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दिल्ली हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली दंगे के आरोपी को उसके खिलाफ दर्ज अन्य FIR में ज़मानत दी

LiveLaw News Network
8 Jun 2020 6:32 AM GMT
दिल्ली हाईकोर्ट के ताज़ा आदेश का हवाला देते हुए ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली दंगे के आरोपी को उसके खिलाफ दर्ज अन्य FIR में ज़मानत दी
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दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी द्वारा 29/05/20 को दिए गए आदेश का हवाला देते हुए, दिल्ली की ट्रायल कोर्ट ने दिल्ली दंगों के आरोपी फिरोज खान को उसके खिलाफ दर्ज अन्य सभी एफआईआर में जमानत दे दी है।

29 मई के आदेश में, दिल्ली हाईकोर्ट ने फिरोज़ खान को उसके खिलाफ एफआईआर में जमानत दी थी।

न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की एकल पीठ ने कहा था कि जेल मुख्य रूप से दोषियों को सजा देने के लिए है, न कि अंडरट्रायल को हिरासत में लेकर 'समाज को संदेश भेजने'के लिए।

अदालत ने कहा था कि

" कोर्ट का काम कानून के अनुसार न्याय करना है, न कि समाज को संदेश देने का। यह एक ऐसी भावना है, जिसके तहत राज्य मांग करता है कि बिना किसी उद्देश्य के भी कैदियों को जेल में रखा जाए, जिससे जेलों में भीड़ बढ़ जाएगी। वहीं अगर इस अपरिहार्य धारणा के साथ अंडरट्रायल को रखा जाएगा तो उनको ऐसा लगेगा कि उनके मुकदमों की सुनवाई पूरी होने से पहले ही उनको सजा दे दी गई है और सिस्टम उनके साथ गलत व्यवहार कर रहा है।

वहीं यदि एक लंबी सुनवाई के बाद अंत में अभियोजन पक्ष अपना आरोप साबित करने में नाकाम रहता है तो राज्य अभियुक्त द्वारा जेल में बिताए गए उसके जीवन के बहुमूल्य वर्षों को वापस नहीं कर सकता। दूसरी तरफ यदि मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद किसी अभियुक्त को सजा दी जाती है तो निश्चित रूप से उसे वह सजा काटनी होगी।"

उक्त आदेश के आधार पर, शनिवार को कड़कड़डूमा में ट्रायल कोर्ट ने फिरोज खान को उनके खिलाफ दर्ज की गई अन्य एफआईआर में भारतीय दंड संहिता की धारा 147,148,149,427, और धारा 436 के तहत जमानत दे दी।

जमानत देते समय, उक्त ट्रायल कोर्ट ने नोट किया कि

"इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि वर्तमान मामले की परिस्थितियांं दिल्ली के माननीय उच्च न्यायालय के निर्णय के दायरे में आती हैं और इस तथ्य को भी ध्यान में रखते हुए कि आरोपी को पुलिस द्वारा किसी और पूछताछ के लिए आवश्यक नहीं है, जमानत आवेदन स्वीकार किया जाता है और आरोपी को इस मामले में जेसी से रिहा करने का निर्देश दिया जाता है।"

कार्यवाही के दौरान, हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जमानत अर्जी का कड़ा विरोध किया था और कहा था कि आरोपी भीड़ का हिस्सा था, जो अन्य सह-आरोपियों के साथ दंगों, पथराव और सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने में शामिल था।

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें




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