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बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना [आर्डर पढ़े]

LiveLaw News Network
28 Nov 2017 3:38 PM GMT
बॉम्बे हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 50 हजार रुपये का जुर्माना [आर्डर पढ़े]
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बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। याचिकाकर्ता ने चिंचपोकली, मुबंई में पान बीडी की दुकान खरीद रखी है। कोर्ट ने कहा कि 2.20 लाख रुपये की सालाना आय के बावजूद याचिकाकर्ता ने अपनी सही मंशा साबित करने के लिए 50 हजार रुपये जमा करने की बात कर दी जो हैरानी पैदा करता है।

हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मंजूला चेल्लुर और जस्टिस एमएस सोनक की बेंच ने याचिकाकर्ता की उस अर्जी को खारिज कर दिया जिसमें उसने मझगांव में डेवलपर्स द्वारा प्लॉट को दोबारा डेवलप करने के मामले में हुए फ्रॉड की जांच स्पेशल टास्क फोर्स से कराने की बात कही थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर जुर्माना लगाते हुए उसे निर्देश दिया कि वह विधिक सेवा प्राधिकरण के सामने जुर्माने की यह रकम जमा करे।

याचिकाकर्ता की अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याची के वकील से पूछा कि वह कहां रहता है।  जब कोर्ट को बताया गया कि याची उस प्लॉट से 500 मीटर की दूरी पर रहता है, कोर्ट ने कहा कि 20 मंजिला मकान बना है और पीआईएल फाइल करने में देरी क्यों हुई। कोर्ट ने आर एंड एम बनाम कोर मंगला रेजिडेंट्स विजिलेंस ग्रुप व अन्य के वाद का हवाला दिया जिसमें कहा गया कि पीआईएल दाखिल करने में देरी घातक है। याचिकाकर्ता ने कहा कि उसकी पान बीडी की दुकान है और आय 1.20 लाख रुपए है और पत्नी की आय एक लाख रुपए है और इस तरह दोनों की आय से घर का खर्चा निकलता है। ऐसे में 50 हजार का ऑफर सही नहीं लगता है और यह हैरानी पैदा करता है।

अदालत ने कहा कि मौजूदा मामले में इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि किसी निजी छद्म बिल्डर ने यह याचिका दायर करवाई हो ताकी वसूली की जा सके। अदालत ने कहा कि हम इस बात से संतुष्ट नहीं हैं कि लोकहित  की मंशा इसके पीछे है। ऐसे में याचिका खारिज की जाती है और याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाता है।


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