ति की अनुशंसा की है।वृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता में कॉलेजियम की बैठक में इसके अन्य सदस्य न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने भी शिरकत की और कॉलेजियम ने निम्नलिखित चार जजों की स्थाई नियुक्त की अनुशंसा की - न्यायमूर्ति अशोक कुमार न्यायमूर्ति विवेक चौधरी न्यायमूर्ति सुमित्रा दयाल सिंह और न्यायमूर्ति अखिलेश चन्द्र शर्माकॉलेजियम ने मणिपुर...

मुख्यपोर्ट ट्रस्ट अधिनियम की व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच में भेजा [निर्णय पढ़े]
मुख्यपोर्ट ट्रस्ट अधिनियम की व्याख्या: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बड़ी बेंच में भेजा [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यपोर्ट ट्रस्ट अधिनियम की व्याख्या के संदर्भ में एक बड़ी बेंच के पास निम्नलिखित मुद्दों को भेजा है: एमपीटी अधिनियम की धारा 2 (ओ) के प्रावधान की व्याख्या में, माल के टाइटल का प्रश्न और उस समय के बिंदु जिस पर धन प्रेषक गुजरता है, वहपोर्ट ट्रस्ट को दिए जाने वाले शुल्कों के संबंध में सामान अनुज्ञप्ति या स्टीमर एजेंट की देनदारी को निर्धारित करने के लिए प्रासंगिक है ; क्या किसी उपभोक्ता या स्टीमर एजेंट पर पोर्ट ट्रस्ट की वजह सेमाल के संबंध में अपनी सेवाओं के लिए, माल के बिल को...

मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को स्‍वीकृति दी
मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को स्‍वीकृति दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मध्‍यस्‍थता और सुलह (संशोधन) विधयेक, 2018 को लोकसभा में पेश करने की स्‍वीकृति दे दी है। यह विवादों के समाधान के लिए संस्‍थागत मध्‍यस्‍थता को प्रोत्‍साहित करने के सरकार के प्रयास का हिस्‍सा है और यह भारत को मजबूत वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) व्‍यवस्‍था का केंद्र बनाता है।इस क़ानून के लाभ :1996 के अधिनियम में संशोधन से मानक तय करने, मध्‍यस्‍थता प्रक्रिया को पक्षकार-सहज बनाने और मामले को समय से निष्‍पादित करने के लिए एक स्‍वतंत्र...

दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को मिलेगा 2017 का नारी शक्ति पुरस्कार
दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल को मिलेगा 2017 का नारी शक्ति पुरस्कार

दिल्ली हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गीता मित्तल को महिला और बाल विकास मंत्रालय की ओर से वर्ष 2017 का नारी शक्ति पुरस्कार दिया जाएगा।इस पुरस्कार को भारत में महिलाओं को मिलने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान माना जाता है। यह पुरस्कार 8 मार्च को मित्तल सहित 30 महिलाओं को दिया जाएगा।न्यायमूर्ति मित्तल को दिल्ली हाई कोर्ट में 2004 में अतिरिक्त जज नियुक्त किया गया था और 2006 में उनको स्थाई कर दिया गया। इसके बाद न्यायमूर्ति जी रोहिणी से उन्होंने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार...

सुप्रीम कोर्ट ने छह साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के अभियुक्त की फांसी की सजा पर रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने छह साल की लड़की के साथ रेप और हत्या के अभियुक्त की फांसी की सजा पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने छह साल की लड़की के साथ बलात्कार करने के बाद उसकी हत्या के दोषी एक व्यक्ति की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है।छोटकू नामक इस व्यक्ति को निचली अदालत ने छह साल की एक लड़की के साथ बलात्कार के बाद उसकी हत्या करने का दोषी पाया था और उसको फांसी की सजा सुनाई थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने उसकी सजा को सही ठहराया था।उसकी फांसी की सजा की पुष्टि करते हुए पीठ ने कहा था, “...छह साल की एक लड़की के साथ बलात्कार तक ही उसकी नृशंसता सीमित नहीं रही और उसने उसकी हत्या...

पति या पत्नी द्वारा एक दूसरे पर अवैध संबंध होने के निराधार आरोप लगाना सबसे गंभीर किस्म की मानसिक क्रूरता : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पति या पत्नी द्वारा एक दूसरे पर अवैध संबंध होने के निराधार आरोप लगाना सबसे गंभीर किस्म की मानसिक क्रूरता : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में पारिवारिक न्यायाधीश के उस फैसले को सही ठहराया जिसमें उन्होंने एक पति को तलाक की अनुमति यह कहते हुए दी थी कि उसके खिलाफ कथित अवैध संबंधों के जो आरोप लगे थे वे उसके प्रति क्रूरता की तरह है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और दीपा शर्मा की पीठ ने कहा, “हमने पाया है कि इस तरह के अवैध संबंधों के झूठे आरोप जो इतने बड़े पैमाने पर लगाए गए, उससे पति को मानसिक पीड़ा हुई। इस तरह के आरोप संबंधों में व्यापक और स्थाई दरार उत्पन्न करता है और यह काफी गहरी पीड़ा देती है और यह आशंका पैदा...

केरल हाई कोर्ट ने कहा, मक्कथायम क़ानून के मुताबिक़, मृतक की बेटी को न कि उसके भाई को मिलेगी उसकी स्व-अर्जित संपत्ति [निर्णय पढ़ें]
केरल हाई कोर्ट ने कहा, मक्कथायम क़ानून के मुताबिक़, मृतक की बेटी को न कि उसके भाई को मिलेगी उसकी स्व-अर्जित संपत्ति [निर्णय पढ़ें]

केरल हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को दरकिनार करते हुए कहा कि मक्कथायम क़ानून के मुताबिक़ किसी व्यक्ति की खुद की अर्जित संपत्ति उसके मरने पर उसकी बेटियों को मिलेगी न कि उसके भाइयों को। खंडपीठ ने कहा कि बेटियों को संपत्ति का उत्तराधिकारी बनने का हक़ है।विवाद एक मृतक के तीन भाइयों के बीच सरकार द्वारा अधिग्रहीत 115 वर्ग फुट जमीन के मुआवजे को लेकर है। यह जमीन उस एक एकड़ जमीन का हिस्सा है जो तीन भाइयों ने खरीदी थी जो कि पूर्व कालीकट के थिय्या (पिछड़ी जाति के) भी रह चुके हैं। एक भाई के सिर्फ...