सुप्रीम कोर्ट

UCO Bank द्वारा 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके कर्मचारी के VRS को रोकने की कोशिश गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को यह टिप्पणी की कि कोई भी एम्प्लॉयर (मालिक) किसी कर्मचारी को सिर्फ़ 'कारण बताओ नोटिस' जारी करके, बिना किसी औपचारिक अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू किए और तय नोटिस अवधि के भीतर अनुमति देने से इनकार किए बिना स्वैच्छिक रिटायरमेंट लेने से नहीं रोक सकता।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें बैंक कर्मचारी को तब 'कारण बताओ नोटिस' दिया गया, जब उसका स्वैच्छिक रिटायरमेंट का आवेदन अभी पेंडिंग था। हालांकि, VRS के अनुरोध...

सुप्रीम कोर्ट ने जाली पॉलिसी पर शिकायत दर्ज न करने के लिए इंश्योरेंस कंपनी से सवाल किया, SIT जांच का आदेश दिया
इंश्योरेंस पॉलिसी में हेराफेरी के मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में तमिलनाडु के पुलिस महानिदेशक (DGP) को इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया।जस्टिस अहसानुद्दीन अमनुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने यह आदेश यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से पारित किया कि इंश्योरेंस कंपनियां जो पॉलिसीधारकों द्वारा जमा किए गए भारी मात्रा में सार्वजनिक धन का प्रबंधन करती हैं, अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी सतर्कता के साथ करें।खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यह मुद्दा...

NI Act की धारा 138 की शर्तें पूरी होने पर चेक बाउंस की शिकायत को ट्रायल से पहले के स्टेज पर रद्द नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जब Negotiable Instruments Act, 1881 (NI Act) की धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो जाती हैं तो चेक बाउंस के मामले को ट्रायल से पहले के स्टेज पर इस आधार पर रद्द नहीं किया जा सकता कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी नहीं किया गया।कोर्ट ने कहा कि चेक किसी कानूनी रूप से लागू होने वाले कर्ज़ के लिए जारी किया गया या नहीं, यह ट्रायल का मामला है, और इसे ट्रायल से पहले के स्टेज पर तय नहीं किया जा सकता।कोर्ट ने कहा,“जब धारा 138 की बुनियादी शर्तें पूरी हो...

बैंकों द्वारा अकाउंट को 'धोखाधड़ी' घोषित करने से पहले कर्जदार की व्यक्तिगत सुनवाई ज़रूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया 'राजेश अग्रवाल' फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (7 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि कर्जदारों के पास यह कानूनी अधिकार नहीं है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों द्वारा उनके अकाउंट को "धोखाधड़ी" के रूप में वर्गीकृत किए जाने से पहले उनकी व्यक्तिगत (मौखिक) सुनवाई हो। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि डिफ़ॉल्टरों को प्रभावी ढंग से जवाब देने के लिए पूरी फ़ॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट दी जानी चाहिए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के.वी. विश्वनाथन की खंडपीठ ने कलकत्ता हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें हाईकोर्ट ने...

S.528 BNSS | विश्वसनीय सबूत आरोपों को गलत साबित कर दें तो आपराधिक कार्यवाही रद्द की जा सकती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को फैसला सुनाया कि जहां अभियोजन पक्ष ऐसे विश्वसनीय और अकाट्य सबूतों का खंडन करने में विफल रहता है, जो शिकायत के तथ्यात्मक आधार को प्रभावी ढंग से कमजोर करते हैं, वहां कोर्ट के लिए कार्यवाही रद्द करने की अपनी शक्ति का प्रयोग करना उचित होगा।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने उन अपीलकर्ताओं के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की, जिन पर एक बुजुर्ग व्यक्ति पर हमला करने का आरोप था। कोर्ट ने पाया कि CCTV फुटेज काफी महत्वपूर्ण साबित...

दरगाह के सज्जादानशीन और वक्फ के मुतवल्ली एक जैसे नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में दोहराया कि दरगाह के सज्जादानशीन का पद वक्फ के मुतवल्ली के पद से मूल रूप से अलग है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सज्जादानशीन का पद मुख्य रूप से एक आध्यात्मिक पद है, जबकि मुतवल्ली का पद एक धर्मनिरपेक्ष प्रशासनिक भूमिका है।जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कर्नाटक की दरगाह के सज्जादानशीन पद के उत्तराधिकार से जुड़े एक विवाद पर फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की।बेंच ने कहा:"ऊपर की गई चर्चा को देखते हुए मुतवल्ली और सज्जादानशीन के पदों को एक जैसा...

गलत तरीके से सार्वजनिक काम देने का एक भी मामला अनुच्छेद 14 का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को एक शुरुआती जांच करने का आदेश दिया। यह जांच अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू पर लगे पक्षपात के आरोपों और उनके रिश्तेदारों व करीबी सहयोगियों को काम के ठेके देने में खुली और प्रतिस्पर्धी निविदा प्रक्रिया से बार-बार हटने के तरीकों से जुड़े आरोपों पर आधारित है।कोर्ट ने कहा कि सार्वजनिक ठेके देने के फैसले संविधान के अनुच्छेद 14 के दायरे में आते हैं। राज्य से यह उम्मीद की जाती है कि वह जनहित को सुरक्षित रखने के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और मनमानी से...

'आवंटित ज़मीन को विकसित न कर पाने पर कोई राहत नहीं', सुप्रीम कोर्ट ने Piaggio के पक्ष में लीज़ रद्द करने का फ़ैसला सही ठहराया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को Piaggio Vehicles Pvt. Ltd. को दी गई लीज़ रद्द करने का फ़ैसले सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि कंपनी तय समय सीमा के भीतर औद्योगिक प्लॉट पर निर्माण या विकास कार्य करने में नाकाम रही, इसलिए वह किसी भी तरह की राहत पाने की हकदार नहीं है।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा,"...इस नतीजे से बचा नहीं जा सकता कि, जिस दिन लीज़ दी गई... तब से लेकर अब तक अपील करने वाली कंपनी इस प्लॉट पर एक पूरी तरह से औद्योगिक निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए...

सर्जन ही सबसे अच्छा जज होता है कि कौन-सा प्रोसीजर अपनाना है: सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल लापरवाही का केस रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को पीडियाट्रिक सर्जन के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही रद्द की। इस सर्जन ने डेढ़ साल के बच्चे की ऑर्किडेक्टॉमी (अंडकोष निकालना) की थी। बच्चे के पिता ने आरोप लगाया था कि इस प्रोसीजर के लिए उनकी कोई सहमति नहीं ली गई।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बच्चे के पिता ने दलील दी कि उन्होंने सिर्फ ऑर्किडोपेक्सी (अंडकोष को सही जगह पर लाने का प्रोसीजर) के लिए सहमति दी थी, लेकिन सर्जन ने कथित तौर पर उनकी मंजूरी के बिना ऑर्किडेक्टॉमी...

NEET | मेडिकल सीट राष्ट्रीय संसाधन, धोखाधड़ी के कारण खाली हुई सीट अगले उम्मीदवार को ही दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG के एक उम्मीदवार के एडमिशन को सही ठहराया। यह सीट तब खाली हुई थी, जब पता चला कि मूल रूप से चुने गए उम्मीदवार ने जाली मार्कशीट का इस्तेमाल करके एडमिशन लिया था। कोर्ट ने कहा कि जब ऐसी परिस्थितियों में कोई सीट खाली होती है तो अधिकारियों का यह फ़र्ज़ है कि वे उसे मेरिट लिस्ट में अगले योग्य उम्मीदवार को दें।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चांदुरकर की बेंच ने नेशनल मेडिकल काउंसिल की अपील खारिज की, जिसमें हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी गई, जिसमें...

किसी को 'बास्टर्ड' कहना IPC की धारा 294 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (6 अप्रैल) को कहा कि सिर्फ़ गाली-गलौज या अश्लील भाषा का इस्तेमाल करना, जिसमें कोई यौन या कामुक तत्व न हो, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 294 के तहत अश्लीलता का अपराध नहीं माना जाएगा।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने IPC की धारा 294(b) के तहत दो आरोपियों की सज़ा रद्द की। इन आरोपियों पर आरोप था कि उन्होंने पारिवारिक संपत्ति विवाद को लेकर हुई तीखी बहस के दौरान "बास्टर्ड" (हरामखोर) शब्द का इस्तेमाल किया था।कोर्ट ने कहा,"...सिर्फ़ 'बास्टर्ड' शब्द का...

सरकारी नौकरी में दया की कोई जगह नहीं, फिजिकल टेस्ट में शामिल न होने वाले उम्मीदवार को दूसरा मौका नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि पुलिस भर्ती प्रक्रिया में तय फिजिकल टेस्ट में शामिल न हो पाने वाला उम्मीदवार सिर्फ इसलिए टेस्ट को दोबारा कराने का अधिकार नहीं मांग सकता कि टेस्ट टालने की उसकी अर्जियों का जवाब नहीं दिया गया। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सरकारी नौकरी के मामलों में दया और अपनी मर्ज़ी से फैसले लेने की गुंजाइश बहुत कम होती है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल के उस फैसले को सही ठहराया...

'मिहिर शाह' फ़ैसले के अनुसार गिरफ़्तारी के आधार लिखित में न देने पर सुप्रीम कोर्ट ने NDPS मामले में डॉक्टरों को दी ज़मानत
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में नशीले पदार्थों से जुड़े मामले में आरोपी दो मेडिकल प्रोफ़ेशनल्स को इस आधार पर ज़मानत दी कि उन्हें मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने से पहले गिरफ़्तारी के आधार लिखित में नहीं दिए गए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह आदेश देते हुए कहा कि 'मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य' मामले के निर्देश के अनुसार, आरोपी को गिरफ़्तारी के आधार दिए जाने चाहिए थे।'मिहिर राजेश शाह' मामले में पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच ने...

राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास, राज्य केवल अन्य सड़कों पर ही टोल लगा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की। इस याचिका में राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल टैक्स लगाने की केंद्र सरकार की शक्ति को चुनौती दी गई। कोर्ट ने यह टिप्पणी की कि इस तरह के शुल्क संविधान के तहत 'संघ सूची' (Union List) के दायरे में आते हैं।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के उपयोग के लिए वसूला जाने वाला टोल, सूची I (संघ सूची) की प्रविष्टि 23 (संसद द्वारा...

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानियों में रिहायशी इलाकों को कमर्शियल ज़ोन में बदलने के बड़े पैमाने पर हो रहे मामलों की जांच के आदेश दिए
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने पूरे देश में बिल्डिंग बाय-लॉ के बड़े पैमाने पर हो रहे उल्लंघन और रिहायशी इलाकों को कमर्शियल इस्तेमाल के लिए बिना इजाज़त बदलने के मामलों का गंभीरता से संज्ञान लिया।कोर्ट ने कहा,"हमारे सामने ऐसे मामले भी आ रहे हैं, जिनमें रिहायशी कॉलोनियों को रिहायशी इमारतों और ज़मीनों का कमर्शियल मकसद से बिना इजाज़त इस्तेमाल करके कमर्शियल इलाकों में बदला जा रहा है। ऐसी हरकतें न सिर्फ कानून और जनहित के खिलाफ हैं, बल्कि उन असली निवासियों के लिए भी बड़ी परेशानी और नुकसान का सबब...

कानूनी सुधारों और प्रगति के बावजूद दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा जारी, पितृसत्ता अब भी हावी: सुप्रीम कोर्ट
यह देखते हुए कि दशकों के कानूनी सुधारों, कल्याणकारी योजनाओं और न्यायिक हस्तक्षेपों के बावजूद महिलाओं के खिलाफ अपराध अभी भी बड़े पैमाने पर जारी हैं, सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि घरेलू हिंसा और लिंग-आधारित अपराधों का लगातार बने रहना एक गहरी जड़ें जमा चुकी पितृसत्तात्मक सामाजिक व्यवस्था को दर्शाता है।कोर्ट ने गौर किया कि जहां एक ओर भारत ने आर्थिक विकास, बेहतर साक्षरता और शिक्षा तथा कार्यबल में महिलाओं की अधिक भागीदारी देखी है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के खिलाफ हिंसा अभी भी व्यापक है, विशेष रूप से...

ऊंचे पद पर बैठे कर्मचारी को अपने जूनियर कर्मचारियों जैसी हल्की सज़ा नहीं मिल सकती: सुप्रीम कोर्ट ने बैंक मैनेजर की बर्खास्तगी बहाल की
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ऊंचे पद पर बैठा कोई भी दोषी अधिकारी, उसी गलत काम के लिए अपने से नीचे के रैंक वाले कर्मचारियों जैसी सज़ा की मांग नहीं कर सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने पंजाब एंड सिंध बैंक के सीनियर मैनेजर की नौकरी से बर्खास्तगी को सही ठहराया। इस मैनेजर ने अपने जूनियर बैंक अधिकारी और एक गनमैन के साथ मिलकर, ग्राहकों के पैसे का अपने निजी फायदे के लिए गलत इस्तेमाल किया था।कोर्ट ने बैंक की अपील मान ली और दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें आरोपी की सज़ा...

पे कमीशन के फ़ायदे अतिरिक्त शर्तें लगाकर नहीं रोके जा सकते: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल को यह टिप्पणी की कि सेंट्रल पे कमीशन की सिफ़ारिशों की मनमानी व्याख्या करके किसी कर्मचारी को पे कमीशन के फ़ायदों से वंचित करने के लिए कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा सकती।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। यह मामला उन याचिकाकर्ताओं से जुड़ा था, जिन्होंने शुरू में बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइज़ेशन में जूनियर इंजीनियरिंग कैडर में नौकरी शुरू की थी। बाद में कैडर के विलय के बाद उन्हें 'जूनियर इंजीनियर' के तौर पर नया पदनाम दिया गया।लेवल 8 पर...

कंपनी आम बैठक में विशेष प्रस्ताव के बिना डायरेक्टर को लोन नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (2 अप्रैल) को बिजनेसमैन सतिंदर सिंह भसीन की ज़मानत रद्द की, क्योंकि उन्होंने कोर्ट द्वारा लगाई गई ज़मानत की शर्तों का उल्लंघन किया था। लगाई गई शर्तों में से एक यह थी कि भसीन को सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में 50 करोड़ रुपये जमा करने होंगे। हालांकि, यह बात सामने आई कि इस शर्त को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी कंपनी भसीन इन्फोटेक एंड इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (BIIPL) के फंड का गलत इस्तेमाल किया था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन.के. सिंह की बेंच ने कहा कि भसीन को इस शर्त...

कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर ब्लैकलिस्टिंग अपने आप नहीं होती, इसके लिए अलग से सोच-समझकर फैसला लेना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने 2 अप्रैल को फैसला सुनाया कि किसी कॉन्ट्रैक्ट को खत्म करने से अपने आप ब्लैकलिस्टिंग सही साबित नहीं हो जाती। ब्लैकलिस्टिंग के लिए एक अलग से 'कारण बताओ नोटिस' (Show Cause Notice) देना और ठीक से सोच-समझकर फैसला लेना ज़रूरी है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने झारखंड हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें पेयजल और स्वच्छता विभाग द्वारा जारी किए गए कॉन्ट्रैक्ट खत्म करने और ब्लैकलिस्ट करने के आदेश को सही ठहराया गया था। यह आदेश अपीलकर्ता (कॉन्ट्रैक्टर) की तरफ से निर्माण...
