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देखो लेकिन रिपोर्टिंग मत करो : सोहराबुद्दीन मुठभेड़ केस के जज ने मीडिया पर रोक लगाई

LiveLaw News Network
30 Nov 2017 4:41 AM GMT
देखो लेकिन रिपोर्टिंग मत करो : सोहराबुद्दीन मुठभेड़ केस के जज ने मीडिया पर रोक लगाई
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सोहराबुद्दीन शेख और तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी  मुठभेड़ की सुनवाई कर रहे सीबीआई के विशेष जज एस जे शर्मा ने सख्त कदम उठाते हुए मीडिया को निर्देश दिए हैं कि वो कोर्ट की कार्रवाई की रिपोर्टिंग ना करे। हालांकि अदालती कार्रवाई के दौरान मीडियाकर्मी कोर्ट में मौजूद रह सकते हैं लेकिन उसकी रिपोर्टिंग नहीं कर सकते।

बुधवार को ये आदेश उस वक्त दिए गए जब बचाव पक्ष ने इन कैमरा कार्रवाई की मांग की जिसमें मीडियाकर्मी कोर्ट रूम में भी मौजूद नहीं रह सकते। लेकिन जज शर्मा ने पत्रकारों को मौजूद रहने की इजाजत दे दी हालांकि रिपोर्टिंग को प्रतिबंधित कर दिया।

बचाव पक्ष के वकील वहाब खान ने इन कैमरा के लिए जज बी एच लोया की मौत पर मीडिया की खबरों को आधार बनाया।

क्या है केस ?

2005 में सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी को गुजरात पुलिस ने हैदराबाद से अगवा किया। आरोप लगाया गया कि दोनों को फर्जी मुठभेड़ में मार डाला गया। शेख के साथी तुलसीराम प्रजापति को भी 2006 में गुजरात पुलिस द्वारा मार डाला गया। उसे सोहराबुद्दीन मुठभेड़ का गवाह माना जा रहा था।

2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल को महाराष्ट्र में ट्रांसफर कर दिया और 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रजापति और शेख के केस को एक साथ जोड दिया।

शुरुआत में जज जेटी उत्पत केस की सुनवाई कर रहे थे लेकिन आरोपी अमित शाह के पेश ना होने पर नाराजगी जाहिर करने पर अचानक उनका तबादला कर दिया गया। फिर केस की सुनवाई जज बी एच लोया ने की।

अब सीबीआई के पूर्व जज लोया की संदिग्ध मौत  की खबर कारवां में आने के बाद मीडिया में कई खबरें प्रकाशित की गई हैं। इनमें से एक खबर द इंडियन एक्सप्रेस में जस्टिस बीआर गवई के हवाले से छपी है जिसमें लोया के परिवार के दावों का खंडन किया गया है कि उनका शव बिना किसी के साथ लातूर भेजा गया और उन्होंने कहा कि दो अन्य जज शव के साथ गए थे। जस्टिस गवई ने ये भी कहा कि चीफ जस्टिस मोहित शाह को लोया के बारे में जानकारी दी गई और वो भी अस्पताल पहुंचे।

लोया के बाद केस की सुनवाई करने वाले जज एस के शर्मा बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह, राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया, व्यवसायी विमल पाटनी, गुजरात पुलिस के पूर्व मुखिया पीसी पांडे, अतिरिक्त डीजीपी गीता जौहरी, IPS अफसर राजकुमार पांडियान, डीजी वंजारा, एन बालासुब्रमण्यम ( आंध्र काडर), दिनेश एमएन ( राजस्थान काडर) और गुजरात पुलिस के अफसर अभय चुडास्मा व एनके अमीन को पहले ही आरोपमुक्त कर चुके हैं।

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