सुप्रीम कोर्ट

Arms Act | सिर्फ़ हथियार मिलने से ही अपराध साबित नहीं होता, अगर यह साबित न हो कि आरोपी को उसकी जानकारी थी और उसका उस पर कंट्रोल था: सुप्रीम कोर्ट
Arms Act | सिर्फ़ हथियार मिलने से ही अपराध साबित नहीं होता, अगर यह साबित न हो कि आरोपी को उसकी जानकारी थी और उसका उस पर कंट्रोल था: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि किसी के घर से हथियार मिलने मात्र से ही उसे आर्म्स एक्ट के तहत दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि यह साबित न हो जाए कि आरोपी को उन हथियारों के बारे में जानकारी थी और उन पर उसका कंट्रोल था।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की बेंच ने एक आदिवासी व्यक्ति को बरी करने के फैसले को सही ठहराते हुए कहा,"हाईकोर्ट का यह कहना सही था कि प्रतिवादी/आरोपी के घर से हथियार समेत कुछ सामान मिलने मात्र से ही उसे अपराध का दोषी नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि...

नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी को विदेशी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
नागरिकता तय करने की प्रक्रिया निष्पक्ष होनी चाहिए, केवल अनुपस्थिति के आधार पर किसी को विदेशी नहीं ठहराया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी व्यक्ति की नागरिकता या विदेशी होने का निर्धारण निष्पक्ष, कानूनी और उचित प्रक्रिया के तहत ही किया जाना चाहिए। अदालत ने गौहाटी हाईकोर्ट के उन फैसलों को रद्द कर दिया, जिनमें 27 लोगों को विदेशी घोषित करने वाले विदेशी न्यायाधिकरणों के आदेश बरकरार रखे गए थे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि राज्य का यह वैध हित है कि कोई व्यक्ति अवैध रूप से भारतीय नागरिकता प्राप्त न करे, लेकिन यह उद्देश्य प्रक्रियात्मक निष्पक्षता की कीमत पर हासिल नहीं किया जा...

MMDR Act | लीज़ डीड में रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने के बावजूद सरकार रॉयल्टी की दर बदल सकती है: सुप्रीम कोर्ट
MMDR Act | लीज़ डीड में रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने के बावजूद सरकार रॉयल्टी की दर बदल सकती है: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि माइनिंग लीज़ डीड में खनिजों की माइनिंग पर रॉयल्टी में बदलाव के बारे में कुछ न कहे जाने का मतलब यह नहीं है कि सरकार 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957' के तहत समय-समय पर रॉयल्टी की दर बदलने की अपनी शक्ति खो देगी।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा,"माइनिंग लीज़ एक कानूनी ग्रांट है, जबकि रॉयल्टी कानूनी लेवी (शुल्क) है। समय-समय पर रॉयल्टी में बदलाव करने की शक्ति MMDR Act की धारा 15 और उसके तहत बने नियमों...

सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज न देने वाला कॉन्ट्रैक्ट पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज न देने वाला कॉन्ट्रैक्ट पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट की किसी शर्त को सिर्फ़ इसलिए कानून और पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ नहीं माना जा सकता, क्योंकि उसमें सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज देने की बात नहीं कही गई।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट की एक शर्त को पब्लिक पॉलिसी के खिलाफ बताया गया, क्योंकि उसमें सिक्योरिटी डिपॉज़िट पर ब्याज देने का प्रावधान नहीं था।मुद्दा यह था कि "क्या...

सिर्फ़ टेलीफ़ोन रिकॉर्ड से नाजायज़ रिश्ते साबित नहीं हो सकते: सुप्रीम कोर्ट ने पति की हत्या के मामले में आरोपियों को बरी करने का फ़ैसला बरकरार रखा
'सिर्फ़ टेलीफ़ोन रिकॉर्ड से नाजायज़ रिश्ते साबित नहीं हो सकते': सुप्रीम कोर्ट ने पति की हत्या के मामले में आरोपियों को बरी करने का फ़ैसला बरकरार रखा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सिर्फ़ टेलीफ़ोन रिकॉर्ड पेश करने से हत्या की वजह बने नाजायज़ रिश्ते का ठोस सबूत नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने 2007 में अपने पति की हत्या की आरोपी महिला, उसके कथित प्रेमी और एक अन्य सह-आरोपी को बरी करने के फ़ैसले को बरकरार रखा।कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष हालात से जुड़े सबूतों (circumstantial evidence) के आधार पर सज़ा सुनाने के लिए ज़रूरी हालात की अटूट कड़ी साबित करने में नाकाम रहा। कोर्ट ने पाया कि जांच में "गंभीर कमियां" थीं, जिसमें बरामद सामान को सील न करना भी शामिल...

S. 19 JJ Act | बच्चे पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाने से पहले चिल्ड्रेन्स कोर्ट को ठोस वजहों वाला आदेश देना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट
S. 19 JJ Act | बच्चे पर बालिग़ की तरह मुक़दमा चलाने से पहले चिल्ड्रेन्स कोर्ट को ठोस वजहों वाला आदेश देना ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट

देश भर की चिल्ड्रेन्स कोर्ट के लिए अहम निर्देश में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि चिल्ड्रेन्स कोर्ट जुवेनाइल जस्टिस (बच्चों की देखभाल और सुरक्षा) एक्ट, 2015 (JJ Act) की धारा 19(1) के तहत ठोस वजहों वाला आदेश दिए बिना कानून के दायरे में आने वाले किसी बच्चे (कानून के साथ टकराव की स्थिति में बच्चा) पर बालिग़ की तरह मुक़दमा नहीं चला सकती।इस ज़रूरत को अनिवार्य मानते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की बेंच ने एक व्यक्ति की हत्या की सज़ा रद्द की। घटना के समय वह 16½ साल...

2016 से पहले जारी DRT रिकवरी सर्टिफिकेट के आधार पर प्रेसिडेंसी टाउन्स इनसॉल्वेंसी एक्ट के तहत दिवालियापन का नोटिस नहीं दिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
2016 से पहले जारी DRT रिकवरी सर्टिफिकेट के आधार पर 'प्रेसिडेंसी टाउन्स इनसॉल्वेंसी एक्ट' के तहत दिवालियापन का नोटिस नहीं दिया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (13 जुलाई) को कहा कि 'रिकवरी ऑफ़ डेट्स एंड बैंकरप्सी एक्ट' (RDB Act) में 2016 के संशोधन से पहले 'डेट्स रिकवरी ट्रिब्यूनल' (DRT) द्वारा जारी रिकवरी सर्टिफिकेट को 'प्रेसिडेंसी टाउन्स इनसॉल्वेंसी एक्ट, 1909' की धारा 9(2) के तहत दिवालियापन की कार्यवाही शुरू करने के लिए "डिक्री या आदेश" नहीं माना जा सकता।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने HDFC बैंक की अपील खारिज करते हुए कहा,"जिस तारीख को वादी कोर्ट पहुंचा, उस तारीख को जो दावा मान्य नहीं, वह केवल इसलिए...

आयरन ओर (लौह अयस्क) पर रॉयल्टी तय करने के लिए उसकी औसत बिक्री कीमत में रॉयल्टी को शामिल करना सही: सुप्रीम कोर्ट
आयरन ओर (लौह अयस्क) पर रॉयल्टी तय करने के लिए उसकी औसत बिक्री कीमत में रॉयल्टी को शामिल करना सही: सुप्रीम कोर्ट

सोमवार (13 जुलाई) को सुप्रीम कोर्ट ने आयरन ओर पर रॉयल्टी की गणना करने के सरकार के तरीके को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि बिक्री कीमत की गणना करते समय डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) और नेशनल मिनरल एक्सप्लोरेशन ट्रस्ट (NMET) के लिए किए गए रॉयल्टी भुगतान को न घटाने का तरीका, माइनिंग कंपनियों को सरकार को रॉयल्टी चुकाने की अपनी ज़िम्मेदारी से बचने से रोकने के लिए एक सही कदम है।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने 'मिनरल्स (एटॉमिक और हाइड्रोकार्बन एनर्जी मिनरल्स के अलावा) कंसेशन...

निवेशकों को फ़ायदा हुआ नियम तोड़ने का बचाव नहीं: म्यूचुअल फ़ंड मामले में कोटक AMC पर SEBI के जुर्माने को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया
'निवेशकों को फ़ायदा हुआ' नियम तोड़ने का बचाव नहीं: म्यूचुअल फ़ंड मामले में कोटक AMC पर SEBI के जुर्माने को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि निवेशकों को हुआ फ़ायदा सिक्योरिटीज़ नियमों के उल्लंघन को सही नहीं ठहरा सकता। कोर्ट ने कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी (कोटक AMC), उसकी ट्रस्टी कंपनी और सीनियर अधिकारियों के ख़िलाफ़ SEBI की कार्रवाई को सही ठहराया। यह कार्रवाई छह फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (FMP) स्कीमों के मैनेजमेंट को लेकर की गई थी। कोर्ट ने कहा कि नियम तोड़ने से हुए वित्तीय नतीजों से ज़्यादा ज़रूरी "मार्केट की ईमानदारी" (मार्केट इंटीग्रिटी) है।कोटक AMC का तर्क था कि उसके फ़ैसले से अंततः...

प्रमोशन के लिए उपयुक्तता तय करने का काम डोमेन एक्सपर्ट्स पर छोड़ देना चाहिए, कोर्ट नई प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट
प्रमोशन के लिए उपयुक्तता तय करने का काम डोमेन एक्सपर्ट्स पर छोड़ देना चाहिए, कोर्ट नई प्रक्रिया शुरू नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने फिर से कहा कि जब कानून में किसी उम्मीदवार के प्रमोशन के लिए उपयुक्तता तय करने का खास तरीका बताया गया हो तो कोर्ट के लिए अपनी राय से कोई अलग तरीका अपनाना या कानून में ऐसे शब्द जोड़ना सही नहीं है जो उसमें पहले से नहीं हैं।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कर्नाटक हाईकोर्ट और सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) के फैसलों को रद्द किया। इन फैसलों में रेस्पोंडेंट-साइंटिस्ट को सीनियर साइंटिस्ट के पद पर प्रमोट किया गया था, जबकि इसके लिए जो तरीका अपनाया गया, वह CSIR...

BREAKING| तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक
BREAKING| तमिलनाडु में जारी रहेगी गो-हत्या: सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसमें बकरीद या किसी भी अन्य दिन तमिलनाडु राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े की हत्या पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने तमिलनाडु राज्य द्वारा दायर स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) पर नोटिस जारी करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। राज्य ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें राज्य में गायों और बछड़ों की हत्या पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई।बेंच ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का आखिरी पैराग्राफ...

Delhi Rent Act| बैंक के विलय से किरायेदारी अधिकार भी हस्तांतरित होते हैं, मकान मालिक की लिखित सहमति न हो तो बेदखली होगी: सुप्रीम कोर्ट
Delhi Rent Act| बैंक के विलय से किरायेदारी अधिकार भी हस्तांतरित होते हैं, मकान मालिक की लिखित सहमति न हो तो बेदखली होगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि यदि किरायेदार बैंक का किसी अन्य बैंक में विलय (Amalgamation) हो जाता है, तो यह किरायेदारी अधिकारों का हस्तांतरण (Transfer of Tenancy) माना जाएगा। यदि ऐसा हस्तांतरण मकान मालिक की लिखित सहमति के बिना होता है, तो दिल्ली किराया नियंत्रण अधिनियम (Delhi Rent Control Act) की धारा 14(1)(b) के तहत बेदखली का आधार बनता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की खंडपीठ ने पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के खिलाफ बेदखली का आदेश बहाल करते हुए कहा...

बच्चे के यौन शोषण की रिपोर्ट नहीं करती थी स्कूल हेडमिस्ट्रेस: सुप्रीम कोर्ट ने फिर से शुरू किया POCSO केस, कहा - खुद जांच करना कोई बहाना नहीं
बच्चे के यौन शोषण की रिपोर्ट नहीं करती थी स्कूल हेडमिस्ट्रेस: सुप्रीम कोर्ट ने फिर से शुरू किया POCSO केस, कहा - खुद जांच करना कोई बहाना नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जुलाई) को फैसला सुनाया कि अगर किसी स्कूल अधिकारी को बच्चे से यौन उत्पीड़न की सीधी शिकायत मिलती है तो वह खुद "जांच-पड़ताल" करके और यह नतीजा निकालकर कि "कुछ नहीं हुआ है," अधिकारियों को घटना की रिपोर्ट करने की आपराधिक जिम्मेदारी से नहीं बच सकता।कोर्ट ने कहा कि 'बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण अधिनियम, 2012' (POCSO Act) की धारा 19 के तहत घटना की रिपोर्ट न करने पर POCSO Act की धारा 21 के तहत आपराधिक जिम्मेदारी बनती है, जिसमें छह महीने तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो...

Commercial Courts Act | दस्तावेज़ों की बड़ी संख्या उन्हें देर से पेश करने का कोई बहाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
Commercial Courts Act | दस्तावेज़ों की बड़ी संख्या उन्हें देर से पेश करने का कोई बहाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जुलाई) को कहा कि सबूतों का केवल 'बड़ी मात्रा में होना' कमर्शियल कोर्ट्स एक्ट, 2015 के तहत उन्हें देर से पेश करने के लिए "उचित कारण" नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"...यह अच्छी तरह से स्थापित है कि जब वादी सबूत पेश करता है तो उससे न केवल सभी दस्तावेज़ पेश करने की उम्मीद की जाती है, बल्कि दूसरी तरफ से उसके गवाहों से पूछे जा सकने वाले सवालों का सही अंदाज़ा लगाने की भी उम्मीद की जाती है। रुक-रुक कर या टुकड़ों में काम...

ओरांव जनजाति की परंपरा के तहत चाचा-ससुर अपनी भतीजी के पति को घर-दामाद के तौर पर नहीं अपना सकते: सुप्रीम कोर्ट
ओरांव जनजाति की परंपरा के तहत चाचा-ससुर अपनी भतीजी के पति को 'घर-दामाद' के तौर पर नहीं अपना सकते: सुप्रीम कोर्ट

ओरांव आदिवासी समुदाय में विरासत से जुड़ी पारंपरिक प्रथाओं के मामले में अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (9 जुलाई) को कहा कि मान्यता प्राप्त पारंपरिक कानून के तहत कोई चाचा-ससुर अपनी भतीजी के पति को 'घर-दामाद' (घर में रहने वाला दामाद) के तौर पर शामिल नहीं कर सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा,"प्रचलित पारंपरिक कानून में ऐसी कोई बात साबित नहीं हुई है कि कोई चाचा-ससुर अपनी भतीजी के पति को अपना घर-दामाद बना सके।" बेंच ने ट्रायल कोर्ट, पहली अपीलीय अदालत...

क्या गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट में मतभेद, बड़ी पीठ को मामला भेजने के संकेत
क्या गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना अनिवार्य है? सुप्रीम कोर्ट में मतभेद, बड़ी पीठ को मामला भेजने के संकेत

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संकेत दिया कि वह इस महत्वपूर्ण कानूनी सवाल पर विचार करेगा कि क्या गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में देना अनिवार्य है।अदालत ने कहा कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों के फैसलों में विरोधाभास दिखाई देता है, इसलिए मामले को बड़ी पीठ के पास भेजने की आवश्यकता पड़ सकती है।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की अवकाशकालीन पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई। सोनम पर...

वकीलों के लिए कंटीन्यूइंग लीगल एजुकेशन ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BCI से नेशनल लीगल एकेडमी बनाने को कहा
वकीलों के लिए 'कंटीन्यूइंग लीगल एजुकेशन' ज़रूरी: सुप्रीम कोर्ट ने BCI से नेशनल लीगल एकेडमी बनाने को कहा

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वकीलों के लिए 'कंटीन्यूइंग लीगल एजुकेशन' (CLE) को संस्थागत रूप देने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया। कोर्ट ने कहा कि न्याय प्रणाली में क्षमता, नैतिक मानकों और जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए जीवन भर पेशेवर रूप से सीखते रहना ज़रूरी है।कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को CLE कार्यक्रम शुरू करने और उन्हें संस्थागत रूप देने का निर्देश दिया। साथ ही जजों के लिए 'नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी' की तर्ज पर वकीलों के लिए 'नेशनल लीगल एकेडमी' (NLA) स्थापित करने की संभावनाओं पर...

बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता IBA, वकीलों की ब्लैकलिस्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला
बार काउंसिल के अधिकार क्षेत्र में दखल नहीं दे सकता IBA, वकीलों की ब्लैकलिस्टिंग पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) केवल धोखाधड़ी में लापरवाही के आरोपों के आधार पर किसी पैनल वकील का नाम 'कौशन लिस्ट' में डालकर उसे प्रभावी रूप से ब्लैकलिस्ट नहीं कर सकता। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई से अधिवक्ता के पेशे और प्रतिष्ठा पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने यह फैसला उस विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनाया, जिसमें एक अधिवक्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी,...