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झारखंड के मुख्यमंत्री का न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटना दुखद; झारखंड हाई कोर्ट में इस बाबत जनहित याचिका दाखिल

LiveLaw News Network
15 Feb 2018 11:50 AM GMT
झारखंड के मुख्यमंत्री का न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटना दुखद; झारखंड हाई कोर्ट में इस बाबत जनहित याचिका दाखिल
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झारखंड हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है कि चूंकि झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के खिलाफ एक आपराधिक मामला चल रहा है, इसलिए उनको न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र नहीं बांटना चाहिए था। दास ने झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के एक कार्यक्रम में ये नियुक्ति पत्र बांटे हैं।

अपनी याचिका में दीवान इन्द्रानील सिन्हा ने कहा कि वह यह देखकर दुखी हुए कि दास नियुक्तिपत्र बाँट रहे थे। उन्हें जानकार और भी दुःख हुआ कि झालसा हाई कोर्ट का अभिन्न हिस्सा है और फिर भी उनको इस तरह के गैरकानूनी कार्य करने की अनुमति दी गई।

सिंह ने आरोप लगाया कि “...इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन करने वालों ने यह संदेश दिया है कि मुख्य मुकदमादार, जैसे कि झारखंड राज्य जिसके मुखिया दास हैं, एक ऐसे व्यक्ति हैं जिनको राज्य के न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बांटने का अधिकार है और उनको इस पर नियंत्रण भी है जबकि ऐसानहीं’ है”

उन्होंने कहा कि दास को इस कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए था और न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति में राज्य सरकार की कोई भूमिका नहीं होती और ऐसा लगना भी नहीं चाहिए कि वे ऐसा करते हैं।

सिंह ने आगे कहा, “...यह भी विचारणीय है कि झालसा के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री को मंच उपलब्ध कराया गया ताकि वह उन न्यायिक अधिकारियों को नियुक्ति पत्र बाँट सकें जिन्होंने अपनी योग्यता के बल पर नियुक्ति पाई है और जो भविष्य में दीवानी और आपराधिक मामलों की सुनवाई करेंगे और हो सकता है कि इन्हीं में से किसी व्यक्ति को रघुबर दास के मामले (W.P(PIL) No.4306/2013) से भी दो-चार होना पड़े ...और तब जाकर उनको यह पता चले कि जिस व्यक्ति ने उनको नियुक्ति पत्र बांटे थे वह और कोई नहीं बल्कि एक मामले में आरोपी है।”

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