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मेडिकल घोटाला : चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाले जज के खिलाफ जांच पैनल बनाया

LiveLaw News Network
8 Dec 2017 8:43 AM GMT
मेडिकल घोटाला : चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन करने वाले जज के खिलाफ जांच पैनल बनाया
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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया दीपक मिश्रा ने एक निजी मेडिकल कॉलेज को सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद छात्रों को दाखिल करने की इजाजत देने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज पर लगे आरोपों की जांच के लिए तीन जजों का पैनल बनाया है। ये आज द टाइम्स ऑफ इंडिया ने प्रकाशित किया है।

पैनल में मद्रास हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस इंदिरा बैनर्जा, सिक्किम हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एस के अग्निहोत्री और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के जज पीके जयसवाल शामिल हैं।

हाईकोर्ट जज की कमी के चलते मेडिकल दाखिले के घोटाले में सीबीआई ने जांच शुरू की और उडीसा हाईकोर्ट के पूर्व जज को गिरफ्तार किया।

इससे पहले चीफ जस्टिस मिश्रा की अगवाई वाली बेंच ने मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया की अपील पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो जजों की बेंच जिसकी अगवाई सवालों में घिरे जज थे, के फैसले को पलट दिया था और हाईकोर्ट के फैसले के बाद किए गए सारे दाखिलों को रद्द कर दिया था।

खास बात ये है कि सुप्रीम कोर्ट ने MCI की याचिका को लंबित रखा ताकि हाईकोर्ट के जज के आदेश की छानबीन कर सके विशेषतौर जब सुप्रीम कोर्ट ने 2017-2018 के लिए मेडिकल कालेज को दाखिला करने पर रोक लगा दी गई हो।

TOI ने सुप्रीम कोर्ट के सूत्र के हवाले से कहा है कि चीफ जस्टिस ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में जस्टिस श्री नारायण शुक्ला की अगवाई वाली बेंच के फैसले पर उत्तर प्रदेश के एडवोकेट जनरल राघवेंद्र सिंह और डॉ अभय कृष्णा से  शिकायत मिलने के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और संबंधित जजों से जवाब मांगा था।

रिपोर्ट के मुताबिक जवाब मिलने के बाद उसे देखने के बाद विचार करते हुए चीफ जस्टिस मिश्रा ने गंभीर श्रेणी के आरोप बताते हुए निष्कर्ष निकाला था कि इस मामले की इन हाउस प्रॉसीजर के तहत गहन जांच की जरूरत है।

तीन जजों की जांच कमेटी मेडिकल कालेज को फायदा पहुंचाने के लिए जारी किए गए न्यायिक आदेश के पीछे के तथ्यों का पता लगाएगी। रिपोर्ट का कहना है कि जिन जज पर सवाल उठे हैं, उन्हें पैनल के सामने खुद का बचाव करने का मौका दिया जाएगा। चूंकि इन हाउस जांच न्यायिक प्रक्रिया के तहत नहीं है इसलिए इस जांच में गवाहों की जांच और जिरह नहीं होगी।

जांच के आदेश में कहा गया है कि एक सही जांच पक्षकारों को फिर से भरोसा दिलाएगी कि उन्हें न्याय मिला है और जनता को ये विश्वास होगा कि जांच से जो सामने आएगा वो पर्याप्त होगा।

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