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जज के फेसबुक पोस्ट पर वकील की टिप्पणी से केस ट्रांसफर हुआ, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुहर लगाई [आर्डर पढ़े]
जज के फेसबुक पोस्ट पर वकील की टिप्पणी से केस ट्रांसफर हुआ, बॉम्बे हाईकोर्ट ने मुहर लगाई [आर्डर पढ़े]

 बॉम्बे हाईकोर्ट की एक डिवीजन बेंच ने हाल ही में  वकील द्वारा जज के फेसबुक पोस्ट पर टिप्पणी के बाद निचली अदालत के जज से मामले को ट्रांसफर  करने के फैसले को बरकरार रखा। न्यायमूर्ति शांतनु केमकर और न्यायमूर्ति नितिन डब्लू सांब्रे ने कहा कि न्यायाधीश के पोस्ट पल टिप्पणी करने का वकील का कार्य "पेशेवर दुर्व्यवहार" के रूप में देखा जाना चाहिए, “ फेसबुक पोस्ट के जवाब में याचिकाकर्ता संख्या 4 का आचरण एक न्यायाधीश जो उपरोक्त पृष्ठभूमि में उनकी अपील पर सुनवाई कर रहा था, इसे विस्तार से जांचने पर पेशेवर...

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली महिला और उसके प्रेमी की मौत की सजा को सही बताया [निर्णय पढ़ें]
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने परिवार के सात लोगों की हत्या करने वाली महिला और उसके प्रेमी की मौत की सजा को सही बताया [निर्णय पढ़ें]

पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने मंगलवार को हरियाणा की एक महिला और उसके प्रेमी की मौत की सजा की पुष्टि की। इस महिला को अपने प्रेमी के साथ मिलकर बच्चे सहित परिवार के सात लोगों को सितंबर 2009 में जहर देकर और गला दबाकर हत्या करने का दोषी पाया गया है। न्यायमूर्ति एबी चौधरी और न्यायमूर्ति कुलदीप सिंह ने कहा, “इस मामले ने समुदाय दियाऔर इस अदालत की आम भावना को झकझोड़ दिया और इस मामले में मौत की सजा की जरूरत है और इनके लिए एकमात्र यही सजा है। ये हत्याएं अफसोसजनक हैं। बहुत ही निर्मम तरीके से ये हत्याएं की...

किसी छात्र को उसकी उत्तर पुस्तिका को देखने की अनुमति देने से न तो जनहित प्रभावित होता है और न सरकार का कामकाज : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]
किसी छात्र को उसकी उत्तर पुस्तिका को देखने की अनुमति देने से न तो जनहित प्रभावित होता है और न सरकार का कामकाज : सुप्रीम कोर्ट [आर्डर पढ़े]

“गोपनीयता और संवेदनशील सूचनाओं के उजागर होने का मुद्दा उठ सकता है लेकिन आदित्य बंदोपाध्याय के मामले में इस मुद्दे को सुलझाया जा चुका है जिसमें यह स्पष्ट कहा गया है कि गोपनीयता बनाए रखने के लिए परीक्षक की पहचान को उजागर नहीं किया जाएगा।”उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) को एक उम्मीदवार को अपनी उत्तर पुस्तिका को देखने की इजाजत देने का आदेश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी उम्मीदवार को उसकी उत्तर पुस्तिका को देखने की इजाजत दी जाती है तो इससे आम हित नहीं प्रभावित होता है और न ही सरकार...

घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामले की सुनवाई के दौरान बच्चों को स्थाई संरक्षण में नहीं दिया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत मामले की सुनवाई के दौरान बच्चों को स्थाई संरक्षण में नहीं दिया जा सकता : बॉम्बे हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“यह तभी होता है जब संरक्षण आदेश या फिर इस अधिनियम के तहत किसी भी तरह का राहत प्राप्त करने के लिए अगर  कोई आवेदन लंबित है, तो उस स्थिति में पीड़ित पक्ष को यह अधिकार प्राप्त है कि वह बच्चे या बच्चों के अस्थाई संरक्षण की मांग कर सकता है”बॉम्बे हाईकोर्ट ने शाम कुंभकर्ण बनाम योगिता मामले में कहा है कि महिलाओं की सुरक्षा से संबंधित घरेलू हिंसा अधिनियम,2005 के तहत सुनवाई के दौरान स्थाई संरक्षण का आदेश नहीं दिया जा सकता है।न्यायमूर्ति संगीतराव एस पाटिल ने न्यायिक मजिस्ट्रेट के इस तरह के एक आदेश को निरस्त...

शराब पर हुए विवाद की वजह से क्या प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को निलंबित किया जा सकता है? इलाहबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विभाजित निर्णय दिया [निर्णय पढ़ें]
शराब पर हुए विवाद की वजह से क्या प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को निलंबित किया जा सकता है? इलाहबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने विभाजित निर्णय दिया [निर्णय पढ़ें]

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 15 प्रशिक्षु न्यायिक अधिकारियों को एक स्थानीय रिसोर्ट में शराब पीकर हंगामा करने के आरोप में हटाने के मामले में विभाजित फैसला दिया है। न्यायमूर्ति एसएस चौहान ने कहा कि ये अधिकारी युवा और अनुभवी हैं और उनको एक और मौक़ा दिया जाना चाहिए जबकि न्यायमूर्ति रजनीश कुमार ने इनको हटाए जाने के आदेश को सही बताया। इसलिए अब इस मामले को मुख्य न्यायाधीश को भेज दिया है कि वह इस मुद्दे पर पीठ का गठन करें। तथ्य क्या है मई 2013 को 15 याचिकाकर्ताओं को सिविल जज (कनिष्ठ प्रभाग) नियुक्त किया गया और...

रजिस्टर्ड ट्रेड मार्क की तरह धोखा देने वाले ट्रेड नाम का प्रयोग ट्रेड मार्क अधिनियम की धारा 29(5) के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
रजिस्टर्ड ट्रेड मार्क की तरह धोखा देने वाले ट्रेड नाम का प्रयोग ट्रेड मार्क अधिनियम की धारा 29(5) के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं करता : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

“जिसको हम धारा 29(5) के तहत अवरोध मानते हैं, वह पंजीकृत ट्रेड नाम या उस ट्रेड नाम के एक हिस्से का प्रयोग है”, न्यायमूर्ति राजीव सहाय एंदलाव ने कहा। दिल्ली हाईकोर्ट ने ट्रेड मार्क अधिनियम की धारा 29(5) के तहत ट्रेड नाम के प्रयोग से होने वाला उल्लंघन और धारा 29 की उप-धारा (1) से (4) तक के प्रावधानों के तहत ट्रेड मार्क के प्रयोग से होने वाला उल्लंघन एक ही नहीं है और दोनों में अंतर है। कोर्ट ने कहा कि धारा 29(5) के तहत उल्लंघन का मामला बनाने के लिए सिर्फ पंजीकृत ट्रेड नाम या ट्रेड मार्क से मिलते...

पटना हाईकोर्ट ने कहा, बिहार को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए कुछ साहसिक और प्रभावी कदम उठाने पड़ेंगे; राज्य से उसका विचार पूछा [आर्डर पढ़े]
पटना हाईकोर्ट ने कहा, बिहार को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए कुछ साहसिक और प्रभावी कदम उठाने पड़ेंगे; राज्य से उसका विचार पूछा [आर्डर पढ़े]

‘हम यह समझने में नाकाम हैं कि 50 माइक्रोंस से भी ऊपर के प्लास्टिक और पॉलिथीन की अनुमति क्यों दी जाए?हाल ही में एक रिट याचिका पर स्वतः संज्ञान लेते हुए पटना हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य को प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को कुछ साहसिक और प्रभावी निर्णय लेने होंगे।दैनिक भास्कर के गया संस्करण में ऐतिहासिक ‘सरोवर’ को हो रहे प्रदूषण पर प्रकाशित खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए एक याचिका पंजीकृत की गई  थी।इस रिपोर्ट में यह कहा गया था कि श्रद्धालु महाबोधि मंदिर के बाहर से चारा खरीदते...

वैवाहिक विवाद गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देने का पर्याप्त कारण नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
वैवाहिक विवाद गर्भावस्था समाप्त करने की अनुमति देने का पर्याप्त कारण नहीं : बॉम्बे हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

तथ्य यह है कि वह अपने वैवाहिक जीवन से गर्भावस्था में पहुंची है और वो बालिग और शिक्षित हैगर्भावस्था समाप्त करने की मांग की एक याचिका से इंकार करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवाद को गर्भावस्था को समाप्त करने का पर्याप्त कारण मानते हुए मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट , 1971 के प्रावधानों का आह्वान करते हुए गर्भावस्था को समाप्त करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।20 सप्ताह से अधिक का गर्भ धारण करने वाली  एक विवाहित महिला ने बॉम्बे हाईकोर्ट में कहा था कि वह गर्भावस्था जारी रखने का...

पुलिस संदेह पर किसी नागरिक की अचल संपत्ति को सील नहीं कर सकती : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]
पुलिस संदेह पर किसी नागरिक की अचल संपत्ति को सील नहीं कर सकती : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट [आर्डर पढ़े]

“सीआरपीसी की धारा 102 के तहत ‘जब्त’ का अर्थ है सर्फ चल संपत्ति को अपने कब्जे में लेना” छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निसार हुसैन बनाम छत्तीसगढ़ राज्य मामले में अपने फैसले में कहा कि पुलिस को अचल संपत्ति को सील करने का अधिकार नहीं है और सीआरपीसी की धारा 102 के तहत ‘जब्त’ का मतलब है चल संपत्ति को कब्जे में लेना। न्यायमूर्ति संजय के अग्रवाल ने सुधीर वसंत कर्नाटकी मोहिदीन मुहम्मद शेख दाऊद बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की पूर्ण पीठ के फैसले का उल्लेख करते हुए कहा सीआरपीसी की धारा 102 के तहत...

सामाजिक मूल्यों और नैतिकताओं की अपनी जगह है पर ये सब संविधान से ऊपर नहीं  प्रेम प्रसंग में माँ-बाप की नजरबंदी से क़ानून स्नातक छात्रा को पटना हाईकोर्ट ने मुक्त कराया [निर्णय पढ़ें]
"सामाजिक मूल्यों और नैतिकताओं की अपनी जगह है पर ये सब संविधान से ऊपर नहीं " प्रेम प्रसंग में माँ-बाप की नजरबंदी से क़ानून स्नातक छात्रा को पटना हाईकोर्ट ने मुक्त कराया [निर्णय पढ़ें]

हादिया मामले का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि सामाजिक मूल्यों और नैतिकताओं की जगह है पर ये सब स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी से ऊपर नहीं हैं। क़ानून की एक स्नातक छात्र को उसके घर में गैरकानूनी ढंग से बंद रखने की खबर पर स्वतः संज्ञान लेते हुए  पटना हाईकोर्ट ने वृहस्पतिवार को उस लड़की को मुक्त किये जाने का आदेश दिया और कहा कि वह अपनी इच्छा से जहां भी जाना चाहती है,उसे जाने दिया जाए। इस लड़की के दिल्ली के एक वकील के साथ प्रेम संबंध होने की खबर है।मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति राजेंद्र मेनन और...

NCPCR  द्वारा सामाजिक आडिट का विरोध करने वाले राज्य कुछ छिपा रहे हैं : सुप्रीम कोर्ट
NCPCR द्वारा सामाजिक आडिट का विरोध करने वाले राज्य "कुछ छिपा" रहे हैं : सुप्रीम कोर्ट

 सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एकीकृत बाल संरक्षण योजना (ICPS ) के तहत फंड के इस्तेमाल ना करने पर राज्य सरकारों को फटकार लगाई।इस तौर तरीके की निंदा करते हुए न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की बेंच ने कहा, "यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। चूंकि बच्चों के लाभ के लिए धन उपलब्ध कराया जाता है, यदि राज्य सरकारें उनका उपयोग नहीं करती हैं तो नुकसान राज्य के बच्चों का है। " न्यायालय ने यह भी नोट किया कि धन के गैर-उपयोग के अलावा कुछ राज्यों ने न तो उपयोग प्रमाण पत्र दिए हैं, न ही वित्तीय वर्ष...

टीम इंडिया या टीम BCCI? क्यों ना RTI अधिनियम के तहत निष्पक्ष क्रिकेट के हित में BCCI को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाए [आर्डर पढ़े]
टीम इंडिया या टीम BCCI? क्यों ना RTI अधिनियम के तहत 'निष्पक्ष क्रिकेट' के हित में BCCI को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाए [आर्डर पढ़े]

केन्द्रीय सूचना आयोग ने भारत में बोर्ड फॉर क्रिकेट कंट्रोल इन इंडिया  (बीसीसीआई) से यह बताने के लिए कहा है कि क्यों ना आरटीआई अधिनियम के तहत इसे सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाना चाहिए, जबकि यह तय करते हुए कि इसे निष्पक्ष क्रिकेट के हित में और भारतीय क्रिकेट टीम के सदस्यों के उचित चयन में उत्तरदायी और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए। सीआईसी एम श्रीधर आचार्युलु ने आदेश दिया कि आयोग बीसीसीआई के सीपीआईओ / अधिकृत प्रतिनिधि को यह बताने के लिए निर्देशित करता है कि क्यों आयोग को विभिन्न न्यायिक घोषणाओं और...

पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई से पहले गुजारा भत्ता की संपूर्ण बकाया राशि खाते में जमा कराना जरूरी नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई से पहले गुजारा भत्ता की संपूर्ण बकाया राशि खाते में जमा कराना जरूरी नहीं : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने सबीना सहदेव बनाम विदुर सहदेव मामले में कहा है कि निचली अदालत के आदेश के अनुरूप गुजारा भत्ता की संपूर्ण राशि पुनरीक्षण याचिका पर गौर करने से पहले खाते में जमा कराना जरूरी नहीं है।विरोधाभासी विचारइस मामले में दो एकल पीठों द्वारा सुनाए गए परस्पर विरोधाभासी फैसलों को देखते हुए इस मामले को खंडपीठ को सौंप दिया गया।राजीव प्रींजा बनाम सारिका एवं अन्य मामले में  हाईकोर्ट की एकल पीठ ने एक आम आदेश देते हुए सभी सत्र अदालतों से कहा कि सीआरपीसी की धारा 399 के तहत आपराधिक पुनर्विचार याचिका...

पहली शिकायत के निपटारे के बाद नए तथ्यों का खुलासा हुआ हो तो दूसरी शिकायत भी सुनवाई योग्य : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
पहली शिकायत के निपटारे के बाद नए तथ्यों का खुलासा हुआ हो तो दूसरी शिकायत भी सुनवाई योग्य : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘ शिकायतकर्ता / अपीलकर्ता को पहली शिकायत के निपटारे के बाद मशीन के कुछ हिस्सों के बदलने से संबंधित कुछ तथ्यों को पता चला, वह भी दिल्ली की की फार्मा लिमिटेड से सर्विस रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद और इसलिए दूसरी शिकायत दर्ज कराने के लिए अपीलकर्ता पर कोई प्रतिबंध नहीं है।’  ओम प्रकाश सिंह बनाम बिहार राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया है कि पहली शिकायत के निपटारे के बाद नए तथ्य के सामने आने पर  ही दूसरी शिकायत सुनवाई योग्य हो सकती है। पहली शिकायत ईरा सिन्हा ने लोगोटेक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई...

किसी प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर सिर्फ इसलिए संदेह नहीं किया जा सकता कि उसने मृतक को बचाने की कोई कोशिश नहीं की : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
किसी प्रत्यक्षदर्शी की गवाही पर सिर्फ इसलिए संदेह नहीं किया जा सकता कि उसने मृतक को बचाने की कोई कोशिश नहीं की : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘किसी अपराध को देखकर हर व्यक्ति में अलग-अलग तरह की प्रतिक्रया होती है और उनकी गवाही पर सिर्फ इसलिए कोई संदेह नहीं किया जाना चाहिए कि गवाह ने एक ख़ास तरीके की प्रतिक्रया नहीं दी।”सुप्रीम कोर्ट ने मोतीराम पडू जोशी बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले में हत्या के अभियुक्त को मिली सजा को सही ठहराते हुए कहा कि प्रत्यक्षदर्शियों पर इसलिए कोई संदेह नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उन्होंने झगड़े में दखल नहीं दिया और मृतक को बचाने की कोशिश नहीं की।इस मामले में हाईकोर्ट ने अभियुक्त को बरी करने के निचली अदालत के निर्णय...

बिक्री के करार के तहत जारी किए गए चेक पर भी परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 लागू होगी अगर इस चेक की चर्चा बिक्री करार में नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]
बिक्री के करार के तहत जारी किए गए चेक पर भी परक्राम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 लागू होगी अगर इस चेक की चर्चा बिक्री करार में नहीं है : दिल्ली हाईकोर्ट [निर्णय पढ़ें]

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा है कि चेक के लौटने का अपराध पराक्रम्य लिखित अधिनियम की धारा 138 के तहत आएगा। कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद कि यह चेक बिक्री की करार के तहत जारी किया गया था पर अगर इस चेक के बारे में अगर बिक्री के करार में नहीं बताया गया है तो इस पर इस धारा के प्रावधान लागू होंगे। यह फैसला न्यायमूर्ति विपिन संघी ने भविष चंद्र शर्मा बनाम बावा सिंह मामले में दिया। निचली अदालत ने इस मामले में आरोपी को बरी करने का आदेश दिया था जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। शिकायतकर्ता का मामला यह है कि उसने...

महिला और बच्चों का वाणिज्यिक यौन शोषण : कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच और अभियोजन के लिए दिशानिर्देश जारी किया [आर्डर पढ़े]
महिला और बच्चों का वाणिज्यिक यौन शोषण : कलकत्ता हाईकोर्ट ने जांच और अभियोजन के लिए दिशानिर्देश जारी किया [आर्डर पढ़े]

कलकत्ता हाईकोर्ट ने अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम, 1956 के तहत मामलों की जांच और सुनवाई के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने कहा है कि इन निर्देशों को मानक मानकर इनका पालन करने की जरूरत है।न्यायमूर्ति रवि किशन कपूर और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची ने राज्य की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए ये दिशानिर्देश जारी किये। इस याचिका में संगीता साहू नामक महिला  को दी गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। संगीता पर एक होटल में संगठित रूप से देह व्यापार चलाने का आरोप है। उसके खराब स्वास्थ्य को...

कई देशों द्वारा मौत की सजा को खत्म करने से कोई आधार नहीं बनता कि इसे अपने देश में भी कानूनी किताब से निकाल दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]
कई देशों द्वारा मौत की सजा को खत्म करने से कोई आधार नहीं बनता कि इसे अपने देश में भी कानूनी किताब से निकाल दिया जाए : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़ें]

‘  जब तक  ये दंड संहिता में बना हुआ है, अदालतों को उचित मामलों में मौत की सजा देने में किसी अवैधता के तहत नहीं रखा जा सकता। ‘ निर्भया मामले में मौत की सजा पाए दो दोषियों की पुनर्विचार याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यूनाइटेड किंगडम, लैटिन अमेरिकी देशों और ऑस्ट्रेलियाई राज्यों जैसे कई देशों द्वारा मौत की सजा को खत्म करने से कोई आधार नहीं बनता कि मौत की सजा को अपने देश में भी कानून की किताब से निकाल दिया जाए। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने विनय शर्मा और...

गरीबों का इलाज करना डॉक्टरों का संवैधानिक कर्तव्य; छूट की जमीन पर बने अस्पतालों को गरीबों का मुफ्त इलाज करने के दिल्ली सरकार के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट ने जायज ठहराया [निर्णय पढ़ें]
गरीबों का इलाज करना डॉक्टरों का संवैधानिक कर्तव्य; छूट की जमीन पर बने अस्पतालों को गरीबों का मुफ्त इलाज करने के दिल्ली सरकार के सर्कुलर को सुप्रीम कोर्ट ने जायज ठहराया [निर्णय पढ़ें]

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्त्वपूर्ण फैसले में कहा कि गरीबों का इलाज करना डॉक्टरों का संवैधानिक कर्तव्य है और वे उन लोगों का इलाज करने से मना नहीं कर सकते जिनको किसी विशेष दवा या किसी विशेष डॉक्टर से इलाज कराना बहुत जरूरी है मगर उनके पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं।न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को निरस्त कर दिया जिसमें उसने दिल्ली सरकार के सर्कुलर को ख़ारिज कर दिया था।पीठ ने छूट वाली जमीन पर बने दिल्ली के सभी अस्पतालों को निर्देश दिया है कि वे सरकार...

सभी नौ सुनवाइयों पर स्थगन लेने के बाद अपील वापस लेने के फैसले से नाराज दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूब को प्रति सुनवाई 50 हजार जमा कराने को कहा [निर्णय पढ़ें]
सभी नौ सुनवाइयों पर स्थगन लेने के बाद अपील वापस लेने के फैसले से नाराज दिल्ली हाईकोर्ट ने यूट्यूब को प्रति सुनवाई 50 हजार जमा कराने को कहा [निर्णय पढ़ें]

यूट्यूब पर दिल्ली के एक डॉक्टर के खिलाफ एक अपमानजनक पोस्ट को हटाने के निचली अदालत के आदेश के खिलाफ उसकी अपील पर सुनवाई के बाद अपील वापस लेने से गुस्साए कोर्ट ने उसे प्रति सुनवाई 50 हजार रुपए जमा करने को कहा है। यूट्यूब के आग्रह पर 64 दिनों के भीतर नौ बार सुनवाई को स्थगित किया गया था।यह मामला साकेत कोर्ट से संबद्ध है जिसने जून 2015 में अमरीका स्थित कंपनी यूट्यूब और इसकी मातृ कंपनी गूगल को दिल्ली के एक डॉक्टर के खिलाफ अपमानजनक पोस्ट को हटाने का आदेश दिया था।कंपनी ने इस आदेश को चुनौती नहीं दी और...