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रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंंबर का मालिक यह कहकर निर्दोष होने का दावा नहीं कर सकता कि फोन किसी और ने इस्तेमाल किया था : पंंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट

LiveLaw News Network
8 Jun 2020 6:55 AM GMT
रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंंबर का मालिक यह कहकर निर्दोष होने का दावा नहीं कर सकता कि फोन किसी और ने इस्तेमाल किया था : पंंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अगर किसी अपराध के लिए मोबाइल फोन नंबर का इस्तेमाल किया जाता है, तो उसका पंजीकृत मालिक केवल यह दावा करके अपनी जवाबदारी से बच नहीं सकता कि फोन का इस्तेमाल किसी और ने किया था।

न्यायमूर्ति हरसिमरन सिंह सेठी की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि रजिस्टर्ड मोबाइल फोन के मालिक पर यह बताने का दायित्व है कि उसके फोन का इस्तेमाल किसी और के द्वारा / अपराध के लिए कैसे किया गया।

पीठ ने कहा कि

"एक बार मोबाइल फोन, जो अपराध के कमीशन में इस्तेमाल किया गया है, याचिकाकर्ता के नाम पर पंजीकृत है और याचिकाकर्ता के केवाईसी के बायो-मेट्रिक सत्यापन के बाद उक्त नंबर जारी किया गया है, अपराध के कमीशन के लिए उक्त नंबर का उपयोग कैसे किया गया? याचिकाकर्ता को यह स्पष्ट करना चाहिए।"

अदालत ने यह भी देखा कि आरोपी ने विशेष रूप से इनकार नहीं किया था कि वह उक्त मोबाइल नंबर का उपयोग नहीं कर रहा था।

अदालत अग्रिम जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें यह दावा किया गया था कि आईपीसी की धारा 420 और आईटी एक्ट की धारा 66 के तहत दर्ज एफआईआर में आरोपी का नाम अनावश्यक रूप से जोड़ा गया है।

सरकार ने तर्क दिया था कि मोबाइल नंबर, जो जिसे अपराध के लिए इस्तेमाल किया गया, उससे फर्जी कॉल किए गए और उक्त नंबर आरोपी के नाम पर पंजीकृत था। यह प्रस्तुत किया गया कि उक्त मोबाइल नंबर बायो-मैट्रिक सत्यापन और केवाईसी के बाद अभियुक्त के नाम पर जारी किया गया।

अदालत ने पाया कि मोबाइल फोन बरामद होना बाकी है और इस तरह, हिरासत में पूछताछ के लिए आरोपी की आवश्यकता है। इस तरह अदालत ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।

अदालत ने अपने आदेश में कहा,

"एक बार फोन को बरामद करना आवश्यक है, याचिकाकर्ता की हिरासत में पूछताछ आवश्यक है ताकि यह पता लगाया जा सके कि याचिकाकर्ता समान प्रकृति के किसी अन्य मामले में भी शामिल है या नहीं। गिरफ्तारी से पूर्व ज़मानत देने के लिए कोई भी आधार नहीं बताया गया है, इसलिए प्रार्थना को अस्वीकार कर दिया जाता है और याचिका खारिज की जाती है। "

आदेश की प्रति डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



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