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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कॉर्बेट और राजाजी राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए सरकार से ड्रोन, सीसीटीवी का प्रयोग करने को कहा [निर्णय पढ़ें]

LiveLaw News Network
16 Jun 2018 3:58 PM GMT
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने कॉर्बेट और राजाजी राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के अवैध शिकार को रोकने के लिए सरकार से ड्रोन, सीसीटीवी का प्रयोग करने को कहा [निर्णय पढ़ें]
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पीआईएल के बहाने अदालत आने के लिए टाइगर रिज़र्व के  सरकारी मकान में रह रहे व्यक्ति पर कोर्ट ने लगाया पांच लाख का जुर्माना  

उत्तराखंड के टाइगर रिज़र्व  क्षेत्र में चल रहे निर्बाध गैर कानूनी खनन और लोगों की रिहाइश का यहां के वन्य जीवों पर प्रतिकूल असर पड़  रहा है और इस साल अब तक आठ बाघों को मारा जा चुका है। इसे देखते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों  की मदद लेने को कहा है ताकि कॉर्बेट और राजाजी राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के अवैध शिकार और खनन पर रोक लगाई जा सके।

सरकार के रुख की खिंचाई करते हुए न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति लोक पाल सिंह की पीठ ने यह जानना चाहा कि  टाइगर रिज़र्व फाॅर्स का गठन हुआ है कि नहीं जिसका की कोर्ट ने इससे पहले दायर की गई जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान आदेश दिया था और कोर्ट द्वारा समय समय पर जारी आदेशों के अनुरूप कदम उठाए गए हैं या नहीं।

पीठ ने निम्नलिखित निर्देश जारी किए -




  1. उत्तराखंड का मुख्य सचिव कलाघर में गैर कानूनी ढंग से रह रहे सभी लोगों को आज से तीन सप्ताह के भीतर हटाने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा जिसमें वर्तमान आवेदनकर्ता भी शामिल है ।

  2. प्रतिवादी/राज्य को यह निर्देश भी दिया जाता है कि अगर किसी  बाघ की अस्वाभाविक मौत होती है तो एसडीएम इसकी जांच करेगा।

  3. कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान और राजाजी राष्ट्रीय उद्यान टाइगर रिज़र्व के निदेशकों को निर्देश है कि  वे मृत बाघ का विसरा सुरक्षित करेंगे ताकि उसके मौत की वजह सुनिश्चित की जा सके। बाघ के पोस्ट-मॉर्टम  की विडिओग्राफी की जाएगी।

  4. राज्य सरकार कॉर्बेट और राजाजी राष्ट्रीय उद्यानों में वन्य जीवों के गैर कानूनी शिकार और खनन को रोकने के लिए आज से तीन महीनों  के भीतर ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की मदद लेगी।

  5. कोर्ट की प्रक्रिया के दुरुपयोग के लिए याचिकाकर्ता पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जा रहा है।  यह पैसा वह इस अदालत की रजिस्ट्री में एक महीने के भीतर जमा कराएगा। अगर उसने ऐसा नहीं किया तो पौड़ी गढ़वाल के जिलाधिकारी उसके भूमि राजस्व  बकाये से यह राशि वसूलेगा।


कोर्ट का यह आदेश जनहित याचिका की आड़ में दाखिल निजी मामले पर दिया गया।  याचिका दायर करने वाले विश्वनाथ सिंह ने 26 फरवरी 2010 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी थी।  इस अधिसूचना में कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान के कोर क्षेत्र (821.99 वर्ग किलोमीटर) और अतिरिक्त क्षेत्र (466.32) सहित कुल 1288.31 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को  टाइगर रिज़र्व घोषित किया गया था।

कोर्ट ने नाराज  होकर कहा , “यह जनहित याचिका की आड़ में निजी याचिका है…याचिकाकर्ता जंगलों पर अतिक्रमण करने के लिए कुख्यात है और अभी तक उसको वहाँ से बेदखल नहीं किया गया है।  ऐसा राज्य सरकार के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना नहीं हो सकता। राज्य को अपनी संपत्ति को अवश्य ही संरक्षित करना चाहिए।

इसी तरह का आदेश 2017  ने राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने भी जारी किया था।


 
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