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पूर्व CJI के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जनहित याचिका पर SC में सुनवाई बंद, NGO ने याचिका वापस ली
पूर्व CJI के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जनहित याचिका पर SC में सुनवाई बंद, NGO ने याचिका वापस ली

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस एम शांतनागौदर की बेंच ने पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया जस्टिस के जी बालाकृष्णन के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति की जांच वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। गैर सरकारी संगठन कॉमन कॉज की इस याचिका को वापस लेने के लिए खारिज किया गया और उचित उपचार के लिए छूट दे दी गई।इस जनहित याचिका में केंद्र सरकार को तत्कालीन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस के जी बालाकृष्णन के खिलाफ जांच के लिए दिए गए दस मई 2012 के आदेश का पालन करने के निर्देश देने की मांग की गई...

खुली जेल : SC ने केंद्र को राजस्थान मॉडल पर राज्यों से बैठक करने और यूनिफार्म गाइडलाइन बनाने को कहा
खुली जेल : SC ने केंद्र को राजस्थान मॉडल पर राज्यों से बैठक करने और यूनिफार्म गाइडलाइन बनाने को कहा

एक महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की बेंच ने जेल रिफॉर्म्स  लेकर केंद्र सरकार और राज्य सरकार को राजस्थान मॉडल की तर्ज पर खुली जेल बनाने पर विचार करने को कहा है।एमिक्स क्यूरी गौरव अग्रवाल ने कोर्ट में अर्जी दाखिल कर खुली जेल को लेकर राजस्थान मॉडल को अपनाने और देश के हर जिले में एक खुली जेल बनाए जाने की वकालत की है।सुप्रीम कोर्ट ने एक्टिविस्ट एवं शोधकर्ता स्मिता चक्रवर्ती द्वारा राजस्थान की खुली जेल पर दाखिल रिपोर्ट को देखते हुए केंद्र सरकार को कोई...

सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अभियुक्त के हिरासत की अवधि बताने के लिए ‘फर्स्ट लिस्टिंग’ के प्रोफोर्मा में संशोधन किया [परिपत्र पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने अभियुक्त के हिरासत की अवधि बताने के लिए ‘फर्स्ट लिस्टिंग’ के प्रोफोर्मा में संशोधन किया [परिपत्र पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने फर्स्ट लिस्टिंग के प्रोफोर्मा में संशोधन किया है और इसके लिए निर्देश उत्तर प्रदेश बनाम मुन्ना @दीवाना मामले में फैसले के तहत आया।उपरोक्त आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश देकर यह सुनिश्चित करने को कहा कि जिन मामलों में लोगों को बरी किए जाते हैं और जितने भी मामले दायर किए जाते हैं उन सबको पंजीकृत करने के दौरान उनमें यह जरूर दर्शाया जाए कि अभियुक्त को कितने दिनों तक हिरासत में रखा गया।अब इस प्रोफोर्मा के कॉलम 7(e) को इस तरीके से पढ़ा जाता है : “सजा की भोगी गई...

निदेशक के खिलाफ यौन शोषण के आरोप के आधार पर सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को तकनीकी स्तर पर रद्द करना अनुचित : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
निदेशक के खिलाफ यौन शोषण के आरोप के आधार पर सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को तकनीकी स्तर पर रद्द करना अनुचित : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा सिक्यूरिटी सर्विसेज की निविदा को रद्द करना अनुचित है। विश्वविद्यालय ने इसके पीछे तर्क यह दिया था कि कंपनी के निदेशक के खिलाफ यौन शोषण का आरोप है और ऐसा करते हुए दूसरे पक्ष को अपनी बात कहने का मौक़ा नहीं दिया।न्यायमूर्ति एस रवीन्द्र भट और न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने इस बारे में सर्वेश सिक्यूरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड की ओर से दायर याचिका की सुनवाई करते हुए उक्त बातें कही। यह कंपनी सुप्रीम कोर्ट सहित विभिन्न सरकारी और...

कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर एक आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समझौते के अनुसार ये मामले विशिष्ट रूप से नोएडा के न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा, “जब यह कहा जाता है कि किसी मामले को नोएडा/दिल्ली के न्यायालयों में निपटाया जाएगा तो ऐसा सिर्फ विभिन्न पक्षों की सुविधा के लिए किया जाता है। इससे यह मामला दिल्ली के न्यायालयों के अधिकारक्षेत्र में नहीं आ जाता। इस प्रकार इस मामले की सुनवाई का...

मध्यस्थता रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसमें सिर्फ एक ही वाक्य होना चाहिए : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]
मध्यस्थता रिपोर्ट की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इसमें सिर्फ एक ही वाक्य होना चाहिए : दिल्ली हाई कोर्ट [आर्डर पढ़े]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को कहा कि कार्यवाही की गोपनीयता बनाए रखने के लिए मध्यस्थता रिपोर्ट में एक वाक्य के अलावा कुछ और शामिल नहीं होना चाहिए।न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति योगेश खन्ना की पीठ ने कहा कि मध्यस्थता के विफल होने के कारण एक ऐसी न्यायिक प्रक्रिया सामने आती है जिसमें सभी पक्षों को क़ानून के तहत उपलब्ध हर तरह के मंतव्यों को अपनाने की छूट होती है।अदालत श्रीमती स्मृति मदन कानसाग्रा द्वारा दायर की गई एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उस याचिका के द्वारा वह यह जानना...

‘जनगण मन’ की तरह ‘वन्दे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण नहीं देने के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]
‘जनगण मन’ की तरह ‘वन्दे मातरम्’ को कानूनी संरक्षण नहीं देने के दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ विशेष अनुमति याचिका खारिज कर दी। इस याचिका में ‘वन्दे मातरम्’ के लिए भी उसी कानूनी संरक्षण की मांग की गई थी जो ‘जनगण मन’ को प्राप्त है।मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति एम खान्विलकर, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने वरिष्ठ वकील प्रवीण एचपी पारेख की दलील सुनने के बाद इस याचिका को खारिज कर दिया।दिल्ली हाई कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरिशंकर की पीठ ने गौतम मोरारका द्वारा दायर उस याचिका को...

पूर्व पत्नी पति की  रिलेटिव नहीं और उसे आईपीसी की धारा 498ए के तहत दंडित नहीं किया जा सकता : गुजरात हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पूर्व पत्नी पति की रिलेटिव नहीं और उसे आईपीसी की धारा 498ए के तहत दंडित नहीं किया जा सकता : गुजरात हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

गुजरात हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की पूर्व पत्नी के खिलाफ एक  मामले को निरस्त कर दिया जिसमें इस व्यक्ति की वर्तमान पत्नी ने आईपीसी की धारा 498ए के अंतर्गत उसके व एक अन्य आरोपी के खिलाफ आपराधिक मामला दायर किया था। शिकायतकर्ता पत्नी ने आरोप लगाया था कि उससे शादी करने के बाद उसका पति अपनी तलाकशुदा पत्नी के पास चला गया। उसने अपनी शिकायत में अपने पति और उसकी पूर्व पत्नी को भी आरोपी बनाया था।जज न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला ने कहा कि अगर यह मान भी लिया जाए कि पति अपनी पहली पत्नी के पास चला गया, चूंकि शादी...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परीक्षाओं में कोर्ट की दखलंदाजी दुर्भाग्यपूर्ण; मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, परीक्षाओं में कोर्ट की दखलंदाजी दुर्भाग्यपूर्ण; मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मदन बी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा 2009 में आयोजित भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी पर गहरा अफ़सोस जाहिर किया और और इसे दूर करने के लिए मध्य मार्ग अपनाने का सुझाव दिया है।मामले का सिलसिलेबार ब्योरा   जून 2010:लिखित परीक्षा का परिणाम घोषित जिसमें 36000 छात्रों ने भाग लिया था। सितंबर 2010:संयुक्त (लिखित और साक्षात्कार) परीक्षा परिणाम घोषित। 2010-2011: असफल उम्मीदवारों ने रिट याचिका दायर की जिसे इलाहाबाद हाई कोर्ट की...

मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने पर दिल्ली हाई कोर्ट नाराज [आर्डर पढ़े]
मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम का उल्लंघन करते हुए 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने पर दिल्ली हाई कोर्ट नाराज [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने कुछ दिन पहले 72 वर्षीय बुजुर्ग को हिरासत में रखने का निर्देश देने के लिए मजिस्ट्रेट और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की कड़ी आलोचना की। बुजुर्ग राम कुमार को इन्स्टीच्यूट ऑफ़ ह्यूमन बिहेविअर एंड अलाइड साइंसेज (इहबास) ने मानसिक स्वास्थय अधिनियम 1987 को ताक पर रखते हुए उनको बंदी बनाकर रखने का आदेश दिया था।कुमार पिछले 10 सालों से अधिक समय से मोटर वाहन दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल, रोहिणी में एक दावे के मामले में एक पक्षकार के रूप में केस लड़ रहे हैं। कुमार के मिनीबस से दुर्घटना हो...

पीड़ित के SC/ST होने की जानकारी होना ही आरोपी के खिलाफ SC/ST के मुकदमे के लिए पर्याप्त: SC [निर्णय पढ़ें]
पीड़ित के SC/ST होने की जानकारी होना ही आरोपी के खिलाफ SC/ST के मुकदमे के लिए पर्याप्त: SC [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने अशर्फी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले की सुनवाई में कहा है कि 2016 में  अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निरोधक) अधिनियम में संशोधन के बाद आरोपी को सिर्फ ये जानकारी होने से ही कि पीडित समुदाय से संबंधित है,धारा 3(2)(v) के तहत उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।सुप्रीम कोर्ट रेप केस में ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट द्वारा दोषी करार जाने के खिलाफ एक शख्स की अपील पर सुनवाई कर रहा था। चूंकि पीडिता  अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति से संबंधित थी इसलिए उसे अनुसूचित जाति...

व्यावसायिक विवादों को संस्थागत मध्यस्थता से सुलझाने के पक्ष में हैं मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा
व्यावसायिक विवादों को संस्थागत मध्यस्थता से सुलझाने के पक्ष में हैं मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का कहना है कि व्यावसायिक विवादों को संस्थागत मध्यस्थता से सुलझाया जाए। वे देश में इस तरह के विवादों को तात्कालिक रूप से सुलझाने के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट इस मध्यस्थता में न्यूनतम हस्तक्षेप करता है और वे चाहते हैं कि मध्यस्थ ज्यादा से ज्यादा मामलों को निपटाएं।विवाद सुलझाने के एक वैकल्पिक तरीके और कम खर्चीली मध्यस्थता का समर्थन करते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि इससे देश की आर्थिक प्रगति को मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि तदर्थ मध्यस्थता का रास्ता नहीं अपनाना...

अगर कोई अनजान व्यक्ति लिफ्ट लेने के बाद उस वाहन को चुरा लेता है तो इससे बीमा पॉलिसी का मौलिक उल्लंघन नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर कोई अनजान व्यक्ति लिफ्ट लेने के बाद उस वाहन को चुरा लेता है तो इससे बीमा पॉलिसी का मौलिक उल्लंघन नहीं होता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि अगर कोई अनजान व्यक्ति जिसको लिफ्ट दिया जाता है बाद में उस गाड़ी को चुरा लेता है तो यह बीमा पॉलिसी का उल्लंघन नहीं है और इसकी वजह से किसी वाहन की बीमा पॉलिसी को कैंसिल नहीं किया जा सकता।कोर्ट मंजीत सिंह की अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। मंजीत सिंह के पास एक ट्रक था जिसकी चोरी हो गई। जब यह घटना हुई, इस ट्रक को कोई और चला रहा था, और इस व्यक्ति ने कुछ लोगों को लिफ्ट दिया। इन अनजान लोगों ने बाद में ड्राईवर को मारा पीटा और फिर ट्रक लेकर फरार हो गए।बीमा कंपनी ने...

सिर्फ खाली सीट भरने के लिए विशेष श्रेणी के लिए कट ऑफ अंक कम नहीं किए जा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
सिर्फ खाली सीट भरने के लिए विशेष श्रेणी के लिए कट ऑफ अंक कम नहीं किए जा सकते: इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

क्या विशेष श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए निर्धारित सीटों का कोटा भरने के लिए कट ऑफ अंक कम किए जा सकते हैं क्योंकि पर्याप्त संख्या में छात्र लिखित परिक्षा पास नहीं हो पाए?इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस प्रश्न का उत्तर ना में दिया है।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ का मानना ​​था कि महज विशेष श्रेणी के लिए आरक्षित सीटों को भरने के लिए कट ऑफ अंक कम नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि एक बार जब छात्र चयन की एक ख़ास प्रक्रिया को स्वीकार कर लेते हैं तो वह चयनित नहीं होने पर उसको चुनौती नहीं दे सकते।अदालत ने एक शख्स...

CAT और NCDRC में घटती क्षमता : सुप्रीम कोर्ट ने AG से रिक्तियों को भरने के लिए निर्देश लाने को कहा
CAT और NCDRC में घटती क्षमता : सुप्रीम कोर्ट ने AG से रिक्तियों को भरने के लिए निर्देश लाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल को सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल और नेशनल कंज्यूमर डिस्पयूट रिड्रेसल कमीशन  में रिक्त पदों को भरने के लिए क्या योजना है, इसके लिए सोमवार को केंद्र सरकार से निर्देश लाने को कहा है।बेंच को विभिन्न ट्रिब्यूनल बार एसोसिएशनों की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों पी एस पटवालिया और ए सुंदरम ने बताया कु NCDRC में 36 पद रिक्त हैं और इसकी क्षमता घटकर चार रह जाएगी।चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अगवाई वाली बेंच ने AG को कहा है कि वो ये निर्देश लाएं कि क्या ये...

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपहर्ता का अपहृत सरकारी स्कूल शिक्षक से “सेटेलमेंट” को मानने से इनकार किया [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपहर्ता का अपहृत सरकारी स्कूल शिक्षक से “सेटेलमेंट” को मानने से इनकार किया [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने वृहस्पतिवार को अपहर्ता और अपहृत स्कूल शिक्षक के बीच सेटेलमेंट को मानने से इनकार कर दिया और कहा कि प्राथमिकी में दर्ज अपराध गैरसमाधेय है।कोर्ट आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 438 के तहत अभियुक्त वाजिद खान द्वारा याचिका की सुनवाई कर रहा था जिसने अपने खिलाफ दायर प्राथमिकी में अग्रिम जमानत का आग्रह किया था। उसके खिलाफ यह प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 323 (स्वैच्छिक रूप से नुकसान पहुंचाने), 365(अपहरण और अगवा), 342(गलत तरीके से नजरबंद करना) और 34(आम इच्छा) के तहत दर्ज...

मेडिकल घोटाला : चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाले जज के खिलाफ जांच पैनल बनाया
मेडिकल घोटाला : चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाले जज के खिलाफ जांच पैनल बनाया

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने एक निजी मेडिकल कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद छात्रों को दाखिल करने की इजाजत देने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन जजों का पैनल बनाया है। ये आज द टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रकाशित किया है।पैनल में मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बैनर्जा, सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज पीके जयसवाल शामिल हैं।हाईकोर्ट जज की कमी के चलते मेडिकल दाखिले के घोटाले में सीबीआई ने जांच शुरू की...

प्रोमोशन में दिव्यांग कोटा : सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाउसिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के खिलाफ अवमानना का आरोप हटाया [आर्डर पढ़े]
प्रोमोशन में दिव्यांग कोटा : सुप्रीम कोर्ट ने एमपी हाउसिंग एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड के खिलाफ अवमानना का आरोप हटाया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एमपी हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड के खिलाफ अवमानना के आरोपों को हटा दिया। उसके खिलाफ यह आरोप लगाया गया था कि वह दिव्यांगों को प्रोमोशन में आरक्षण नहीं दे रहा है।न्यायमूर्ति राजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बनुमथी इस मामले की सुनवाई कर रहे थे जिसके बारे में याचिका अचिंत्य देब दासगुप्ता ने दायर की थी। उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार के खिलाफ याचिका में राज्य के आवासीय और पर्यावरण विभाग, आम प्रशासन विभाग, उद्योग एवं रोजगार मंत्रालय, एमपी हाउसिंग एंड डेवलपमेंट बोर्ड और राज्य के...

सभी मंत्री को आरटीआई अधिनियम के अधीन सार्वजनिक अधिकरण घोषित करने का सीआईसी का आदेश रद्द [आर्डर पढ़े]
सभी मंत्री को आरटीआई अधिनियम के अधीन सार्वजनिक अधिकरण घोषित करने का सीआईसी का आदेश रद्द [आर्डर पढ़े]

दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना आयोग के उस आदेश को निरस्त कर दिया है जिसमें उसने प्रत्येक मंत्री को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत “सार्वजनिक अधिकरण” घोषित कर दिया था।न्यायमूर्ति विभु बखरू ने 12 मार्च 2016 को दिए इस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के मंत्री सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के खंड 2(h) के तहत “सार्वजनिक अधिकरण” होंगे।कोर्ट ने सीआइसी द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों को जारी निर्देशों को भी खारिज कर दिया जिसमें उसने प्रत्येक मंत्री को मदद...