Digital Arrest' घोटालों पर सुप्रीम कोर्ट की स्वतः संज्ञान कार्यवाही: गृह मंत्रालय ने SOP का प्रस्ताव रखा, इंटर-एजेंसी समन्वय और ठगे गए धन की वापसी पर ज़ोर
सुप्रीम कोर्ट में 'डिजिटल अरेस्ट स्कैम' से जुड़े स्वतः संज्ञान (suo motu) मामले की सुनवाई के दौरान गृह मंत्रालय (MHA) ने एक स्थिति रिपोर्ट दाख़िल कर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) का प्रस्ताव रखा है। इस SOP का उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना और जहाँ संभव हो, ठगी से निकाली गई राशि की समयबद्ध वापसी सुनिश्चित करना है।
यह मामला चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ के समक्ष लंबित है। कोर्ट के निर्देश पर MHA ने 'डिजिटल अरेस्ट' से जुड़े सभी पहलुओं की व्यापक जांच के लिए एक उच्च-स्तरीय अंतर-विभागीय समिति (IDC) का गठन किया था।
हाल ही में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने कोर्ट को बताया कि IDC की दूसरी बैठक 2 फरवरी को हुई, जिसमें विभिन्न हितधारकों ने अब तक उठाए गए कदमों की जानकारी दी। ताज़ा स्थिति रिपोर्ट में अलग-अलग एजेंसियों द्वारा किए गए उपायों का विवरण दिया गया है—
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI)
Central Bureau of Investigation ने I4C द्वारा साझा किए गए डेटा के आधार पर ₹10 करोड़ या उससे अधिक के नुकसान वाले 'डिजिटल अरेस्ट' मामलों की पहचान की है और उनकी जांच की जाएगी। इसके लिए दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 की धारा 6 के तहत आवश्यक सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया जारी है।
दूरसंचार विभाग (DoT)
Department of Telecommunications ने कई अहम कदम उठाए हैं, जिनमें शामिल हैं—
टेलीकम्युनिकेशंस (यूज़र आइडेंटिफिकेशन) नियम, 2025 का ड्राफ्ट, ताकि लापरवाह SIM जारी करने, मल्टीपल SIM और 'म्यूल SIM' पर रोक लगे (बायोमेट्रिक पहचान के ज़रिये)।
SIMBOX से जुड़े मामलों से निपटने के लिए रेडियो इक्विपमेंट पज़ेशन से जुड़े ड्राफ्ट नियम।
WhatsApp, Telegram, Signal जैसे ऐप-आधारित कम्युनिकेशन प्लेटफॉर्म्स के लिए SIM-बाइंडिंग और सेशन अवधि तय करने के निर्देश (VoIP आधारित स्कैम पर रोक के लिए)।
स्पूफ्ड इंटरनेशनल कॉल ब्लॉक करना, म्यूल SIM का पुनः सत्यापन, संचार साथी और डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म का संचालन।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI)
Reserve Bank of India ने IDC को बताया—
AI आधारित निगरानी: 26 बैंकों में “MuleHunter.ai” की तैनाती।
PMLA के तहत संदिग्ध लेन-देन पर अस्थायी रोक की कानूनी संभावना पर विचार।
साइबर फ्रॉड और म्यूल अकाउंट्स रोकने के लिए डेबिट होल्ड SOP का मसौदा।
धोखाधड़ी से प्रेरित अधिकृत लेन-देन में क्षतिपूर्ति और दायित्व ढांचा विकसित करने पर काम।
NCRP को Account Aggregator और CKYC से जोड़ने की संभावना।
KYC में चूक या मिलीभगत पर कड़ी जवाबदेही तय करना।
गृह मंत्रालय (MHA)
MHA ने साइबर वित्तीय धोखाधड़ी मामलों के लिए अपने प्रस्तावित SOP पर ज़ोर दिया, जिसमें—
बैंक खातों को फ्रीज़/अनफ्रीज़ करने की प्रक्रिया,
धोखाधड़ी की राशि पर लियन लगाने और हटाने की व्यवस्था,
Citizen Financial Cyber Fraud Reporting and Management System (CFCFRMS) के ज़रिये धन की वापसी,
गलत तरीके से की गई कार्रवाई के खिलाफ ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र,
SOP के क्रियान्वयन की निगरानी और कानूनी आधार (BNSS, PMLA व न्यायिक आदेश) शामिल हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)
Ministry of Electronics and Information Technology ने बताया—
Google, Meta, Microsoft जैसे बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ उच्च-स्तरीय बैठक।
Microsoft द्वारा त्वरित कार्रवाई की सराहना, जबकि WhatsApp की ओर से अपर्याप्त कदमों पर चिंता।
IT अधिनियम, 2000 के तहत क्षतिपूर्ति तंत्र मज़बूत करने के प्रयास।
CDAC के साथ मिलकर शिकायत और मुआवज़ा प्रक्रिया के लिए समर्पित पोर्टल विकसित करना।
स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, IDC ने यह भी नोट किया कि RBI, DoT, MeitY, उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय और विधि विभाग के प्रतिनिधियों के साथ एक उप-समिति गठित की जाएगी, जो बैंकों, टेलीकॉम कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की साझा जिम्मेदारी तय करने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करेगी।
सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की निगरानी जारी रखे हुए है, ताकि 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके और पीड़ितों को त्वरित राहत मिल सके।