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सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
14 April 2018 6:08 AM GMT
सिर्फ इसलिए कि हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है, हिरासत के आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
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सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि सिर्फ इसलिए कि किसी हिरासत संबंधी आदेश पर अगर हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं है तो उस आदेश को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसने सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले पर भरोसा किया था जिसे अब तीन जजों की पीठ ने पलट दिया है।

मद्रास हाई कोर्ट ने पुलिस आयुक्त एवं अन्य बनाम गुरबक्स आनंदराम भिरयानी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार बनाते हुए और हाई कोर्ट के एक अन्य फैसले ने हिरासत से संबंधित एक फैसले को निरस्त कर दिया था क्योंकि इसमें हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं था।

राज्य ने इसके बाद सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया और कहा कि यद्यपि हिरासत की अवधि समाप्त हो चुकी है, हाई कोर्ट के निर्णय में कानूनी स्थिति के बारे में बयान को सही करना जरूरी है।

मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि टी देवकी बनाम तमिलनाडु सरकार के मामले में दिए गए फैसले में यह कहा गया है कि कानून इस बात की जरूरत नहीं है कि हिरासत देने वाला अथॉरिटी इस बात का भी जिक्र करे कि हिरासत में भेजे जाने वाले व्यक्ति की हिरासत की अवधि क्या होगी, हिरासत में लेने का आदेश व्यर्थ या गैर कानूनी नहीं हो जाता क्योंकि इस बात का खुलासा नहीं किया गया है।

न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ ने पीठ की ओर से कहा, “आदेश में हिरासत की अवधि का जिक्र नहीं होने के कारण हिरासत के आदेश को निरस्त करके हाई कोर्ट ने ठीक नहीं किया है। भिरयानी के मामले में इस कोर्ट के फैसले के आधार पर हाई कोर्ट ने यह फैसला दिया है जो कि इसके बाद देवकी के मामले में एक बड़ी पीठ द्वारा दिए गए फैसले के बाद एक अच्छा क़ानून नहीं रहा। शांति मामले में हाई कोर्ट का निर्णय जो कि भिरयानी मामले में दिए गए फैसले की तरह ही है, सही कानूनी स्थिति को नहीं दर्शाएगा।


 
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