इलाहाबाद हाईकोट

हनी-ट्रैप वसूली गिरोह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी पुलिस को जांच और कड़ी निगरानी के निर्देश
हनी-ट्रैप वसूली गिरोह पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त: यूपी पुलिस को जांच और कड़ी निगरानी के निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मेरठ जोन में संचालित कथित हनी-ट्रैप और ब्लैकमेल गिरोह की जांच के आदेश दिए हैं। अदालत ने मेरठ जोन के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को इस पूरे मामले की जांच करने का निर्देश दिया।जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरून सक्सेनाकी खंडपीठ ने कहा कि इस तरह के गिरोह का अस्तित्व, जो महिलाओं के जरिए लोगों को फंसाकर ब्लैकमेल करता है, समाज की “गंभीर रूप से चिंताजनक स्थिति” को दर्शाता है।अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि इस तरह के अपराधों को जारी रहने दिया गया, तो एक...

माता-पिता की जिम्मेदारी के नाम पर पत्नी की उपेक्षा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा भरण-पोषण बरकरार रखा
माता-पिता की जिम्मेदारी के नाम पर पत्नी की उपेक्षा नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बढ़ा भरण-पोषण बरकरार रखा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पति की अपने माता-पिता और भाई-बहनों के प्रति जिम्मेदारियां उसे अपनी पत्नी के भरण-पोषण के प्राथमिक दायित्व से मुक्त नहीं कर सकतीं।जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने एक रेलवे कर्मचारी द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।मामले में फैमिली कोर्ट इटावा ने पत्नी के लिए मासिक भरण-पोषण राशि 3500 रुपये से बढ़ाकर 8000 रुपये और नाबालिग पुत्र के लिए 1500 रुपये से बढ़ाकर 4000 रुपये की थी।पति ने हाईकोर्ट में दलील दी कि वह रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी...

भरण-पोषण बार-बार मिलने वाला अधिकार, समझौते का उल्लंघन होने पर पत्नी फिर से शुरू कर सकती है पुरानी अर्जी: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भरण-पोषण बार-बार मिलने वाला अधिकार, समझौते का उल्लंघन होने पर पत्नी फिर से शुरू कर सकती है पुरानी अर्जी: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि अगर कोई पति मध्यस्थता समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है तो पत्नी को भरण-पोषण के लिए नई अर्जी दाखिल करने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वह पहले से शुरू की गई कार्यवाही को ही आगे बढ़ा सकती है।हाईकोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि भरण-पोषण का अधिकार कोई एक बार मिलने वाला तोहफ़ा नहीं है, बल्कि यह एक गतिशील और बार-बार मिलने वाला अधिकार है, जो हर बार दायित्व के उल्लंघन पर नए सिरे से लागू हो जाता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की पीठ मूल रूप से एक पति द्वारा दायर...

गुज़ारा भत्ता न चुकाने के कारण मई 2025 से लगातार हिरासत में व्यक्ति? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा
गुज़ारा भत्ता न चुकाने के कारण मई 2025 से लगातार हिरासत में व्यक्ति? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फ़ैमिली कोर्ट से स्पष्टीकरण मांगा

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट से उस व्यक्ति की लगातार हिरासत के बारे में स्पष्टीकरण मांगा, जिसने गुज़ारा भत्ता नहीं चुकाया। आरोप है कि वह व्यक्ति 23 मई, 2025 से लगातार हिरासत में है।जस्टिस प्रवीण कुमार गिरि की बेंच ने यह स्पष्टीकरण तब मांगा, जब वह प्रेम सिंह नाम के एक व्यक्ति द्वारा दायर क्रिमिनल रिवीज़न याचिका पर सुनवाई कर रही थी। प्रेम सिंह ने मथुरा की फ़ैमिली कोर्ट के प्रिंसिपल जज द्वारा 9 जनवरी, 2026 को CrPC की धारा 125(3) के तहत एक कार्यवाही में पारित आदेश को चुनौती दी थी।...

बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बरेली नमाज़ विवाद—बड़े जमावड़े पर रोक, शांति भंग हुई तो राज्य कार्रवाई को स्वतंत्र: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले में, जिसमें एक व्यक्ति को अपने घर में नमाज़ पढ़ने से रोके जाने के आरोप पर पहले 24 घंटे सुरक्षा प्रदान की गई थी, अब यह निर्देश दिया है कि वह अपने आवास पर बड़ी संख्या में लोगों को एकत्र न करे।यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने 25 मार्च को पारित किया।मामला बरेली निवासी हसीन खान से जुड़ा है, जिन्हें पहले एक अन्य पीठ द्वारा सुरक्षा दी गई थी। हालांकि, बाद में बेंच के पुनर्गठन के बाद मामले की सुनवाई नई पीठ के समक्ष हुई।सुनवाई के...

एकतरफा भरण-पोषण आदेश को चुनौती में केवल नोटिस न मिलने का मुद्दा उठेगा, मेरिट पर बहस नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
एकतरफा भरण-पोषण आदेश को चुनौती में केवल नोटिस न मिलने का मुद्दा उठेगा, मेरिट पर बहस नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि भरण-पोषण मामले में पारित एकतरफा अंतरिम आदेश को चुनौती देते समय पक्षकार मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर बहस नहीं कर सकता।कोर्ट ने आगे कहा कि ऐसी चुनौती का दायरा केवल यह साबित करने तक सीमित होता है कि उसे नोटिस नहीं मिला था या उसके अनुपस्थित रहने का पर्याप्त कारण था।यह टिप्पणी जस्टिस गरिमा प्रसाद की पीठ ने पति द्वारा दायर आपराधिक पुनर्विचार याचिका खारिज करते हुए की।मामले में ट्रायल कोर्ट ने घरेलू हिंसा कानून के तहत पत्नी को अंतरिम भरण-पोषण के...

मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को भी मिलेगा इलाज खर्च का हक: हाईकोर्ट ने नियम में किया बदलाव
मृत सरकारी कर्मचारी के परिजनों को भी मिलेगा इलाज खर्च का हक: हाईकोर्ट ने नियम में किया बदलाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (चिकित्सा उपस्थिति) नियम 2011 के नियम 16 की व्याख्या को व्यापक बनाते हुए कहा कि अब मृत या असमर्थ कर्मचारी के कानूनी वारिस भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति (रिइम्बर्समेंट) का दावा कर सकेंगे।जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि नियम 16 को रीड डाउन करते हुए इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि यदि लाभार्थी (बेनेफिशियरी) की मृत्यु हो जाए या वह दावा करने में असमर्थ हो, तो उसके कानूनी वारिस भी दावा प्रस्तुत कर...

बच्चे के भरण-पोषण के दावे में पिता के खिलाफ कमाने वाली माँ को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
बच्चे के भरण-पोषण के दावे में पिता के खिलाफ कमाने वाली माँ को पक्षकार बनाना ज़रूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि किसी बच्चे द्वारा अपने पिता के खिलाफ दायर भरण-पोषण की याचिका में कमाने वाली माँ को औपचारिक रूप से एक पक्षकार के तौर पर शामिल करना ज़रूरी नहीं है।हालांकि, जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में ट्रायल कोर्ट को 'साझी माता-पिता की ज़िम्मेदारी' के सिद्धांत के आधार पर भरण-पोषण की अंतिम राशि तय करते समय, कमाने वाले दोनों माता-पिता की आर्थिक क्षमता पर विचार करना चाहिए।सिंगल जज ने यह आदेश तब पारित किया, जब वह पिता द्वारा दायर एक आपराधिक...

तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन उसका ऐलान किया जाता है; कोर्ट का बाद का आदेश सिर्फ़ ऐलानिया होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन उसका ऐलान किया जाता है; कोर्ट का बाद का आदेश सिर्फ़ ऐलानिया होता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि मोहम्मदिया कानून के तहत, तलाक उसी तारीख से लागू होता है, जिस दिन पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में कोर्ट का जो आदेश इसकी पुष्टि करता है, वह सिर्फ़ ऐलानिया प्रकृति का होता है।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने यह साफ़ किया कि कोर्ट का ऐसा आदेश फ़ैसले की तारीख से कोई नया तलाक नहीं बनाता, बल्कि यह तलाक के ऐलान की मूल तारीख से ही जुड़ा माना जाता है।बेंच ने साफ़ किया,"यह भी तय है कि जहाँ कोई पति तलाक का ऐलान करता है। बाद में उसी के संबंध में आदेश लेने के लिए कोर्ट...

भरण-पोषण तय करते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भरण-पोषण तय करते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी की कि भरण-पोषण देते समय पत्नी की पेशेवर काबिलियत और उसकी कमाने की क्षमता को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।जस्टिस मदन पाल सिंह की बेंच ने पत्नी की पेशेवर योग्यताओं और रेडियोलॉजिस्ट के तौर पर उसके पिछले काम को ध्यान में रखते हुए CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को दिए जाने वाले मासिक भरण-पोषण की रकम कम की।सिंगल जज ने फैमिली कोर्ट के आदेश में बदलाव करते हुए भरण-पोषण की रकम 18,000 रुपये से घटाकर 12,000 रुपये प्रति माह की थी।संक्षेप में कहें तो यह क्रिमिनल रिवीजन याचिका...

हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से पहले कानूनी सहायता या कम से कम सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
हिरासत में बंद आरोपी के खिलाफ आरोप तय करने से पहले कानूनी सहायता या कम से कम सुनवाई अनिवार्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाल ही में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि जब आरोपी न्यायिक हिरासत में हो तो ट्रायल कोर्ट द्वारा उसे डिस्चार्ज अर्जी दाखिल करने के लिए एक कानूनी वकील मुहैया कराया जाना चाहिए। वहीं, यदि आरोपी ऐसे वकील को लेने से इनकार करता है तो आरोपों को तय करने के मुद्दे पर एक कानूनी वकील की सहायता से सुनवाई का अवसर अवश्य दिया जाना चाहिए।BNSS की धारा 262 और 263 का हवाला देते हुए, जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने कहा:“यह बिल्कुल स्पष्ट हो जाता है कि एक ओर, कानून आरोपी को दस्तावेजों की प्रतियां मिलने के 60...

भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालय में स्थानांतरित करना वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट
भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालय में स्थानांतरित करना वैध: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ग्राम न्यायालय अधिनियम, 2008 की धारा 16 के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालयों में ट्रांसफर करने का फैसला सही ठहराया।यह देखते हुए कि जिन प्रावधानों के तहत भरण-पोषण की कार्यवाही फैमिली कोर्ट से ग्राम न्यायालय में ट्रांसफर करने का आदेश पारित किया गया, उन्हें चुनौती नहीं दी गई, जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस स्वरूपामा चतुर्वेदी की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया:“यह स्थापित सिद्धांत लागू करते हुए कि असंगति की स्थिति में बाद में बना कानून पहले बने कानून पर प्रभावी...

स्त्रीधन पर पत्नी का पूर्ण अधिकार, इसे लेने पर नहीं बनता आपराधिक मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट
स्त्रीधन पर पत्नी का पूर्ण अधिकार, इसे लेने पर नहीं बनता आपराधिक मामला: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया कि 'स्त्रीधन' पर महिला का पूर्ण अधिकार होता है और उसे लेने के लिए पत्नी के खिलाफ आपराधिक विश्वासघात (धारा 406 आईपीसी) का मामला नहीं चलाया जा सकता।जस्टिस चावन प्रकाश ने कहा कि विवाह से पहले, विवाह के समय या उसके बाद महिला को जो भी संपत्ति दी जाती है, वह उसका 'स्त्रीधन' होती है और उस पर केवल उसी का अधिकार रहता है।अदालत ने कहा कि पत्नी को अपने स्त्रीधन का उपयोग या निपटान अपनी इच्छा से करने का पूरा अधिकार है।अदालत ने स्पष्ट किया,“पति आवश्यकता...

आय निर्धारण के लिए पति के ITR तलब, DV मामले में ट्रायल कोर्ट को पुनः निर्णय का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट
आय निर्धारण के लिए पति के ITR तलब, DV मामले में ट्रायल कोर्ट को पुनः निर्णय का निर्देश: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा अधिनियम से जुड़े एक मामले में पति की आय का सही आकलन करने के लिए उसके आयकर रिटर्न (ITR) तलब किए और ट्रायल कोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए।मामला तब सामने आया जब पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति ने अपनी वास्तविक आय छुपाने के लिए खुद को मजदूर बताया, जबकि वह पेशे से आर्किटेक्ट है। पत्नी ने CrPC की धारा 91 के तहत आवेदन दाखिल कर पति के आयकर रिटर्न मंगाने की मांग की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि ऐसे दस्तावेजों की आवश्यकता नहीं है।इस आदेश को पत्नी...

पति की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती भरण-पोषण की जिम्मेदारी, विधवा ससुर से मांग सकती है गुजारा भत्ता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
पति की मृत्यु के बाद भी खत्म नहीं होती भरण-पोषण की जिम्मेदारी, विधवा ससुर से मांग सकती है गुजारा भत्ता: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी में कहा कि पति की अपनी पत्नी के भरण-पोषण की जिम्मेदारी उसकी मृत्यु के बाद भी समाप्त नहीं होती। ऐसे में विधवा को अपने ससुर से भरण-पोषण मांगने का अधिकार है।जस्टिस अरिंदम सिन्हा और जस्टिस सत्यवीर सिंह की खंडपीठ ने कहा,“यह स्थापित सिद्धांत है कि पति अपनी पत्नी के भरण-पोषण के लिए बाध्य है। यह दायित्व उसकी मृत्यु के बाद भी जारी रहता है और कानून विधवा को ससुर से भरण-पोषण मांगने की अनुमति देता है।”अदालत यह टिप्पणी एक अपील पर सुनवाई के दौरान कर रही थी, जिसमें पति...

संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में नाबालिग के लिए अलग अभिभावक जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में नाबालिग के लिए अलग अभिभावक जरूरी नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी हिंदू नाबालिग का हित अविभाजित संयुक्त परिवार की संपत्ति में है तो उसके लिए अलग से अभिभावक नियुक्त करने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे मामलों में परिवार का वयस्क सदस्य ही संपत्ति का प्रबंधन करता है।जस्टिस रोहित रंजन अग्रवाल ने कहा,“यदि नाबालिग का हित संयुक्त पारिवारिक संपत्ति में है तो परिवार का वयस्क सदस्य चाहे पुरुष हो या महिला उस संपत्ति की देखभाल करेगा और अलग से अभिभावक नियुक्त करने की जरूरत नहीं है।” मामला एक विधवा मां से जुड़ा था जिसने अपनी नाबालिग...

अपनी पसंद से शादी करना सम्मान का मुद्दा नहीं, वयस्कों की सुरक्षा करना राज्य का कर्तव्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट
अपनी पसंद से शादी करना सम्मान का मुद्दा नहीं, वयस्कों की सुरक्षा करना राज्य का कर्तव्य: इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति बालिगों द्वारा अपनी पसंद से की गई शादी को सम्मान का मुद्दा नहीं बना सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में राज्य का दायित्व है कि वह दंपति के जीवन, स्वतंत्रता और संपत्ति की रक्षा करे, भले ही खतरा उनके अपने परिवार से ही क्यों न हो।जस्टिस जे.जे. मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने यह टिप्पणी याचिका पर सुनवाई करते हुए की, जिसमें एक दंपति ने अपनी सुरक्षा की मांग की। दोनों ने अपनी मर्जी से आर्य समाज मंदिर में विवाह...