Top
Begin typing your search above and press return to search.
मुख्य सुर्खियां

वीरभद्र सिंह को उनके खिलाफ आय से अधिक मामले में सीबीआई की जांच की प्रकृति क्या हो इस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया

LiveLaw News Network
13 Feb 2018 12:03 PM GMT
वीरभद्र सिंह को उनके खिलाफ आय से अधिक मामले में सीबीआई की जांच की प्रकृति क्या हो इस पर जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया
x

न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्य मंत्री वीरभद्र सिंह को सीबीआई के इस आग्रह पर कि राज्य में हुए किसी अपराध की जांच के लिए कार्रवाई की प्रकृति क्या होनी चाहिए यह बताने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।

आय से अधिक संपत्ति रखने के मामले में जांच का सामना कर रहे सिंह के वकील कपिल सिबल ने पीठ से कहा कि सीबीआई को जवाब देने के लिए अधिक समय की जरूरत है।

गत माह, पीठ ने सिंह को सीबीआई के कहने पर नोटिस जारी किया था। दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा सिंह के खिलाफ जांच के लिए सीमित अनुमति देने के निर्णय को सीबीआई ने चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने 31 मार्च 2017 को आदेश पास कर कहा कि राज्य की अनुमति के बारे में निर्णय सुनवाई अदालत लेगी।

सीबीआई के अनुसार, दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान  (डीएसपीई) अधिनियम, 1946 की धारा 6 राज्य सरकार से अनुमति की प्रकृति के बारे में कोई चर्चा नहीं करता इसलिए उसे इस बारे में स्पष्टीकरण के लिए सुप्रीम कोर्ट में आना पड़ा है क्योंकि यह उसकी जांच की शक्ति को प्रभावित करेगा।

इससे पहले, सीबीआई ने हाई कोर्ट के समक्ष कहा था कि 24 अगस्त 1990 को हिमाचल प्रदेश सरकार ने अनुमति दी थी जिसके अनुसार राज्य में तैनात केंद्र सरकार के कमर्चारियों के खिलाफ अपराधों की जांच की जा सकती है।

सिंह ने हाई कोर्ट में कहा था कि वह केंद्र सरकार के किसी विभाग या फिर किसी अन्य केन्द्रीय संस्थान के हिमाचल प्रदेश के भूभाग में तैनात कोई अधिकारी नहीं हैं।

हाई कोर्ट ने हालांकि कहा था कि इस बारे में निर्णय निचली अदालत करेगी।

हाई कोर्ट ने वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी के खिलाफ आय से अधिक मामले में सीबीआई की जांच में हस्तक्षप करने से यह कहते हुए मना कर दिया था कि उन्हें नहीं लगता कि उनके खिलाफ दायर एफआईआर कोई राजनीतिक हथकंडा है।

कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के 1 अक्टूबर 2015 के अंतरिम आदेश को निरस्त कर दिया था जिसमें सीबीआई को इस मामले में कोर्ट की अनुमति के बिना उनको गिरफ्तार करने, उनसे पूछताछ करने या उनके खिलाफ चार्ज शीट दाखिल करने से रोक दिया गया था।

सितम्बर 2015 में सीबीआई ने सिंह के खिलाफ 2009 से 2011 के बीच यूपीए सरकार में केंद्रीय इस्पात मंत्री रहते हुए अपनी ज्ञात आय से अधिक 6.1 करोड़ की संपत्ति रखने के आरोपों की जांच के लिए एफआईआर दर्ज किया था।

Next Story