इलाहाबाद हाईकोट
एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास पर यूपी सरकार को हाईकोर्ट की फटकार, शीर्ष अधिकारियों को किया तलब
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एसिड अटैक पीड़ितों के पुनर्वास, मुआवजे और दीर्घकालिक सहायता को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने कहा कि राज्य सरकार इस गंभीर मुद्दे को हल्के और लापरवाह तरीके से ले रही है और अब तक कोई ठोस पुनर्वास नीति तैयार नहीं की गई।जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि एसिड अटैक पीड़ितों के लिए प्रभावी और समयबद्ध नीति बनाने के लिए सरकार की ओर से उच्च प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस प्रयास दिखाई नहीं देता।अदालत ने इस मामले में...
चाइनीज मांझे पर सख्त कानून लाएगी यूपी सरकार, पीड़ितों को मुआवजा देने पर भी विचार: हाईकोर्ट में दी जानकारी
उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को बताया कि जानलेवा चाइनीज मांझा के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून लाया जाएगा। सरकार ने यह भी कहा कि इस प्रस्तावित कानून में पीड़ितों को मुआवजा देने का प्रावधान भी शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।जस्टिस राजन रॉय और जस्टिस मंजीव शुक्ल की खंडपीठ को बताया गया कि प्रस्तावित कानून का नाम उत्तर प्रदेश घातक मांझा (निर्माण, बिक्री और उपयोग निषेध) अधिनियम रखा जा सकता है।सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि फिलहाल कानून का...
गंगा में नाव पर इफ्तार विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को भी दी जमानत
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी में गंगा नदी में नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, कथित तौर पर मांसाहारी भोजन करने और उसका बचा हुआ हिस्सा नदी में फेंकने के आरोप में गिरफ्तार बाकी 6 मुस्लिम आरोपियों को भी जमानत दी।जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने यह राहत देते हुए कहा कि इसी FIR में शामिल 8 अन्य आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।गौरतलब है कि 15 मई को जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ल ने 5 आरोपियों और जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को जमानत दी थी। सोमवार के आदेश के बाद...
S.133 CrPC | उपद्रव हटाने की कार्यवाही में पेश किया गया साक्ष्य विश्वसनीय होना चाहिए, न कि निर्णायक प्रकृति का: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि CrPC की धारा 133 के तहत परेशानी हटाने की कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है और इसमें कथित परेशानी से जुड़े आवेदन पर फैसला करने के लिए "कोई भी भरोसेमंद सबूत" चाहिए होता है, न कि निर्णायक सबूत।जस्टिस डॉ. अजय कुमार-II ने फैसला दिया,"CrPC की धारा 133 के तहत कार्यवाही संक्षिप्त प्रकृति की होती है। इसका मकसद सार्वजनिक शांति और अमन को होने वाले आसन्न खतरे के मामलों से निपटना होता है। इसका इस्तेमाल—या बल्कि दुरुपयोग—किसी संपत्ति के मालिक के कीमती अधिकार को खत्म...
हाईकोर्ट अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता में भरण-पोषण की राशि बढ़ा या घटा नहीं सकता, इसका उपाय BNSS की धारा 146 के तहत: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपनी पुनरीक्षण अधिकारिता के तहत किसी याचिका पर सुनवाई करते समय भरण-पोषण की राशि को सीधे तौर पर बढ़ा या घटा नहीं सकता।जस्टिस अचल सचदेव की पीठ ने टिप्पणी की कि बदली हुई परिस्थितियों के कारण भरण-पोषण भत्ते में संशोधन या बदलाव का उचित उपाय केवल BNSS की धारा 146 (CrPC की धारा 127) के तहत यह उपाय उसी अदालत के समक्ष किया जाना चाहिए जिसने मूल आदेश पारित किया था।अदालत ने टिप्पणी की कि पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते समय वह साक्ष्यों का पुनर्मूल्यांकन नहीं कर सकती या...
यूपी किराया नियंत्रण अधिनियम के तहत सुरक्षा का दावा करने वाले किरायेदार को कानून की प्रयोज्यता साबित करनी होगी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि किसी किरायेदार को उत्तर प्रदेश शहरी भवन (किरायेदारी, किराया और बेदखली का विनियमन) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा पाने के लिए, उसे इस कानून की प्रयोज्यता (लागू होने) को साबित करना होगा।जस्टिस डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया,“जहां कोई किरायेदार यूपी अधिनियम संख्या 13, 1972 के प्रावधानों के तहत सुरक्षा चाहता है तो यह साबित करने का बोझ उस पक्ष पर होता है, जो अधिनियम की प्रयोज्यता का दावा कर रहा है। उसे उन बुनियादी तथ्यों को स्थापित करना...
पूर्व और वर्तमान विधायकों को पेंशन-भत्ते देने वाला कानून वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज की चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश राज्य विधानमंडल (सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन) अधिनियम, 1980 की संवैधानिक वैधता बरकरार रखी। अदालत ने कहा कि वर्तमान और पूर्व विधायकों तथा विधान परिषद सदस्यों को पेंशन, भत्ते और अन्य सुविधाएं देने पर संविधान में कोई रोक नहीं है।जस्टिस राजन राय और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने जनहित याचिका खारिज करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी नीतिगत बातें विधायिका के विवेक और निर्णय के दायरे में आती हैं और अदालत को केवल स्पष्ट...
वाराणसी इफ्तार विवाद | 'गंगा में मांसाहारी भोजन के अवशेष फेंकने से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं': इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पिछले हफ़्ते 8 मुस्लिम पुरुषों की ज़मानत अर्ज़ियां मंज़ूर कीं। इन पर इफ्तार पार्टी आयोजित करने, गंगा नदी (वाराणसी में) में नाव पर मांसाहारी भोजन करने और बचा हुआ कचरा नदी में फेंकने का आरोप है।उसी दिन (15 मई) जारी अलग-अलग आदेशों में जस्टिस राजीव लोचन शुक्ला ने 5 आरोपियों को ज़मानत दी, जबकि जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने 3 आरोपियों को ज़मानत दी। इसके साथ ही इस मामले में कुल 14 आरोपियों में से 8 को अब ज़मानत मिल चुकी है।उल्लेखनीय है कि इस मामले में 14 आरोपियों में से 8 को अब...
राहुल गांधी के खिलाफ याचिकाएं दायर करने वाले BJP कार्यकर्ता की Z+ सुरक्षा मांग पर 3 हफ्ते में फैसला करे केंद्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि कर्नाटक के भारतीय जनता पार्टी (BJP) कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा मांगी गई अखिल भारतीय स्तर की Z+ सुरक्षा पर तीन सप्ताह के भीतर कारणयुक्त फैसला लिया जाए।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अभदेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने यह आदेश शिशिर की याचिका का निस्तारण करते हुए दिया।शिशिर ने अपनी याचिका में मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ाकर अखिल भारतीय स्तर पर Z+ सुरक्षा देने की मांग की थी। फिलहाल उन्हें सीएपीएफ सुरक्षा अधिकारी की चौबीसों घंटे सुरक्षा...
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ अवमानना याचिका खारिज, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा- जमानत रद्द कराने का रास्ता खुला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज की। याचिका में आरोप लगाया गया कि उन्होंने POCSO मामले में अदालत द्वारा लगाई गई जमानत शर्तों का उल्लंघन किया।जस्टिस दिनेश पाठक की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया अदालत की अवमानना का मामला नहीं बनता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है, तो संबंधित पक्ष जमानत निरस्तीकरण याचिका दायर कर सकता है।यह अवमानना याचिका आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने दायर की थी।...
बालिग होने के बाद मुस्लिम पर्सनल लॉ विवाह की अनुमति दे सकता है, लिव-इन संबंध की नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में भले ही बालिग होने के बाद विवाह को मान्यता दी गई हो लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि विवाह के बिना लिव-इन संबंध को भी कानूनी स्वीकृति मिल जाती है।जस्टिस गरिमा प्रसाद ने कहा,“यदि मुस्लिम पर्सनल लॉ के कुछ मत बालिग होने पर विवाह को मान्यता देते हैं तो वह केवल विवाह से संबंधित है विवाह के बाहर लिव-इन व्यवस्था से नहीं।”बता दें, यह मामला अंतरधार्मिक जोड़े की याचिका से जुड़ा था। याचिका दायर करने वाली महिला 20 वर्षीय मुस्लिम थी, जबकि पुरुष...
राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, CBI और ED से मांगी प्रगति रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश के प्रयागराज स्थित इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति की शिकायत पर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को आरोपों का सत्यापन कर प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।यह आदेश जस्टिस राजेश सिंह चौहान और जस्टिस जफीर अहमद की खंडपीठ ने BJP कार्यकर्ता एस. विग्नेश शिशिर द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया।इन-चैंबर सुनवाई के दौरान CBI की ओर से अदालत को बताया गया कि एजेंसी को शिकायत...
21 साल से कम उम्र के लड़के के साथ Live-in Relationship को संरक्षण नहीं दे सकता कोर्ट: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि यदि live-in relationship में किसी एक साथी की उम्र वैधानिक विवाह आयु से कम है, तो अदालत संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत ऐसे संबंध को संरक्षण नहीं दे सकती। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों को जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार के तहत सुरक्षा मिलती रहेगी।जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ एक 20 वर्षीय मुस्लिम महिला और 19 वर्षीय हिंदू युवक की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। दोनों ने दावा किया था कि वे live-in relationship में हैं और महिला के परिवार से उन्हें खतरा...
S.233 CrPC | आरोपी को बचाव पक्ष के गवाहों को बुलाने का अधिकार, कोर्ट का दखल सीमित: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला दिया कि कोर्ट आमतौर पर CrPC की धारा 233 के तहत आरोपी के बचाव पक्ष के गवाहों को पेश करने के अधिकार में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने कहा कि अगर कोर्ट आरोपी द्वारा पेश किए जाने वाले गवाहों को समन जारी करने से मना करती है तो वह ऐसा केवल लिखित में कारण बताते हुए और यह देखते हुए कर सकती है कि ऐसे समन से न्याय में देरी होगी या न्याय का मकसद ही खत्म हो जाएगा।जस्टिस विवेक कुमार सिंह ने कहा,“CrPC की धारा 311 के तहत, शक्ति केवल कोर्ट के पास होती है। CrPC की धारा 233 के तहत अधिकार...
मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जुआ मामले की जांच नहीं कर सकती पुलिस : इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि सार्वजनिक स्थान या सड़क पर जुआ खेलने से जुड़ा Public Gambling Act, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय (Non-Cognizable) है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना पुलिस जांच शुरू नहीं कर सकती और बिना वारंट गिरफ्तारी भी नहीं की जा सकती।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की एकलपीठ ने यह टिप्पणी करते हुए एक आरोपी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश को रद्द कर दिया।मामला मिर्जापुर का था, जहां पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों...
मजिस्ट्रेट की अनुमति बिना जुआ अधिनियम की धारा 13 में जांच नहीं कर सकती पुलिस: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर जुआ खेलने से जुड़ा सार्वजनिक जुआ अधिनियम, 1867 की धारा 13 के तहत अपराध गैर-संज्ञेय है। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच शुरू नहीं कर सकती और न ही बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है।जस्टिस संजय कुमार पचौरी की पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए मिर्जापुर में दर्ज आपराधिक मामले और उससे जुड़े संज्ञान व समन आदेश रद्द किया।मामला उस FIR से जुड़ा था जिसमें पुलिस ने चार लोगों को ताश के पत्तों और...
पेट दर्द की दवा से मां को शराबी नहीं कहा जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंपी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पेट दर्द के इलाज से जुड़ी मेडिकल पर्चियों के आधार पर किसी महिला को शराब की आदी या मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं माना जा सकता। अदालत ने कहा कि ऐसे आधार पर मां को उसके बच्चे की अभिरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस संदीप जैन ने यह टिप्पणी करते हुए नाबालिग बच्चे की अभिरक्षा मां को सौंप दी। अदालत ने कहा कि पांच वर्ष तक की आयु के बच्चे की प्राकृतिक संरक्षक मां होती है।मामला उस याचिका से जुड़ा था जिसमें मां ने आरोप लगाया था कि बच्चे के पिता ने जबरन बच्चे को उससे अलग कर...
अदालत में तीखी बहस अवमानना नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बैठे हुए जज के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग खारिज की
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रैक्टिस कर रहे वकील द्वारा दायर याचिका खारिज की, जिसमें हाईकोर्ट के वर्तमान जज जस्टिस सरल श्रीवास्तव के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई।जस्टिस सलील कुमार राय और जस्टिस देवेंद्र सिंह-प्रथम की खंडपीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी गलत आदेश या अदालत में वकील और जज के बीच हुई तीखी बहस को आपराधिक अवमानना का आधार नहीं बनाया जा सकता।मामले में वकील अरुण मिश्रा ने दावा किया था कि नवंबर, 2025 में उन्होंने एक मामले की सुनवाई से जस्टिस सरल श्रीवास्तव से स्वयं को अलग...
पत्नी की शिक्षा या अकेले कमाने की क्षमता CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने में बाधा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि सिर्फ़ इस बात से कि पत्नी पढ़ी-लिखी है या उसमें कमाने की क्षमता है, उसे CrPC की धारा 125 के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस गरिमा प्रसाद की बेंच ने आगे कहा कि जिस बात पर विचार किया जाना चाहिए, वह यह है कि क्या उसमें खुद का भरण-पोषण करने की वास्तविक और मौजूदा क्षमता है। वह भी उसी जीवन-स्तर के अनुसार, जिसका वह अपने वैवाहिक घर में आनंद लेती थी।कोर्ट ने यह भी कहा कि जब तक यह साबित न हो जाए कि वह किसी लाभकारी रोज़गार में है और खुद का...
ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा...

















