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ऑपरेटिव ऑर्डर के साथ व्याख्यात्मक निर्णय दिया जाये : सुप्रीम कोर्ट ने 'रिजन्स टू फॉलो' ऑर्डर जारी करने के एनसीडीआरसी के रवैये की आलोचना की

LiveLaw News Network
22 Feb 2021 4:18 AM GMT
ऑपरेटिव ऑर्डर के साथ व्याख्यात्मक निर्णय दिया जाये : सुप्रीम कोर्ट ने रिजन्स टू फॉलो ऑर्डर जारी करने के एनसीडीआरसी के रवैये की आलोचना की
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सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निपटारा आयोग (एनसीडीआरसी) द्वारा आदेश की व्याख्या बाद में किये जाने ('रिजन्स टू फॉलो') की परम्परा की आलोचना करते हुए उसे ऑपरेटिव ऑर्डर के साथ व्याख्यात्मक फैसला देने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी की खंडपीठ ने कहा कि एनसीडीआरसी के समक्ष वैसे सभी मामलों में, जिनमें व्याख्या नहीं हुई है, दो महीने की अवधि के भीतर मामले के पक्षकारों को इसकी उपलब्धता सुनिश्चित करायी जानी चाहिए।

मौजूद मामले में ऑपरेटिव ऑर्डर 26 अप्रैल 2019 को घोषित किया गया था और इसका व्याख्यात्मक फैसला आठ माह के बाद उपलब्ध कराया गया था।

इसका उल्लेख करते हुए बेंच ने कहा,

"निर्विवाद रूप से, जिन मामलों में कोर्ट के समक्ष कारणों की व्याख्या के जरिये पीड़ित पक्षों को कानूनी राहत की गुंजाइश होती है और यदि उन्हें फैसले का कारण उपलब्ध नहीं कराया जाता है तो यह उनके साथ पूर्वाग्रह होता है। यह निश्चित तौर पर फैसलों को मेरिट के आधार पर चुनौती देने के पीड़ित पक्ष के अधिकारों के उल्लंघन के समान है, यहां तक कि इससे सफल पक्ष मुकदमे की सफलता का फल हासिल करने से वंचित हो जाता है।"

कोर्ट ने 'ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड बनाम जायझू शाई (Zaixhu Xie) एवं अन्य' के मामले में हाल ही में जारी एक आदेश का उल्लेख भी किया, जिसमें यह कहा गया था कि फैसला देने में देरी भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है और यह समस्या तब और उग्र रूप ले लेती है जब फैसले का ऑपरेटिव पार्ट जल्दी उपलब्ध करा दिया जाता है और व्याख्यात्मक आदेश बहुत बाद में जारी किया जाता है या अनिश्चित काल तक उपलब्ध नहीं कराया जाता है।

एनसीडीआरसी के रजिस्ट्रार की ओर से पेश की गयी रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए बेंच ने कहा कि 20 दिसम्बर 2019 तक 85 ऐसे मामले थे, जिनमें ऑपरेटिव ऑर्डर जारी कर दिये गये थे, लेकिन व्याख्यात्मक निर्णय अभी तक नहीं दिया गया है।

कोर्ट ने कहा,

"आयोग के रजिस्ट्रार द्वारा उपलब्ध कराये गये तथ्यों को किसी भी प्रकार से उचित नहीं ठहराया जा सकता कि आदेश के ऑपरेटिव पार्ट को जारी करने के लंबे समय बाद भी व्याख्यात्मक आदेश जारी नहीं किया जा सका हो या दोनों के बीच का अंतराल फैसला सुरक्षित किये जाने के बाद निर्णय सुनाये जाने की महत्तम अवधि से भी अधिक हो।"

केस का नाम : सुदीप्त चक्रवर्ती बनाम राणाघाट एस डी अस्पताल [ सिविल अपील नं. 9404 /2019 ]

कोरम : न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी

साइटेशन : एलएल 2021 एस सी 100

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