सुप्रीम कोर्ट

यह देखने के लिए कि क्या यह अवैध सब-लेटिंग (किराए पर देना) छिपाने का तरीका है, साझेदारी का पर्दा हटाया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि साझेदारी की व्यवस्था का इस्तेमाल कब्ज़े के गैर-कानूनी हस्तांतरण को छिपाने के लिए एक तरीके के तौर पर नहीं किया जा सकता, सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल को फैसला सुनाया कि अदालतों को साझेदारी का पर्दा हटाने का अधिकार है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या यह सिर्फ़ बिना अनुमति के सब-लेटिंग (किराए पर देना) के लिए एक दिखावा है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच अपील पर सुनवाई कर रही थी, जो अपीलकर्ता ने कर्नाटक हाई कोर्ट के फ़ैसले को चुनौती देते हुए दायर की थी।...

मालिकाना हक की घोषणा के लिए बाद में दायर किया गया कोई भी मुकदमा CPC की धारा 11 के स्पष्टीकरण IV के तहत वर्जित होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को यह स्पष्ट किया कि मालिकाना हक की घोषणा के लिए बाद में दायर किया गया कोई भी मुकदमा CPC की धारा 11 के स्पष्टीकरण IV (रचनात्मक रेस ज्यूडिकाटा) के तहत वर्जित होगा, यदि वादी ने स्थायी निषेधाज्ञा के लिए दायर पहले के मुकदमे में, जहां मालिकाना हक विवादित था, मालिकाना हक की घोषणा की मांग करना छोड़ दिया था।कोर्ट ने यह माना कि चूंकि मालिकाना हक का दावा प्राथमिक मुकदमे में उठाया जा सकता था और उठाया जाना भी चाहिए था, इसलिए संबंधित पक्ष को नए मुकदमे में उस मुद्दे...

कोर्ट अथॉरिटी के विवेक की जगह अपना फ़ैसला नहीं दे सकता: सुप्रीम कोर्ट ने गवर्नर को दिए निर्देश रद्द किए
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को कहा कि उत्तर प्रदेश सिविल सर्विसेज़ (एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन) रूल्स, 1981 के तहत एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देना गवर्नर के विवेक पर निर्भर है।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने उत्तराखंड हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया कि वह दिवंगत डॉक्टर की विधवा को एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन दे, जिनकी ड्यूटी के दौरान मौत हो गई। कोर्ट ने कहा कि जब गवर्नर ने एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन देने के मामले की जांच ही नहीं की थी...

सबरीमाला रेफरेंस सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा: मंदिरों से दूसरे संप्रदायों को बाहर रखने से हिंदू धर्म पर असर पड़ेगा
सबरीमाला रेफरेंस की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि किसी खास संप्रदाय के मंदिरों से दूसरे संप्रदायों को बाहर रखने से हिंदू धर्म पर असर पड़ेगा।यह टिप्पणी जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने की, जो 9 जजों की उस बेंच का हिस्सा हैं, जो सबरीमाला रिव्यू मामले में उठाए गए संवैधानिक मुद्दों की सुनवाई कर रही है।जस्टिस नागरत्ना ने यह टिप्पणी तब की, जब सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन, जो नायर सर्विस सोसाइटी और केरल के धार्मिक संगठनों की ओर से पेश हो रहे थे, अपनी दलीलें दे रहे थे। वैद्यनाथन...

मंदिर जाते समय उससे जुड़ी परंपराओं का पालन करना ज़रूरी: सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला मामले की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि भले ही हिंदू धर्म में कोई कठोर सांप्रदायिक ढांचा नहीं है, लेकिन किसी खास मंदिर में जाने वाले भक्तों को उस मंदिर से जुड़ी परंपराओं या रीति-रिवाजों का पालन करना ज़रूरी है।इस मामले की सुनवाई 9 जजों की एक बेंच कर रही है, जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस एम.एम. सुंदरेश, जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह, जस्टिस अरविंद कुमार, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले, जस्टिस आर....

अंतरिम आदेश से प्रभावित कोई बाहरी व्यक्ति रिट कार्यवाही में पक्षकार बनने का हकदार: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि कार्यवाही में शामिल न होने वाले किसी बाहरी व्यक्ति को, जो मूल रिट कार्यवाही का पक्षकार नहीं है, पक्षकार बनने से मना नहीं किया जा सकता, यदि उस कार्यवाही में पारित आदेश का उस बाहरी व्यक्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"रिट कार्यवाही में जहां कोर्ट से पहले से पारित किसी अंतरिम आदेश के दायरे और प्रभाव की व्याख्या करने के लिए कहा जाता है, वहां किसी ऐसे व्यक्ति को, जो उस आदेश से सीधे और स्पष्ट रूप से प्रभावित...

'सर्विस छोड़ना स्वैच्छिक रिटायरमेंट नहीं': सुप्रीम कोर्ट ने SBI क्लर्क को पेंशन के फ़ायदे देने से मना किया
सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला दिया कि कोई कर्मचारी जो रिटायरमेंट से कुछ समय पहले ही सेवा छोड़ देता है, वह इसे स्वैच्छिक रिटायरमेंट बताकर पेंशन के फ़ायदे नहीं मांग सकता।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने टिप्पणी की,"...हमने पाया कि यह मामला स्वैच्छिक रिटायरमेंट का नहीं है, बल्कि सेवाओं को अपनी मर्ज़ी से छोड़ने का है, जिसमें 24.01.1998 से 11.12.1998 तक, अपीलकर्ता ने बिना किसी को बताए और बिना छुट्टी लिए, लंबे समय तक अनुपस्थित रहना शुरू कर दिया था..." बेंच ने यह टिप्पणी करते...

सुप्रीम कोर्ट का आदेश- मेरठ में गिराए जाएं 859 प्रॉपर्टीज़ में बने अवैध सेटबैक, कंपाउंडिंग पर भी लगाई रोक
उत्तर प्रदेश के मेरठ में बिना इजाज़त और बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध निर्माणों पर अपनी सख़्ती जारी रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 अप्रैल) को 859 प्रॉपर्टीज़ में सभी बिना इजाज़त वाले सेटबैक को दो महीने के अंदर गिराने का आदेश दिया। साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अधिकारियों को भी फटकार लगाई कि उन्होंने स्कूलों, अस्पतालों और यहाँ तक कि सरकारी बैंकों को भी ऐसी इमारतों से चलाने की इजाज़त कैसे दी, जो "पूरी तरह से अवैध और बिना इजाज़त" हैं।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने यह...

S.142 NI Act | बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने का मतलब यह नहीं कि डायरेक्टर को कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों की जानकारी थी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि सिर्फ़ बोर्ड प्रस्ताव पर दस्तखत करने से यह साबित नहीं होता कि कोई डायरेक्टर कंपनी के रोज़मर्रा के मामलों का इंचार्ज था और उनके लिए ज़िम्मेदार था> इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।कंपनी की डायरेक्टर की अपील मंज़ूर करते हुए जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने चेक बाउंस मामले में उनके खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही रद्द की। बेंच ने कहा कि ऐसा कोई खास आरोप नहीं था...

Motor Accident Claim | केस पार्टी बनाई गई बीमा कंपनी सभी आधार उठा सकती है और मुआवज़े की रकम को चुनौती दे सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी की उस अपील को मंज़ूरी दी, जो बॉम्बे हाईकोर्ट के फ़ैसले के ख़िलाफ़ थी। हाईकोर्ट ने बीमा कंपनी को मोटर दुर्घटना मुआवज़े की रकम के बारे में अपनी दलीलें रखने से रोक दिया था।कोर्ट ने कहा कि जब किसी मोटर दुर्घटना मुआवज़े के केस में बीमा कंपनी को एक पार्टी-प्रतिवादी (Respondent) के तौर पर शामिल किया जाता है तो उसे सभी उपलब्ध आधारों पर दावे को चुनौती देने का अधिकार होता है। यानी, उसे सिर्फ़ मोटर वाहन अधिनियम की धारा 149(2) में बताए गए आधारों (जैसे, पॉलिसी की...

बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें, पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं: सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के गृह सचिवों से कहा
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे बच्चों की तस्करी को हल्के में न लें। साथ ही इस बात पर ज़ोर दिया कि यह मुद्दा कानून-व्यवस्था से जुड़ी गंभीर चिंताओं वाला है और इस पर राज्य के अधिकारियों के स्तर पर तत्काल कार्रवाई की ज़रूरत है।जस्टिस जेबी पारदीवाला ने कहा,"कृपया इस मुद्दे को बहुत-बहुत गंभीरता से लें। बच्चों की तस्करी बेकाबू हो चुकी है। पूरे देश में गिरोह सक्रिय हैं। अगर आप सभी इस पर ध्यान नहीं देंगे तो हालात काबू से बाहर हो जाएंगे। इस मामले में केवल राज्य सरकार...

कई अपराधों के लिए जब जेल की सज़ाएं एक साथ चलती हैं तो जुर्माना भी एक साथ ही चलता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (8 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जहां अलग-अलग अपराधों के लिए दी गई सज़ाओं को एक साथ (Concurrently) चलाने का निर्देश दिया गया हो, वहां हर अपराध के लिए अलग से जुर्माना नहीं लगाया जा सकता।कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि दो अपराधों की सज़ा के हिस्से के तौर पर अलग से लगाया गया जुर्माना भी, जेल की सज़ाओं के साथ-साथ ही माना जाएगा।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन. वी. अंजारिया की बेंच ने कहा,"IPC की धारा 53 में जुर्माने को भी सज़ा का एक हिस्सा माना गया। इस नज़रिए से जब सज़ा को एक...

Sabarimala Reference | अंधविश्वास से जुड़ी प्रथाओं की न्यायिक पुनर्विचार पर रोक नहीं: सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट
सबरीमाला मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि अदालतों को ऐसी प्रथाओं या 'अंधविश्वासों' को रद्द करने से नहीं रोका जा सकता, जो सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य का उल्लंघन करती हों। भले ही संविधान के अनुच्छेद 25(2)(b) के तहत धर्म सुधार के लिए कानून बनाने की शक्ति विधायिका के पास हो।अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि किसी भी 'आवश्यक धार्मिक प्रथा' (ERP) को केवल संबंधित धर्म के दार्शनिक दृष्टिकोण से ही देखा जाना चाहिए।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली...

S. 27 Evidence Act | अपराध से जोड़ने वाले सबूत के बिना हथियार की बरामदगी बेमानी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हत्या की सज़ा रद्द की। कोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष द्वारा साक्ष्य अधिनियम (Evidence Act) की धारा 27 के तहत आरोपी के खुलासे वाले बयानों के आधार पर की गई सबूतों की बरामदगी में कई विसंगतियां थीं, गवाह मुकर गए और फोरेंसिक रूप से कोई जुड़ाव साबित नहीं हो पाया।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने टिप्पणी की कि किसी अपराध को अंजाम देने से जुड़े सबूतों की केवल बरामदगी, जो कि आरोपी के खुलासे वाले बयानों पर आधारित हो, सज़ा देने के लिए पर्याप्त नहीं होगी। ऐसा...

CCS Pension Rules | कर्मचारी के खिलाफ आपराधिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित होने पर ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई भी नियोक्ता उस कर्मचारी की ग्रेच्युटी का भुगतान रोकने का हकदार है, जिसके खिलाफ कोई न्यायिक या अनुशासनात्मक कार्यवाही लंबित है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने हिमाचल प्रदेश सड़क परिवहन निगम के एक पूर्व क्लर्क द्वारा दायर अपील खारिज की। इस क्लर्क की ग्रेच्युटी परिवहन निगम ने उसके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही के लंबित होने के कारण रोक दी थी।रिटायरमेंट के बाद अपीलकर्ता की ग्रेच्युटी प्रतिवादी विभाग द्वारा रोक दी गई थी। इसका कारण उसके...

Motor Accident Claim | सिर्फ इसलिए सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि मृतक रिटायरमेंट के करीब था: सुप्रीम कोर्ट
मोटर दुर्घटना मुआवज़ा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में मृतक की सैलरी से 50 प्रतिशत की कटौती को गलत ठहराया। यह कटौती इस आधार पर की गई कि मृतक की नौकरी के सिर्फ 6 महीने बचे थे।जस्टिस राजेश बिंदल और विजय बिश्नोई की बेंच ने दावेदारों (मृतक के परिवार वालों) को दिए जाने वाले मुआवज़े की रकम बढ़ा दी। बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट और मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने मुआवज़े की रकम तय करते समय मृतक की सैलरी से 50% की कटौती करके गलती की थी।बेंच ने कहा,"हमारे सामने जो मामला है, उसमें ट्रिब्यूनल और हाईकोर्ट...

बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ जांच के लिए नए कानून का इंतज़ार ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में साफ किया कि बिना इजाज़त के पैसे उधार देने के मामले में खुद से शुरू की गई (suo motu) कार्रवाई को बंद करने वाले उसके पिछले आदेश का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि इस विषय पर अभी कोई कानून मौजूद नहीं है, या यह कि कानून लागू करने वाली कार्रवाई के लिए राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा नए कानून बनाने का इंतज़ार करना होगा।अदालत ने साफ किया कि बिना लाइसेंस वाले साहूकारों के खिलाफ राज्यों के पैसे उधार देने से जुड़े कानूनों और भारतीय न्याय संहिता के तहत मौजूदा...

अपील खारिज होने पर डिक्री के क्रियान्वयन के लिए नई लिमिटेशन अवधि शुरू होगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अपील को गैर-हाजिरी (default) के कारण खारिज किया जाता है, तो उससे एक नया लिमिटेशन पीरियड शुरू होता है, और ऐसे में 12 साल के भीतर दायर की गई एग्जीक्यूशन पिटीशन (डिक्री के क्रियान्वयन की अर्जी) मान्य होगी।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने कहा कि यह तर्क सही नहीं है कि एग्जीक्यूशन पिटीशन की 12 साल की अवधि केवल डिक्री पास होने की तारीख से ही गिनी जाए, खासकर तब जब उस डिक्री के खिलाफ अपील लंबित रही हो।कोर्ट ने बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच...

सबरीमाला फ़ैसले पर पुनर्विचार नहीं होगा, सिर्फ़ संवैधानिक सवालों पर विचार होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) सबरीमाला मंदिर से जुड़े मामले की सुनवाई शुरू की। इस मामले में क़ानून से जुड़े कई बड़े सवाल उठाए गए, जिनमें धार्मिक संप्रदाय और ज़रूरी धार्मिक प्रथाओं से जुड़े सवाल भी शामिल हैं।बहस की शुरुआत सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की। उन्होंने केंद्र सरकार का पक्ष साफ़ करते हुए कहा कि 2018 का सबरीमाला फ़ैसला, जिसमें सभी वर्गों की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई, ग़लत था। हालांकि, बेंच ने कहा कि चूंकि मौजूदा मामले का दायरा अनुच्छेद 25 (अंतरात्मा की स्वतंत्रता...

अनारक्षित श्रेणी में PwD के लिए क्षैतिज रूप से आरक्षित पद SC/ST/OBC दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी खुले हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि जब किसी अनारक्षित सीट पर क्षैतिज आरक्षण लागू होता है तो उस अनारक्षित सीट के लिए प्रतिस्पर्धा करने का अधिकार उन सभी उम्मीदवारों को होता है जिनके पास वह क्षैतिज विशेषता (Horizontal Attribute) मौजूद है, चाहे वे SC, ST, OBC या सामान्य श्रेणी के हों।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। इस मामले में वेस्ट बंगाल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड में जूनियर सिविल इंजीनियर के एक पद को यूआर...
