सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : जानिए सुप्रीम कोर्ट में कैसा रहा पिछला सप्ताह

Update: 2021-02-28 15:06 GMT

22 फरवरी 2021 से 26 फरवरी 2021 तक सुप्रीम कोर्ट के कुछ ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र

पति के करियर और प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाले पत्नी के आरोप तलाक मांगने के लिए मानसिक क्रूरता के समान हैः सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पत्नी द्वारा लगाए गए ऐसे आरोप,जो पति के करियरऔर प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं,वह तलाक मांगने के लिए उसके खिलाफ की गई मानसिक क्रूरता के समान है।

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल,न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति हृषिकेश रॉय की खंडपीठ ने कहा कि सहनशीलता का स्तर हर जोड़े में एक दूसरे से भिन्न होता है और अदालत को पक्षकारों की पृष्ठभूमि, शिक्षा के स्तर और स्टे्टस को भी ध्यान में रखना होगा, ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि क्या क्रूरता का आरोप विवाह के विघटन को सही ठहराने के लिए पर्याप्त है।

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सुप्रीम कोर्ट ने 2021 में जाति आधारित जनगणना की मांग वाली जनहित याचिका पर नोटिस जारी किया

सुप्रीम कोर्ट ने (शुक्रवार) एक जनहित याचिका में नोटिस जारी की, जिसमें सरकार को 2021 में पिछड़े वर्गों के लिए जाति आधारित जनगणना करने के लिए निर्देश देने की मांग की गई। इसके साथ ही याचिका में सरकार के गृह मंत्रालय, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (Social Justice & Empowerment Department) और पिछड़े वर्ग के राष्ट्रीय आयोग को इसे संचालित करने के लिए निर्देश की देने मांग की गई । आज सुनवाई के दौरान, सीजेआई एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति बोपन्ना और न्यायमूर्ति रामसुब्रमण्यम की तीन-न्यायाधीश पीठ के समक्ष प्रस्तुत याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता जीएस मणि ने कहा कि अदालत ने वर्तमान मामले के समान एक मामले में नोटिस जारी किया था।

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'हम यौन उत्पीड़न मामलों को कारपेट के नीचे नहीं दबा सकते' : सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के जज के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही में दखल देने से इनकार किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मध्य प्रदेश के एक पूर्व जिला न्यायाधीश से जूनियर न्यायिक अधिकारी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों पर मप्र उच्च न्यायालय द्वारा शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को चुनौती देने वाली याचिका को वापस लेने के लिए कहा।

सीजेआई एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति एस ए बोपन्ना और न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन की तीन-न्यायाधीश पीठ ने हालांकि उन्हें जांच के लिए उपस्थित होने की स्वतंत्रता दी है।

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सुप्रीम कोर्ट ने 'अवनी' बाघिन को मारने पर महाराष्ट्र अफसरों के खिलाफ अवमानना याचिका को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को वन्यजीव शोधकर्ता संगीता डोगरा द्वारा 2018 में बाघिन अवनी की हत्या के संबंध में दायर अवमानना याचिका को वापस लेने पर खारिज कर दिया।

सीजेआई बोबडे, न्यायमूर्ति बोपन्ना और न्यायमूर्ति रामासुब्रमण्यन की तीन-न्यायाधीश पीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए निर्देश जारी किया जिसमें आरोप लगाया गया कि अधिकारियों द्वारा अवनी के हत्यारों को अदालत के निर्देशों की धज्जियां उड़ाते हुए इनाम दिया गया।

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"हम कोर्ट में मुकदमों का बोझ बढ़ाने के जिम्मेदार, क्योंकि अंडरटेकिंग देने को अनुमति देने के बाद अवमानना याचिका दाखिल होती है " : सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने कहा, "जब हम किसी पक्ष को किसी अंडरटेकिंग को प्रस्तुत करने की अनुमति देते हैं, तो ज्यादातर मामलों में इसके बाद अवमानना याचिका दाखिल की जाती है। इस तरह से हमारे सामने सैकड़ों अवमानना याचिकाएं हैं। हम सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों को बढ़ा रहे हैं।" न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ कर्नाटक उच्च न्यायालय के आदेशों से उत्पन्न एक एसएलपी पर विचार कर रही थी, जिसके द्वारा न्यायालय ने पहले निष्कासन के आदेश के खिलाफ संशोधन याचिका खारिज कर दी थी, फिर इस फैसले पर पुनर्विचार भी किया था और याचिकाकर्ता-किरायेदार को खाली करने के लिए अतिरिक्त समय देने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया था।

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शिक्षा, सह-पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियां उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के दायरे में 'सेवा' नहीं: एनसीडीआरसी

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने दोहराया है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 शैक्षणिक संस्थानों पर लागू नहीं होता है, और सह-पाठ्यचर्या संबंधी गतिविधियां जैसे तैराकी "सेवा" के दायरे में नहीं आती हैं, जो अधिनियम के तहत परिभाषित हैं। मामले के तथ्य मौजूदा अपील उत्तर प्रदेश उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, लखनऊ के 03.06.2016 के आदेश के खिलाफ छात्र के पिता द्वारा दायर की गई थी। छात्र प्रतिवाद स्कूल में एनरॉल था। दलील दी गई कि स्कूल ने तैराकी सहित विभिन्न समर कैंप गतिविधियों की पेशकश की, और छात्रों को एक हजार रुपए का शुल्क देकर शामिल होने के लिए कह। अपीलकर्ता ने स्कूल की पेशकश के अनुसार एनरॉल किया।

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नए सोशल मीडिया नियम: मैसेजिंग प्लेटफ़ॉर्म से मैसेज के 'पहले ओरिजनेटर' को ट्रेस करने के लिए कहा जा सकता है

सोशल मीडिया को विनियमित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित नए नियमों के तहत सोशल मीडिया इंटरमीडियरी द्वारा मैसेजिंग के 'पहले ओरिजनेटर' को ट्रेस करने के लिए 'व्हाट्सएप', 'फेसबुक मैसेंजर', 'टेलीग्राम' जैसे मैसेजिंग प्लेटफॉर्म से कहा जा सकता है। यह एक महत्वपूर्ण फैसला है क्योंकि कानून को लागू करने वाली एजेंसियां फेक न्यूज फैलाने वाले, अभद्र भाषा वाले आदि वायरल फॉरवर्ड मैसेजस के बारे में गंभीर रूप से लगातार चिंताएं जता रही थीं।

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NI एक्ट 138 : सुप्रीम कोर्ट ने चेक अनादर मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त अदालतों के गठन पर केंद्र की राय पूछी

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 की धारा 138 के तहत चेक अनादर के मामलों की सुनवाई के लिए अतिरिक्त अदालतों के गठन पर केंद्र सरकार से विचार मांगे।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एस रवींद्र भट की पीठ ने एडिशनल सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी से पूछा कि क्या भारत संघ संविधान के अनुच्छेद 247 के तहत शक्तियों का प्रयोग कर एनआई अधिनियम की धारा 138 के मामलों के लिए अतिरिक्त अदालतें बनाने के लिए तैयार है?

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सरकारी कर्मचारी वेतन और पेंशन पाने के हकदार हैं; भुगतान में देरी होने पर उचित ब्याज देना होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी कर्मचारी वेतन और पेंशन पाने के हकदार हैं और सरकार ने जो सरकारी कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के भुगतान में देरी की है, उसके लिए सरकार को उचित ब्याज दर (Interest Rate) के साथ वेतन और पेंशन का भुगतान करने के लिए निर्देशित किया जाता है। आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक पूर्व जिला और सत्र न्यायाधीश द्वारा दायर जनहित याचिका को अनुमति प्रदान की थी और जिसमें (i) मार्च-अप्रैल 2020 के स्थगित वेतन का भुगतान 12% प्रति वर्ष की ब्याज दर से वेतन का भुगतान करने (ii) समान ब्याज दर के साथ मार्च 2020 के महीने के लिए आस्थगित पेंशन का भुगतान करने के लिए कहा गया।

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सीपीसी आदेश VII नियम 11 : अदालतों के पास यह देखने की शक्ति कि इसके समय में तुच्छ या तंग करने वाले मुकदमों को अनुमति ना दी जाए : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आदेश VII नियम 11 [वाद की अस्वीकृति] के प्रावधान विस्तृत नहीं होते हैं और न्यायालय के पास यह देखने की शक्ति है कि न्यायालयों के समय के दौरान तुच्छ या तंग करने वाले मुकदमों को अनुमति नहीं दी जाए। इस मामले में, वादी ने मद्रास उच्च न्यायालय के मूल पक्ष में एक सिविल वाद दायर किया, जिसमें अन्य प्रतिवादियों के पक्ष में पहले प्रतिवादी द्वारा निष्पादित बिक्री को इस आधार पर चुनौती दी गई थी कि वादी और पहले प्रतिवादी के बीच पूर्व- क्रय समझौता है।

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शारीरिक रूप से गुप्त मतदान के माध्यम से एससीबीए चुनाव कराने की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एससीबीए उप नियमों के संदर्भ में शारीरिक रूप से गुप्त मतदान के माध्यम से आगामी चुनाव कराने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की चुनाव समिति को निर्देश देने के लिए दायर याचिका को वापस लेने के कारण खारिज कर दिया।

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन और न्यायमूर्ति बीआर गवई की पीठ ने याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार यादव से सवाल किया कि वर्तमान मामला भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत कैसे सुनवाई योग्य है।

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मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन का उल्लंघन करने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी मेडिकल कॉलेज पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया

सुप्रीम कोर्ट ने (बुधवार) सरस्वती मेडिकल कॉलेज को महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा (Director General Medical Education) द्वारा आवंटित नहीं की गई मेडिकल सीटों पर छात्रों को एडमिशन देकर मेडिकल काउंसिल रेगुलेशन का जानबूझकर उल्लंघन करने पर पांच करोड़ रुपये जुर्माने लगाया। कालेज को यह जुर्माना सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया गया।

आगे कोर्ट ने कहा कि कॉलेज ने स्वंय ही 132 छात्रों को एडमिशन दिया और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के द्वारा छात्रों को डिस्चार्ज करने के निर्देश के बावजूद कॉलेज ने एडमिशन जारी रखा। कॉलेज ने निर्देशों का पालन नहीं किया, इसलिए कोर्ट कॉलेज को माफ नहीं कर सकता।

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नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए राज्य अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर सकता है ' : मुख्तार अंसारी को ट्रांसफर करने की याचिका में यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा

उत्तर प्रदेश राज्य ने अपनी उस याचिका में लिखित दलीलें दायर की है, जिसे वर्तमान में पंजाब की जेल में बंद बसपा विधायक मुख्तार अंसारी को हत्या, जबरन वसूली आदि से जुड़े दस मामलों में यूपी में ट्रायल का सामना करने के लिए दायर किया गया है। लिखित प्रस्तुतियां निम्नलिखित हैं: 1. राज्य द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत याचिका सुनवाई योग्य है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत किया गया है कि राज्य द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत एक याचिका दायर करने के लिए कोई निहित या स्पष्ट रोक मौजूद नहीं है, जब तक कि मौलिक अधिकारों की सुरक्षा के लिए पारित किए जाने वाले आदेश / निर्देश की आवश्यकता मौजूद है।

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यूपीएससी परीक्षा के लिए कोई अतिरिक्त मौका नहीं : सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी प्रयास कर चुके प्रत्याशियों की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन अभ्यर्थियों के लिए अतिरिक्त मौका देने की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने अक्टूबर 2020 में अपना अंतिम प्रयास समाप्त कर लिया था। 9 फरवरी, 2021 को जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस इंदु मल्होत्रा और जस्टिस अजय रस्तोगी की पीठ ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था (रचना बनाम भारत संघ)। पिछली सुनवाई में, केंद्र की ओर से पेश एएसजी एसवी राजू ने अतिरिक्त मौके की मांग के खिलाफ प्रस्तुतियां दीं और कहा कि अभ्यर्थी की याचिका अनुचित है क्योंकि उम्मीदवारों को 2020 में परीक्षा की तैयारी के लिए पर्याप्त समय दिया गया था।

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पालघर लिंचिंग मामला : सुप्रीम कोर्ट ने NIA जांच की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाली

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पालघर लिंचिंग मामले की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से जांच कराने की याचिका पर सुनवाई दो सप्ताह के लिए टाल दी जिसमें दो साधुओं को पालघर में मौत के घाट उतार दिया गया था। जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने महाराष्ट्र राज्य को दूसरी चार्जशीट कोर्ट में दाखिल करने का निर्देश दिया और उसके बाद मामले को स्थगित करने के लिए आगे बढ़ी। महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता आर बसंत ने पीठ को बताया कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट में दूसरी पूरक चार्जशीट दाखिल की जानी है।

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जब तक आदेश XLI नियम 27, 28 और 29 के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तब तक अपीलीय अदालत अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दे सकती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जब तक आदेश XLI नियम 27, 28 और 29 के तहत प्रक्रिया का पालन नहीं किया जाता है, तब तक अपील करने वाले पक्षों को अतिरिक्त साक्ष्य प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है और / या अपीलीय अदालत के लिए उस अदालत को निर्देश देने के लिए न्यायसंगत नहीं है जिसमें डिक्री की अपील को प्राथमिकता दी गई है या किसी अन्य अधीनस्थ अदालत को भी, जिसके द्वारा ऐसे सबूतों को लेने और अपीलीय न्यायालय को भेजा जाना है।

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हम अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट या मजिस्ट्रेट नहीं हैं: सुप्रीम कोर्ट ने 'योर ऑनर' कहे जाने पर जताई आपत्त‌ि

भारत के मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच ने सोमवार को एक लॉ स्टूडेंट के संबोधन पर तब आपत्ति जताई, जब उसने जजों को 'योर ऑनर' कहकर संबोधित किया। छात्र पार्टी-इन-पर्सन के रूप में पेश हुआ था।

सीजेआई एसए बोबेडे ने याचिकाकर्ता से कहा, "जब आप हमें योर ऑनर कहते हैं, तो या तो आपके ध्यान में सुप्रीम कोर्ट ऑफ यूनाइटेड स्टेट्स या मजिस्ट्रेट होते हैं, जबकि हम दोनों नहीं हैं।' याचिकाकर्ता ने उक्त टिप्‍पणी के बाद तुरंत माफी मांगी और कहा कि वह "माई लॉर्ड्स" शब्द का उपयोग करेगा। सीजेआई ने जवाब दिया, "जो कुछ भी हो। हमारा विषय यह नहीं है कि आप हमें क्या कहते हैं। लेकिन गलत शब्दों का प्रयोग न करें"।

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स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत पेंशन आवश्यक प्रमाण से ही प्राप्त की जा सकती है, किसी अन्य तरीके से नहीं': सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत पेंशन आवश्यक प्रमाण (प्रूफ) से ही प्राप्त की जा सकती है और इसके अलावा किसी अन्य तरीके से पेंशन नहीं प्राप्त किया जा सकता है।

जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की बेंच ने मद्रास उच्च न्यायालय के उस आदेश को अलग रखा, जिसमें स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के तहत ए. अलागम पेरुमल कोन को स्वतंत्रता सेनानी पेंशन देने का आदेश दिया गया था। पीठ ने कहा कि, "जब कोई विशेष पेंशन योजना के तहत दावा किया जाता है, जब तक कि कोई पेंशन देने के लिए पात्रता मानदंड को पूरा नहीं करता है, जैसा कि योजना में उल्लेख किया गया है, कोई भी आवेदक इस तरह के पेंशन का दावा नहीं कर सकता है। "

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पारिवारिक समझौते के तहत पहले से मौजूद अधिकारों को मान्यता देने के लिए दाखिले पर आधारित एक सहमति डिक्री को भारतीय पंजीकरण अधिनियम की धारा 17 (1) (बी) के तहत पंजीकरण की आवश्यकता नहीं : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि पारिवारिक समझौते के तहत पहले से मौजूद अधिकारों को मान्यता देने के लिए दाखिले पर आधारित एक सहमति डिक्री को भारतीय पंजीकरण अधिनियम की धारा 17 (1) (बी) के तहत पंजीकरण की आवश्यकता नहीं है। बदलू, कृषि भूमि का कार्यकाल धारक था। उसके दो बेटे बाली राम और शेर सिंह थे। वर्ष 1953 में शेर सिंह का निधन हो गया और उनकी विधवा जगनो बच गई। शेर सिंह की मृत्यु के बाद, उसकी विधवा को अपने दिवंगत पति का हिस्सा विरासत में मिला, यानी, बदलू के स्वामित्व वाली कृषि संपत्ति का आधा हिस्सा।

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निर्माता डीलर की गलती के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जब तक साबित ना हो कि उन मामलों में उनके बीच संबंध "सिद्धांत-दर-सिद्धांत" के आधार पर था और निर्माता डीलर की कमियों से अवगत था

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई निर्माता डीलर की गलती के लिए उत्तरदायी नहीं होगा, जब तक कि यह साबित नहीं हो जाता है कि निर्माता डीलर की कमियों से अवगत था, उन मामलों में जहां उनके बीच संबंध "सिद्धांत-दर-सिद्धांत" के आधार पर था। ऐसा कहते हुए, जस्टिस यूयू ललित, जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस एस रवींद्र भट की तीन जजों वाली बेंच ने टाटा मोटर्स लिमिटेड को अपने एक गोवा स्थित एक डीलर, विस्तार गोवा ( प्राइवेट) लिमिटेड के अनुचित व्यापार व्यवहार से उत्पन्न देयता से मुक्त कर दिया।

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'जेलों में दुखद स्थिति ' : सुप्रीम कोर्ट ने पैरोल आवेदन पर विचार करने में विफलता पर विभागीय जांच के खिलाफ जेल अधीक्षक की याचिका खारिज की

जो लोग मांस का एक पैकेट खोल नहीं सकते, उनकी जेलों को चलाने के लिए कोई भूमिका नहीं है। यह जेलों की दुखद स्थिति है, " सोमवार को न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ ने टिप्पणी की। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एमआर शाह की पीठ औरंगाबाद, महाराष्ट्र के जेल अधीक्षक की याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें बॉम्बे हाई द्वारा आवश्यक समय से पूर्व पैरोल के लिए आवेदन पर विचार करने में विफलता के लिए उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के सरकार के फैसले का विरोध किया था।

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हिंदू महिला अपने माता-पिता की ओर अपने उत्तराधिकारी के साथ "पारिवारिक समझौते' में शामिल हो सकती है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एक हिंदू महिला अपने माता-पिता की ओर अपने उत्तराधिकारी के साथ " पारिवारिक समझौते' में शामिल हो सकती है। पृष्ठभूमि के तथ्य बदलू, कृषि भूमि का कार्यकाल धारक था। उसके दो बेटे बाली राम और शेर सिंह थे। वर्ष 1953 में शेर सिंह का निधन हो गया और उनकी विधवा जगनो बच गई। शेर सिंह की मृत्यु के बाद, उसकी विधवा को अपने दिवंगत पति का हिस्सा विरासत में मिला, यानी, बदलू के स्वामित्व वाली कृषि संपत्ति का आधा हिस्सा।

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सुप्रीम कोर्ट ने मॉडल बिल्डर-क्रेता समझौता और एजेंट-क्रेता समझौता तैयार करने मांग वाली याचिका पर सुनवाई एक सप्ताह के लिए टाली

सुप्रीम कोर्ट ने पारदर्शिता, निष्पक्ष खेल सुनिश्चित करने और धोखाधड़ी को कम करने के लिए एक मॉडल बिल्डर-क्रेता समझौता और एजेंट-क्रेता समझौता तैयार करने के लिए केंद्र को दिशा-निर्देशों की मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई को एक सप्ताह के लिए स्थगित कर दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिकाकर्ता को कई राज्यों में पहले से ही एक मॉडल समझौते से संबंधित निर्देश और जानकारी लेने के लिए एक सप्ताह का समय दिया

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 अमेज़न बनाम फ्यूचर : सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया, NCLT कार्यवाही की अनुमति दी, योजना के अनुमोदन पर रोक लगाई

सुप्रीम कोर्ट ने आज अमेज़न द्वारा दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा अपनी ही जस्टिस मिड्ढा की सिंगल जज बेंच द्वारा दिए गए आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने को चुनौती देने की याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें भविष्य के लिए रिलायंस रिटेल हिस्सेदारी बिक्री के 25000 करोड़ रुपये के सौदे पर यथास्थिति का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने एनसीएलटी की कार्यवाही को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया है, लेकिन योजनाओं के अनुमोदन पर किसी अंतिम आदेश देने से रोक दिया है।

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ऑपरेटिव ऑर्डर के साथ व्याख्यात्मक निर्णय दिया जाये : सुप्रीम कोर्ट ने 'रिजन्स टू फॉलो' ऑर्डर जारी करने के एनसीडीआरसी के रवैये की आलोचना की

सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) द्वारा आदेश की व्याख्या बाद में किये जाने ('रिजन्स टू फॉलो') की परम्परा की आलोचना करते हुए उसे ऑपरेटिव ऑर्डर के साथ व्याख्यात्मक फैसला देने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की खंडपीठ ने कहा कि एनसीडीआरसी के समक्ष वैसे सभी मामलों में, जिनमें व्याख्या नहीं हुई है, दो महीने की अवधि के भीतर मामले के पक्षकारों को इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करायी जानी चाहिए।

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सुप्रीम कोर्ट ने सासंद कार्ति चिदंबरम को दो करोड़ रुपये जमा कराने की शर्त पर 6 महीने के लिए विदेश जाने की इजाजत दी

जस्टिस अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सोमवार को कार्ति चिदंबरम को 2 करोड़ रुपए जमा करने की शर्त पर विदेश यात्रा की अनुमति दी एएसजी राजू ने आवेदन की अनुमति का विरोध करते हुए तर्क दिया कि अनुमति, यदि दी जाए, तो 10 करोड़ रुपये की राशि जमा करके दी जाए, जैसा कि पहले भी किया गया था। हालांकि, कार्ति चिदंबरम की ओर से पेश कपिल सिब्बल ने कहा, "एक सांसद को 10 करोड़ रुपये जमा करने के लिए क्यों कहा जाना चाहिए?"

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