मुख्य सुर्खियां
चार्जशीट दाख़िल होने के बाद भी एफआईआर को निरस्त करने की याचिका पर ग़ौर हो सकता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 482 के तहत एफआईआर को निरस्त करने के लिए आवेदन पर हाइकोर्ट उस समय भी ग़ौर कर सकता है जब याचिका के लम्बित होने के दौरान चार्जशीट दायर किया जाता है।सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एसए बोबडे और एल नागेश्वर राव की पीठ ने यह फ़ैसला उस याचिका पर ग़ौर करते हुए सुनाया जिसमें दिल्ली हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें आनंद कुमार मोहट्टा के ख़िलाफ़ एफआईआर को निरस्त करने से मना कर दिया गया था।सुप्रीम कोर्ट में इस अपील के लम्बित रहने के दौरान...
मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 11 के तहत कोर्ट CPC के आदेश 2 के नियम 2 को लागू नहीं कर सकता : दिल्ली हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि कोर्ट किसी दावे की उपयुक्तता के प्रश्न पर कोड ऑफ़ सिविल प्रोसीजर (सीसीपी) आदेश 2 के नियम 2 के तहत ग़ौर नहीं कर सकता जब वह मध्यस्थता और सुलह अधिनियम 1996 की धारा 11 के तहत मामले की सुनवाई कर रहा है।न्यायमूर्ति नवीन चावला ने कहा कि याचिकाकर्ता के दावे आदेश 2 के नियम 2 द्वारा रोके जाएँगे या नहीं इसका निर्णय करना अधिनियम की धारा 11 के तहत इस अदालत का काम नहीं है।CPC के आदेश 2 के नियम 2 में कहा गया है कि जहाँ वादी मुकदमा नहीं करता या जानबूझकर अपने दावे का कोई...
दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस से कहा : ‘अनौपचारिक और लापरवाही’ से स्थिति रिपोर्ट दाख़िल करने से बचे [निर्णय पढ़ें]
दिल्ली हाईकोर्ट ने मयूर विहार थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर मनोज कुमार के ख़िलाफ़ अवमानना नोटिस को निरस्त कर दिया लेकिन दिल्ली पुलिस को चेतावनी दी कि वह अनौपचारिक और लापरवाही से स्थिति रिपोर्ट दाख़िल करने से बचे।न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति संगीत ढींगरा सहगल की पीठ ने अपने आदेश में कहा, “…दिल्ली पुलिस के अधिकारियों को अपने आचरण के उस उच्च स्तर पर खड़ा उतरना चाहिए जिसके आधार पर वे ख़ुद को परखे जाने की बात करते हैं…यह कोर्ट संबंधित एसएचओ और दिल्ली पुलिस के अन्य अधिकारियों को यह...
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पत्रकारों की स्थिति सुधारने को कहा [आर्डर पढ़े]
उत्तराखंड हाइकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से पत्रकारों की समग्र स्थिति को ठीक करने के लिए विभिन्न क़दम उठाने को कहा है।कोर्ट ने उन्हें राज्य की आवासीय योजनाओं में आरक्षण देने को कहा है। न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की पीठ ने पत्रकारों की सेवा स्थिति में सुधार लाने के लिए कई तरह के निर्देश दिए। पीठ ने यह भी कहा कि पत्रकारों को केंद्र सरकार के 11 नवम्बर 2011 की अधिसूचना के अनुरूप वेतन नहीं दिया जा रहा है और वरिष्ठ पत्रकारों को जो पेंशन दिया जा रहा है वह भी काफ़ी कम होता...
अगर कोर्ट की टिप्पणी से भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों का मनोबल टूटा है तो यह उनकी कमज़ोरी को दर्शाता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मदन बी लोकर और न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित की पीठ ने मणिपुर फ़र्ज़ी मुठभेड़ मामले की सुनवाई से उनके अलग होने के बारे में एक याचिका को रद्द कर दिया।इस संबंध में याचिकाएँ कुछ पुलिसवालों की ओर से दायर की गई थीं। याचिका में कहा गया था कि एक्स्ट्रा-जूडिशल एक्सेक्यूशन विक्टिम्ज़ फ़ैमिलीज़ असोसीएशन वर्सेस यूनीयन ऑफ़ इंडिया मामले में पीठ ने जो कुछ मौखिक विचार व्यक्त किए थे उसे निकल दिए जाएँ। यह भी माँग की गई थी कि इस पीठ को इस मामले की सुनवाई से ख़ुद को अलग कर लेना चाहिए और...
अदालतों को छात्रों का अस्थाई प्रवेश लेने के लिए अंतरिम आदेश देने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के एक फ़ैसले को निरस्त करते हुए कहा कि अदालतों को छात्रों को अस्थाई प्रवेश देने के बारे में अंतरिम आदेश देने से बचना चाहिए।एसवीएस शैक्षणिक एवं सामाजिक ट्रस्ट ने तमिलनाडु के डॉ. अमजीआर मेडिकल यूनिवर्सिटी के आदेश के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी क्योंकि उसने बीएचएमएस में वर्ष 2016-2017 अकादमिक वर्ष में प्रवेश केलिए उसको अस्थाई सम्बद्धता देने के आग्रह को अस्वीकार कर दिया था। अपने अंतरिम आदेश में मद्रास हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को कहा था कि वह इस कॉलेज को होमियोपैथी...
पति की मौत के एक दशक बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के ख़िलाफ़ पत्नी की याचिका स्वीकार की [निर्णय पढ़ें]
उसकी पति को मरे एक दशक हो गया है और अब दिल्ली हाईकोर्ट ने उसे अपने पति से तलाक़ लेने की उसकी अर्ज़ी पर अपना फ़ैसला दिया है। कोर्ट ने एक दशक बाद तलाक़ के आदेश के ख़िलाफ़ पत्नी की याचिकाको को स्वीकार कर लिया है।वर्ष 2007 में पारिवारिक अदालत ने उनकी शादी को यह कहते हुए समाप्त घोषित कर दिया था कि दोनों ऐसी स्थिति में पहुँच गये हैं जहाँ से अब लौटना उनके लिए मुश्किल है और उनकी शादी टूट चुकी है। पत्नी ने2008 में इसके ख़िलाफ़ एक अपील दायर की और उसी दौरान उसके पति की मौत हो गई। मामले में पति का...
पति को अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण करना है भले ही इसके लिए वह भीख माँगे, उधार ले या चोरी करे : पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट [आर्डर पढ़े]
“एक पति का पहला और सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कर्तव्य है अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण। भले ही उसको इसके लिए भीख माँगना पड़े, उधार लेनी पड़े या चोरी करनी पड़े।” पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हाल ही में अपने एक फ़ैसले में यह बात कही।न्यायमूर्ति एचएस मदान ने पारिवारिक अदालत के एक फ़ैसले को पति द्वारा दी गई चुनौती पर सुनवाई के दौरान यह बात कही। पारिवारिक अदालत ने अपनी पत्नी को गुज़ारे की राशि नहीं देने पर पति को जेल भेजने का आदेश सुनाया था।वर्तमान मामले में पारिवारिक अदालत ने पति को 12 महीने के...
पीड़ित के सुसाइड नोट को मृत्यु से पहले का बयान मानते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को क़सूरवार ठहराया और सज़ा सुनाई [निर्णय पढ़ें]
'मृत्यु पूर्व बयान को पूरी तरह पढ़ने से पता चलता है कि यह आरोपी को पूरी तरह दोषमुक्त नहीं करता है हालाँकि उसने कहा कि उसे दंडित नहीं किया जाए’मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार पीड़ित लड़की की आत्महत्या के नोट को उसका मृत्युपूर्व बयान मानते हुए बलात्कार के आरोपी को इस मामले में सज़ा सुनाई है।दो व्यक्ति शाहिद और शमीम पर 18 वर्ष की एक लड़की से बलात्कार करने का आरोप थाइन लोगों ने उसे अपनी कार में लिफ़्ट दिया था और बाद में उन्होंने उसके साथ बलात्कार किया। इस लड़की ने ख़ुद पुलिस में शिकायत की और फिर...
अदालत में दलील के दौरान पति को ‘नपुंसक’ बताना मानहानि हो सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
‘नपुंसक’शब्द को जब उसके अपने सादे और व्याकरणिक अर्थ में समझा जाता है, तो यह किसी व्यक्ति के मनोदशा पर प्रतिकूल रूप से प्रतिबिंबित होता है और ऐसी स्थिति बन सकती है की उसव्यक्ति का दूसरे लोग उपहास करें।बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि याचिका में पति को नपुंसक बताना 'मानहानि' हो सकती है।एक पति ने मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने उच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में ...
आपराधिक अभियोजन को निपटाने का कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता; बॉम्बे हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले से नाराजगी जताई, जांच अधिकारी और एपीपी के खिलाफ जांच का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]
हाल के एक फैसले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भारतीय दंड संहिता की धारा 277 (लापरवाही से गाड़ी चलाने), धारा 337 और धारा 304A के तहत एक आरोपी को बरी किए जाने के फैसले पर नाराजगी जाहिर करते हुए इस मामले की दुबारा सुनवाई का आदेश दिया है।नागपुर खंडपीठ के न्यायमूर्ति जेडए हक़ ने मजिस्ट्रेट के उस फैसले की आलोचना की और आरोपी को बरी करने के फैसले को खारिज कर दिया और कहा कि “मजिस्ट्रेट आपराधिक न्याय दिलाने के अपने कर्तव्य में विफल रहा है”।अदालत ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि शीर्षक सहित यह फैसला साढ़े चार...
सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]
पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने उस स्वर्ण अधिनियम 1968 के तहत एक अपील को खारिज कर दिया जिसकी सुनवाई के लंबित रहने के दौरान उस अधिनियम को ही संसद ने रद्द कर दिया।दिल्ली उच्च न्यायालय ने 1972 में ही इस अपील को खारिज कर दिया था। 1973 में उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ एक विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी, और शीर्ष अदालत ने 9 अगस्त 1973 को इसकी कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।हालांकि जब इस अपील पर सुनवाई लंबित थी उसी दौरान वर्ष 1990 में संसद ने स्वर्ण (नियंत्रण) अधिनियम, 1968 को रद्द कर दिया। यह पाया गया...
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी ‘बाबा’ को जमानत देने से इनकार किया; कहा, समाज किसी व्यक्ति में जितना ज्यादा विश्वास जताता है उसकी ज़िम्मेदारी उतनी ही बड़ी होती है [आर्डर पढ़े]
“हमारे समाज ने ‘गुरुओं’ में काफी विश्वास जताया है और लोग उन पर भगवान की तरह ही विश्वास करते हैं और आम तौर पर भक्त इन गुरुओं के प्रति खुद को बिना किसी शर्त के समर्पित कर देते हैं और उनके आदेशों को एक आज्ञाकारी बच्चे की तरह मानते हैं”बलात्कार के मामले में आरोपी एक बाबा की जमानत याचिका खारिज करते हुए हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि अपने को पवित्र और आध्यात्मिक व्यक्ति बताते हुए अगर कोई व्यक्ति अपराध करता है तो वह अपराध ज्यादा गंभीर होता है क्योंकि इस तरह का कृत्य समाज के विश्वास को हिला...
श्रमिक मुआवजा अधिनियम : सुप्रीम कोर्ट ने कहा, मुआवजा राशि पर ब्याज दुर्घटना की तारीख से देय होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है की कर्मचारी मुआवजा अधिनियम के तहत किसी कर्मचारी को मुआवजे के भुगतान पर ब्याज की अदायगी दुर्घटना की तारीख से होनी चाहिए।कोर्ट ने यह फैसला एक नियोक्ता की याचिका पर दिया जिसने अपने एक कर्मचारी की मौत पर मुआवजे की राशि के भुगतान को चुनौती दी थी।इस मामले में, श्रमिक मुआवजा आयुक्त ने मुआवजे की राशि पर प्रति वर्ष 12% की दर से ब्याज देने को कहा था पर यह आदेश की तिथि की समाप्ति होने के 45 दिनों के बाद से दिया था और वह भी अगर नियोक्ता 45 दिनों के भीतर तय राशि को चुकाने में नाकाम...
अगर आरोप निर्धारित नहीं किए जाने से आरोपी के प्रति कोई दुर्भावना पैदा नहीं हुई है तो उसको दोषी करार दिये जाने के फैसले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी बड़े अपराध में आरोप निर्धारित किए बिना दोषी ठहराने के फैसले को तभी खारिज किया जा सकता है जब आरोपी यह साबित करे कि उसके खिलाफ इससे दुर्भावना पैदा हुई है और इस तरह, न्याय विफल रहा है।उत्तर प्रदेश राज्य बनाम कामिल मामले में न्यायमूर्ति आर बनुमती और न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी की पीठ ने आरोपी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। आरोपी का कहना था कि आईपीसी की धारा 302 के तहत उस पर अभी कोई आरोप तय नहीं किया गया है इसलिए इस धारा के तहत उसको दोषी करार नहीं दिया जा...
हर मामले में ‘मौत की सजा’ देना उचित नहीं है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत मौत की सजा को फिर बदला [निर्णय पढ़ें]
“हमारी राय में संबंधित मामले में कथित अपराध नृशंस तरीके से नहीं हुआ और इसलिए यह विरलों में विरल मामले मामला नहीं है जिसे लिए मौत की सजा दी जाए”।मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने के बार फिर, एक आरोपी को आईपीसी की धारा 376 के तहत मिली मौत की सजा को बदल दिया है। आरोपी पर तीन साल की एक बच्ची के साथ बलात्कार का आरोप है।एक ही महीने में मौत की सजा को हाईकोर्ट द्वारा बदलने की यह तीसरी घटना है।तीन साल की एक बच्ची के साथ बलाताकार करने के दोषी तौहीद को निचली अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने कहा था कि प्रत्यक्ष...
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिव-इन पार्टनर गुजारा राशि का दावा कर सकते हैं [आर्डर पढ़े]
“तथ्य यह है कि, डीवीसी अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत पीड़ित जैसे पत्नी या लिव-इन-पार्टनर आपराधिक प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 125के तहत मिलने वाली राहत से कहीं ज्यादा राहत पाने के हकदार हैं।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लिव-इन पार्टनर घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 के तहत महिलाओं के संरक्षण के प्रावधानों के तहत गुजारा राशि की मांग कर सकता है।मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय पीठ ने ललिता टोप्पो बनाम झारखंड राज्य मामले पर सुनवाई करते हुए...
आपराधिक सुनवाइयों के बारे में निचली अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]
“सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत किसी आवेदन पर निर्णय लेने के दौरान, अभियुक्त के अधिकारों के बीच एक बनाया जाना चाहिए”।सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आपराधिक मुकदमे के संदर्भ में किन बातों का ध्यान रखा जाना चाहिए इस बारे में एक दिशानिर्देश जारी किया।केरल उच्च न्यायालय के आदेश को निरस्त करते हुए न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे और न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा की पीठ ने कहा कि सीआरपीसी की धारा 231 (2) के तहत गवाह से पूछताछ को स्थगित करने के किसी आवेदन पर गौर करने के दौरान आरोपी के अधिकार और अभियोजन पक्ष के...
जो बहुत दृढ़ चरित्र की महिला नहीं है उसे भी किसी के साथ संभोग करने से इनकार का अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखा [निर्णय पढ़ें]
“ऐसी महिला के साक्ष्य को केवल इसलिए नहीं दरकिनार नहीं किया जा सकता क्योंकि दृढ़ चरित्र वाली महिला नहीं है”।अगर यह मान भी लें कि महिला दृढ़ चरित्र वाली नहीं है, उसे किसी के भी साथ यौन संबंध को नकारने का अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में चार लोगों की सजा को बरकरार रखते हुए यह बात कही।पृष्ठभूमिआरोपी ने निचली अदालत को सीआरपीसी की धारा 313 के तहत अपने बयान में कहा था कि इस महिला का चरित्र खराब था और वह वेश्यावृत्ति करती थी। हालांकि उन्होंने अदालत से कहा कि इस महिला के खिलाफ...

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![अगर कोर्ट की टिप्पणी से भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों का मनोबल टूटा है तो यह उनकी कमज़ोरी को दर्शाता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] अगर कोर्ट की टिप्पणी से भारतीय सेना और अर्ध सैनिक बलों का मनोबल टूटा है तो यह उनकी कमज़ोरी को दर्शाता है : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/10/Justice-Madan-B-Lokur-and-Justice-UU-Lalit.jpg)
![अदालतों को छात्रों का अस्थाई प्रवेश लेने के लिए अंतरिम आदेश देने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] अदालतों को छात्रों का अस्थाई प्रवेश लेने के लिए अंतरिम आदेश देने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/11/Justice-SA-Bobde-Justice-Nageswara-Rao.jpg)
![पति की मौत के एक दशक बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के ख़िलाफ़ पत्नी की याचिका स्वीकार की [निर्णय पढ़ें] पति की मौत के एक दशक बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने तलाक़ के ख़िलाफ़ पत्नी की याचिका स्वीकार की [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/05/Delhi-High-Court-2.jpg)
![पति को अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण करना है भले ही इसके लिए वह भीख माँगे, उधार ले या चोरी करे : पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट [आर्डर पढ़े] पति को अपनी पत्नी और अपने बच्चे का भरण पोषण करना है भले ही इसके लिए वह भीख माँगे, उधार ले या चोरी करे : पंजाब एवं हरियाणा हाइकोर्ट [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/08/Punjab-and-Haryana-High-Court.jpg)
![पीड़ित के सुसाइड नोट को मृत्यु से पहले का बयान मानते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को क़सूरवार ठहराया और सज़ा सुनाई [निर्णय पढ़ें] पीड़ित के सुसाइड नोट को मृत्यु से पहले का बयान मानते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी को क़सूरवार ठहराया और सज़ा सुनाई [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2017/11/23244007_2005417013075772_6514921900151073317_n-1.jpg)
![अदालत में दलील के दौरान पति को ‘नपुंसक’ बताना मानहानि हो सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें] अदालत में दलील के दौरान पति को ‘नपुंसक’ बताना मानहानि हो सकती है : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/bombay-hc.png)
![आपराधिक अभियोजन को निपटाने का कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता; बॉम्बे हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले से नाराजगी जताई, जांच अधिकारी और एपीपी के खिलाफ जांच का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें] आपराधिक अभियोजन को निपटाने का कोई शॉर्टकट नहीं हो सकता; बॉम्बे हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के फैसले से नाराजगी जताई, जांच अधिकारी और एपीपी के खिलाफ जांच का आदेश दिया [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/03/Nagpur-Bench-of-Bombay-HC.png)
![कलकत्ता हाईकोर्ट ने सिपाही के ख़िलाफ़ सुनवाई को 8 सप्ताह के लिए स्थगित किया ताकि वह गिरफ़्तारी के डर के बिना सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके [आर्डर पढ़े] कलकत्ता हाईकोर्ट ने सिपाही के ख़िलाफ़ सुनवाई को 8 सप्ताह के लिए स्थगित किया ताकि वह गिरफ़्तारी के डर के बिना सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/11/Justice-Protik-Prakash-Banerjee.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें] सुप्रीम कोर्ट ने स्वर्ण नियंत्रण अधिनियम 1968 के तहत 1973 में इस अधिनियम को दी गई चुनौती याचिका खारिज की [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/11/RF-Nariman-NAVIN-SINHA.jpg)
![हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी ‘बाबा’ को जमानत देने से इनकार किया; कहा, समाज किसी व्यक्ति में जितना ज्यादा विश्वास जताता है उसकी ज़िम्मेदारी उतनी ही बड़ी होती है [आर्डर पढ़े] हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बलात्कार के आरोपी ‘बाबा’ को जमानत देने से इनकार किया; कहा, समाज किसी व्यक्ति में जितना ज्यादा विश्वास जताता है उसकी ज़िम्मेदारी उतनी ही बड़ी होती है [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/06/Himachal-Pradesh-High-Court-LL-Size-min-1.jpg)

![अगर आरोप निर्धारित नहीं किए जाने से आरोपी के प्रति कोई दुर्भावना पैदा नहीं हुई है तो उसको दोषी करार दिये जाने के फैसले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें] अगर आरोप निर्धारित नहीं किए जाने से आरोपी के प्रति कोई दुर्भावना पैदा नहीं हुई है तो उसको दोषी करार दिये जाने के फैसले को निरस्त नहीं किया जा सकता : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/10/Justice-R-Banumathi-Justice-Indira-Banerjee.jpg)
![हर मामले में ‘मौत की सजा’ देना उचित नहीं है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत मौत की सजा को फिर बदला [निर्णय पढ़ें] हर मामले में ‘मौत की सजा’ देना उचित नहीं है, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत मौत की सजा को फिर बदला [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/01/Death-Penalty.jpg)
![सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिव-इन पार्टनर गुजारा राशि का दावा कर सकते हैं [आर्डर पढ़े] सुप्रीम कोर्ट ने कहा, घरेलू हिंसा अधिनियम के प्रावधानों के तहत लिव-इन पार्टनर गुजारा राशि का दावा कर सकते हैं [आर्डर पढ़े]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/11/Ranjan-Gogoi-UU-Lalit-KM-Joseph.jpg)
![आपराधिक सुनवाइयों के बारे में निचली अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें] आपराधिक सुनवाइयों के बारे में निचली अदालतों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने जारी किए दिशानिर्देश [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/10/AM-SAPRE-indu-malhotra.jpg)
![जो बहुत दृढ़ चरित्र की महिला नहीं है उसे भी किसी के साथ संभोग करने से इनकार का अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखा [निर्णय पढ़ें] जो बहुत दृढ़ चरित्र की महिला नहीं है उसे भी किसी के साथ संभोग करने से इनकार का अधिकार है, सुप्रीम कोर्ट ने सामूहिक बलात्कार मामले में सजा बरकरार रखा [निर्णय पढ़ें]](http://hindi.livelaw.in/wp-content/uploads/2018/11/Justice-R-Banumathi-Justice-Indira-Banerjee-1.jpg)