सुप्रीम कोर्ट

तथ्य या कानून की मामूली गलती दिखाने मात्र से लेटर्स पेटेंट बेंच सिंगल बेंच के फैसले में दखल नहीं दे सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच अपनी 'लेटर्स पेटेंट' अधिकारिता (Jurisdiction) का इस्तेमाल करते हुए रिट अधिकारिता के तहत दिए गए सिंगल जज के फैसले में केवल इसलिए दखल नहीं दे सकती, क्योंकि उसका मामले को देखने का नजरिया अलग है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने कहा,"तथ्य या कानून की कोई मामूली गलती दिखाने मात्र से 'लेटर्स पेटेंट बेंच' को रिट कोर्ट के फैसले में दखल देने का अधिकार नहीं है। अगर संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट कोर्ट का फैसला न्याय,...

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: मानव तस्करी विरोधी इकाइयों को पुलिस स्टेशन का दर्जा देने के लिए अधिसूचना जारी करें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे कानून के अनुसार उचित अधिसूचना जारी करके 'मानव तस्करी विरोधी इकाइयों' (ATHUs) को पुलिस स्टेशन का दर्जा दें। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि मानव तस्करी से निपटने के लिए उसकी 'पीड़ित सुरक्षा योजना' (Victim Protection Plan) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यह कदम उठाना जरूरी है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की खंडपीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के गृह विभागों को इस निर्देश को जल्द-से-जल्द लागू करने का...

बच्चों को सेफ-अनसेफ टच के बारे में सिखाया जाना चाहिए; शिक्षकों को ग्रूमिंग और दुर्व्यवहार की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि बच्चों को उनकी उम्र के हिसाब से सेक्स एजुकेशन और डिजिटल सुरक्षा पाठ्यक्रम के तहत उनके शरीर, 'सेफ' (सुरक्षित) और 'अनसेफ' (असुरक्षित) टच के बीच के अंतर, और 'सहमति' (Consent) के महत्व के बारे में शुरुआती स्तर से ही सिखाया जाना चाहिए।कोर्ट ने स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों को यह भी निर्देश दिया कि वे हर क्लासरूम, हॉस्टल, लाइब्रेरी और कंप्यूटर लैब में बाल सुरक्षा हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करें। साथ ही शिक्षकों और अन्य स्टाफ को 'ग्रूमिंग' (बच्चों को बहला-फुसलाकर गलत काम...

बड़ी खबर: इंटरनेट का इस्तेमाल करना बच्चों समेत हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार, इससे पूरी तरह वंचित करना बेतुका होगा: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि इंटरनेट तक पहुंच और उसके इस्तेमाल का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 19(1)(ए) के तहत प्रत्येक व्यक्ति का मौलिक अधिकार है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस अधिकार में बच्चे भी शामिल हैं और उनकी उम्र चाहे जो भी हो, उन्हें इससे पूरी तरह वंचित नहीं किया जा सकता।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि बच्चों को इंटरनेट इस्तेमाल करने के अधिकार से पूरी तरह वंचित करना उतना ही बेतुका होगा, जितना यह कहना कि एक निश्चित उम्र से...

राज्य मंदिर की ज़मीन का उपहार स्वीकार नहीं कर सकता; HR&CE Act के तहत सरकार मंदिर की संपत्तियों की केवल संरक्षक, मालिक नहीं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार मंदिर की संपत्तियों की संरक्षक और नियामक (रेगुलेटर) है, न कि उनकी मालिक। इसलिए वह किसी ट्रस्टी से ऐसी संपत्ति का उपहार स्वीकार नहीं कर सकती, भले ही यह हस्तांतरण किसी सार्वजनिक उद्देश्य के लिए ही क्यों न किया जा रहा हो।मद्रास हाईकोर्ट का फैसला पलटते हुए जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की खंडपीठ ने एक 'गिफ्ट डीड' (उपहार विलेख) को अमान्य घोषित किया। इस डीड के ज़रिए, तमिलनाडु के इरोड ज़िले में स्थित 'नागापालयम मरियम्मन-पोन्नाचियम्मन मंदिर' के अस्थायी...

हाईकोर्ट में सुनवाई की तारीख तय करते समय छुट्टियों की अवधि सामान्यतः नहीं गिनी जाएगी: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 अक्टूबर) को स्पष्ट किया कि यदि हाईकोर्ट किसी मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश देता है और इस अवधि की गणना के दौरान अदालत में छुट्टियां पड़ती हैं तो रजिस्ट्री को सामान्यतः छुट्टियों की अवधि को छोड़कर दो सप्ताह की गणना करनी चाहिए। हालांकि यह संबंधित हाईकोर्ट के लागू नियमों के अधीन होगा।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा कि यदि हाईकोर्ट की कोई बेंच किसी याचिका को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश देती है और इस अवधि के समाप्त होने...

बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री हटाने के लिए राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की जवाबदेही तय करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) का पता लगाने और उसे हटाने के लिए तकनीकी और नियामक व्यवस्था मजबूत करने का निर्देश दिया।जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार को ऐसी सामग्री की पहचान करने और उसे विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने में मदद के लिए एक व्यापक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने को कहा है। अदालत ने यह निर्देश ऐसे समय दिया, जब 2024 में जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस एवं अन्य बनाम एस. हरिश एवं अन्य मामले...

आर्बिट्रेशन क्लॉज़ होने से आपराधिक मामला दर्ज करने पर रोक नहीं लगती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में कहा कि किसी समझौते में 'आर्बिट्रेशन क्लॉज़' (मध्यस्थता खंड) होने का मतलब यह नहीं है कि आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती। कोर्ट ने यह भी कहा कि अदालतों को सबसे पहले यह देखना चाहिए कि क्या लगाए गए आरोपों में अपराध के ज़रूरी तत्व मौजूद हैं या नहीं।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने यह टिप्पणी तब की, जब वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रहे थे। गुवाहाटी हाईकोर्ट ने चाय कंपनी के CEO के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला रद्द करने से इनकार...

BREAKING | ग़ैर-हिंदू धर्म अपनाने वाले लोग केवल धर्म परिवर्तन से पहले की अपनी स्थिति के आधार पर पिछड़े वर्ग के कोटे का दावा नहीं कर सकते: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट का वह फैसला बरकरार रखा, जिसमें कहा गया कि इस्लाम अपनाने वाला कोई व्यक्ति धर्म परिवर्तन से पहले की अपनी स्थिति के आधार पर पिछड़े वर्ग के आरक्षण का हकदार नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की बेंच ने तमिलनाडु सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर चुनौती को खारिज कर दिया। कोर्ट ने आदेश दिया:"कोई व्यक्ति जो इस्लाम अपनाता है, केवल इस कार्य से वह राज्य में अधिसूचित सात पिछड़े सामाजिक समुदायों में से किसी एक का सदस्य नहीं बन जाता। उसकी...

सिर्फ इसलिए नीलामी रद्द नहीं की जा सकती कि नई बोलियां पिछली बोलियों से कम हैं: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश में रेत खनन से जुड़ी दो नीलामियों को रद्द किए जाने के फैसले को पलट दिया। कोर्ट ने कहा है कि सरकार केवल इस आधार पर सबसे ऊंची बोलियों को खारिज नहीं कर सकती कि वे पिछली नीलामी में लगाई गई बोलियों की रकम से कम हैं।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने फैसला सुनाया कि भले ही सरकार के पास बोलियों को खारिज करने का अधिकार है, लेकिन उसे इस अधिकार का इस्तेमाल निष्पक्ष तरीके से और ठोस आधारों पर करना चाहिए।यह मामला शहदोल और कटनी जिलों में रेत खनन क्षेत्रों की...

प्रोफेशनल कोर्स के बीच में स्टूडेंट्स की फीस नहीं बढ़ाई जा सकती, सिवाय कुछ खास परिस्थितियों के: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेल्फ-फाइनेंसिंग उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रोफेशनल कोर्स कर रहे स्टूडेंट्स की फीस, कोर्स के बीच में आमतौर पर नहीं बढ़ाई जा सकती। ऐसा केवल कुछ विशेष परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जैसे कि खर्चों में अचानक और अप्रत्याशित बढ़ोतरी होना।जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि स्टूडेंट्स और उनके परिवारों के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें कितनी फीस देनी होगी। अक्सर स्टूडेंट और उनके परिवार अपनी आय और बचत का एक बड़ा हिस्सा प्रोफेशनल...

Immoral Trafficking Prevention | बचाई गई महिलाओं के मामले में मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली जांच के लिए दिशानिर्देश तैयार करे NJA: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने 'इम्मोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट, 1956' (ITP Act) की धारा 17 के तहत मजिस्ट्रेट द्वारा की जाने वाली 'प्रारंभिक जांच' (Threshold Inquiry) में एकरूपता लाने के लिए व्यापक दिशानिर्देश बनाने को कहा। इस जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या बचाई गई वयस्क सेक्स वर्कर अपनी मर्जी से इस काम में शामिल थीं।कोर्ट ने नेशनल ज्यूडिशियल एकेडमी (NJA) से कहा कि वह मजिस्ट्रेटों के लिए ऐसी जांच करने हेतु एक विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार करे। इस मामले में याचिकाकर्ता NGO 'प्रज्वला' दिशानिर्देश तैयार...

भर्ती विज्ञापन में योग्यता की शर्त अस्पष्ट हो तो उम्मीदवार के पक्ष में होगा उसका अर्थ: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में निर्धारित पात्रता या योग्यता की शर्तों में अस्पष्टता होने पर उसका अर्थ ऐसे उम्मीदवार के पक्ष में लगाया जाना चाहिए, जो प्रथम दृष्टया आवश्यक योग्यता रखता हो।कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया, जिसमें भर्ती विज्ञापन में अनुभव संबंधी शर्तों की अस्पष्टता के बावजूद एक उम्मीदवार को लाइब्रेरियन के पद पर नियुक्ति के लिए अयोग्य ठहराया गया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की खंडपीठ ने...

प्रदर्शन पर पाबंदियों के बचाव में दिल्ली पुलिस ने गिनाए CJP के पुराने उल्लंघन, कहा- कानून-व्यवस्था बिगड़ने से रोकने के लिए जरूरी है कार्रवाई

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाई गई पाबंदियों का बचाव करते हुए कहा कि यह कदम राजधानी में कानून-व्यवस्था का गंभीर संकट रोकने के लिए जरूरी है।पुलिस ने प्रदर्शन आयोजक कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के पुराने प्रदर्शनों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पहले भी अनुमति की शर्तों का उल्लंघन किया गया था और संसद मार्च के लिए भीड़ जुटाई गई, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे। दिल्ली पुलिस ने यह हलफनामा सुप्रीम कोर्ट...

राज्य को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाए बिना उस पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य को औपचारिक रूप से पक्षकार बनाए बिना उस पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने कहा,"अगर सरकारी खजाने से कोई राहत मांगी जा रही है तो संविधान के अनुच्छेद 300 के तहत राज्य को एक कानूनी इकाई (Juristic Entity) के रूप में पक्षकार बनाए बिना केवल किसी अधिकारी या विभाग को शामिल करने से याचिका में बुनियादी कमी आ जाती है।" बेंच ने बॉम्बे हाईकोर्ट का वह फैसला रद्द किया, जिसमें राज्य सरकार को पक्षकार बनाए बिना ही, एक 'बिना...

S. 62 IBC | अपील दायर करने की समय-सीमा NCLAT के आदेश सुनाए जाने की तारीख से शुरू होती है, न कि सर्टिफाइड कॉपी मिलने की तारीख से: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (14 अक्टूबर) को कहा कि इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 की धारा 62 के तहत अपील दायर करने की समय-सीमा उस तारीख से शुरू होती है, जब नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) अपना आदेश सुनाता है, न कि उस तारीख से जब अपील करने वाले को सर्टिफाइड कॉपी मिलती है।जस्टिस एस.वी.एन. भट्टी और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा कि सर्टिफाइड कॉपी के लिए आवेदन करने और उसे प्राप्त करने में वादी द्वारा बिताए गए समय को लिमिटेशन एक्ट, 1963 की धारा 12(2) के तहत हटाया जा सकता है, लेकिन...

PMLA | ED का गिरफ्तारी का आदेश एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को भेजने में देरी से गिरफ्तारी अपने-आप गैर-कानूनी नहीं हो जाती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग के कथित अपराध में गिरफ्तारी के समय, अगर गिरफ्तारी करने वाला अधिकारी गिरफ्तारी का आदेश और उससे जुड़े कागजात एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी को तुरंत नहीं भेज पाता है तो भी देरी की वाजिब वजह होने पर गिरफ्तारी गैर-कानूनी नहीं मानी जाएगी।जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि जब मनमानी गिरफ्तारी से बचाने वाले मुख्य नियमों का पालन किया गया हो - जैसे कि अधिकृत अधिकारी के पास सबूत हों, विश्वास करने के कारण लिखित में दर्ज हों, गिरफ्तारी के आधार बताए...

सुप्रीम कोर्ट का रेलवे को निर्देश: ऑनलाइन टिकटों की तरह काउंटर से खरीदे गए टिकटों पर भी इंश्योरेंस कवर दें

एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रेलवे को आदेश दिया कि वह 27 अक्टूबर से दो हफ़्ते के अंदर रेलवे रिज़र्वेशन काउंटर से खरीदे गए टिकटों पर भी इंश्योरेंस कवर दे। कोर्ट ने कहा कि इंश्योरेंस कवर वैसा ही होना चाहिए जैसा ऑनलाइन टिकट खरीदने पर मिलता है।जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने आम लोगों की सुरक्षा और ट्रेन यात्रा के दौरान होने वाली अप्रिय घटनाओं को रोकने से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। इस मामले में उठाए गए मुद्दों में से एक इंश्योरेंस कवर का...

नशीली दवाओं का इस्तेमाल करने वाले पीड़ित हैं, उन्हें सज़ा देने के बजाय सप्लाई चेन तोड़ने पर ध्यान देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नशीली दवाओं की सप्लाई चेन के आखिरी चरण में मौजूद लोगों को सिर्फ़ अपराधी नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने चेतावनी दी कि उन पर मुकदमा चलाने और ट्रायल के दौरान जेल में रखने से बुरे नतीजे हो सकते हैं, क्योंकि वे ऐसे लोगों के संपर्क में आ सकते हैं जो उन्हें ड्रग्स के धंधे में और गहराई तक धकेल सकते हैं।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा,"ऐसे पीड़ितों पर मुकदमा चलाने से मामला और बिगड़ सकता है। ट्रायल के दौरान जेल में रहने से पीड़ित सप्लाई चेन का...