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विधि आयोग का विनियमित सट्टेबाजी और जुआ को वैध बनाने का सुझाव, कहा – पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी नहीं

LiveLaw News Network
7 July 2018 4:47 PM GMT
विधि आयोग का विनियमित सट्टेबाजी और जुआ को वैध बनाने का सुझाव, कहा – पूर्ण प्रतिबंध प्रभावी नहीं
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विधि आयोग ने अपनी 276वें रिपोर्ट में सट्टेबाजी और जुए को वैध बनाए जाने का सुझाव दिया है और कहा है कि इन पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाने का वांछित परिणाम नहीं मिल रहा है।

 इस रिपोर्ट का शीर्षक है “Legal Framework: Gambling and Sports Betting including in Cricket in India”रिपोर्ट में कहा गया है, “विनियमित सट्टेबाजी और जुए को वैध बनाने के विभिन्न पक्षों पर गौर करने पर इसको वैध बनाने के फायदे इनकी नैतिकता के खिलाफ होने के बारे में दिए गए दलील से ज्यादा दमदार हैं...

 चूंकि इन गतिविधियों को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, इनको प्रभावी रूप से विनियमित करना एकमात्र विकल्प है. इसलिए, अगर संसद और राज्य की विधायिकाएं इस दिशा में आगे बढना चाहती हैं, तो आयोग का मानना है कि जुए को विनियमित करने से इसमें होने वाले फर्जीवाड़े और काले धन को सफ़ेद करने की गतिविधि को पकड़ा जा सकता है। जुए का इस तरह का विनियमन के लिए तीन तरह की रणनीति अपनानी होगी, वर्तमान में जुए (लाटरी, घुड़ दौड़) के बाजार में सुधार लाना होगा, गैरकानूनी जुए को विनियमित करना होगा और और एक कठोर और व्यापक विनियमन व्यवस्था लागू करनी होगी।”

 सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

 यह रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट द्वारा भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड बनाम बिहार क्रिकेट संघ एवं अन्य मामले में दिए गए निर्देश के आधार पर तैयार किया गया है जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विधि आयोग (एलसीआई) से कहा था कि वह भारत में सट्टेबाजी को वैध बनाने के बारे में अध्ययन करे।

एलसीआई ने हालांकि सट्टेबाजी और जुए दोनों का अध्ययन किया और कहा कि दोनों में निकट का संबंध है।इसको रोकना मुश्किल है

 यह रिपोर्ट में इस तथ्य को स्वीकार किया गया है कि ऑनलाइन जुए के इजाद होने और इस पर गुमनाम रहने के फायदे के बाद किसी भी देश कल इए इसको नियंत्रित करना और इस पर पाबंदी लगाना काफी मुश्किल हो गया है। इसके बाद इस रिपोर्ट में इसको विनियमित करने के फायदे बताए गए हैं और कहा गया है कि इससे न केवल इसके बाजार को पारदर्शी बनाया जा सकता है बल्कि माफिया द्वारा सट्टेबाजी और जुए के उद्योग को नियंत्रित करने पर प्रहार भी करेगा। इसके अलावा, इस उद्योग को विनियमित करने और इस पर कर लगाने से सरकार को राजस्व प्राप्त होगा जिसको आम लोगों के कल्याण पर खर्च किया जा सकता है।

 सुझाव

 संसद को क़ानून बनाने का अधिकार है




  1. चूंकि ऑनलाइन सट्टेबाजी और जुएवाजी टेलीफोन, वायरलेस, ब्राडकास्टिंग जैसे संचार माध्यमों से होगा है, जो संविधान की प्रथम सूची के सातवीं अनुसूची की प्रविष्टि 31 के तहत आता है और संसद इस बारे में क़ानून बना सकती है।


 राज्यों के आदर्श क़ानून




  1. संसद संविधान के अनुच्छेद 249 और 252 के तहत इस विषय पर क़ानून बना सकती है। अगर यह क़ानून 252 के तहत बनाया जाता है तो इससे इत्तिफाक
    रखने
    वाले राज्यों के अलावा अन्य राज्य भी इसको स्वीकार करने के लिए स्वतंत्र होंगे। राज्य सूची होने के कारण इस बारे में अपना क़ानून बनाने के लिए स्वतंत्र होंगे।


 कौशल से जुड़े गेम्स को इससे मुक्त रखा जा सकता है




  1. चूंकि घुड़ दौड़ को एक कौशल माना जाता है, इसको पूर्ण प्रतिबंध से बाहर रखा गया हैविधायिका और न्यायपालिका दोनों द्वारा। कौशल से जुड़े अन्य गेम्स को भी इसी तरह प्रतिबंध की परिधि से दूर रखा जाएगा।


ओपेरटरों की जिम्मेदारी




  1. ऑपरेटर को इस तरह के कौशल से जुड़े गेम्स के खिलाड़ियों की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा।


 जुए और सट्टेबाजी के लिए लाइसेंसशुदा भारतीय ऑपरेटर्स




  1. जुए और सट्टेबाजी सिर्फ कोई लाइसेंसधारी भारतीय ही कर सकता है जिसको यह लाइसेंस उचित अथॉरिटी से दिया जाएगा। इसे खेलने वालों पर यह प्रतिबन्ध होगा कि एक व्यक्ति किसी निर्धारित अवधि में कितनी बार इसमें शामिल हो सकता है। इसमें लगाए जानेवाले दाँव की राशि पैन कार्ड और आधार
    कार्ड
    से जुड़ा होगा और सट्टे की राशि क्या होगी यह क़ानून निर्धारित करेगा जिसकी एक ऊपरी सीमा होगी।


 उचित जुआ बनाम छोटा जुआ




  1. जुए को दो वर्गों में बांटी जाएगीउचित जुआ और छोटा जुआ। उचित जुआ में दाँव बड़े लगाए जाएंगे और ज्यादा आय वालों को इसमें भाग लेने की अनुमति होगी। कम आय वाले लोगों को छोटे जुए में शामिल होने की इजाजत होगी और वे बड़ा दाँव नहीं लगा पाएंगे।


 जो छूट का लाभ लेते और कर नहीं देते उन्हें जुआ नहीं खेलने दिया जाए




  1. क़ानून में समाज के उन वर्गों को इन गतिविधियों के बुरे प्रभाव से बचाया जाए विशेषकर युवा और बच्चों को जो 18 वर्ष से कम उम्र के हैं। उन लोगों को इसमें शरीक होने की इजाजत नहीं हो जो सरकारी छूट और सामाजिक कल्याण योजना का लाभ उठा रहे हैं।


 जुए का प्रचार करने वाले वेबसाइट पर पोर्नोग्राफिक सामाग्रियां नहीं हों।




  1. जुए का प्रचार करने वाले वेबसाइट्स पर पोर्नोग्राफिक सामग्रियों की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।


 खतरों के बारे में बताया जाए




  1. जुए/सट्टेबाजी में जो जोखिम है उसके बारे में जुए और सट्टेबाजी के सभी प्लेटफार्म पर प्रमुखता से बताया जाए।


 कोई लेनदेन नकद नहीं हो




  1. इस तरह की गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति को नकद लेनदेन की इजाजत नहीं होनी चाहिए। इससे इसकी गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। नकद का प्रयोग करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान हो।


 आय पर कर लगे




  1. इस तरह की गतिविधियों से होने वाली आय पर कर का प्रावधान हो।


 जुआ उद्योग में विदेशी निवेश को प्रोत्साहन




  1. अधिनियम में उपयुक्त संशोधन कर कैसिनो/ऑनलाइन गेमिंग उद्योग में विदेशी निवेश की अनुमति हो और तकनीकी सहभागिता हो। जो राज्य कैसिनो चलाकर पर्यटन और होटल एवं सत्कार उद्योग को बढ़ाना चाहते हैं उन्हें अपना राजस्व बढाने में इससे मदद मिलेगी।

  2. पर इसमें होने वाले विदेशी निवेश की निगरानी की जानी चाहिए।


 गैरक़ानूनी जुएवाजी के लिए बिचौलियों को जिम्मेदार ठहराया जाए 




  1. आईटी नियम, 2011 के तहत बिचौलियों को जुएवाजी से जुडी
    सामग्री के प्रसारण के मनाही है। पर जब राज्य जुएवाजी को विनियमित या नियंत्रित करना चाहती है तो यह नियम आड़े आता है। इसलिए यह सुझाव दिया जाता है कि नियमों में उपयुक्त संशोधन कर अगर बिना अनुमति वाले कंटेंट का प्रसारण करते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए।


 राष्ट्रीय खेल विकास संहिता को संशोधित किया जाए




  1. राष्ट्रीय खेल विकास संहिता,2011 को संशोधित कर खेलों में सट्टेबाजी और जुए की अनुमति दी जाए क्योंकि तभी इसका विनियमन हो सकता है।


 इंडियन कॉन्ट्रैक्ट अधिनियम को संशोधित किया जाए




  1.   इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट, 1872 के प्रावधानों को संशोधित कर इसके तहत लाइसेंसयुक्त जुए से होने वाले लेनदेन को इससे छूट दिया जाए क्योंकि इसके रहते इसमें भाग लेने वाले लोग गैरकानूनी कार्रवाई से नहीं बच सकते।


खेल में मैच फिक्सिंग को आपराधिक घोषित किया जाए  




  1. मैच फिक्सिंग और खेलों में होने वाले धोखाधड़ी को आपराधिक घोषित कर दिया जाना चाहिए और इसके लिए कड़ी सजा
    का
    प्रावधान हो।

  2. इस क्षेत्र को विनियमित करने के रास्ते में और भी जो क़ानून आड़े सकते हैं उनमें आवश्यक संशोधन किया जाए।


 

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