सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने उमीद पोर्टल के खिलाफ याचिका को सूचीबद्ध करने से इनकार किया, कहा- वक्फ संशोधन अधिनियम चुनौती में विचार करेंगे
सुप्रीम कोर्ट ने आज (22 अगस्त) केंद्र सरकार द्वारा वक्फ, जिसमें वक्फ-बाय-यूजर भी शामिल हैं, के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए शुरू किए गए 'उमीद पोर्टल' के निलंबन की मांग वाली याचिका की तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया।चीफ जस्टिस बीआर गवई ने मौखिक रूप से कहा कि कोर्ट इस मुद्दे पर वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के संचालन को स्थगित करने की याचिका पर अपने लंबित फैसले में विचार करेगा। उन्होंने वकील शाहरुख आलम से कहा, “आप पंजीकरण कराएं, कोई भी आपको पंजीकरण से मना नहीं कर रहा है... हम उस हिस्से पर विचार करेंगे।”आलम...
Bihar SIR: वोटर ड्राफ्ट रोल से बाहर हुए लोग आधार कार्ड के साथ कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन- सुप्रीम कोर्ट
बिहार SIR मामले में, सुप्रीम कोर्ट ने आज आदेश दिया कि जिन व्यक्तियों को मसौदा मतदाता सूची से बाहर रखा गया है, वे ऑनलाइन मोड के माध्यम से शामिल करने के लिए अपने आवेदन जमा कर सकते हैं और फॉर्म का भौतिक रूप से जमा करना आवश्यक नहीं है।न्यायालय ने आगे स्पष्ट किया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा उल्लिखित ग्यारह दस्तावेजों में से कोई भी दस्तावेज या आधार कार्ड सूची में शामिल करने की मांग करने वाले आवेदनों के साथ जमा किया जा सकता है। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने बिहार राज्य में...
BREAKING | सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में किया संशोधन, कहा- Delhi-NCR में टीकाकरण के बाद ही छोड़े जाएंगे उठाए गए आवारा कुत्तें
सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को दो जजों की बेंच द्वारा दिए गए उस निर्देश पर रोक लगा दी, जिसमें कहा गया था कि दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से उठाए गए आवारा कुत्तों को नहीं छोड़ा जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एनवी अंजारिया की तीन जजों की बेंच ने स्पष्ट किया कि उठाए गए आवारा कुत्तों को नसबंदी, कृमिनाशक और टीकाकरण के बाद उसी क्षेत्र में वापस छोड़ा जाना चाहिए, जहां से उन्हें उठाया गया था, सिवाय उन कुत्तों के जो रेबीज से संक्रमित हैं, जिनके रेबीज से संक्रमित होने का संदेह...
राष्ट्रपति के संदर्भ में राज्यों द्वारा अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दायर करने के प्रश्न का उत्तर देने से सुप्रीम कोर्ट बचेगा
सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से कहा कि वह राष्ट्रपति के संदर्भ के 14वें प्रश्न पर विचार नहीं करेगा कि क्या संविधान अनुच्छेद 131 के तहत मुकदमे के अलावा, केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच विवादों का निपटारा करने के सुप्रीम कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाता है, और क्या कोई राज्य संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर सकता है।यह बात जस्टिस पीएस नरसिम्हा द्वारा मंगलवार को पूछे गए उस सवाल के बाद आई, जिसमें उन्होंने पूछा था कि जब मुद्दे ज़्यादातर विधेयकों पर राष्ट्रपति और राज्यपाल की...
राज्यपाल द्वारा अनिश्चितकाल तक बिल रोकने से विधानसभा निष्क्रिय हो जाएगी: सुप्रीम कोर्ट
विधेयकों को मंजूरी से संबंधित मुद्दों पर राष्ट्रपति के संदर्भ की सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (21 अगस्त) को मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यदि राज्यपाल अनिश्चित काल के लिए विधेयकों को रोकते हैं, तो यह विधायिका को निष्क्रिय कर देगा। क्या ऐसी स्थिति में अदालतें हस्तक्षेप करने के लिए शक्तिहीन हैं, अदालत ने पूछा।चीफ़ जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर की खंडपीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है। सॉलिसिटर जनरल की इस दलील का जवाब देते...
S.186 IPC के तहत 'बाधा' शारीरिक बल तक सीमित नहीं, बल्कि लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में किसी भी प्रकार की बाधा है : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (20 अगस्त) को स्पष्ट किया कि आईपीसी की धारा 186 के तहत दोषसिद्धि के लिए हिंसा या शारीरिक बल प्रयोग की आवश्यकता नहीं है। न्यायालय ने कहा कि किसी लोक सेवक के वैध कर्तव्य में बाधा, धमकी, भय या जानबूझकर असहयोग के माध्यम से भी डाली जा सकती है, बशर्ते कि इससे कर्तव्य निर्वहन में कठिनाई हो। कोर्ट ने कहा,"हमारा मानना है कि भारतीय दंड संहिता की धारा 186 में प्रयुक्त 'बाधा' शब्द केवल शारीरिक बाधा डालने तक ही सीमित नहीं है। यह आवश्यक नहीं कि यह आपराधिक बल प्रयोग का कृत्य हो। यह...
ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत अपराध की परिसीमा अवधि ड्रग्स एनालिस्ट की रिपोर्ट प्राप्त होने से शुरू होती है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत 3 वर्ष के कारावास से दंडनीय अपराधों की परिसीमा अवधि की गणना सरकारी विश्लेषक की रिपोर्ट के प्रकाशन की तिथि से की जानी चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ केरल हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अपीलकर्ता के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम की धारा 32 के तहत कार्यवाही जारी रखने की अनुमति दी गई थी और शिकायतों को परिसीमा अवधि के भीतर माना गया...
IPC की धारा 172-188 से जुड़े अपराधों को धारा 195 के प्रतिबंध को दरकिनार करने के लिए विभाजित नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धांत निर्धारित किए
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CrPC की धारा 195 मजिस्ट्रेट को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 172-188 के तहत अपराधों का संज्ञान लेने से तब तक रोकती है, जब तक कि संबंधित लोक सेवक शिकायत दर्ज न करे, यह प्रतिबंध उन अन्य अपराधों पर भी लागू होता है, जो इन प्रावधानों से इतने निकटता से जुड़े हैं कि उन्हें विभाजित नहीं किया जा सकता।पूर्व उदाहरणों पर चर्चा के बाद न्यायालय ने कहा:"इस प्रकार, उपरोक्त के मद्देनजर, कानून का सारांश इस प्रकार दिया जा सकता है कि उस लोक सेवक द्वारा शिकायत अवश्य की जानी चाहिए,...
अगर सड़क में गड्ढे हैं तो NHAI या उसके एजेंट टोल नहीं वसूल सकते: सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के विचार की पुष्टि की
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाईकोर्ट के उस दृष्टिकोण की पुष्टि की, जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि हाईवे की स्थिति बहुत खराब है तो भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) यात्रियों को टोल देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ एनएचएआई की अपील खारिज कर दी, जिसमें सड़क की खराब स्थिति के कारण त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा में एनएच-544 पर टोल वसूली पर रोक लगा दी गई थी।पीठ ने हाईकोर्ट के इस दृष्टिकोण से स्पष्ट रूप से...
सरकारें अस्थायी कर्मचारियों से नियमित काम न लें, स्थायी पद बनाएं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (19 अगस्त) को इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया, जिसने लंबे समय से सेवारत तदर्थ कर्मचारियों को नियमित करने से इनकार कर दिया था, जिन्होंने यूपी उच्च शिक्षा सेवा आयोग में बारहमासी प्रकृति का काम किया था, केवल इस आधार पर कि उन्हें शुरू में दैनिक वेतन भोगी के रूप में नियुक्त किया गया था और कोई स्वीकृत पद उपलब्ध नहीं थे।अपीलकर्ता- पांच चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और एक ड्राइवर- 1989-1992 से आयोग के साथ लगातार काम कर रहे थे। दशकों की सेवा के बावजूद, नियमितीकरण की उनकी मांग...
NH-544 के पलियेक्कारा में टोल वसूली लेने पर लगी रोक, सुप्रीम कोर्ट ने NHAI की अपील खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा दायर अपील खारिज की, जिसमें केरल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी। इस फैसले में राष्ट्रीय राजमार्ग 544 पर एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति के कारण त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा टोल बूथ पर टोल वसूली रोक दी गई थी।न्यायालय ने टोल वसूली करने वाली रियायतग्राही गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की अपील को भी खारिज कर दिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) बीआर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने सोमवार को फैसला सुरक्षित रख...
16 साल की मुस्लिम लड़की किसी मुस्लिम पुरुष से वैध विवाह कर सकती है: सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (19 अगस्त) को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका खारिज की। इस याचिका में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के 2022 के उस फैसले को चुनौती दी गई, जिसमें कहा गया था कि 16 साल की मुस्लिम लड़की किसी मुस्लिम पुरुष से वैध विवाह कर सकती है और दंपति को धमकियों से सुरक्षा प्रदान की गई थी।जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की खंडपीठ ने कहा कि NCPCR इस मुकदमे से अनजान है और उसे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने का कोई अधिकार नहीं है।खंडपीठ ने...
RP Act | पर्याप्त न होने तक संपत्ति का खुलासा न करने मात्र से चुनाव अमान्य नहीं होगा: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हलफनामे में संपत्ति का खुलासा न करने मात्र से यदि वह कोई भौतिक दोष नहीं है और पर्याप्त प्रकृति का नहीं है तो नामांकन स्वीकार करना अनुचित नहीं होगा, जिससे चुनाव अमान्य हो जाएगा।जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 123 के अनुसार ऐसी विफलता भ्रष्ट आचरण नहीं मानी जाएगी, जिससे धारा 100(1)(बी) के अनुसार चुनाव परिणाम अमान्य हो जाता है।ऐसा मानते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत राष्ट्र समिति (BRS) की विधायक कोवा लक्ष्मी के चुनाव में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जो तेलंगाना...
विवाह विच्छेद करते समय पत्नी को 1.25 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता दिया जाए: सुप्रीम कोर्ट का आदेश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने पति को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपरिवर्तनीय विच्छेद के आधार पर विवाह विच्छेद करते समय अपनी पत्नी को 1.25 करोड़ रुपये का स्थायी गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने मद्रास हाईकोर्ट का आदेश के विरुद्ध अपील पर सुनवाई की, जिसमें प्रतिवादी-पत्नी द्वारा क्रूरता के आधार पर फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दिए गए तलाक का आदेश रद्द कर दिया गया।हाईकोर्ट का निर्णय रद्द करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ द्वारा लिखित निर्णय में विवाह...
S. 306 IPC | आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में यह जांच की जानी चाहिए कि क्या आरोपी ने अपने कृत्य से पीड़ित को आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का इरादा किया था: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अगस्त) को सांसद मोहनभाई डेलकर की आत्महत्या के मामले में दादरा एवं नगर हवेली के प्रशासक और अन्य अधिकारियों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला रद्द करने के बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। न्यायालय ने कहा कि आत्महत्या से प्रत्यक्ष और निकट संबंध के बिना उत्पीड़न, भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 306 के तहत आरोप कायम रखने के लिए पर्याप्त नहीं है।न्यायालय ने कहा,"भले ही लंबे समय तक लगातार उत्पीड़न का आरोप हो; धारा 306 और धारा 107 के तत्वों को शामिल करने के लिए,...
'अगर ट्रैफिक जाम 12 घंटे तक रहता है तो टोल क्यों चुकाएं?': सुप्रीम कोर्ट ने एनएच 544 में पलियेक्कारा टोल वसूली को लेकर NHAI की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (18 अगस्त) को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा दायर याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जिसमें केरल उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें राष्ट्रीय राजमार्ग 544 पर एडापल्ली-मन्नुथी खंड की खराब स्थिति के कारण त्रिशूर जिले के पलियेक्कारा टोल बूथ पर टोल वसूली पर रोक लगा दी गई थी। पीठ ने टोल वसूलने वाली रियायतग्राही कंपनी गुरुवायूर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड द्वारा दायर याचिका पर भी सुनवाई की, जिसमें उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी गई...
सुप्रीम कोर्ट ने सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकलांग हुए कैडेटों के बीमा कवरेज और पुनर्वास पर संघ से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (19 अगस्त) को सैन्य प्रशिक्षण के दौरान विकलांग हुए कैडेटों की कठिनाइयों से संबंधित एक स्वतः संज्ञान मामले में केंद्रीय रक्षा, वित्त और सामाजिक न्याय मंत्रालयों के साथ-साथ रक्षा प्रमुखों, थलसेना, वायुसेना और नौसेना को नोटिस जारी किया। जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने अधिकारियों से यह जांच करने को कहा कि क्या विकलांग कैडेटों के मासिक चिकित्सा व्यय में वृद्धि की जा सकती है, क्या मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में बीमा कवरेज प्रदान किया जा सकता है, और क्या...
WB Premises Tenancy Act | धारा 7 के तहत यदि स्वीकृत किराया समय पर जमा नहीं किया जाता तो किरायेदार बेदखली से सुरक्षित नहीं: सुप्रीम कोर्ट
पश्चिम बंगाल परिसर किरायेदारी अधिनियम, 1997 (WBPT Act) की व्याख्या करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में फैसला सुनाया कि एक बार किरायेदार को बेदखली का समन जारी होने के बाद लागू ब्याज सहित बकाया किराया जमा करने की वैधानिक 30-दिन की अवधि अनिवार्य है और इसे परिसीमा अधिनियम की धारा 5 का हवाला देकर बढ़ाया नहीं जा सकता।जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस अरविंद कुमार की खंडपीठ ने एक ऐसे मामले पर विचार किया, जिसमें अपीलकर्ता-किरायेदार वैधानिक 30-दिन की अवधि के भीतर स्वीकृत किराया जमा करने में विफल रहा और...
मध्यस्थता के लिए सहमति देने वाले पक्षों को मध्यस्थता न होने के आधार पर पंचाट का विरोध करने से रोका गया: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि ट्रस्टों से संबंधित विवादों में जब कोई पक्ष स्वेच्छा से मध्यस्थता के लिए प्रस्तुत होता है और सहमति डिक्री स्वीकार कर लेता है तो एस्टोपल का सिद्धांत लागू होता है। इससे उस पक्ष के लिए बाद में इस आधार पर डिक्री को चुनौती देना अनुचित हो जाता है कि ऐसे विवाद मध्यस्थता-योग्य नहीं हैं।जस्टिस ऑगस्टाइन जॉर्ज मसीह और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की खंडपीठ ने गुरु तेग बहादुर चैरिटेबल ट्रस्ट के न्यासियों के बीच उत्पन्न विवाद की सुनवाई की। प्रतिवादियों ने शुरू में स्थायी...
ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की ज़मानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के विरुद्ध अपीलों से संबंधित सिद्धांतों का सारांश प्रस्तुत किया
बुधवार (13 अगस्त) को सागर धनखड़ हत्याकांड में ओलंपियन पहलवान सुशील कुमार की ज़मानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज़मानत के विरुद्ध अपील के संबंध में सिद्धांत निर्धारित किए। न्यायालय ने कहा कि ज़मानत के विरुद्ध अपील और ज़मानत रद्द करने की अपील अलग-अलग अवधारणाएं हैं, क्योंकि दोनों में अलग-अलग मानदंड शामिल हैं।न्यायालय ने कहा कि ज़मानत के विरुद्ध अपील पर हाईकोर्ट विचार कर सकता है, यदि यह दर्शाया गया हो कि ज़मानत आदेश अपराध की गंभीरता, अपराध के प्रभाव, आदेश का अवैध होना, विकृत होना, गवाहों को...



















