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नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने पक्षकारों से “चिल” करने को नहीं कहा

LiveLaw News Network
28 Nov 2017 4:36 AM GMT
नहीं, दिल्ली हाई कोर्ट ने पक्षकारों से “चिल” करने को नहीं कहा
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हर ओर इस खबर की चर्चा थी कि दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले के पक्षकारों से “चिल करो” कहा। मेरा सोशल मीडिया टाइमलाइन फैसले की स्क्रीन शॉट से भरा हुआ था और लोग इस खुशी का इजहार कर रहे थे कि चलो, दिल्ली हाई कोर्ट ने अंततः यह बात कह तो दी।

पर बाद में मालूम हुआ कि जिस बात के लिए दिल्ली हाई कोर्ट की प्रशंसा की जा रही है उसे अमरीका की कोर्ट ऑफ़ अपील्स की ओर से कहा गया है।

चलिए, मैं बताता हूँ आपको इसके बारे में।

हुआ यूं कि खिलौना बनाने वाली एक कंपनी मैटेल इंक ने एक डेनिश बैंड एक्वा के खिलाफ अमरीकी अदालत का दरवाजा खटखटाया। इस शिकायत की जड़ में था बैंड का 1997 का एक पॉप गीत बार्बी गर्ल। कंपनी ने उस समय दावा किया था कि इस गाने में बार्बी का नाम उसके ट्रेडमार्क पर पाबंदी लगाता है और उसको महत्त्वहीन करार देता है। उसने  दलील दी कि यह गाना उस मार्क को बदनाम करता है और आरोप लगाया कि इस गाने के बोल कम उम्र की युवतियों के लिए अनुचित हैं।

तीन जजों की बेंच के लिए अपना फैसला लिखते हुए जज कोज़िन्सकी ने हालांकि मैटेल की बात को खारिज कर दिया। उसने कहा कि गाने में इस मार्क का प्रयोग ट्रेड मार्क डाइल्यूशन एक्ट के अधीन गैरवाणिज्यिक उपयोग पर मिलने वाली छूट के तहत आता है।



अपने फैसले में कोर्ट ने इस मामले की पांच साल तक चली सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से कही गई भली-बुरी बातों को भी नोट किया। कोर्ट ने कहा,

“उसने बाद में गाने को दूसरी कंपनी की संपत्ति का “चोरी” बताया। यह न तो अपराध को कम करता है और न ही यह इसको कानूनी बनाता है। यह तो वैसा ही है कि बैंक लूटनेवाला लूट के दौरान बैंक कर्मचारी को एक माफीनामा पकड़ा दे। जब एमसीए के प्रवक्ता ने इस ओर ध्यान दिलाया कि हर एल्बम में एक डिसक्लेमर है जिसमें कहा गया है कि बार्बी गर्ल एक “सामाजिक टिपण्णी” है जिसे डॉल को बनाने वाली कंपनी ने न तो बनाया है और न ही इसे अनुमोदित किया है, मैटेल के एक प्रतिनिधि ने कहा कि “यह स्वीकार्य नहीं है। जब मैटेल ने मुकदमा दायर किया, मैटेल और एमसीए के कर्मचारियों ने मीडिया में एक दूसरे पर खुलेआम आरोप लगाए।”

इस तरह के आपसी बर्तावों के खिलाफ प्रतिवादी कंपनी ने मैटेल पर प्रतिदावा भी दायर किया। कोर्ट ने हालांकि इसे ऐसा बयान बताया जिस पर कोई कारर्वाई नहीं की जा सकती और दोनों ही पक्षों को सलीके से पेश आने की नसीहत दी।

कोर्ट ने इसके बाद अपने फैसले में कहा, “पार्टियों को सलाह दी जाती है ­­– चिल करो”।

अब, दिल्ली हाई कोर्ट ने सिर्फ अमरीकी कोर्ट के इस फैसले का जिक्र किया जब मैटेल ने एक आनेवाली फिल्म “तेरा इंतज़ार” के गाने ’बार्बी गर्ल’ को लेकर इसी तरह की राहत के लिए उसका दरवाजा खटखटाया। दिल्ली हाई कोर्ट ने अपनी बात को कुछ इस तरह से बाद की पंक्तियों में स्पष्ट किया :

 “पक्षकारों को सलाह दी जाती है कि वे चिल करें। अमरीकी अपील कोर्ट द्वारा वादी मैटेल इंक को एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट की इस अस्वाभाविक सलाह के बावजूद मैटेल इंक ने अब यही मामला इस कोर्ट में भी अपनी भारतीय सहयोगी मैटेल टॉयज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड, के साथ मिलकर उठाया है। इस बार यह मामला एक हिंदी फिल्म “तेरा इंतजार” के निर्माता के खिलाफ दायर किया है। यह फिल्म 24 नवंबर 2017 को रिलीज होने वाली है।”

हाई कोर्ट ने अपने फैसले के 17वें पैरे में कहा :

“वादी नंबर 1 मैटेल इंक ने अमरीकी अदालत के समक्ष कहा कि गाना “लेट’स गो पार्टी” कम उम्र की युवतियों के लिए अनुपयुक्त है। हालांकि वादी नंबर 1 मैटेल इंक को जो सलाह दी गई वह थी “चिल करो”।

सो, यद्यपि कोर्ट के किसी फैसले के बारे में अपने यहाँ दिलचस्पी कम ही देखी जाती है, इसे दुर्भाग्य ही कह सकते हैं कि जो उत्साह दिखा वह किसी और कारणों से था।

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