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कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
12 Dec 2017 3:02 PM GMT
कंपनियों के करार में निर्दिष्ट अधिकार क्षेत्र वाला कोर्ट ही कर सकता है मामले की सुनवाई : दिल्ली हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मध्यस्थता और सुलह अधिनियम, 1996 की धारा 11 के तहत दायर एक आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि समझौते के अनुसार ये मामले विशिष्ट रूप से नोएडा के न्यायालयों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने कहा, “जब यह कहा जाता है कि किसी मामले को नोएडा/दिल्ली के न्यायालयों में निपटाया जाएगा तो ऐसा सिर्फ विभिन्न पक्षों की सुविधा के लिए किया जाता है। इससे यह मामला दिल्ली के न्यायालयों के अधिकारक्षेत्र में नहीं आ जाता। इस प्रकार इस मामले की सुनवाई का अधिकार सिर्फ उस हाई कोर्ट को है जिसके अधिकार क्षेत्र में नोएडा और उत्तर प्रदेश आते हैं।

इस मामले के पक्षकार सीवीएस इंश्योरेंस एंड इन्वेस्टमेंट और विपुल आईटी इन्फ्रास्ट्रॉफ्ट प्राइवेट लिमिटेड ने जनवरी 2013 में एक समझौता हुआ। इसके तुरंत बाद भुगतान को लेकर उनमें विवाद हो गया और सीवीएस इंश्योरेंस ने मध्यस्थता के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

समझौते में किसी भी विवाद को सुलझाने का अधिकार नोएडा स्थित न्यायालयों को दिया गया था जबकि मध्यस्थता के लिए निर्धारित जगह दिल्ली और नोएडा थी।

कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस कंपनी का पंजीकृत कार्यालय दिल्ली में है और इसके अलावा इससे संबंधित किसी भी तरह की कार्रवाई का क्षेत्र दिल्ली नहीं है।

इसके बाद कोर्ट ने इस आवेदन पर सुनवाई करने से मना कर दिया और दोनों पक्षों को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अपील करने को कहा।


 
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