मुख्य सुर्खियां

अगर उम्र के आधार पर पीड़ित को संदेह का लाभ देने की बात हो तो यह लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर उम्र के आधार पर पीड़ित को संदेह का लाभ देने की बात हो तो यह लाभ आरोपी को दिया जाना चाहिए : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाइकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पीड़ित के उम्र में संदेह का लाभ आरोपी को मिलना चाहिए।न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा ने इसको स्पष्ट करते हुए कहा कि पीड़ित की उम्र को मेडिकल परीक्षण में जो पता चला है उसके तहत उसकी ऊपरी सीमा को ध्यान में रखना चाहिए और इसमें एक से दो साल के ऊपर नीचे को ध्यान में रखा जा सकता है।कोर्ट ने राज्य द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। इस याचिका में निचली अदालत द्वारा राम धल्ल नामक एक आरोपी को बच्चों के प्रति क्रूरता के अपराध में जूवेनाइल जस्टिस (केयर...

मैंने बिना भय और पक्षपात के सेवा की, एक मुस्कान से ही जीवन सार्थक : जस्टिस कुरियन जोसफ
मैंने बिना भय और पक्षपात के सेवा की, एक मुस्कान से ही जीवन सार्थक : जस्टिस कुरियन जोसफ

सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हुए जस्टिस कुरियन जोसफ ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में आयोजित विदाई समारोह में कहा कि उन्होंने हमेशा बिना किसी भय और पक्षपात के ही सेवा की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने हमेशा अपना सर्वश्रेष्ठ दिया और स्पष्ट विवेक से फैसले किए।जस्टिस कुरियन ने कहा, “  मैं पूरी दुनिया को बता सकता हूं कि मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। कोई भी पूर्णता का दावा नहीं कर सकता।”इस मौके पर उन्होंने कहा कि कानून जगत से जुड़े लोगों की चुप्पी  समाज को अधिक नुकसान पहुंचाती है। यदि वकील चुप हैं...

अगर नियोक्ता (राज्य) चुने हुए उम्मीदवारों की नियुक्ति नहीं करता है तो उसे इसका उचित कारण देना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर नियोक्ता (राज्य) चुने हुए उम्मीदवारों की नियुक्ति नहीं करता है तो उसे इसका उचित कारण देना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब इतनी भारी संख्या में पद ख़ाली हैं और उम्मीदवारों के चयन की प्रकिया का पालन किया गया है तो नियोक्ता को कोर्ट के संतुष्ट होने तक यह बताना होगा कि उसने चुने हुए उम्मीदवारों की नयुक्ति क्यों नहीं की, भले ही वे स्थानापन्न पैनल से ही क्यों ना हों।न्यायमूर्ति कुरीयन जोसफ़,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की तीन सदस्यीय पीठ ने दिनेश कुमार कश्यप बनाम दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे मामले में एक अपील पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। इस याचिका में कहा गया है कि नियुक्ति...

मेघालय हाईकोर्ट ने सरकार से कहा, शिक्षकों को भिखारी नहीं माना जाए, वे  देश के सर्वाधिक सम्मानित नागरिक और समाज की रीढ़ हैं [निर्णय पढ़ें]
मेघालय हाईकोर्ट ने सरकार से कहा, शिक्षकों को भिखारी नहीं माना जाए, वे देश के सर्वाधिक सम्मानित नागरिक और समाज की रीढ़ हैं [निर्णय पढ़ें]

राज्य के शिक्षकों को भारी राहत दिलाते हुए मेघालय हाइकोर्ट ने सरकार से कहा कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक, भले ही वे तदर्थ नियुक्ति वाले हों या सहायताप्राप्त, सेवाओं के मामले में बराबर हैं और उन्हें समान वेतन, पेंशन और अन्य लाभ मिलना चाहिए।न्यायमूर्ति मोहम्मद याक़ूब मीर और न्यायमूर्ति एसआर सेन की पीठ ने मेघालय कॉलेज टीचर्ज़ असोसीएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। असोसीएशन ने तदर्थ और सहायता प्राप्त शिक्षकों को पेंशन और अन्य नहीं दिए जाने के मुद्दे को इस याचिका में उठाया है।...

रिटायर होने से पहले न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने कहा, मौत की सजा पर फिर से विचार करने की जरूरत, दोषी की सजा उम्रकैज में बदली [निर्णय पढ़ें]
रिटायर होने से पहले न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने कहा, मौत की सजा पर फिर से विचार करने की जरूरत, दोषी की सजा उम्रकैज में बदली [निर्णय पढ़ें]

गुरुवार को रिटायर होने से पूर्व सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठता में तीसरे जज न्यायमूर्ति कुरियन जोसफ ने तीन हत्याओं के दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में बदलते हुए कहा है कि अब वक्त आ गया है जब देश में मौत की सजा के प्रावधान पर फिर से विचार किया जाए। हालांकि पीठ में शामिल न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता का मानना है कि फांसी एक वैद्य सजा है और जब तक ये संविधान में है इस पर विचार करने की जरूरत नहीं है। 2:1  के बहुमत से ये फैसला आया है।बुधवार को सुनाए गए फैसले में पीठ की अगवाई कर रहे...

मौत की सज़ा देने से पहले अपराधी में सुधार की संभावना की तलाश के लिए उसका मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सकीय आकलन होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मौत की सज़ा देने से पहले अपराधी में सुधार की संभावना की तलाश के लिए उसका मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सकीय आकलन होना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मौत की सज़ा देने से पहले उस अपराधी का उचित मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सकीय आकलन होना चाहिए ताकि यह पता किया जा सके कि उसमें सुधार की संभावना है कि नहीं।न्यायमूर्ति कुरीयन जोसफ़,न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने छन्नू लाल वर्मा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में तीन लोगों की हत्या के आरोपी व्यक्ति की मौत की सज़ा को बदल दिया।पीठ ने बच्चन सिंह मामलासहित विभिन्न फ़ैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इस मामले में जो मौत की सज़ा दी गई है वह...

बाद में अगर किसी को फ़्लैट बेचा गया है तो वह भी उपभोक्ता के रूप में शिकायत कर सकता है, इस पर हमेशा प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया [निर्णय पढ़ें]
बाद में अगर किसी को फ़्लैट बेचा गया है तो वह भी उपभोक्ता के रूप में शिकायत कर सकता है, इस पर हमेशा प्रतिबंध नहीं लगाया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘सब्सिकवेंट ट्रांसफ़री’ के उपभोक्ता के रूप में शिकायत पर हमेशा ही प्रतिबंध नहीं लगा है।न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने सीसीआई प्राजेक्ट्स (पी) लिमिटेड बनाम व्रजेंद्र जोगजीवनदास थककर के मामले में कहा कि हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण बनाम राजे राम मामले में आए फ़ैसले को इस हद तक खींचा नहीं जा सकता और यह नहीं कहा जा सकता कि हर समय जब किसी व्यक्ति को बाद में फ़्लैट ट्रान्स्फ़र किया जाता है (यानी जो मूल आवंटी नहीं है), तो इस तरह के व्यक्ति की...

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, बलात्कार की संशोधित परिभाषा फ़रवरी 2013 से पहले हुई घटनाओं पर लागू नहीं होगा; फ़ैसले को बदलकर बलात्कार के आरोपी को बलात्कार के प्रयास का आरोपी बताया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा, बलात्कार की संशोधित परिभाषा फ़रवरी 2013 से पहले हुई घटनाओं पर लागू नहीं होगा; फ़ैसले को बदलकर बलात्कार के आरोपी को बलात्कार के प्रयास का आरोपी बताया

बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा है कि आपराधिक क़ानून (संशोधन) विधेयक 2013 को पिछले प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता। इस आधार पर कोर्ट ने बलात्कार के एक आरोपी की सज़ा को बलात्कार की कोशिश के आरोप में बदल दिया।आरोपी को आईपीसी की धारा 376 (2)(f) के तहत दोषी पाया गया था। न्यायमूर्ति एएम बादर ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई की जिसे अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, मुंबई ने 29 जून 2013 को सज़ा सुनाई थी।पृष्ठभूमिआरोपी दिलीप गवंद पर शांताबेन की पोती के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया। आरोपी ने इससे इनकार किया और कहा कि यह...

पिछले 12 सालों से अलग रह रहे दंपति को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तलाक़ की अनुमति दी [निर्णय पढ़ें]
पिछले 12 सालों से अलग रह रहे दंपति को बॉम्बे हाईकोर्ट ने तलाक़ की अनुमति दी [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने अलग रह रहे दंपति को यह कहते हुए तलाक़ की अनुमति दे दी है कि उनके बीच शादी अब मात्र काल्पनिक रूप में रह गया है।न्यायमूर्ति अमजद सैयद और न्यायमूर्ति सुरेश गुप्ते की पीठ ने कहा कि इस दौरान दोनों के बीच एक ही बार सम्पर्क हुआ जब दोनों ने 12 साल पहले फ़ोन पर बात की। कोर्ट ने कहा, “दोनों के बीच फ़ोन पर 2006 से पहले बात हुई। इस समय हम 2018 में हैं। उनको अलग हुए इतने दिन हो गए हैं और इस दौरान सहवास शुरू करने का कोई प्रयास नहीं किया गया। उनका एकमात्र बेटा अब 23 साल का है और वह अपने बाप...

शेयरधारकों के डेरिवेटिव मुक़दमे पर ग़ौर तभी जब कंपनी कोर्ट के क्षेत्राधिकार को माने : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
शेयरधारकों के डेरिवेटिव मुक़दमे पर ग़ौर तभी जब कंपनी कोर्ट के क्षेत्राधिकार को माने : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी कंपनी के लाभ की रक्षा के लिए दायर किए जाने वाले डेरिवेटिव मुक़दमे पर ग़ौर तभी किया जा सकता है जब कंपनी कोर्ट के इस क्षेत्राधिकार को मानने के लिए तैयार है।न्यायमूर्ति एके सीकरी और न्यायमूर्ति अशोक भूषण की पीठ ने अहमद अब्दुल्ला अहमद अल घूरेर बनाम स्टार हेल्थ एंड ऐलायड इंस्योरेंश कंपनी लिमिटेड के मामले में  इस माले की सुनवाई के बारे में मद्रास हाईकोर्ट के क्षेत्रीयन्यायाधिकार के मुद्दे पर ग़ौर कर रहा था। वादी द्वारा दायर यह मामला दुबई स्थित एक विदेशी कंपनी के...

लंबित आपराधिक मामलों के बारे में उम्मीदवार के बताने के बाद भी नियोक्ता उसकी उपयुक्तता की अलग से जाँच कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
लंबित आपराधिक मामलों के बारे में उम्मीदवार के बताने के बाद भी नियोक्ता उसकी उपयुक्तता की अलग से जाँच कर सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई उम्मीदवार यह घोषणा कर भी देता है कि उसके ख़िलाफ़ आपराधिक मामला लंबित है, नियोक्ता को उसके बारे में जाँच करने और उसकी उपयुक्तता का पता लगाने का अधिकार है।न्यायमूर्ति यूयू ललित और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ मध्य प्रदेश सरकार की याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि नियोक्ता भर्ती के लिए आने वाले उम्मीदवारों की जॉब प्रोफ़ायल पर ग़ौर कर सकता है और इस बात का पता लगा सकता है कि उम्मीदवार के ख़िलाफ़ लगाए गये आपराधिक आरोप...

बीसीआई के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव को ग़लत ठहराने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]
बीसीआई के लिए प्रतिनिधियों के चुनाव को ग़लत ठहराने के मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया [निर्णय पढ़ें]

पीठ ने कहा, किसी सही बैठक के लिए ज़रूरी है कि बैठक की नोटिस के साथ एजेंडा का भी ज़िक्र होसुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को सही ठहराया है जिसमें उसने 2014 में राज्य बार काउंसिल के चुनाव को रद्द कर दिया था। यह चुनाव बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधि चुनने के लिए हुआ था।बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया ने अधिवक्ता सुनील गुप्ता की चुनाव याचिका को ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि अधिवक्ता प्रताप मेहता को बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया का प्रतिनिधि चुने जाने में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है।सुप्रीम कोर्ट...

सुप्रीम कोर्ट में सारी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी : SC ने सभी हाईकोर्ट को मूल रिकॉर्ड का अंग्रेजी अनुवाद भेजने के निर्देश दिए [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट में सारी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में होगी : SC ने सभी हाईकोर्ट को मूल रिकॉर्ड का अंग्रेजी अनुवाद भेजने के निर्देश दिए [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर सभी उच्च न्यायालयों के रजिस्ट्रार जनरल को मूल रिकॉर्ड स्थानीय भाषा से अंग्रेजी भाषा में अनुवाद कर भेजने के निर्देश दिए हैं।न्यायमूर्ति एसए बोबड़े, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 348 में यह अनिवार्य है कि सुप्रीम कोर्ट  में सारी कार्यवाही अंग्रेजी भाषा में की जाएगी।दरअसल पीठ एक आपराधिक अपील सुन रही थी जिसमें मौत की सजा सुनाई गई थी।आरोपी के वकील ने पीठ को बताया कि उन्हें  पोस्ट मॉर्टम रिपोर्ट,...

मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ विशेष अनुमति याचिका को बिना कारण बताए ख़ारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
मौत की सज़ा के ख़िलाफ़ विशेष अनुमति याचिका को बिना कारण बताए ख़ारिज नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जिस मामले में मौत की सज़ा दी गई है उस मामले में दायर विशेष अनुमति याचिका को ख़ारिज करने का कारण बताना ज़रूरी है।इस माह की 1 तारीख़ को न्यायमूर्ति एके सीकरी,न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने दो अलग-अलग मामलों में इस तरह के दो आदेशों को वापस ले लिया जिसमें आरोपी ने अपनी सज़ा के ख़िलाफ़ विशेष अनुमति याचिका दायर की थी।“…अगर विशेष अनुमति याचिका को ख़ारिज कर मौत की सज़ा की पुष्टि की जानी है तो इस बारे में कम से कम सज़ा को लेकर जो आदेश दिया जाता है...

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस्तीफ़ा देना कर्मचारी का अधिकार है जो कि सेवा नियमों के कतिपय शर्तों से जुड़ा है [आर्डर पढ़े]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, इस्तीफ़ा देना कर्मचारी का अधिकार है जो कि सेवा नियमों के कतिपय शर्तों से जुड़ा है [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस्तीफ़ा देना किसी कर्मचारी का अधिकार है और उसकी इच्छा के विरुद्ध उसको काम करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता बशर्ते कि नियुक्ति की शर्तों से जुड़े नियम की शर्तों या कोई अनुशासनात्मक मामला है जो लम्बित है या जिसकी कार्रवाई की बात सोची जा रही है जिससे बचने के लिए ऐसा नहीं किया जा रहा हो।संजय जैन एयर इंडिया में निर्धारित पाँच साल के लिए थे और 30 दिनों का अग्रिम नोटिस देकर उन्होंने इस्तीफ़ा दे दिया। इसके बाद उन्होंने जेट एयरवेज़ ज्वाइन किया और एयर इंडिया से कहा कि वह...

मुफ़्त सर्विस की सुविधा लेने में विलंब का मतलब यह नहीं है कि वाहन की वारंटी समाप्त कर दी जाए, एनसीडीआरसी ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को मुआवज़ा देने को कहा [आर्डर पढ़े]
मुफ़्त सर्विस की सुविधा लेने में विलंब का मतलब यह नहीं है कि वाहन की वारंटी समाप्त कर दी जाए, एनसीडीआरसी ने टाटा मोटर्स और उसके डीलर को मुआवज़ा देने को कहा [आर्डर पढ़े]

अगर कोई वाहन मालिक मुफ़्त में मिलने वाले सर्विस की सुविधा लेने में विलम्ब करता है तो इसका मतलब यह नहीं कि वह अपने वाहन के बारे में लापरवाह है और इस वजह से इस वाहन की वारंटी को समाप्त नहीं किया जा सकता। फ़ोरम ने कहा कि इसके लिए वाहन निर्माता कम्पनी और उसका डीलर दोनों ही ज़िम्मेदार है और एनसीडीआरसी ने दोनों को वाहन मालिक को मुआवज़ा देने का आदेश दिया। वारंटी में रहने के बावजूद कंपनी के डीलर ने वाहन की सर्विसिंग और इसकी मरम्मत से इंकार कर दिया था।एनसीडीआरसी के पीठासीन सदस्य प्रेम नारायण ने राज्य...

आपराधिक अपील के लंबित होने के कारण इंजीनियर को 10 सालों से नहीं मिल रही है नौकरी; सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उसके मामले का जल्दी निपटारा करने को कहा [आर्डर पढ़े]
आपराधिक अपील के लंबित होने के कारण इंजीनियर को 10 सालों से नहीं मिल रही है नौकरी; सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से उसके मामले का जल्दी निपटारा करने को कहा [आर्डर पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से आग्रह किया है कि वह एक युवक की आपराधिक अपील को शीघ्रता से निपटा दे। यह युवक एक योग्यताप्राप्त इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर है और एमबीए स्नातक है।जब हाईकोर्ट ने जल्दी से सुनवाई करने की उसकी अपील ठुकरा दी तो संतोष ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। बाद में हाईकोर्ट ने उसके निलंबन को समाप्त करने के आग्रह को भी ठुकरा दिया था।संतोष को आईपीसी की धारा 326 के तहत दोषी माना गया था और उसको निचली अदालत ने पाँच साल के सश्रम कारावास की सज़ा सुनाई थी।हाईकोर्ट के समक्ष यह अपील की...

अगर किसी महिला को उसके पति का घर उस पर हुए हमले और उत्पीड़न के कारण छोड़ना पड़ता है तो इसे पत्नी की उपेक्षा माना जाएगा : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
अगर किसी महिला को उसके पति का घर उस पर हुए हमले और उत्पीड़न के कारण छोड़ना पड़ता है तो इसे पत्नी की उपेक्षा माना जाएगा : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

बॉम्बे हाईकोर्ट ने हाल ही में पुणे की सत्र अदालत के एक फ़ैसले को सही ठहराते हुए चंद्रभागा बोरहाडे की याचिका को स्वीकार कर लिया जिसमें उन्होंने सीआरपीसी की धारा 125 के तहत गुज़ारे की राशि की माँग की है।न्यायमूर्ति मृदुला भाटकर ने बाबनराव की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका निरस्त कर दी जिसमें उन्होंने सत्र अदालत के फ़ैसले को चुनौती दी थी।पृष्ठभूमिप्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गुज़ारा संबंधी आवेदन को 20 मार्च 2001 को जारी आदेश में ख़ारिज कर दिया था पर सत्र अदालत ने इसे स्वीकार कर लिया। कोर्ट ने...

न तो माँ-बाप और न ही कोई अन्य किसी बालिग़ लड़का और लड़की के साथ रहने में कोई हस्तक्षेप कर सकता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
न तो माँ-बाप और न ही कोई अन्य किसी बालिग़ लड़का और लड़की के साथ रहने में कोई हस्तक्षेप कर सकता है : इलाहाबाद हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि अगर लड़का और लड़की बालिग़ हैं और वे अपनी इच्छा से साथ रह रहे हैं तो उनके माँ-बाप सहित किसी को भी उनके साथ रहने में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं है।न्यायमूर्ति कौशल जयेन्द्र ठाकेर एक जोड़े की याचिका पर ग़ौर करते हुए यह बात कही। इन जोड़ों ने कोर्ट में एक याचिका दायर कर उनके माँ-बाप और अन्य लोगों को उनके वैवाहिक जीवन में दख़ल नहीं देने के बारे में निर्देश देने के लिए कोर्ट से अपील की थी। साथ ही इन लोगों ने अपनी सुरक्षा और स्वतंत्रता की गुहार लगाई थी।इन लोगों ने...

आवेदन के दौरान कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं देने के कारण विदेशी फ़ैसले को लागू करने का आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
आवेदन के दौरान कुछ ज़रूरी दस्तावेज़ नहीं देने के कारण विदेशी फ़ैसले को लागू करने का आवेदन रद्द नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विदेशी फ़ैसले को लागू कराने के लिए दायर किए गए आवेदन में शुरू में अगर मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 47 के तहत ज़रूरी दस्तावेज़ों को पेश करने की आवश्यकता को पूरा नहीं किया गया है तो  इसको आधार बनाकर इस आवेदन को ख़ारिज नहीं किया जा सकता।P.E.C. Limited vs. Austbulk Shipping SDN BHD मामले में न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ एक आवेदन पर विचार कर रहा था जिसमें इस अधिनियम की धारा 47 के तहत एक आदेश को लागू कराए जाने को लेकर अपील की गई...