मुख्य सुर्खियां

स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश में डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन अंक की वैधता की जांच अब पांच जजों की संविधान पीठ करेगी
स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश में डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन अंक की वैधता की जांच अब पांच जजों की संविधान पीठ करेगी

 सुप्रीम कोर्ट की पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ अब यह जांच करेगी कि क्या राज्य में स्नातकोत्तर मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए दूरस्थ / पहाड़ी क्षेत्रों में कार्यरत डॉक्टरों के लिए प्रोत्साहन अंक प्रदान किए जा सकते हैं। जस्टिस कुरियन जोसेफ,जस्टिस एम एम शांतनागौदर और जस्टिस नवीन सिन्हा की तीन जजों की पीठ ने शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को तमिलनाडु मेडिकल डॉक्टर एसोसिएशन और अन्य लोगों द्वारा दाखिल याचिकाओं के लिए  बड़ी पीठ के फैसले के लिए भेज दिया।याचिकाओं में पोस्ट ग्रेजुएट...

थैलिसीमिया मेजर से ग्रस्त होने के 5 महीने बाद डॉक्टर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, MCI ने PG कोर्स को दिव्यांग अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाया
थैलिसीमिया मेजर से ग्रस्त होने के 5 महीने बाद डॉक्टर पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, MCI ने PG कोर्स को दिव्यांग अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाया

नए विनियमन में 21 दिव्यांगता के लिए 5% आरक्षण का प्रावधानथैलिसीमिया मेजर से पीड़ित होने के पांच महीने बाद एक डॉक्टर ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। डॉक्टर को दिव्यांगता प्रमाणपत्र चाहिए था ताकि वह स्नातकोत्तर में दिव्यांगता कोटे के तहत प्रवेश ले सके। मेडिकल काउंसिल ऑफ़ इंडिया (एमसीआई) ने पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन रेगुलेशन्स, 2000 को संशोधित किया है ताकि वह दिव्यांग अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप हो सके और 21 तरह की दिव्यांगता के लिए आरक्षण दिया जा सके।इस संशोधित विनियमन को 5 अप्रैल को गजट...

हत्या के आरोपी को अपर्याप्त कानूनी मदद : पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा निरस्त की, मामले की दुबारा सुनवाई करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
हत्या के आरोपी को अपर्याप्त कानूनी मदद : पटना हाई कोर्ट ने मौत की सजा निरस्त की, मामले की दुबारा सुनवाई करने को कहा [निर्णय पढ़ें]

पटना हाई कोर्ट हत्या के एक मामले में दुबारा सुनवाई का आदेश दिया है। आरोपी की मौत की सजा को निरस्त करते हुए कोर्ट ने कहा कि आरोपी को पर्याप्त कानूनी मदद उपलब्ध नहीं कराई गई।यह मामला दो नाबालिग बच्चों की हत्या का है। सुनवाई अदालत ने अभियोजन पक्ष के छह गवाहों की गवाही के आधार पर आरोपी को मौत की सजा सुनाई थी।अपील के दौरान हाई कोर्ट में कहा गया कि गरीबी के कारण आरोपी नियमित रूप से अपना वकील नहीं रख सका और यही कारण है कि छह में से पांच गवाहों से कोई वकील पूछताछ नहीं कर पाया। यह भी कहा गया कि ज्ञापक,...

राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का हाई कोर्ट का जज होना आवश्यक नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
राज्य बिजली नियामक आयोग के अध्यक्ष का हाई कोर्ट का जज होना आवश्यक नहीं है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने वृहस्पतिवार को कहा कि यह जरूरी नहीं है कि राज्य बिजली नियामक आयोग (एसईआरसी) का अध्यक्ष हाई कोर्ट का कोई जज ही हो। आयोग राज्य में बिजली शुल्कों का निर्धारण करता है।न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ ने गौर किया कि बिजली अधिनियम, 2003 के अनुसार, राज्य आयोग का अध्यक्ष हाई कोर्ट का कोई जज “हो सकता” है जबकि केंद्रीय आयोग का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट का कोई जज या हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश हो सकता है।इसके बाद पीठ ने कहा कि अधिनियम राज्य को आयोग के अध्यक्ष के...

केरल सरकार ने SC/ST एक्ट के कठोर प्रावधानों को कमजोर करने संबंधी SC के फैसले पर पुनर्विचार/ वापस लेने की याचिका दाखिल की [याचिका पढ़े]
केरल सरकार ने SC/ST एक्ट के कठोर प्रावधानों को कमजोर करने संबंधी SC के फैसले पर पुनर्विचार/ वापस लेने की याचिका दाखिल की [याचिका पढ़े]

केंद्र सरकार के बाद  सर्वोच्च न्यायालय के एससी / एसटी अधिनियम के कड़े प्रावधानों पर सुरक्षा उपाय के दिशानिर्देश देने और तत्काल गिरफ्तारी पर रोक के फैसले के लगभग एक महीने बाद केरल सरकार ने मार्च 20 के फैसले के पुनर्विचार/ वापस लेने के सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।वकील जी प्रकाश द्वारा दायर अपनी याचिका में  केरल सरकार ने  कहा कि "अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति के लोगों की रक्षा के लिए पेश किए गए अत्याचार अधिनियम के प्रावधानों को उपरोक्त निर्देशों ने निरस्त कर दिया है।”यह कहा गया है कि 20...

CrPC की धारा 199 (2) लागू करने के लिए कथित मानहानि वक्तव्य का CM के सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित संबंध होना चाहिए : SC [निर्णय पढ़ें]
CrPC की धारा 199 (2) लागू करने के लिए कथित मानहानि वक्तव्य का CM के सार्वजनिक कर्तव्यों के निर्वहन के साथ उचित संबंध होना चाहिए : SC [निर्णय पढ़ें]

धारा 199 (2) और 199 (4) (सीआरपीसी) एक आंतरिक सुरक्षा प्रदान करते हैं, जिसके लिए  लोक  अभियोजक को स्कैन करने और सामग्री के साथ संतुष्ट होने की आवश्यकता होती है क्यो कि मानहानि के लिए शिकायत लोक अभियोजक के रूप में करनी है,  अदालत ने कहा। सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी अंतर्निहित शक्तियों को इस्तेमाल करते हुए  मध्य प्रदेश में कांग्रेस के प्रमुख प्रवक्ता के खिलाफ आपराधिक  कार्यवाही बंद कर दी, जिसमें एक प्रेस कांफ्रेंस में राज्य के मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि वाला बयान देने का...

कठुआ रेप व हत्या केस : सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के रुकावट पैदा करने पर संज्ञान लिया, बार काउंसिल और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा [याचिका पढ़े]
कठुआ रेप व हत्या केस : सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के रुकावट पैदा करने पर संज्ञान लिया, बार काउंसिल और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा [याचिका पढ़े]

"कानून की प्रक्रिया में रुकावट और न्याय देने , से रोकन और वह भी वकीलों द्वारा, उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता और ये अनैतिक है। वकील किसी को न्याय तक पहुंचने से नहीं रोक सकते “ "कानून और नैतिकता के तहत आरोप पत्र दाखिल करने या वकील द्वारा शिकार के परिवार के प्रतिनिधित्व के विरोध को अनुमति नहीं दी जा सकती। किसी भी अदालत के सामने हर पक्षकार वकील को संलग्न करने का हकदार है और अगर अधिवक्ताओं ने इस सिद्धांत का विरोध किया है, तो यह न्याय व्यवस्था प्रणाली के विनाशकारी होगा।“कठुआ में  8 वर्षीय लड़की से...

मास्टर ऑफ रोस्टर का CJI का अधिकार इसी शर्त पर कि अधिकार का इस्तेमाल सही तरीके से होगा: दवे और सिब्बल ने शांति भूषण की याचिका पर दी दलील
मास्टर ऑफ रोस्टर का CJI का अधिकार इसी शर्त पर कि अधिकार का इस्तेमाल सही तरीके से होगा: दवे और सिब्बल ने शांति भूषण की याचिका पर दी दलील

जस्टिस ए के सीकरी और अशोक भूषण की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने शुक्रवार को पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ वकील शांति भूषण द्वारा दायर याचिका के संबंध में अटॉर्नी जनरल की सहायता के लिए अनुरोध किया है जिसमें ‘ मास्टर ऑफ रोस्टर’ के तौर पर  भारत के मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक प्राधिकरण का स्पष्टीकरण मांगा गया है। "आप प्रार्थना कर रहे हैं कि 'भारत के मुख्य न्यायाधीश' के लिए कोई भी संदर्भ सर्वोच्च न्यायालय के 5 वरिष्ठ न्यायाधीशों के एक महाविद्यालय (मुख्य न्यायमूर्ति द्वारा प्रशासनिक शक्तियों के...

सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी हिरासत संबंधी आदेश पर अगर हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है तो उस आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसने सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर भरोसा किया था जिसे अब तीन जजों की पीठ ने पलट दिया है।मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त एवं अन्य बनाम गुरबक्स आनंदराम भिरयानी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए और हाई कोर्ट के एक अन्य फैसले ने हिरासत से संबंधित एक...

आधार को जोड़ने के नाम पर पेंशन के भुगतान में देरी नहीं हो सकती, CIC ने कहा [आर्डर पढ़े]
आधार को जोड़ने के नाम पर पेंशन के भुगतान में देरी नहीं हो सकती, CIC ने कहा [आर्डर पढ़े]

यहां तक ​​कि इसे आधार के साथ जोड़ना जरूरी भी है तो भुगतान में देरी नहीं होनी चाहिए  या  पेंशन के बारे में जानकारी देने से इनकार नहीं किया जा सकता,  प्रोफेसर एम श्रीधर आचार्युलु ने कहा।केन्द्रीय सूचना आयोग ने कहा है कि सार्वजनिक प्राधिकारी वरिष्ठ नागरिकों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को पेंशन के भुगतान को आधार से जोड़ने के नाम पर देरी नहीं कर सकते।पेंशनर मुख्य रूप से अपनी आजीविका के लिए पेंशन पर निर्भर करते हैं और देरी करना अमानवीय होगा और ये जीवन के मौलिक अधिकार को अस्वीकार करने जैसा होगा।यहां तक...

पट्टे की भूमि पर लिए जाने वाले एकमुश्त प्रीमियम पर जीएसटी की वसूली जायज : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पट्टे की भूमि पर लिए जाने वाले एकमुश्त प्रीमियम पर जीएसटी की वसूली जायज : बॉम्बे हाई कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाई कोर्ट ने केंद्रीय औद्योगिक और विकास निगम महाराष्ट्र लिमिटेड (सिडको) द्वारा पट्टे पर दिए जाने वाली जमीन पर एक बार वसूले जाने वाले जीएसटी शुल्क को जायज माना है.न्यायमूर्ति एससी धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति पीडी नाइक ने नवी मुंबई एवं अन्य स्थानों के बिल्डर एसोसिएशन की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया। इन लोगों ने इस तरह की जमीन पर एक मुश्त लगाए जाने वाले 18% जीएसटी का विरोध किया है और अपनी याचिका में सिडको को यह राशि नहीं वसूलने का आदेश देने की मांग की है।मामले की पृष्ठभूमिसिडको...

SC/ ST अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हंगामा, गुस्सा और सौहार्द बिगड़ा : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा [लिखित सबमिशन पढ़ें]
SC/ ST अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हंगामा, गुस्सा और सौहार्द बिगड़ा : केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा [लिखित सबमिशन पढ़ें]

संविधान में गठित 'शक्तियों के पृथक्करण' के बारे में सुप्रीम कोर्ट को याद दिलाने के अलावा, AG केके वेणुगोपाल ने लिखित प्रस्तुतियां में कहा: "पूरे फैसले को इस तथ्य के आधार पर दिया गया है  कि अदालत अपनी “ शक्तियों का सहारा' लेकर कानून बना सकती है और कानून बनाने की शक्ति वहां है जहां इसका कोई भी अस्तित्व नहीं है।” उच्चतम न्यायालय को मार्च 20, 2018 के उस आदेश को वापस लेने, जिसमें एससी / एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने से पहले जांच  और स्वचालित गिरफ्तारी पर प्रतिबंध लगाने से पहले...

ट्रांसफर याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी एक पक्ष की सुविधा अभियोजन, अन्य आरोपियों, गवाहियों और समाज के हितों की अनदेखी न करे [आदेश पढ़ें]
ट्रांसफर याचिका : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, किसी एक पक्ष की सुविधा अभियोजन, अन्य आरोपियों, गवाहियों और समाज के हितों की अनदेखी न करे [आदेश पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने आपराधिक मामलों के ट्रांसफर की अर्जी के बारे में महत्त्वपूर्ण बातें कही है। कोर्ट ने कहा है कि किसी पक्ष को सुविधा देने का मतलब यह नहीं है कि दूसरे पक्ष की सुविधाओं का ध्यान नहीं रखा जाए। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की स्थिति में अभियोजन, दूसरे आरोपी, गवाहों और समाज के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए।मामले को ट्रांसफर करने की एक अपील को खारिज करते हुए न्यायमूर्ति एके गोएल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि हो सकता है कि कोई पक्ष अपनी सुविधा के लिए मामले को ट्रांसफर कराना चाहता हो पर वह...

मणिपुर हाई कोर्ट में सिर्फ दो जज : सुप्रीम कोर्ट ने अंतरअदालतीय अपील को गुवाहाटी हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया [आर्डर पढ़े]
मणिपुर हाई कोर्ट में सिर्फ दो जज : सुप्रीम कोर्ट ने अंतरअदालतीय अपील को गुवाहाटी हाई कोर्ट में ट्रांसफर किया [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट को मणिपुर सरकार द्वारा दायर एक बहुत ही दिलचस्प ट्रांसफर याचिका पर सुनवाई का मौक़ा मिला।राज्य ने एक मामले को मणिपुर हाई कोर्ट से इस आधार पर गुवाहाटी हाई कोर्ट ट्रांसफर करने का आग्रह किया कि हाई कोर्ट में सिर्फ दो ही जज हैं और इनमें से एक जज द्वारा दिए गए आदेश को एक खंडपीठ में चुनौती दिया जाना है। चूंकि हाई कोर्ट में सिर्फ दो ही जज हैं, अंतरअदालतीय मामले की सुनवाई के लिए खंडपीठ का गठन नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति के नोबिन सिंह ने नलिनीबाला देवी को एक याचिका दायर करने की अनुमति दे दी...

कठुआ बलात्कार मामला : वकीलों के संगठन ने चार्ज शीट रोकने के लिए किया कठुआ के वकीलों की निंदा
कठुआ बलात्कार मामला : वकीलों के संगठन ने चार्ज शीट रोकने के लिए किया कठुआ के वकीलों की निंदा

लॉयर्स फोरम फॉर डेमोक्रेसी एंड जस्टिस ने एक प्रेस बयान जारी कर कठुआ, जम्मू-कश्मीर में आठ साल की लड़की के साथ बलात्कार करने और फिर उसकी हत्या कर दिए जाने के मामले में चार्ज शीट में रुकावट डालने के कुछ वकीलों के प्रयास की निंदा की है।फोरम ने इस प्रयास को “शर्मनाक और कानूनी बिरादरी” पर एक कलंक बताया है। उसने जम्मू-कश्मीर के बार काउंसिल और बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया को इन वकीलों के खिलाफ उपयुक्त कार्रवाई करने को कहा है। फोरम ने जम्मू-कश्मीर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से आग्रह है कि इस मामले को अन्य राज्य...

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दो से अधिक बच्चों के पिता और डीजे बनने की ख्वाहिश रखने वाले व्यक्ति को योग्य ठहराने को सही बताया [निर्णय पढ़ें]
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने दो से अधिक बच्चों के पिता और डीजे बनने की ख्वाहिश रखने वाले व्यक्ति को योग्य ठहराने को सही बताया [निर्णय पढ़ें]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक जिला जज के उस फैसले को सही ठहराया है जिसमें उन्होंने जिला जज के लिए मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार पास करने वाले एक महिला को इसलिए योग्य ठहरा दिया है क्योंकि उसके दो से अधिक बच्चे हैं और यह मध्य प्रदेश सिविल सेवा परीक्षा (सेवा की सामान्य परिस्थिति) नियम, 1961 के खिलाफ है।हाई कोर्ट द्वारा जारी विज्ञापन के अनुबंध 3 में यह स्पष्ट कहा गया है कि अगर कोई उम्मीदवार एमपी उच्च न्यायिक सेवा नियम 1994 और एमपी सिविल सेवा नियम, 1961 का पालन नहीं करता तो उसे योग्य घोषित कर दिया...

दिल्ली हाईकोर्ट ने उच्च योग्यता डिग्री धारक को NET सर्टिफिकेट ना देने पर UGC को लगाई फटकार [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने उच्च योग्यता डिग्री धारक को NET सर्टिफिकेट ना देने पर UGC को लगाई फटकार [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को  निर्धारित योग्यता से उच्च योग्यता की डिग्री हासिल करने वाले उम्मीदवार को राष्ट्रीय योग्यता परीक्षा (NET) प्रमाण पत्र देने से इनकार करने पर कड़ी फटकार लगाई।"यदि मास्टर  डिग्री NET के लिए न्यूनतम पात्रता योग्यता है, तो उच्च योग्यता की डिग्री वाले उम्मीदवार भी NET  के लिए पात्र होंगे," न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा।दीक्षा लांबा द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था जिसमें यूजीसी ने  एक पत्र द्वारा दिसंबर, 2012 में आयोजित...

न्यायिक कार्य से दूर रहने का आह्वान करना एडवोकेट के मौलिक अधिकार का हनन है : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वकीलों से काम पर लौटने को कहा [आर्डर पढ़े]
न्यायिक कार्य से दूर रहने का आह्वान करना एडवोकेट के मौलिक अधिकार का हनन है : मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वकीलों से काम पर लौटने को कहा [आर्डर पढ़े]

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी को भी न्यायिक कार्य से दूर रहने का आह्वान करना उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। कोर्ट ने कहा कि राज्य बार काउंसिल का वकीलों को सप्ताह भर कार्य नहीं करने और का आह्वान करने का निर्णय गैर कानूनी और असंवैधानिक है।मुख्य न्यायाधीश हेमंत गुप्ता के नेतृत्व वाली पीठ ने राज्य के वकीलों से तत्काल काम शुरू करने को कहा है ताकि जरूरतमंदों, गरीबों, विचाराधीन कैदियों और अन्य लोग जो न्याय पाना चाहते हैं उनको कोई नुकसान नहीं हो।इस बारे में एक वकील प्रवीण पांडेय ने जनहित...

सुप्रीम कोर्ट ने महिला व नाबालिग बेटे को सरंक्षण दिया, शक्तिशाली ससुराल वालों के उत्पीड़न से बचाने की लगाई है गुहार
सुप्रीम कोर्ट ने महिला व नाबालिग बेटे को सरंक्षण दिया, शक्तिशाली ससुराल वालों के उत्पीड़न से बचाने की लगाई है गुहार

एक NRI महिला को राहत देते हुए  सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन मामलों में महिला और उसके नाबालिग बेटे  के खिलाफ कोई दंडनात्कम कदम ना उठाया जिन्हें कथित तौर पर उसके बहिष्कृत पति और संयुक्त खुफिया समिति के पूर्व अध्यक्ष उनके ससुर ने जांच एजेंसियों की मदद से डराने के लिए दर्ज कराया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड की पीठ ने  महिला [नाम नहीं दिया गया है] और उसके 10 वर्षीय बेटे के पक्ष में दाखिल ऑल इंडिया वीमेन कांफ्रेंस की याचिका पर ये आदेश...

उड़ीसा हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायत करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत [आर्डर पढ़े]
उड़ीसा हाई कोर्ट के जजों के खिलाफ शिकायत करने वाले आरटीआई कार्यकर्ता को सुप्रीम कोर्ट ने दी जमानत [आर्डर पढ़े]

जेल में आठ महीना बिताने के बाद आरटीआई कार्यकर्ता जयंत कुमार दास को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दे दी है। दास ने उड़ीसा हाई कोर्ट के दो वर्तमान जजों के खिलाफ शिकायत की थी। इन जजों के खिलाफ इस समय अदालती जांच चल रही है। यह दूसरा मामला है जब कटक के लालबाग़ पुलिस ने 8 अगस्त को पिछले वर्ष दास को गिरफ्तार किया क्योंकि उसने भगवान जगन्नाथ और गजपति राजा दिब्यासिंह देब के खिलाफ फेसबुक पर टिप्पणी की थी।पिछले महीने उड़ीसा हाई कोर्ट ने उसे साइबर स्टाकिंग मामले में जमानत दी थी जिसमें उसको छह साल के जेल की सजा हुई थी।...