इलाहाबाद हाईकोट

ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
ड्यूटी पर जाते समय सड़क दुर्घटना में मारे गए पुलिस के सपोर्ट स्टाफ को पेंशन नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के 'फॉलोअर' (सपोर्ट स्टाफ) के परिवार को पेंशन देने से इनकार किया, जिसकी ड्यूटी पर जाते समय एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। कोर्ट ने कहा कि सड़क दुर्घटनाएं 'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' के नियम 3 के दायरे में नहीं आतीं; यह नियम उन विशेष परिस्थितियों को बताता है जिनमें पेंशन दी जा सकती है।'उत्तर प्रदेश पुलिस (असाधारण पेंशन) नियमावली, 1961' का नियम 3 कहता है कि ये नियम उत्तर प्रदेश के सभी राजपत्रित/अराजपत्रित पुलिस, PAC या अग्निशमन सेवा...

स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम व्यक्ति का धर्मांतरण आवेदन खारिज करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADM को लगाई फटकार
स्वेच्छा से हिंदू धर्म अपनाने वाले मुस्लिम व्यक्ति का धर्मांतरण आवेदन खारिज करने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ADM को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिषेध कानून के तहत एक मुस्लिम व्यक्ति के हिंदू धर्म अपनाने के मामले में ADM की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराज़गी जताई है। कोर्ट ने कहा कि ADM ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर बार-बार पुलिस जांच करवाई और आपराधिक मामले को आधार बनाकर धर्मांतरण प्रमाणन आवेदन खारिज कर दिया।जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने फिलहाल प्रयागराज के ADM (प्रशासन) द्वारा पारित उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें याचिकाकर्ता के 'सनातन धर्म'...

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के सामूहिक बलात्कार मामले में 3 लोगों को बरी किया, कहा- कोई मेडिकल सबूत नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1983 के 'सामूहिक बलात्कार' मामले में 3 लोगों को बरी किया, कहा- कोई मेडिकल सबूत नहीं

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में 1983 के एक कथित सामूहिक बलात्कार मामले में 3 लोगों को बरी किया। इस मामले में पीड़िता घटनाक्रम के समय 7 महीने की गर्भवती थी।जस्टिस अवनीश सक्सेना की बेंच ने आरोपियों को 'संदेह का लाभ' दिया। बेंच ने पाया कि FIR दर्ज करने में बिना किसी वजह के देरी हुई और मामले की पुष्टि करने वाले मेडिकल सबूतों की पूरी तरह कमी है।कोर्ट ने FIR को 'अस्पष्ट' भी बताया, क्योंकि कथित तौर पर पीड़िता के साथ चार लोगों ने बलात्कार किया था, लेकिन FIR में सिर्फ तीन लोगों के नाम थे।बेंच ने टिप्पणी...

बिना गिरफ्तारी के कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को दिया आश्वासन
बिना गिरफ्तारी के कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा: यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को दिया आश्वासन

इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण और आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी की प्रक्रिया को BNSS, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सख्ती से लागू करेगी।यह आश्वासन राज्य के एडिशनल एडवोकेट जनरल (AAG) विनोद कुमार शाही ने जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष दिया।AAG ने अदालत को बताया कि उन्होंने राज्य के अपर मुख्य सचिव (गृह) और पुलिस...

“तारीख पर तारीख” सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट
“तारीख पर तारीख” सिर्फ जजों की गलती नहीं, सरकार और पुलिस भी जिम्मेदार: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला अदालतों में लंबित आपराधिक मामलों पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि “तारीख पर तारीख” वाली स्थिति के लिए केवल न्यायिक अधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं, बल्कि राज्य सरकार और पुलिस तंत्र की कमियां भी इसके लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।जस्टिस अरुण कुमार देशवाल की पीठ ने बॉलीवुड फिल्म दमिनी के मशहूर संवाद “तारीख पर तारीख… मिलती है तो सिर्फ तारीख” का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आम लोगों की न्याय व्यवस्था के प्रति धारणा को दर्शाता है। हालांकि, अदालत ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त स्टाफ,...

2026 CLAT-UG | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ाइनल आंसर-की बहाल की, मेरिट लिस्ट में बदलाव के सिंगल जज का निर्देश रद्द किया
2026 CLAT-UG | इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ाइनल आंसर-की बहाल की, मेरिट लिस्ट में बदलाव के सिंगल जज का निर्देश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस साल फ़रवरी में सिंगल जज द्वारा दिए गए आदेश को रद्द किया। इस आदेश में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज़ के कंसोर्टियम को कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट (CLAT) यूजी 2026 के लिए मेरिट लिस्ट में बदलाव करने का निर्देश दिया गया था।ऐसा करके जस्टिस सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस स्वरूपमा चतुर्वेदी की डिवीज़न बेंच ने वास्तव में 16 दिसंबर, 2025 को कंसोर्टियम द्वारा जारी की गई फ़ाइनल आंसर-की को बहाल किया। यह आंसर-की एक्सपर्ट कमेटियों द्वारा उठाई गई आपत्तियों की समीक्षा करने के बाद जारी की गई थी।इस तरह बेंच...

3 महीने अवैध हिरासत में रखने का आरोप: हाईकोर्ट का निर्देश- ₹10 लाख का मुआवज़ा दे यूपी सरकार
3 महीने अवैध हिरासत में रखने का आरोप: हाईकोर्ट का निर्देश- ₹10 लाख का मुआवज़ा दे यूपी सरकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह एक व्यक्ति को उसकी अवैध गिरफ्तारी और 3 महीने से ज़्यादा समय तक जेल में रखने के लिए ₹10 लाख का मुआवज़ा दे।जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की बेंच ने पाया कि राज्य के अधिकारियों ने याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी के लिखित कारण न बताकर उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित किया था। कोर्ट ने कहा कि इससे भारत के संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत उसके मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है।इस संबंध में बेंच ने मिहिर राजेश शाह...

मानव जीवन की रक्षा को लेकर पुलिस की संवेदनशीलता अब भी बेहद कम: हाईकोर्ट ने बदायूं SSP को लगाई फटकार
मानव जीवन की रक्षा को लेकर पुलिस की संवेदनशीलता अब भी बेहद कम: हाईकोर्ट ने बदायूं SSP को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पुलिस के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य की पहली जिम्मेदारी मानव जीवन बचाना है केवल अपराध होने के बाद अपराधियों को सजा दिलाना नहीं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था एजेंसियों की मानव जीवन की रक्षा को लेकर संवेदनशीलता हमेशा कम रही है और आज भी वैसी ही बनी हुई है।अदालत ने ये टिप्पणियां बदायूं की सीनियर पुलिस अधीक्षक द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए कीं।मामला ननकराम...

भगोड़े आरोपियों का मुकदमा कैसे चलेगा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 356 के तहत अनुपस्थिति में ट्रायल की पूरी प्रक्रिया बताई
भगोड़े आरोपियों का मुकदमा कैसे चलेगा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने BNSS की धारा 356 के तहत 'अनुपस्थिति में ट्रायल' की पूरी प्रक्रिया बताई

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि यदि कोई घोषित भगोड़ा आरोपी जानबूझकर गिरफ्तारी और मुकदमे से बचता है तो उसकी अनुपस्थिति में भी आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है। अदालत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत अनुपस्थिति में ट्रायल की विस्तृत प्रक्रिया निर्धारित की।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरी की पीठ ने इस प्रावधान को भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली में ऐतिहासिक प्रावधान बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया से भागने वाले आरोपियों के कारण होने वाली देरी...

नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव के आरोपी स्टूडेंट को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत
नाबालिग स्टूडेंट को बुर्का पहनाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव के आरोपी स्टूडेंट को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत, मिली अग्रिम जमानत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्कूली स्टूडेंट को अग्रिम जमानत दी, जिस पर आरोप है कि उसने नाबालिग स्टूडेंट का कथित रूप से ब्रेनवॉश कर उसे बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने के लिए दबाव डाला।जस्टिस अवनीश सक्सेना की पीठ ने आरोपी स्टूडेंट मालिश्का उर्फ मालिश्का फातमा को राहत देते हुए कहा कि पीड़िता के बयान के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई अन्य ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे आरोपी की संलिप्तता प्रथम दृष्टया स्थापित हो सके।आरोपी के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के...

अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील नहीं होगी, जब तक अदालत ने अधिकार क्षेत्र न लांघा हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अवमानना कार्यवाही शुरू करने से इनकार के खिलाफ इंट्रा-कोर्ट अपील नहीं होगी, जब तक अदालत ने अधिकार क्षेत्र न लांघा हो: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दोहराया कि अवमानना अदालत द्वारा कार्यवाही शुरू करने से इनकार किए जाने के आदेश के खिलाफ विशेष अपील अथवा इंट्रा-कोर्ट अपील दाखिल नहीं की जा सकती, जब तक यह न दिखाया जाए कि अवमानना अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करते हुए पक्षकारों के अधिकारों या मूल विवाद के गुण-दोष पर फैसला दे दिया।जस्टिस शेखर बी. सराफ और जस्टिस अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने कहा कि यदि अवमानना अदालत बिना मूल विवाद के गुण-दोष में गए केवल कार्यवाही प्रारंभ करने से इनकार करती है, तो उसके आदेश के विरुद्ध...

मथुरा भगदड़ मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, भीड़ प्रबंधन नीति और अवैध निर्माण पर प्रशासन को लगाई फटकार
मथुरा भगदड़ मामलों पर हाईकोर्ट सख्त, भीड़ प्रबंधन नीति और अवैध निर्माण पर प्रशासन को लगाई फटकार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा में हालिया भगदड़ जैसी घटनाओं और अवैध निर्माणों को लेकर प्रशासनिक तंत्र पर कड़ी नाराजगी जताते हुए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण तथा जिला प्रशासन को फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर प्रशासन की उदासीनता चिंताजनक है।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा दाखिल हलफनामे पर असंतोष जताते हुए पूछा कि उसके अधिकार क्षेत्र में अवैध निर्माण रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए कोई नीति क्यों नहीं...

2013 की हिस्ट्रीशीट: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद POCSO मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामला रद्द कराने पहुंचे हाइकोर्ट
2013 की हिस्ट्रीशीट: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद POCSO मामले के शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज ने मामला रद्द कराने पहुंचे हाइकोर्ट

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ दर्ज POCSO मामले के प्रथम सूचना दाता आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने वर्ष 2013 में उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा खोली गई अपनी हिस्ट्रीशीट को चुनौती देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने पुलिस निगरानी रजिस्टर से अपना नाम हटाने की भी मांग की।आशुतोष महाराज ने स्वयं अदालत में पेश होकर कहा कि उनके खिलाफ शामली जिले के कांधला थाने में हिस्ट्रीशीट खोली गई। याचिका में उनका कहना है कि जिन आपराधिक मामलों का हवाला देकर यह कार्रवाई की गई, उनमें कई मामलों...

सिविल सेवकों को माननीय लिखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
सिविल सेवकों को 'माननीय' लिखने का अधिकार नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि संप्रभु कार्यों का निर्वहन करने वाले संवैधानिक पदाधिकारियों को प्रत्येक आधिकारिक संचार में माननीय संबोधन दिया जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि सांसद, मंत्री, जज तथा अन्य ऐसे संवैधानिक पदाधिकारी इस सम्मानसूचक संबोधन के हकदार हैं जबकि किसी भी रैंक के सिविल सेवक इस विशेष संबोधन के पात्र नहीं हैं।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने कहा कि किसी व्यक्ति की निजी नाराजगी या पारिवारिक परिचय के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी...

मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगी
मथुरा भगदड़: हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख, भीड़ और संकट प्रबंधन की पूरी योजना मांगी

मथुरा में धार्मिक अवसरों पर लगातार सामने आ रही भगदड़ जैसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन से पूछा कि क्या शहर में भीड़ और आपदा प्रबंधन के लिए कोई समग्र योजना मौजूद हैजस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने प्रशासन से यह भी पूछा कि भीड़जनित आपदाओं से निपटने के लिए कौन-सी रणनीतियां, प्रबंधन सिद्धांत और प्रशिक्षण व्यवस्थाएं लागू हैं तथा संबंधित पक्षों को जागरूक करने और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए।मामले की सुनवाई स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज द्वारा दायर...

मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया
मौजूद ही नहीं जो कानून, उसी के तहत दे दिया तलाक: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द किया

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा फैमिली कोर्ट द्वारा पारित तलाक डिक्री रद्द करते हुए कड़ी टिप्पणी की कि अदालत ने ऐसे कानून के तहत तलाक दिया, जिसका अस्तित्व ही नहीं है। हाईकोर्ट ने संबंधित न्यायिक अधिकारी के फैसले को अत्यंत लापरवाह और अनौपचारिक बताते हुए उसकी कार्यप्रणाली पर नाराज़गी जताई।जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस विवेक सारन की खंडपीठ ने यह आदेश पति की अपील पर पारित किया, जिसने जनवरी 2026 में फैमिली कोर्ट द्वारा पत्नी को दिए गए तलाक आदेश को चुनौती दी थी।मामले में पत्नी ने अपनी याचिका मुस्लिम स्त्री...

अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम-से-कम 2 लाख मुआवज़े का आदेश दिया
अवैध जब्ती और जल्दबाज़ी में नीलामी पर राज्य सरकार को झटका: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कम-से-कम 2 लाख मुआवज़े का आदेश दिया

इलाहाबाद हाRकोर्ट ने कथित गौ-तस्करी के अप्रमाणित आरोप में वाहन जब्त कर जल्दबाज़ी में नीलाम करने पर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाते हुए वाहन स्वामी को कम-से-कम 2 लाख रुपये मुआवज़ा देने का आदेश दिया। अदालत ने जब्ती और ज़ब्ती से जुड़े आदेश रद्द करते हुए कहा कि राज्य की कार्रवाई मनमानी, अवैध और कानून के विपरीत थी।जस्टिस संदीप जैन ने कहा कि यदि राज्य सरकार वाहन वापस नहीं कर सकती तो उसे वाहन स्वामी को अतिरिक्त 4 लाख रुपये वाहन मूल्य के रूप में देने होंगे।मामले के अनुसार 8 सितंबर 2024 को चंदौली जिले...