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बॉम्बे हाईकोर्ट में वकील ने याचिका दाखिल कर ‘ सरकारी काम के दौरान मौत होने पर’ जज लोया के परिवार को मुआवजे की मांग की

LiveLaw News Network
15 Jun 2018 10:17 AM GMT
बॉम्बे हाईकोर्ट में वकील ने याचिका दाखिल कर ‘ सरकारी काम के दौरान मौत होने पर’ जज लोया के परिवार को मुआवजे की मांग की
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वकील सतीश उके ने मुंबई उच्च न्यायालय की नागपुर पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की है जिसमें न्यायाधीश बीएच लोया के परिवार के सदस्यों को मुआवजा और अन्य लाभ मुहैया कराने के लिए महाराष्ट्र राज्य को निर्देशों की मांग की गई है जो 1 दिसंबर, 2014 को असामयिक मौत से पहले सोहराबुद्दीन ट्रायल देख रहे थे।

याचिका में कहा गया है कि कानून और न्याय विभाग के संयुक्त सचिव के 27 नवंबर, 2014 को जारी एक पत्र में यह कहा गया था कि न्यायाधीश लोया और न्यायाधीश विनय जोशी 30 नवंबर, 2014 से  1 दिसंबर, 2014 की सुबह सात बजे तक सरकारी कार्य के लिए मुंबई से आएंगे और सरकारी गेस्ट हाउस रवि भवन, नागपुर में रहेंगे।

इस प्रकार याचिका में दलील दी गई कि 1 दिसंबर को 6:15 बजे उनकी मृत्यु के दौरान, न्यायाधीश लोया सरकारी ड्यूटी पर थे और इसलिए उनका परिवार मुआवजा पाने का हकदार है।”

यह प्रस्तुत किया गया है कि न्यायाधीश लोया छोटी उम्र के थे और उनकी लंबी सेवा अभी भी शेष थी। यह भी देखा जाना चाहिए कि सेवा में उनकी उम्र और सेवा प्रतिष्ठा, स्थिरता और अखंडता पर विचार करना; करियर की प्रगति के दौरान वह उच्च न्यायालय के न्यायाधीश भी हो सकते थे। इसलिए उनका परिवार संभावित करियर प्रगति और मृत न्यायाधीशबृजगोपाल हरकिशन लोया की जीवन प्रत्याशा के संदर्भ में मौद्रिक मुआवजे का हकदार है।

 इस मामले में लाइव लॉ को भी उत्तरदाता के रूप में नामित किया गया है। याचिका में कहा गया है कि एक समाचार पोर्टल के रूप में लाइव लॉ ने विभिन्न सूचनात्मक सामग्री / समाचार वस्तुओं को प्रकाशित किया जो इस याचिका में शामिल मुद्दे से निपटने में मदद कर सकते हैं।ये याचिका दायर की गई है लेकिन अभी सुनवाई की तारीख तय की जानी है।

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