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कठुआ रेप व हत्या केस : सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के रुकावट पैदा करने पर संज्ञान लिया, बार काउंसिल और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा [याचिका पढ़े]

LiveLaw News Network
14 April 2018 8:12 AM GMT
कठुआ रेप व हत्या केस : सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों के रुकावट पैदा करने पर संज्ञान लिया, बार काउंसिल और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा [याचिका पढ़े]
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"कानून की प्रक्रिया में रुकावट और न्याय देने , से रोकन और वह भी वकीलों द्वारा, उसे कभी माफ नहीं किया जा सकता और ये अनैतिक है। वकील किसी को न्याय तक पहुंचने से नहीं रोक सकते “

 "कानून और नैतिकता के तहत आरोप पत्र दाखिल करने या वकील द्वारा शिकार के परिवार के प्रतिनिधित्व के विरोध को अनुमति नहीं दी जा सकती। किसी भी अदालत के सामने हर पक्षकार वकील को संलग्न करने का हकदार है और अगर अधिवक्ताओं ने इस सिद्धांत का विरोध किया है, तो यह न्याय व्यवस्था प्रणाली के विनाशकारी होगा।“

कठुआ में  8 वर्षीय लड़की से बलात्कार और हत्या के मामले में वकालों द्वारा पुलिस को आरोपपत्र दाखिल करने से रोकने पर  गंभीर कदम उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मामले की संज्ञान लेकर कार्रवाई की और कठुआ बार एसोसिएशन और जम्मू बार एसोसिएशन को नोटिस जारी किया।  कोर्ट ने  कहा है कि "न्याय और कानून की प्रक्रिया में अवरोध और वह भी वकीलों द्वारा, कभी माफ़ नहीं किया जा सकता।"  मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड की पीठ ने अदालत में पेश होने वाली पीड़ितों के महिला वकील को रोकने के लिए अधिवक्ताओं के प्रयासों को भी गंभीरता से लिया। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया और बार एसोसिएशन को भी नोटिस जारी किया है और सभी पक्षों से  19 अप्रैल तक जवाब मांगा है।

दरअसल सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के एक समूह ने बेंच को ध्यान दिलाया था जिन्होंने बेंच से आग्रह किया था कि इस मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया जाए।  दोपहर में आदेश पारित करने वाली पीठ ने वकीलों से कहा था कि कुछ सामग्रियों को अदालत के सामने लाया जाए जिसके बाद इस घटना को दो पेज विवरण के रूप में दाखिल किया गया था। दायर याचिका में आग्रह किया गया था कि  ये सिस्टम के लिए आघात है, जो कानून के शासन के सिद्धांत पर आधारित है और कानून की नजर में सबको बराबर संरक्षण पर विश्वास रखता है।  जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, बार कॉउंसिल ऑफ जम्मू कश्मीर और DGP को नोटिस जारी कर डिटेल रिपोर्ट देने को कहा जाए। जम्मू कश्मीर बार एसोसिएशन को आदेश दिया जाए कि राजनीतिक फायदे के लिए कानून को हाथ में न ले और कानून में बाधा न पहुँचाएं। जम्मू कश्मीर राज्य सरकार को इस बाबत विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा जाए। परिवार के तरफ से पेश होने वाले वकील को पर्यापत सुरक्षा दी जाए और उन्हें भी रिपोर्ट देने को कहा जाए।”

 जम्मू और कश्मीर के वकील एम शोएब आलम ने शुरू में प्रस्तुत किया कि इस समय सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि राज्य पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल करने से पुलिस को रोकने के प्रयास के लिए कुछ वकीलों  के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर दी है। जम्मू-कश्मीर और कठुआ बार के वकीलों ने अपराध शाखा को 7 आरोपियों के खिलाफ सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में आरोपपत्र दाखिल करने से रोक दिया था। याचिका में कहा गया कि इस याचिका के लिए जानकारी का स्रोत कठुआ बलात्कार मामले से संबंधित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है जिसमें जम्मू एवं कश्मीर जिले के कठुआ जिले के रसना गांव में आठ साल की लड़की की बेरहमी से बलात्कार और हत्या कर दी गई।


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