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हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जलते हुए अगरबत्ती के फेरे लगाना ‘पवित्र आग’ के फेरे लगाने के बराबर : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
हिंदू विवाह अधिनियम के तहत जलते हुए अगरबत्ती के फेरे लगाना ‘पवित्र आग’ के फेरे लगाने के बराबर : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक व्यक्ति की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उसने कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह 14 फरवरी 2009 को हुई उसकी शादी को अमान्य कर दे। इस व्यक्ति ने 10 सितम्बर 2012 को फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। फैमिली कोर्ट ने वैवाहिक अधिकार को बहाल करने की अपील मान ली थी।न्यायमूर्ति केके तातेड और बीपी कोलाबावाला ने अपीलकर्ता के वकील की इस दलील को ठुकरा दिया कि अगरबत्ती के फेरे लगाना पवित्र आग के चारों और सात फेरे लेने के बराबर नहीं है और हिंदू विवाह अधिनियम की...

सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार से कहा, 6 या 7 अवैध मंजिलों का निर्माण कैसे ? ये अनजाना नहीं बल्कि मौन सहमति है
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार से कहा, 6 या 7 अवैध मंजिलों का निर्माण कैसे ? ये अनजाना नहीं बल्कि मौन सहमति है

हिमाचल प्रदेश सरकार पर गैरकानूनी निर्माण को रोकने के लिए समय पर कार्रवाई नहीं करने के लिए  फटकार लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पूछा है  कि कई जगहों पर पर्यटक लॉज के रूप में छह या सात मंजिल कैसे बनाई जा रही हैं जबकि बिल्डिंग प्लान के अनुसार  केवल एक मंजिल की ही अनुमति है।कोर्ट ने इस मुद्दे पर बुधवार को सरकार से सीलिंग और तोड़फोड़  अभियान में शामिल अधिकारियों के नाम और पदनाम के बारे में एक नया हलफनामा दायर करने के लिए कहा है ताकि सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में कोई अवैध निर्माण नहीं हो रहे...

माता-पिता लड़ते रहे, केरल हाईकोर्ट ने किया बच्चे का नामकरण [निर्णय पढ़ें]
माता-पिता लड़ते रहे, केरल हाईकोर्ट ने किया बच्चे का नामकरण [निर्णय पढ़ें]

अदालत ने कहा कि "जोहान" नाम बच्चे की मां की इच्छाओं का प्रतिनिधित्व करेगा और उपनाम के रूप में "सचिन" नाम का नाम पिता की आवश्यकता को पूरा करेगा क्योंकि कहा गया नाम बच्चे को उसकी पहचान देगा। केरल उच्च न्यायालय को धन्यवाद कि आखिरी में उसने एक बच्चे का नामकरण किया जो उसके  माता-पिता का बाध्य कर्तव्य था लेकिन वो लड़ने में व्यस्त थे। दूसरे बच्चे के जन्म के बाद दोनों के बीच संबंध तनावग्रस्त हो गए, पारिवारिक अदालत में अन्य कानूनी लड़ाई के बीच अंतर-धर्म दंपत्ति ने  बच्चे को नाम देने के लिए भी लड़ना शुरू...

संसद की स्थाई समिति की रिपोर्टों पर संवैधानिक पीठ के निर्णय का सारांश [निर्णय पढ़ें]
संसद की स्थाई समिति की रिपोर्टों पर संवैधानिक पीठ के निर्णय का सारांश [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि अदालतों का संसद की स्थाई समिति की रिपोर्टों पर भरोसा करना संसद के विशेषाधिकारों का हनन नहीं है।यह फैसला मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एके सिकरी, एएम खानविलकर, डीवाई चंद्रचूड़ और अशोक भूषण की पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ ने सुनाया।तथ्यकोर्ट बहुत सारी जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थे जिनमें से एक याचिका कल्पना मेहता ने दायर की थी। मेहता ने अपनी याचिका में दो टीकों – गर्दासिल और सर्वरिक्स के आंध्र प्रदेश और गुजरात की महिला आदिवासियों पर सर्वाइकल कैंसर के इलाज के लिए...

सिर्फ गुजारे की राशि के दावे के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम की शरण में नहीं जा सकते : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ गुजारे की राशि के दावे के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम की शरण में नहीं जा सकते : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

हर कोई यहाँ तक कि गुजारे की राशि के लिए भी अधिनियम 2005 की शरण में नहीं जा सकता, इस अधिनियम का उद्देश्य उन महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है जो किसी भी तरह की पारिवारिक हिंसा की शिकार हैं, कोर्ट ने कहा।बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है कि घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों को सिर्फ गुजारे की राशि के दावे के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता। जब तक कि पक्षकार घरेलू हिंसा का आरोप नहीं लगाता और कोर्ट में पीड़ित के रूप में नहीं आता तब तक इस प्रावधान का प्रयोग नहीं किया जा सकता।इस मामले में फैमिली कोर्ट ने...

अयोग्य घोषित करने की अपील पर निर्णय लेने के बारे में अध्यक्ष को याद दिलाने का मतलब न्यायिक पुनरीक्षण नहीं है : कर्नाटक हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अयोग्य घोषित करने की अपील पर निर्णय लेने के बारे में अध्यक्ष को याद दिलाने का मतलब न्यायिक पुनरीक्षण नहीं है : कर्नाटक हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सदन के अध्यक्ष को अयोग्य करार दिए जाने के बारे में लंबित आवेदन पर सिर्फ निर्णय लेने की याद भर दिलाने का मतलब न्यायिक पुनरीक्षण नहीं होता, कोर्ट ने कहा।एकल पीठ द्वारा कर्नाटक विधानसभा के अध्यक्ष को जेडीएस विधायकों को अयोग्य घोषित करने के बारे में लंबित आवेदन पर निर्णय लने के लिए कहने को सही ठहराते हुए कर्नाटक हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने कहा कि पीठ को विधानसभा अध्यक्ष से इस आवेदन पर शीघ्रता से निर्णय लेने के लिए आग्रह करने का अधिकार है। खंडपीठ ने कहा कि ऐसा आग्रह करना न्याय के हित में है।न्यायमूर्ति...

सुप्रीम कोर्ट ने IGI एयरपोर्ट पर सभी वाहनों को सीएनजी में बदलने के एनजीटी के आदेश पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने IGI एयरपोर्ट पर सभी वाहनों को सीएनजी में बदलने के एनजीटी के आदेश पर रोक लगाई [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर चल रहे सभी गैर-सीएनजी वाहनों को सीएनजी में बदलने के नेशनल ट्रिब्यूनल के  निर्देश पर रोक लगा दी है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस  ने एनजीटी द्वारा जारी इस निर्देश को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल की गई है।फेडरेशन ने तर्क दिया कि एनजीटी आदेश में इस विशेष निर्देश के समर्थन में कोई चर्चा और कारण नहीं दिए गए हैं और हवाई अड्डे पर  विभिन्न प्रकार के वाहन तैनात हैं और उनमें से कई को सीएनजी में परिवर्तित नहीं किया जा सकता। इन दलीलों...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वह अधिकरणों की निगरानी के लिए स्वायत्त निकाय के गठन पर मोटे तौर पर सहमत है [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, वह अधिकरणों की निगरानी के लिए स्वायत्त निकाय के गठन पर मोटे तौर पर सहमत है [आर्डर पढ़े]

इस तरह की निकाय भर्ती और अधिकरणों के सदस्यों के कामकाज की निगरानी कर सकती है, कोर्ट ने कहा।सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि वह मोटे और पर एक ऐसे प्रभावी और स्वायत्त निकाय की परिकल्पना के पक्ष में है जो कुछ आवश्यक अपवादों को छोड़कर सभी अधिकरणों पर नज़र रखे।पीठ ने कहा सुप्रीम कोर्ट के तीन अवकाशप्राप्त जजों की एक समिति के गठन का निर्देश दिया जो कि अधिकरणों में काम कर चुके हैं और उनको निम्नलिखित बातों पर गौर करने को कहा है : नियमित कैडर का निर्माण और अधिकरण में भर्ती के लिए अर्हताओं का निर्धारण; एक...

कावेरी विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के कदम को बताया “घोर अवमानना”, जल संसाधन सचिव को तलब किया [आर्डर पढ़े]
कावेरी विवाद : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के कदम को बताया “घोर अवमानना”, जल संसाधन सचिव को तलब किया [आर्डर पढ़े]

यह टिप्पणी करते हुए कि केंद्र द्वारा तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुदुचेरी  के बीच कावेरी पानी के साझा करने की योजना तैयार ना करना " घोर अवमानना" है, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्रीय जल संसाधन सचिव को 14 मई को पेश होने के निर्देश दिए हैं।चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड की बेंच ने  अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल की दलीलों को मानने से इंकार कर दिया कि 'योजना' तैयार है और केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा अनुमोदित होने के बाद अदालत के समक्ष रखा जाएगा जो शीघ्रता से किया...

पति पर अवैध संबंध होने का झूठा आरोप क्रूरता है : दिल्ली हाई कोर्ट ने तलाक मंजूर किया [निर्णय पढ़ें]
पति पर अवैध संबंध होने का झूठा आरोप क्रूरता है : दिल्ली हाई कोर्ट ने तलाक मंजूर किया [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति को अपनी पत्नी से यह कहते हुए तलाक की अनुमति दे दी कि उससे अलग हुई पत्नी ने अपनी विधवा साली से उसके अवैध संबंध होने के झूठे आरोप लगाए थे और यह आरोप उसके खिलाफ क्रूरता जैसा है।न्यायमूर्ति जेआर मिधा सुनवाई अदालत के आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहे थे। इस आदेश के तहत हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13A के तहत निचली अदालत ने अलग रहने का न्यायिक आदेश दे दिया था। पति ने इसके बाद तलाक की मांग की जबकि पत्नी ने अलग रहने के न्यायिक आदेश को रद्द किए जाने की मांग...

गुजरात हाईकोर्ट ने GST ट्रिब्यूनल के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, राज्य,  GST परिषद को नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]
गुजरात हाईकोर्ट ने GST ट्रिब्यूनल के गठन को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र, राज्य, GST परिषद को नोटिस जारी किया [आर्डर पढ़े]

गुजरात उच्च न्यायालय ने केंद्रीय और राज्य जीएसटी अपीलीय न्यायाधिकरण के गठन  को चुनौती देने वाली दो चार्टर्ड एकाउंटेंट की याचिका पर  केंद्र, गुजरात सरकार और सामान और सेवा कर परिषद को नोटिस जारी किया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि सिर्फ एक न्यायिक सदस्य की नियुक्ति " अवैध" है।न्यायमूर्ति अकिल कुरैशी और न्यायमूर्ति बीएन करिया ने सेंट्रल गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स एक्ट की धारा 109 और गुजरात सामान और सेवा कर अधिनियम की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका पर  नोटिस जारी कर 2 जुलाई, 2018 तक जवाब मांगा...

पूर्व मुख्यमंत्रियों को विशेष वर्ग का नागरिक मानना मनमाना और भेदभावपूर्ण है : पढ़िए लोक प्रहरी की याचिका पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा [निर्णय पढ़ें]
पूर्व मुख्यमंत्रियों को विशेष वर्ग का नागरिक मानना मनमाना और भेदभावपूर्ण है : पढ़िए लोक प्रहरी की याचिका पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा [निर्णय पढ़ें]

‘मुख्यमंत्री जब पद छोड़ता है, तो वह एक आम नागरिक जैसा हो जाता है, हालांकि जिस पद पर वह रहा होता है, वह सुरक्षा और अन्य प्रोटोकॉल का अधिकारी होता है। पर सरकारी बंगले की आजीवन सुविधाएं संविधान के समानता के सिद्धांत के अनुरूप नहीं है।’पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगले में रहने का अधिकार नहीं है। यह निर्णय सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक बार जब कोई मुख्यमंत्री पद से हट जाता है, वह एक आम नागरिक बन जाता/जाती है और वह सरकारी बंगले में जीवन भर रहने का अधिकारी नहीं होता/होती। हालांकि, उसको...

अगर जायज शिकायतकर्ता को अपील करने का अधिकार है तो वह आगे की जांच की मांग क्यों नहीं कर सकता? सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ करेगी इसकी जांच [आर्डर पढ़े]
अगर जायज शिकायतकर्ता को अपील करने का अधिकार है तो वह आगे की जांच की मांग क्यों नहीं कर सकता? सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ करेगी इसकी जांच [आर्डर पढ़े]

जायज शिकायतकर्ता की मांग पर आपराधिक मामले की सुनवाई कर रही अदालत इसमें आगे की जांच का आदेश दे सकती है या नहीं, इस बात के निर्णय के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक वृहत्तर पीठ का गठन कर दिया। ऐसा 2009 में आपराधिक प्रक्रिया संहिता को संशोधित किये जाने के संदर्भ में किया गया है जिसके द्वारा पीड़ित को अपील का अधिकार दिया गया है।सुप्रीम कोर्ट बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्णय के खिलाफ दायर एक याचिका की सनुवाई कर रहा था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने रीता नाग बनाम पश्चिम बंगाल सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले...

सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के दोषी ‘ अंकल’ की सजा को कम किया जिसने पीड़िता से शादी की थी [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने बलात्कार के दोषी ‘ अंकल’ की सजा को कम किया जिसने पीड़िता से शादी की थी [आर्डर पढ़े]

 मामले में दिए गए असाधारण तथ्यों और परिस्थितियों में और अभियोजन पक्ष की किसी भी और पीड़ा को कम करने के लिए भारत के संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपने क्षेत्राधिकार का प्रयोग करते हुए हम पहले से ही जेल में बिताई अवधि तक अपीलकर्ता की सजा को संशोधित करने के इच्छुक हैं, पीठ ने कहा।  सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए अभियोजन पक्ष की किसी और पीड़ा को कम करने के लिए बलात्कार के आरोपी की सजा को पहले से ही काट चुके जेल की अवधि तक...

वाणिज्यिक अदालतों के आर्थिक अधिकारक्षेत्र को बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी [अधिसूचना पढ़ें]
वाणिज्यिक अदालतों के आर्थिक अधिकारक्षेत्र को बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी [अधिसूचना पढ़ें]

केंद्र सरकार ने 3 मई 2018 को एक अधिसूचना जारी किया ताकि हाई कोर्ट्स अधिनियम, 2015 के वाणिज्यिक अदालतों, वाणिज्यिक प्रभागों और वाणिज्यिक अपीली डिवीजन का संशोधन किया जा सके।तेजी से हो रहे आर्थिक विकास को देखते हुए, वाणिज्यिक गतिविधियों में तेजी आई है और इस वजह से वाणिज्यिक विवादों की संख्या में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारी वृद्धि हुई है।प्रत्यक्ष विदेशी निवेश, विदेशों में वाणिज्यिक कारोबार में आई कई गुनी वृद्धि ने इस स्थिति को और बढ़ाया है।इन विवादों को शीघ्रता से निपटाने और विदेशी...

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग से कहा, सिर्फ कोर्ट में याचिका डालने वाले का ही नहीं, सभी उम्मीदवारों के परीक्षा परिणामों को संशोधित करें [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग से कहा, सिर्फ कोर्ट में याचिका डालने वाले का ही नहीं, सभी उम्मीदवारों के परीक्षा परिणामों को संशोधित करें [निर्णय पढ़ें]

जब परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के उत्तर सही हैं, तो उनको यह हक़ है कि वे अपने परीक्षा परिणामों की समीक्षा की मांग करें। दोष परीक्षार्थियों में नहीं है बल्कि परीक्षा का आयोजन करने वाली निकाय में है, पीठ ने कहा।सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग को स्कूल लेक्चरर एग्जाम, 2015 में बैठने वाले सभी उम्मीदवारों के परीक्षा परिणामों की समीक्षा करने को कहा है। कोर्ट के आदेश के बाद गठित विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ याचिका दायर करने वाले उम्मीदवार की ही नहीं, बल्कि सभी...

धर्मनिरपेक्षता का सार धार्मिक रस्मों के आधार पर राज्य द्वारा लोगों से गैर-भेदभाव है: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
धर्मनिरपेक्षता का सार धार्मिक रस्मों के आधार पर राज्य द्वारा लोगों से गैर-भेदभाव है: सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

अदालत ने कहा कि राज्य पर सभी धर्मों की धार्मिक प्रथाओं को संरक्षित करने का संवैधानिक दायित्व है महाकालेश्वर मंदिर के ज्योतिर्लिंग को होने वाले नुकसान के कारणों से निपटने वाले अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने धर्म और धर्मनिरपेक्षता के बारे में कुछ महत्वपूर्ण अवलोकन किए हैं। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, जिन्होंने इस फैसले को लिखा, ने पाया कि धर्मनिरपेक्षता का सार धार्मिक अंतर के आधार पर राज्य द्वारा लोगों से भेदभाव नहीं है और सभी धर्मों की धार्मिक प्रथाओं को संरक्षित करना उसका एक संवैधानिक दायित्व...

SARFAESI अधिनियम के तहत प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद दीवानी मामले पर गौर नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
SARFAESI अधिनियम के तहत प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद दीवानी मामले पर गौर नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने श्री आनंदकुमार मिल्स बनाम इंडियन ओवरसीज बैंक के मामले में कहा कि सिक्यूरिटाईजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ़ फाइनेंसियल एसेट्स एंड एन्फोर्समेंट ऑफ़ सिक्यूरिटी इंटरेस्ट (SARFAESI) अधिनियम, 2002 के तहत कार्यवाही शुरू हो जाती है तो उसके बाद दीवानी मामले पर गौर नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर बनुमथी की पीठ ने मद्रास हाई कोर्ट के 2010 के एक आदेश के खिलाफ एक याचिका की सुनवाई करते हुए यह बात कही। पीठ ने कहा कि SARFAESI अधिनियम की धारा 34 के तहत दीवानी अदालत का...

छुट्टी शुरू होने से एक दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस काथावाला तड़के 3:30 बजे तक कोर्ट में बैठे
छुट्टी शुरू होने से एक दिन पहले बॉम्बे हाईकोर्ट के जस्टिस काथावाला तड़के 3:30 बजे तक कोर्ट में बैठे

न्यायमूर्ति शाहरुख जिमी काथावाला तड़के 3:30 बजे तक कोर्ट में बैठे थे, ताकि ग्रीष्मकालीन अवकाश शुरू होने से पहले अदालत के आखिरी दिन अपने बोर्ड में सूचीबद्ध सभी मामलों की सुनवाई पूरी हो सके। यह अभूतपूर्व है लेकिन जस्टिस काथावाला बॉम्बे बार में ऐसे व्यक्ति के रूप में जाने जाते हैं जो दिन के अंत से पहले बोर्ड पर सूचीबद्ध सभी मामलों को पूरा करते हैं। आम तौर पर सौ या सो से अधिक मामले उनके बोर्ड पर सूचीबद्ध होते हैं और न्यायमूर्ति काथावाला सुनिश्चित करते हैं कि सभी मामले सुनें।इससे पहले  जस्टिस...