मुख्य सुर्खियां
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बिना किराए सरकारी बंगलों में रहने के अधिनियम को असंवैधानिक करार दिया
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने मंगलवार को घोषित किया कि उत्तराखंड पूर्व मुख्यमंत्री सुविधा अधिनियम, 2019 जो राज्य के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बाजार के किराए का भुगतान किए बिना सरकारी बंगलों में रहने की अनुमति देता है, " संविधान के विपरीत " है। मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन और न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की पीठ ने माना है कि एक मुख्यमंत्री, एक बार जब वह पद छोड़ देता है, तो वह आम आदमी की तरह होता है और सुरक्षा और अन्य प्रोटोकॉल के अलावा किसी भी अधिमान्य उपचार का हकदार नहीं होता है।अदालत ने देखा, ...
" अगर बच्चे माता-पिता को शांति से रहने नहीं दे सकते तो कम से कम उनके जीवन को नर्क न बनाएं" बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी एक बेटी को चेतावनी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मंगलवार को सरिता सोमकुंवर नामक महिला को कड़ी चेतावनी दी। इस महिला पर अपनी ही बुजुर्ग मां को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने इस महिला को चेताते हुए कहा है कि अगर उसके खिलाफ एक और शिकायत आ गई तो उसे उस फ्लैट में जाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, जहां इस समय वह अपने 19 वर्षीय बेटे और मां के साथ रह रही है। न्यायमूर्ति एस जे कथावाला और न्यायमूर्ति एस पी तवाडे की खंडपीठ ने 70 वर्षीय रजनी सोमकुंवर की तरफ से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह...
केंद्र ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता सावित्री राठो की नियुक्ति को अधिसूचित किया
केंद्र सरकार ने उड़ीसा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अधिवक्ता सावित्री राठो की नियुक्ति को अधिसूचित किया है। इस वर्ष जनवरी में सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने धिवक्ता सावित्री राठो के नाम की सिफारिश की थी। उड़ीसा हाईकोर्ट कोलेजियम ने पिछले साल मई में राठो के नाम की सिफारिश की थी। हालांकि, एससी कॉलेजियम ने 3 अक्टूबर, 2019 को दिए गए अपने प्रस्ताव को रद्द कर दिया था। अधिसूचना पढ़ें
केंद्र सरकार ने जम्मू और कश्मीर हाईकोर्ट के जज के रूप में अधिवक्ता जावेद इकबाल वानी की नियुक्ति को अधिसूचित किया
केंद्र सरकार ने अधिवक्ता जावेद इकबाल वानी की नियुक्ति को जम्मू और कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेश के लिए उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में अधिसूचित किया है। यह अधिसूचना सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम द्वारा इस साल जनवरी में की गई सिफारिश के अनुरूप है। जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय कॉलेजियम ने पिछले साल मार्च में वानी के नाम की सिफारिश की थी। हालांकि, केंद्र सरकार द्वारा अपनी आईबी रिपोर्ट में आपत्तियां किए जाने के बाद इस पर तब विचार नहीं हुआ था। अधिसूचना...
भवन निर्माण श्रमिकों के फंड के कथित दुरुपयोग के ख़िलाफ़ सीबीआई जांच की मांग के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका
दिल्ली हाईकोर्ट में एक एनजीओ ने एक जनहित याचिका दायर कर करोड़ों के फंड के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है। यह फंड विशेष रूप से राष्ट्रीय राजधानी के पंजीकृत भवन निर्माण श्रमिकों के लिए है। यह याचिका पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति संस्थान (पीडीयूएसएस) नामक एनजीओ ने दायर की है, जिसमें कहा गया है कि इस मद में ₹3200 करोड़ जमा है। इस फंड का प्रबंधन दिल्ली भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिक कल्याण बोर्ड (डीबीओसीडब्ल्यू) करता है जिसका नेतृत्व राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली का श्रम मंत्री करता है। ...
दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोटिस, सम्मन और डाक की भौतिक रूप से सेवा पर अस्थायी रोक लगाई, ईमेल और व्हाट्सएप से दस्तावेज़ भेजने को प्राथमिकता
दिल्ली में COVID 19 के बढ़ते मामलों के आलोक में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने नोटिस, सम्मन और डाक की सेवा के संबंध में प्रक्रिया में अस्थायी संशोधन किया है। 03 जून को दिए गए आदेश में मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल ने निर्देश दिया था कि सभी दस्तावेजों / नोटिस / समन / डाक भौतिक रूप से भेजे दिया जाएं, सिवाय इसके कि अदालत द्वारा उस प्रभाव का कोई विशिष्ट आदेश हो। इस आदेश में अस्थायी संशोधन करते हुए निर्देश दिया गया है कि इस तरह के दस्तावेज भौतिक रूप से भेजने के बजाय ईमेल, फैक्स या व्हाट्सएप के माध्यम से...
वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन की पत्नी और जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की माता श्रीमती बापसी एफ नरीमन का निधन
वरिष्ठ अधिवक्ता फली एस नरीमन की पत्नी और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश माननीय श्री जस्टिस रोहिंटन एफ नरीमन की माता श्रीमती बापसी एफ नरीमन का आज नई दिल्ली में निधन हो गया। बुधवार, 10 जून को सुबह 11 बजे अंतिम संस्कार होगा और सरकार के नियमों के अनुसार केवल परिवार के सदस्य मौजूद रहेंगे, जिसमें 20 लोगों को शामिल होने की अनुमति है। बापसी 89 साल की थीं। उनकी और फली नरीमन की शादी 1955 में हुई थी। फली नरीमन की आत्मकथा "Before Memory Fades" में उनका उल्लेख किया गया है।
पूरी तरह अस्वीकार्य : दिल्ली हाईकोर्ट ने आदेश की सॉफ्ट कॉपी प्रमाणित न होने के आधार पर बेल बॉन्ड स्वीकार नहीं करने के लिए जिला न्यायाधीश की आलोचना की
दिल्ली हाईकोर्ट ने किसी आरोपी के बेल बॉन्ड को इस आधार पर स्वीकार करने से इनकार करने के लिए जिला न्यायाधीश की आलोचना की कि आरोपी के द्वारा पेश हाईकोर्ट के जमानत आदेश की सॉफ्ट कॉपी प्रमाणित नहीं की गई थी। यह आदेश जिला न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देने वाली आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत दायर एक याचिका पर सुनवाई में आया। जिला न्यायाधीश ने अपीलकर्ता की जमानत को इस आधार पर स्वीकार करने से इनकार कर दिया कि उसके द्वारा पेश हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी, प्रामाणिक प्रतिलिपि (authenticated...
COVID-19 का कोई मामला नहीं होने के बावजूद हज़रत निज़ामुद्दीन बस्ती पिछले 65 दिनों से है सील : दक्षिण पूर्वी दिल्ली के डीएम को नोटिस
हज़रत निज़ामुद्दीन बस्ती आरडब्ल्यूए ने प्रेसिडेंट ने दक्षिण पूर्वी दिल्ली के ज़िला मजिस्ट्रेट श्रीमती हरलीन कौर को एक कानूनी नोटिस दिया है। इस नोटिस में आरोप लगाया गया है कि कोरोना का कोई मामला नहीं होने के बाद भी इस अधिकारी ने इस क्षेत्र को पिछले 65 दिनों से सील कर रखा है। नोटिस में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी की हज़रत निज़ामुद्दीन बस्ती को जानबूझकर निशाना बनाया गया है ताकि मुस्लिम समुदाय को बदनाम किया जा सके। यह क्षेत्र 30 मार्च से सील है जबकि इस क्षेत्र में COVID-19 का एक भी मामला...
(जेलों में भीड़) पुलिस ने दिया कैदियों के क्वारंटाइन का आश्वासन, मद्रास हाईकोर्ट ने पैरोल के आदेशों को लिया वापस
मद्रास हाईकोर्ट ने सोमवार को COVID -19 के बीच जेलों के मद्देनजर जेलों में भीड़ कम करने के लिए 26 मार्च, 2020 की समन्वित पीठ की ओर से पारित आदेश के बाद रिहा किए गए 11 दोषियों के पैरोल आदेशों को वापस ले लिया। जस्टिस डॉ विनीत कोठारी और जस्टिस आर सुरेश कुमार की खंडपीठ ने आदेश दिया है कि पैरोल को वापस लिया जाए/ रद्द किया जाए और दोषी व्यक्तियों को 15 जून, 2020 को या उससे पहले संबंधित जेल अधीक्षकों के समक्ष आत्मसमर्पण करना चाहिए। उक्त आदेश पुलिस महानिदेशक के आश्वासनों के मद्देनजर दिया गया गया, जिसमें...
पुलिस बल के अंदर सांप्रदायिकता रोकने के लिए समिति का गठन करने की मांग, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष एक याचिका दायर कर मांग की गई है कि राज्य में पुलिस बल के भीतर बढ़ती ''सांप्रदायिकता'' की चिंता का समाधान करने के लिए विशेष समिति का गठन किया जाए। हाईकोर्ट के एक अधिवक्ता दीपक बुंदेला ने यह दायर याचिका दायर की है, जिसमें यह भी मांग की गई है कि राज्य में एक ''पुलिस शिकायत प्राधिकरण'' का गठन भी किया जाए। बुंदेला ने एडवोकेट एहतेशाम हाशमी के माध्यम से यह याचिका हाईकोर्ट के समक्ष दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कुछ पुलिसकर्मियों ने उस पर हमला करते हुए उसे...
बॉम्बे हाईकोर्ट ने मॉल में आने-जाने के रास्ते से अलग रास्ते की वाली शराब की दुकान को खोलने की अनुमति दी
बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को वृहन मुंबई नगरपालिका को 'वर्ल्ड ऑफ़ वाइंज़'नामक शराब के स्टोर को खोलने की इजाज़त देने का आदेश दिया। यह दुकान नरीमन प्वाइंट पर एक मॉल में है। शराब की इस अलग दुकान को नगरपालिका के नियमों के तहत होम डिलीवरी की भी अनुमति देने को कहा है। न्यायमूर्ति एसजे कठवल्ला और न्यायमूर्ति एसपी तावड़े की पीठ ने इस स्टोर के मालिक ओजस मार्केटिंग मैनजमेंट प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के बाद यह फ़ैसला दिया। तकनीकी रूप से यह स्टोर CR2 मॉल में है जो नरीमन प्वाइंट पर है। अदालत...
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने और अपने अधीनस्थ न्यायालयों के अंतरिम आदेशों की मियाद 29 जून तक बढ़ाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कई क्षेत्रों में COVID 19 महामारी के कारण आवाजाही पर रोक और कंटेनमेंट ज़ोन में अदालत का कामकाज नहीं होने को देखते हुए खुद के और अधीनस्थ न्यायालयों के सभी अंतरिम आदेशों की मियाद 29 जून 2020 तक के लिए बढ़ा दी है। आदेश के अनुसार, बेदख़ली और ढहाने के आदेश स्थगित रहेंगे और अग्रिम ज़मानत के आदेश जो 10 जून को समाप्त हो रहे थे अब 29 जून तक प्रभावी रहेंगे। नियमित ज़मानत आदेश जिनकी अवधि 14 जून से पहले समाप्त हो रही थी, अब 29 जून तक प्रभावी रहेंगे। न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और...
सीमा अवधि बढ़ाने वाला शीर्ष अदालत का पूर्व का आदेश सीआरपीसी की धारा 167 (2) पर भी लागू होगा? सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस आवेदन पर केन्द्र को नोटिस जारी किया, जिसमें स्पष्टीकरण की मांग की गई है कि 15 मार्च से सभी अपील दाखिल करने के लिए सीमा अवधि बढ़ाने वाला शीर्ष अदालत का पूर्व का आदेश, आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 167 (2) के तहत जमानत के लिए निर्धारित समय सीमा को कवर नहीं करता है। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने इस बात पर विचार किया कि क्या लॉकडाउन के दौरान सीमा अवधि के विस्तार के मुद्दे से संबंधित स्वत: संज्ञान मामले की सुनवाई करते...
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने कोर्ट क्लर्क के खिलाफ शुरु की मानहानि की कार्यवाही, यू-ट्यूब के जरिए न्यायिक अधिकारियों को बदनाम करने का है आरोप
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने मानसा में सत्र न्यायालय में तैनात एक कोर्ट क्लर्क के खिलाफ मानहानी का सुओ मोटो मुकदमा दायर किया है। क्लर्क पर कथित रूप से यू-ट्यूब के जरिए न्यायिक अधिकारियों को बदनाम करने का आरोप है। आरोपी हरमीत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने यू-ट्यूब पर एक चैनल बनाया था, जिसका शीर्षक 'भारतीय न्यायपालिका, लुधियाना का बदसूरत चेहरा' था और उस पर ऐसे वीडियो अपलोड किए थे, जिनमें न्यायिक अधिकारियों पर झूठे आरोप लगाए गए थे। आरोप है कि उक्त चैनल के जरिए आरोपी ने जिला व सत्र...
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा ,जमानत स्वीकार न करना सजा के तरीके के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने दोहराया है कि चूंकि अभियुक्त का अपराध केवल मुकदमे के समापन पर स्थापित होता है, इसलिए जमानत स्वीकार न करना सजा के एक तरीके के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। याचिकाकर्ता-अभियुक्त की नियमित जमानत अर्जी की अनुमति देते हुए, जिन्होंने जांच में आवश्यकतानुसार सहयोग किया था, जस्टिस संदीप शर्मा ने कहा, "जमानत का उद्देश्य मुकदमे में अभियुक्त की उपस्थिति को सुनिश्चित करना है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि जमानत दी जानी चाहिए या इनकार किया जाना है, उचित परिक्षण...
रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंंबर का मालिक यह कहकर निर्दोष होने का दावा नहीं कर सकता कि फोन किसी और ने इस्तेमाल किया था : पंंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अगर किसी अपराध के लिए मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका पंजीकृत मालिक केवल यह दावा करके अपनी जवाबदारी से बच नहीं सकता कि फोन का इस्तेमाल किसी और ने किया था। न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि रजिस्टर्ड मोबाइल फोन के मालिक पर यह बताने का दायित्व है कि उसके फोन का इस्तेमाल किसी और के द्वारा / अपराध के लिए कैसे किया गया। पीठ ने कहा कि "एक बार मोबाइल फोन, जो अपराध के कमीशन में इस्तेमाल किया गया...
COVID-19 : बॉम्बे हाईकोर्ट के SOP के बाद CMM ने निचली अदालतों में वकीलों और वादियों को एहतियात बरतने के लिए सर्कुलर जारी किया
बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र, गोवा, दादर और नगर हवेली के केंद्र शासित प्रदेशों और दमन और दीव में 3 जून को एक मानक संचालन प्रक्रिया ( SOP) जारी करते हुए घोषणा की कि गोवा और केंद्र शासित प्रदेशों में 50 % कर्मचारी और महाराष्ट्र में सभी अधीनस्थ न्यायालय 15% कर्मचारियों के साथ कामकाज शुरू करेंगे। मंगलवार से, पुणे, सोलापुर, औरंगाबाद, नासिक, मालेगांव, धुले, जलगांव, अकोला, अमरावती और नागपुर की नगरपालिका सीमा के भीतर अधीनस्थ अदालतें 6 घंटे में दो शिफ्टों में काम करना शुरू कर देंगी। पहली पाली में सुबह...
दिल्ली हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली दंगे के आरोपी को उसके खिलाफ दर्ज अन्य FIR में ज़मानत दी
दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी द्वारा 29/05/20 को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी फिरोज खान को उसके खिलाफ दर्ज अन्य सभी एफआईआर में जमानत दे दी है। 29 मई के आदेश में, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिरोज़ खान को उसके खिलाफ एफआईआर में जमानत दी थी। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने कहा था कि जेल मुख्य रूप से दोषियों को सजा देने के लिए है, न कि अंडरट्रायल को हिरासत में लेकर 'समाज को संदेश भेजने'के लिए। अदालत ने कहा था कि "...
POCSO मामले में ज़मानत की सभी कार्यवाही में पीड़ित को नोटिस दिए जाना सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट ने जारी किए निर्देश
दिल्ली हाईकोर्ट ने निर्देश जारी कर सेशन कोर्ट से कहा है कि The Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act, 2012 मामले में जब भी ज़मानत की अर्ज़ी पर सुनवाई हो तो यह सुनिश्चित किया जाए कि पीड़ित को इससे पहले नोटिस भेजा जाए । न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह की एकल पीठ ने कहा कि ज़िला जज सभी पीठासीन पदाधिकारियों को इस बात से अवगत कराएंगे कि इस शर्त का पालन अनिवार्य है कि सुनवाई से पहले पीड़ित को सूचित किया जाए। एक आपराधिक याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया कि आईपीसी की धारा...



















