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वरिष्ठ एडवोकेट बनाए जाने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के ये हैं नए अधिसूचित नियम [अधिसूचना पढ़ें]

LiveLaw News Network
16 Jun 2018 4:00 PM GMT
वरिष्ठ एडवोकेट बनाए जाने के लिए कर्नाटक हाईकोर्ट के ये हैं नए अधिसूचित नियम [अधिसूचना पढ़ें]
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कर्नाटक हाईकोर्ट ने 8  जून को कर्नाटक (डिजिंगनेशन ऑफ़ सीनियर एडवोकेट्स) रूल्स, 2018 को गत वर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुरूप अधिसूचित कर दिया जिसके आधार पर किसी एडवोकेट को वरिष्ठ एडवोकेट  बनाया जाएगा।

इन नियमों के तहत वकीलों को कर्नाटक हाईकोर्ट के अधीन अदालतों में इस पद के लिए आवेदन की अनुमति होगी।  इसके तहत जो वकील वरिष्ठ बनने के काबिल हैं उनके लिए अंक-आधारित आकलन की व्यवस्था की गई है। ये अंक किस तरह से मिलेंगे उसे निम्न तालिका से समझा जा सकता है :



इन नियमों में वरिष्ठ एडवोकेटों का दर्जा देने के लिए एक कमिटी बनाने  की व्यवस्था की गई है। इस कमिटी की अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे और इसमें (i) कर्नाटक हाईकोर्ट के दो वरिष्ठतम वर्तमान जज; (ii) कर्नाटक के महाधिवक्ता और  (iii) कर्नाटक हाईकोर्ट बार के एक सदस्य शामिल होंगे जिन्हें कमिटी के अन्य सदस्य नामित करेंगे।

इस तरह का दर्जा देने के लिए चार तरह से प्रस्ताव पेश किये जाने का जिक्र किया गया है।  इस तरह का प्रस्ताव हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश या अन्य कोई वर्तमान जज पेश कर सकते हैं; राज्य का महाधिवक्ता ऐसा प्रस्ताव पेश कर सकता है; कर्नाटक हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले दो वरिष्ठ एडवोकेट ऐसा प्रस्ताव ला सकते हैं; या फिर एडवोकेट खुद ऐसा प्रस्ताव पेश कर सकता है।

प्रक्रिया

सभी तरह के आवेदन और लिखित प्रस्ताव सचिवालय को सौंपे जाएंगे जो आवेदक  की प्रतिष्ठा, आचरण और ईमानदारी, उनके द्वारा दी गई मुफ्त कानूनी सेवाओं और पिछले पांच वर्षों में क़ानून के प्रश्न से जुड़े मामलों में उनकी उपस्थिति के बारे सूचनाएं इकट्ठा करेगा। यह आवेदन या प्रस्ताव इसके बाद हाईकोर्ट के वेबसाइट पर प्रकाशित किया जाएगा और अन्य संबंधित  लोगों से इस बारे में राय माँगी जाएगी।

फिर इन सुझावों को कमिटी के सामने रखा जाएगा और फिर वह इस पर एडवोकेट की राय जानेंगे। एडवोकेट के बारे में सारे आंकड़े जुटाने  के बाद एडवोकेट के मामले को कमिटी के समक्ष जांच के लिए रखा जाएगा और फिर कमिटी इस पर निर्णय करेगी।

इस तरह के आकलन  के बाद एडवोकेट की उम्मीदवारी को पूर्ण अदालत के समक्ष  रखा जाएगा जो इस पर वोट करेगा। नियम में कहा गया है कि पूर्ण अदालत में गुप्त मतदान की अनुमति नहीं होगी बशर्ते कि  यह अनिवार्य न हो। जिन मामलों को पूर्ण अदालत खारिज कर देती है उस पर दुबारा दो साल के बाद विचार हो सकता है।अगर कोई उम्मीदवार अपने बारे में किसी तरह का प्रचार करता है तो उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा।

नियमों में स्पष्ट किया गया है कि वरिष्ठ एडवोकेट का दर्जा दिए जाने से संबंधित सभी लंबित आवेदनों को लौटा दिया जाएगा और उनसे दुबारा आवेदन करने को कहा जाएगा।

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