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एक आदमी ने लोक अदालत से किया धोखाधड़ी, गुजरात हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया [आर्डर पढ़े]
एक आदमी ने लोक अदालत से किया धोखाधड़ी, गुजरात हाई कोर्ट ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया [आर्डर पढ़े]

गुजरात हाई कोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है जिसने बिना भुगतान के चेक वापसी के आरोप में न्यायिक हिरासत से जमानत प्राप्त किया था। लोक अदालत ने उसको इस आधार पर जमानत दे दी कि उसने शिकायतकर्ता के साथ मामला सुलझा लिया है और वह एक साल के अंदर पूरी राशि चुका देगा।इस मामले को सीधे-सीधे धोखाधड़ी बताते हुए न्यायमूर्ति जेबी पर्दीवाला ने उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और उसको दो सप्ताह के अंदर अदालत में हाजिर होने को कहा है।इस बारे में याचिका सोनल हार्दिकभाई ठक्कर ने दायर की...

इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस के लिए जरूरी है कि मुकदमों की प्रबंधन प्रणाली शुरू की जाए ताकि न्याय सक्षमता से दिलाया जा सके : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
इज ऑफ़ डूइंग बिजनेस के लिए जरूरी है कि मुकदमों की प्रबंधन प्रणाली शुरू की जाए ताकि न्याय सक्षमता से दिलाया जा सके : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मुकदमों के प्रबंधन की प्रणाली शुरू करने की जरूरत पर जोर दिया ताकि व्यवसाय को आसान बनाने के लिए इसके एक जरूरी पक्ष न्याय दिलाने की व्यवस्था में सुधार लाया जा सके।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, “ईज ऑफ़ डूइंग बिजनेस और एन्फोर्समेंट ऑफ़ कॉन्ट्रैक्ट आजकल बहुत लोकप्रिय हो गया है। व्यवसाय करने में आसानी के लिए जहाँ तक न्याय दिलाने की व्यवस्था का सवाल है, अब समय आ गया है जब मुकदमों के प्रबंधन का कार्यक्रम लागू किया जाए”।1987 के एक मुकदमे...

दो लड़कों को अगवा कर हत्या करने का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के बरी करने के फैसले को निरस्त कर अभियुक्त को सजा सुनाई [आर्डर पढ़े]
दो लड़कों को अगवा कर हत्या करने का मामला : सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के बरी करने के फैसले को निरस्त कर अभियुक्त को सजा सुनाई [आर्डर पढ़े]

दो लड़कों को अगवा करके हत्या करने के दोषी एक आदमी को बरी करने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत द्वारा उसको सजा सुनाने का फैसला बरकरार रखा पर उसकी मौत सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया।निचली अदालत ने अभियुक्त महिपाल को मौत की सजा सुनाई थी। अभियुक्त के खिलाफ मुख्य साक्ष्य यह था कि उसके कमरे से सिम कार्ड बरामद हुआ था और उस लड़के का शव भी उसके अहाते में मिला था।निचली अदालत के जांच परिणामों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने यह कहते हुए अभियुक्त को बरी कर दिया...

सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति की 14 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार के मामले की सीबीआई से जांच कराने की याचिका उड़ीसा हाई कोर्ट को वापस भेजी
सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति की 14 साल की लड़की से सामूहिक बलात्कार के मामले की सीबीआई से जांच कराने की याचिका उड़ीसा हाई कोर्ट को वापस भेजी

सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश आदर्श कुमार गोएल और यूयू ललित की पीठ ने अनुसूचितजाति की एक 14 साल की लड़की के साथ हुए सामूहिक बलात्कार के मामले की जांच सीबीआई से कराने की याचिका उड़ीसा हाई कोर्ट को वापस कर दिया है। कोरापूत की इस लड़की ने बाद में आत्महत्या कर ली थी। कोर्ट ने कहा कि इसी तरह की और याचिकाएं हाई कोर्ट में लंबित हैं इसलिए वह इस याचिका को वापस हाई कोर्ट के पास भेज रहा है। पीठ ने यह आदेश उस समय दिया जब सरकारी वकील ने यह कहा कि ऐसी ही दूसरी याचिकाएं भी हाई कोर्ट में लंबित हैं।पीट ने कहा, “अगर...

स्वतंत्रता सेनानी को तीन दशक तक पेंशन के लिए भटकाने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर साधा निशाना [आर्डर पढ़े]
स्वतंत्रता सेनानी को तीन दशक तक पेंशन के लिए भटकाने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार पर साधा निशाना [आर्डर पढ़े]

उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने एक स्वतंत्रता सेनानी को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन के अनुदान के अपने वैध दावे की पूर्ति के लिए एक से दूसरे कार्यालय के चक्कर कटवाने के लिए राज्य सरकार को आडे हाथों लिया है।न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा ने स्वतंत्रता सेनानी की विधवा को इस उत्पीड़न के लिए 3,50,000 रुपये का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।अदालत ने राज्य को बिना किसी देरी के स्वतंत्रता सेनानी सत्येश्वर शर्मा की विधवा को एक महीने के भीतर स्वतंत्रता सेनानी पेंशन के पूरे बकाए का भुगतान करने का आदेश दिया। अदालत...

मध्यस्थता संबंधी आदेश सीधे उस कोर्ट में भी दायर किया जा सकता है जिसने यह आदेश दिया है और इसके लिए आदेश को ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मध्यस्थता संबंधी आदेश सीधे उस कोर्ट में भी दायर किया जा सकता है जिसने यह आदेश दिया है और इसके लिए आदेश को ट्रांसफर करने की जरूरत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि मध्यस्थता संबंधी आदेश सीधे उस कोर्ट में भी दायर और लागू किया जा सकता है जिस कोर्ट ने उस व्यक्ति के खिलाफ आदेश दिया है और इसके लिए आदेश के उस कोर्ट से स्थानान्तरण की जरूरत नहीं है जिसके अधिकारक्षेत्र में मध्यस्थता की प्रक्रिया आती है।न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति एसके कौल की पीठ ने सुन्दरम फाइनेंस लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसे एक सुनवाई अदालत ने कहा था कि वह पहले उचित कार्यक्षेत्र वाली अदालत के समक्ष निष्पादन कार्यवाही की फाइलिंग करे,...

जांच पूरी होने तक कमर्चारी को गुजारा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
जांच पूरी होने तक कमर्चारी को गुजारा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि जांच के दौरान कर्मचारी को गुजारा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि उसको यह वित्तीय मदद देने से इनकार करने का मतलब उसको खुद के बचाव का मौक़ा नहीं देने जैसा होगा।न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने कहा, “कमर्चारी को उसके खिलाफ हो रही जांच चलने तक गुजारा भत्ता प्राप्त करने का अधिकार है क्योंकि अगर उस कर्मचारी के पास पैसा नहीं है तो इस बात की अपेक्षा करना अनर्गल है कि वह कर्मचारी इस जांच में सार्थक रूप से भागीदारी...

सिर्फ इस आरोप पर कि नो-क्लेम प्रमाणपत्र वित्तीय दबाव से और  डरा-धमकाकर प्राप्त किया गया, मामला पंचाट में जाने लायक नहीं बन जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ इस आरोप पर कि नो-क्लेम प्रमाणपत्र वित्तीय दबाव से और डरा-धमकाकर प्राप्त किया गया, मामला पंचाट में जाने लायक नहीं बन जाता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

हाई कोर्ट की मध्यस्थता के एक उल्लेख को निरस्त करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पक्षकारों को करार की पूर्ण और अंतिम राशि मिल जाने के बाद मध्यस्थता के मुद्दे को उठाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ इस आरोप से कि नो-क्लेम प्रमाणपत्र वित्तीय दबाव और डरा-धमकाकर प्राप्त किया गया, और इसके अलावा और कोई बात नहीं है, तो इतने भर से मामला पंचाट में जाने लायक नहीं हो जाता।यह विवाद ओएनजीसी द्वारा दिए गए एक ठेके से पैदा हुआ। जिस कंपनी ने यह ठेका दिया उसने काम पूरा होने पर अंतिम भुगतान...

झारखंड के मुख्यमंत्री का न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटना दुखद; झारखंड हाई कोर्ट में इस बाबत जनहित याचिका दाखिल
झारखंड के मुख्यमंत्री का न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटना दुखद; झारखंड हाई कोर्ट में इस बाबत जनहित याचिका दाखिल

झारखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है कि चूंकि झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ एक आपराधिक मामला चल रहा है, इसलिए उनको न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र नहीं बांटना चाहिए था। दास ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के एक कार्यक्रम में ये नियुक्ति पत्र बांटे हैं।अपनी याचिका में दीवान इन्द्रानील सिन्हा ने कहा कि वह यह देखकर दुखी हुए कि दास नियुक्तिपत्र बाँट रहे थे। उन्हें जानकार और भी दुःख हुआ कि झालसा हाई कोर्ट का अभिन्न हिस्सा है और फिर भी उनको इस तरह के गैरकानूनी...

सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी तीन लोगों को जमानत देने के समय बॉम्बे हाई कोर्ट के बयान से असहमति जताई; आरोपियों से जमानत के लिए दुबारा बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश होने को कहा [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या के आरोपी तीन लोगों को जमानत देने के समय बॉम्बे हाई कोर्ट के बयान से असहमति जताई; आरोपियों से जमानत के लिए दुबारा बॉम्बे हाई कोर्ट में पेश होने को कहा [आर्डर पढ़े]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने जनवरी 2017 में तीन लोगों को जमानत देते हुए जो आदेश दिया था उसकी उस समय काफी आलोचना हुई थी क्योंकि उसमें धार्मिक घृणा के आधार पर किसी हत्या की नींदा की गई थी। यह मामला है पुणे में तीन लोगों द्वारा शेख मोहसिन की 2 जून 2014 को हत्या की। इनको जमानत देते हुए हाई कोर्ट ने कहा था :“मृतक का दोष सिर्फ इतना था कि वह किसी और धर्म का था। मैं यह मानता हूँ कि यह बात आरोपी/आवेदनकर्ता के पक्ष में जाता है”।इसके अलावा, आवेदक/आरोपी का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है और यह लगता है कि धर्म के नाम...

सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ में आरोपमुक्त करने के फैसले की हाईकोर्ट द्वारा जांच की जरूरत : बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज अभय एम ठिप्से
सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ में आरोपमुक्त करने के फैसले की हाईकोर्ट द्वारा जांच की जरूरत : बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज अभय एम ठिप्से

बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय एम ठिप्से जिन्होंने सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में चार आरोपियों की जमानत याचिकाओं को सुना था, ने अब कहा है कि इस मामले में आरोपमुक्त करने  के आदेश की फिर से जांच करने की आवश्यकता है। सोहराबुद्दीन शेख, कौसर बी और तुलसीराम प्रजापति की कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में आरोपी डीजी वंजारा को जमानत देने पर सफाई देते हुए उन्होंने माना कि यह सुप्रीम कोर्ट की ओर से आदेश के तहत किया गया था, क्योंकि मामले में अन्य को जमानत दी गई थी।द  इंडियन एक्सप्रेस से एक...

जस्टिस चितंबरेश ने रजनीकांत की सुपर-हिट मूवी मन्नान के गीत का हवाला देकर बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी
जस्टिस चितंबरेश ने रजनीकांत की सुपर-हिट मूवी 'मन्नान' के गीत का हवाला देकर बच्चे की कस्टडी मां को सौंपी

  7 फरवरी को पारित एक फैसले में  केरल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति चितंबरेश ने रजनीकांत की सुपर-हिट फिल्म मन्नान के एक गीत के बोल का हवाला देते हुए फैसला सुनाते हुए अपने बच्चे की कस्टडी केलिए  एक मां की हैबियस कॉरपस याचिका की अनुमति दे दी।न्यायाधीश ने लिखा: "अम्मा अंतराक्षीता यूआईआईआरईईईईई अम्माई वानंगथा उयिर इलाईईए " (कोई भी जीवन नहीं है जो अपनी मां के लिए पुकार नहीं करता कोई ऐसा जीवन प्रपत्र नहीं है जो अपनी मां का सम्मान नहीं करता)। के.जे. येसूदास द्वारा गाया तमिल फिल्म मन्नान के लिए गीत।...

प्रतीकात्मक कब्जा लेने के खिलाफ DRT में कोई अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
'प्रतीकात्मक कब्जा' लेने के खिलाफ DRT में कोई अर्जी दाखिल नहीं की जा सकती : इलाहाबाद हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

मैसर्स एन सी एम एल इंडस्ट्रीज लिमिटेड निदेशक और अन्य के माध्यम से बनाम ऋण रिकवरी ट्रिब्यूनल, लखनऊ और अन्य मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की फुल बेंच ने यह धारण किया है कि किसी भी प्रतिरोध के साथ मिलकर "प्रतीकात्मक कब्ज़ा" या कब्जे  का नोटिस जारी करना, प्रतिभूतिकरण और पुनर्निर्माण के वित्तपोषण की धारा 13 (4) में संपत्ति और सुरक्षा ब्याज अधिनियम के प्रवर्तन के तहत "उपाय" नहीं माना जा सकता। इसलिए, उस स्तर पर उधारकर्ता डीआरटी में धारा 17 (1) के तहत आवेदन दायर नहीं कर सकता। सामने आए संदर्भ का जवाब...

बॉम्बे हाई कोर्ट के खिलाफ जालसाजी करने वाले मुकदमादारों और वकील के खिलाफ न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने शुरू की अवमानना की कार्रवाई [आर्डर पढ़े]
बॉम्बे हाई कोर्ट के खिलाफ जालसाजी करने वाले मुकदमादारों और वकील के खिलाफ न्यायमूर्ति जीएस पटेल ने शुरू की अवमानना की कार्रवाई [आर्डर पढ़े]

बॉम्बे हाई कोर्ट के जज जीएस पटेल ने कहा कि हमारे कमर्शियल मुकदमेबाजी की व्यवस्था में सड़ांध पैदा हो गया है। यह मामला इसका उदाहरण है। अगर कभी कोर्ट के खिलाफ किसी फर्जीवाड़े का जिक्र होगा तो इस मामले का उल्लेख जरूर किया जाएगा।इस मामले में जितेंदरपाल सिंह चड्ढा नामक मुकदमेदार, उसके श्वसुर प्रिथिपाल चड्ढा और इनके वकील दत्तात्रेय परब ने मिलीभगत से ‘व्यवस्था का फ़ायदा उठाया’ और उन्होंने एक ही परिसंपत्ति के खिलाफ एक ही साथ मामले दायर लड़े।मामले की पृष्ठभूमिन्यायमूर्ति पटेल चैम्बर सम्मन के आवेदन पर सुनवाई...

दिल्ली की एक अदालत ने मीडिया पर पाबंदी लगाने की आरके पचौरी की अपील खारिज की; फैसला आने तक चेतावनी के साथ रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी [आर्डर पढ़े]
दिल्ली की एक अदालत ने मीडिया पर पाबंदी लगाने की आरके पचौरी की अपील खारिज की; फैसला आने तक चेतावनी के साथ रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी [आर्डर पढ़े]

दिल्ली की एक अदालत ने कहा कि मीडिया को अपनी रिपोर्टिंग से किसी मुद्दे पर ज्यादा प्रकाश डालना चाहिए न कि उसको लेकर ज्यादा विवाद उत्पन्न करना चाहिए। कोर्ट ने मीडिया पर पाबंदी लगाने के आरके पचौरी के आग्रह को खारिज कर दिया। टेरी के पूर्व प्रमुख पचौरी अपने खिलाफ यौन प्रताड़ना के आरोप झेल रहे हैं। पर कोर्ट ने कहा कि इस मामले की किसी भी तरह की रिपोर्टिंग में उनके विचारों को तरजीह दी जानी चाहिए यह समझते हुए कि मामला कोर्ट के विचाराधीन है।अतिरिक्त जिला जज सुमित दास ने मीडिया पर इस मामले की रिपोर्टिंग पर...

डीजीसीए ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, ओवरबुकिंग की वजह से अगर सीट नहीं मिलती है तो यात्रियों को मुआवजा मिलना चाहिए [आर्डर पढ़े]
डीजीसीए ने दिल्ली हाई कोर्ट से कहा, ओवरबुकिंग की वजह से अगर सीट नहीं मिलती है तो यात्रियों को मुआवजा मिलना चाहिए [आर्डर पढ़े]

नागर विमान महानिदेशालय (डीजीसीए) ने दिल्ली हाई कोर्ट से स्पष्ट कहा कि जिन यात्रियों को ओवरबुकिंग की वजह से सीट नहीं मिलती है उन्हें तत्काल मुआवजा दिया जाना चाहिए और संबंधित एयरलाइन्स से उनको अपने गंतव्य तक जाने का इंतजाम किया जाना चाहिए।यह फैसला पल्लव मोंगिया द्वारा दायर याचिका पर कोर्ट ने दी गई। मोंगिया को कन्फर्म टिकट होने के बावजूद दिसंबर 2015 में एयर इंडिया ने उन्हें प्लेन में जगह नहीं दी। अब उन्होंने डीजीसीए द्वारा जारी किए गए सिविल एविएशन रिक्वायरमेंट (सीएआर) के पैराग्राफ 3.2 को चुनौती दी...

आधार [10 वां दिन-सत्र 2] इस केस का फैसला भारत का भविष्य तय करने जा रहा है : कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें समाप्त की
आधार [10 वां दिन-सत्र 2] इस केस का फैसला भारत का भविष्य तय करने जा रहा है : कपिल सिब्बल ने अपनी दलीलें समाप्त की

"आजादी के बाद यह सबसे महत्वपूर्ण मामला है ,यह एडीएम जबलपुर मामले से ज्यादा महत्वपूर्ण है। आधार परियोजना के सम्मिलित चरित्र के मद्देनजर एडीएम जबलपुर मामले की तुलना में यह और भी अधिक महत्व रखता है। एडीएम जबलपुर केवल आपातकाल से संबंधित मामला था। यह समय की सीमित अवधि के लिए था। इस मामले के मुद्दे एक असीमित अवधि के लिए प्रासंगिक हैं। इस मामले में निर्णय देश के भविष्य को तय करने जा रहा है। यह तय करेगा कि क्या कोई व्यक्ति भारत में स्वतंत्र विकल्प के लिए हकदार है ", वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने...

आधार पर 10वें दिन की बहस [सत्र 1]: आधार नहीं होने के कारण किसी को आजीविका के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता; सिबल ने कहा, आधार प्रोजेक्ट अनुच्छेद 14 और 21 पर खड़ा नहीं उतरता
आधार पर 10वें दिन की बहस [सत्र 1]: आधार नहीं होने के कारण किसी को आजीविका के उसके अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता; सिबल ने कहा, आधार प्रोजेक्ट अनुच्छेद 14 और 21 पर खड़ा नहीं उतरता

आधार पर 10वें दिन की बहस मंगलवार को हुई और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष दो याचिकाकर्ताओं की ओर से अपना पक्ष रखा। उन्होंने इस्राइल के बायोमेट्रिक डाटाबेस लॉ के साथ आधार अधिनियम 2016 की तुलना की।सिबल ने कहा, “आधार अधिनियम के उलट इस्राइली क़ानून के तहत आईडी कार्ड स्वैच्छिक है। आधार के विपरीत इस्राइल के क़ानून में सहमति की अवधारणा छलावा नहीं है। इस्राइल में लोगों से जमा किए गए बायोमेट्रिक डाटा सिर्फ एक निश्चित अवधि के लिए उसी कार्य के लिए ही प्रयोग हो सकता है जिसके...

वीरभद्र सिंह को उनके खिलाफ आय से अधिक मामले में सीबीआई की जांच की प्रकृति क्या हो इस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया
वीरभद्र सिंह को उनके खिलाफ आय से अधिक मामले में सीबीआई की जांच की प्रकृति क्या हो इस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया

न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री वीरभद्र सिंह को सीबीआई के इस आग्रह पर कि राज्य में हुए किसी अपराध की जांच के लिए कार्रवाई की प्रकृति क्या होनी चाहिए यह बताने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में जांच का सामना कर रहे सिंह के वकील कपिल सिबल ने पीठ से कहा कि सीबीआई को जवाब देने के लिए अधिक समय की जरूरत है।गत माह, पीठ ने सिंह को सीबीआई के कहने पर नोटिस जारी किया था। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सिंह के...

किसी अपराध की सूचना पुलिस को ना देने पर सबूत मिटाने का दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी अपराध की सूचना पुलिस को ना देने पर सबूत मिटाने का दोषी ठहराना न्यायसंगत नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने दिनेश कुमार कालिदास पटेल बनाम गुजरात राज्य में माना है कि अगर कोई व्यक्ति किसी अपराध की सूचना पुलिस को ना दे तो उसे सबूत मिटाने का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। दरअसल निचली अदालत ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 498 ए और 201 के तहत अपराध के लिए एक व्यक्ति को दोषी ठहराया था। उच्च न्यायालय ने आईपीसी की धारा 498 ए के अपराध से बरी किया लेकिन आईपीसी की धारा 201 के तहत सजा को बनाए रखा।न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति अमिताव रॉय की पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय ने आईपीसी की धारा 201...