सुप्रीम कोर्ट
मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान कोर्ट की कार्यवाही की रिपोर्टिंग जारी रख सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अदालत की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप साझा करने और अपलोड करने पर लगाई गई अंतरिम रोक का मतलब यह नहीं है कि मान्यता प्राप्त समाचार संस्थान अदालत की कार्यवाही की रिपोर्टिंग नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि प्रतिबंध केवल अदालत की कार्यवाही के ऑडियो-वीडियो क्लिप के उपयोग तक सीमित है।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहन की खंडपीठ ने कहा कि 24 जुलाई के अंतरिम आदेश को समाचार संस्थानों की रिपोर्टिंग पर पूर्ण प्रतिबंध के रूप में नहीं पढ़ा जाना...
Solid Waste Management Rules 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को पर्यावरण मुआवज़े पर गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026' के तहत पर्यावरण मुआवज़ा तय करने के लिए गाइडलाइंस के तौर पर कई सिद्धांत तय किए। साथ ही कोर्ट ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) को ऐसा मुआवज़ा लगाने और वसूलने के लिए विस्तृत गाइडलाइंस बनाने का निर्देश दिया।जस्टिस पमिदिघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट से जुड़ी अपीलों पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश जारी किए। कोर्ट ने कहा कि 'सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2026' के नोटिफ़िकेशन...
सुप्रीम कोर्ट का केंद्र सरकार और IRDA से सवाल: क्या बिना इंश्योरेंस वाली गाड़ियों को पेट्रोल देने से मना किया जा सकता है?
सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (IRDA) और सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) को एक पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया। इस प्रोजेक्ट के तहत गाड़ियों को उनके इंश्योरेंस स्टेटस से जोड़ा जाएगा ताकि पेट्रोल पंप पर गाड़ियों के वैलिड थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की जांच की जा सके।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के महत्व से जुड़े कई अहम निर्देश जारी किए।इस मामले...
BREAKING| सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: कारों के लिए थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस को 4 साल और दो-पहिया वाहनों के लिए 6 साल तक बढ़ाया जाए
एक अहम घटनाक्रम में सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए थर्ड-पार्टी मोटर वाहन इंश्योरेंस की अवधि को चार साल और नए दो-पहिया वाहनों के लिए छह साल तक बढ़ाने का निर्देश दिया।सुप्रीम कोर्ट के 2018 के निर्देश के बाद यह कारों के लिए 3 साल और दो-पहिया वाहनों के लिए 5 साल है। मंगलवार को कोर्ट ने गौर किया कि आठ साल पहले जारी किए गए इस निर्देश के बावजूद, कई वाहन बिना इंश्योरेंस के हैं। इसलिए कोर्ट ने इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (IRDAI) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) की आपत्तियों के...
Bar Council Elections : सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट चीफ जस्टिस को पूर्व जजों या वकीलों में से 2 महिला सदस्यों को को-ऑप्ट करने की इजाज़त दी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को निर्देश दिया कि स्टेट बार काउंसिल में शामिल की जाने वाली दो महिला सदस्यों को हाईकोर्ट की पूर्व महिला जजों या बार में अच्छी प्रतिष्ठा वाली सीनियर महिला वकीलों में से चुना जाए। कोर्ट का मानना है कि इस तरीके से काउंसिल के कामकाज में "निष्पक्षता, स्वतंत्रता और पारदर्शिता" आएगी।कोर्ट ने संबंधित हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को इन दो सदस्यों को नॉमिनेट करने की इजाज़त दी।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच स्टेट बार काउंसिल...
सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट तोड़ने से धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता, शुरुआत से बेईमान मंशा जरूरी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि केवल किसी अनुबंध (Contract) का उल्लंघन होने से धोखाधड़ी (Cheating) का आपराधिक मामला नहीं बनता। इसके लिए यह साबित होना जरूरी है कि आरोपी की धोखाधड़ी या बेईमान मंशा लेन-देन की शुरुआत से ही थी। इसी आधार पर कोर्ट ने दो भू-स्वामियों के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और आपराधिक न्यासभंग (IPC की धारा 406 और 420) की कार्यवाही रद्द कर दी।जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने कहा कि मामला वर्ष 2012 के एक जॉइंट डेवलपमेंट एग्रीमेंट (Joint Development Agreement) से जुड़ा...
सुप्रीम कोर्ट का अधिकारियों को निर्देश: फुटपाथ की सही निशानदेही करें ताकि पैदल चलने वालों को बिना कब्ज़े वाली जगह मिले
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारों को निर्देश दिया कि वे यह पक्का करें कि फुटपाथ की सही निशानदेही (Demarcation) हो, ताकि पैदल चलने वालों को ऐसे फुटपाथ मिलें जिन पर कोई कब्ज़ा न हो।जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच सुरक्षित और सही तरीके से चिह्नित फुटपाथ तक पहुंचने के अधिकार से जुड़े एक स्वतः संज्ञान (Suo M oto) मामले की सुनवाई कर रही थी। 19 जून के अपने आदेश में, कोर्ट ने कहा था कि चिह्नित फुटपाथ पर चलने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है और कई निर्देश जारी किए।जब मामले पर सुनवाई हुई तो बेंच ने...
नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी का अपराध नहीं, बल्कि मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द किया, जिस पर अपनी गाड़ी की पिछली नंबर प्लेट छिपाने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को केवल यह शक होना कि नंबर प्लेट ट्रैफिक चालान से बचने के लिए छिपाई गई थी, धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा,"पुलिस का यह शक कि पिछली नंबर प्लेट चालान से बचने के लिए छिपाई गई, या यह कि अपराध होने पर अपराधी का पता लगाना मुश्किल होगा, ज़्यादा से ज़्यादा एक अनुमान ही है......
ट्रांसजेंडर संशोधन 2026 पहले से मिले अधिकारों को खत्म नहीं कर सकता: सुप्रीम कोर्ट, केंद्र से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र सरकार से कहा कि वह 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम' में 2026 के संशोधन के असर पर विचार करे। यह उन लोगों के लिए है, जो सेक्स रीअसाइनमेंट थेरेपी (जेंडर बदलने की प्रक्रिया) के बीच में हैं या जिन्हें पहले ही ट्रांसजेंडर कार्ड मिल चुके हैं।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मौखिक रूप से कहा कि ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को पहले से मिले अधिकारों में कोई बदलाव नहीं किया जाना चाहिए। हालांकि,...
BREAKING| IPC की धारा 498A 'शादी जैसे रिश्तों' पर भी होगी लागू: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि 'शादी जैसे रिश्तों' (Live in Relationship) में रहने वाली महिलाओं को IPC की धारा 498A के तहत सुरक्षा से बाहर रखना भेदभावपूर्ण होगा। कोर्ट ने माना कि ऐसे रिश्ते में रहने वाले पुरुष पर भारतीय दंड संहिता (IPC), 1860 की धारा 498A के तहत घरेलू क्रूरता का मुकदमा चलाया जा सकता है।हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि यह फ़ैसला उन "लिव-इन रिश्तों" पर लागू होगा जो "शादी जैसे रिश्तों" की श्रेणी में आते हैं, यानी जहाँ शादी करने का इरादा साफ़ हो।कोर्ट ने कहा कि क्रूरता से...
सुप्रीम कोर्ट में केस सीक्वेंसिंग पर उठे सवाल, CJI सूर्यकांत बोले- सुझावों के लिए समिति गठित
चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को बताया कि सुप्रीम कोर्ट की फुल कोर्ट ने मामलों की सुनवाई के क्रम (Sequencing of Cases) को लेकर उठी चिंताओं पर विचार करने के लिए एक समिति गठित करने का निर्णय लिया है।यह मुद्दा सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया ने अदालत के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि रोजाना सुबह अंतिम समय पर मामलों की सुनवाई का क्रम बदल दिए जाने से वकीलों को भारी असुविधा होती है और बार के सदस्यों में इस संबंध में व्यापक सहमति है कि मौजूदा व्यवस्था अनिश्चितता पैदा कर रही है।भाटिया ने कहा कि कई बार सुबह...
Court Fees Act | ज़मीन अधिग्रहण मुआवज़े में कानूनी फ़ायदों के ख़िलाफ़ अपील पर मूल्य-आधारित कोर्ट फ़ीस लगेगी: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ज़मीन अधिग्रहण अधिनियम, 1894 के तहत ऐसी अपील, जो मुआवज़े के तय होने या उसे बढ़ाने को चुनौती दिए बिना सिर्फ़ कानूनी फ़ायदों (Statutory Benefits) को पाने तक सीमित हो, उस पर कोर्ट फ़ीस अधिनियम, 1870 की धारा 8 के तहत डिक्री की गई राशि पर 'एड वैलोरम' (मूल्य-आधारित) कोर्ट फ़ीस लगेगी।जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा,"धारा 54 के तहत ऐसी किसी भी चीज़ (कानूनी फ़ायदों) को कम करने या हटाने की अपील, मुआवज़े से जुड़े रेफरेंस कोर्ट के फ़ैसले (डिक्री) के ख़िलाफ़ अपील...
सिर्फ 'संदेह' के आधार पर बैंक अकाउंट फ्रीज नहीं कर सकती ED, 'Reasons to Believe' अनिवार्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया था कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2000 की धारा 17(1A) के तहत केवल 'संदेह' (Suspicion) के आधार पर बैंक खाते फ्रीज नहीं किए जा सकते। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी के पास 'Reasons to Believe' (विश्वास के कारण) होना अनिवार्य है।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की खंडपीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट की व्याख्या से सहमति जताते हुए कहा कि भले ही धारा...
S. 125 CrPC | पति शुरुआती में ही पत्नी का एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर साबित कर दे तो पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को कहा कि CrPC की धारा 125 के तहत पत्नी को अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने से इनकार किया जा सकता है, अगर पति शुरुआती स्तर पर ही पत्नी के एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर (व्यभिचार) को साबित कर देता है।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा,"...हमारा मानना है कि अगर पति धारा 125(4) के तहत अर्ज़ी दाखिल करता है और पहली ही बार में सबूतों के ज़रिए आरोप को साबित कर देता है, तभी अंतरिम गुज़ारा-भत्ता देने पर रोक लगाई जा सकती है।" बेंच ने एक पति की अपील को...
CrPC की धारा 299 के तहत आदेश के बिना दर्ज गवाह की गवाही का इस्तेमाल बाद में फरार आरोपी के खिलाफ नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जुलाई) को कहा कि आरोपी के खिलाफ मुकदमे में दर्ज सबूतों का इस्तेमाल बाद में किसी फरार आरोपी के खिलाफ तब तक नहीं किया जा सकता, जब तक कि CrPC की धारा 299 / BNSS की धारा 335 के तहत कोई आदेश पारित न किया गया हो। इस आदेश में दो अधिकार-क्षेत्र संबंधी तथ्यों को स्थापित करना ज़रूरी है: पहला, आरोपी फरार था और दूसरा, उसे तुरंत गिरफ्तार करने की कोई संभावना नहीं थी।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की बेंच ने अपीलकर्ता की हत्या की सजा रद्द की। अपीलकर्ता 1999 में...
रूस-यूक्रेन युद्ध में मारे गए भारतीय: सुप्रीम कोर्ट ने विदेश मंत्रालय को परिवारों की मदद करने, शव वापस लाने और मुआवज़ा दिलाने का निर्देश दिया
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह उन भारतीय नागरिकों के शवों की DNA प्रोफ़ाइलिंग करे जो रूसी सेना की तरफ़ से यूक्रेन युद्ध में लड़ते हुए मारे गए, ताकि उन्हें वापस लाकर संबंधित परिवारों को सौंपा जा सके।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच 26 भारतीयों के परिवारों द्वारा दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इन लोगों को कथित तौर पर रूस-यूक्रेन युद्ध में लड़ने के लिए मजबूर किया गया, जबकि वे नौकरी की तलाश में रूस गए।आरोपों के...
सड़कों पर आवारा पशु 'प्राकृतिक स्पीड ब्रेकर' नहीं, हादसों के पीड़ितों को मुआवजा दें राज्य: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में सड़कों और राजमार्गों पर घूम रहे आवारा मवेशियों से होने वाले हादसों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि राज्य सरकारों को ऐसे मामलों में पीड़ितों को मुआवजा देने की व्यवस्था करनी चाहिए।अदालत ने केंद्र और राज्यों से मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा आवारा पशुओं की समस्या के स्थायी समाधान के लिए व्यापक तंत्र विकसित करने का भी आग्रह किया।जस्टिस संजय करोल और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने कहा,"आवारा मवेशी राष्ट्रीय राजमार्गों, सड़कों और गलियों में मनमाने ढंग से...
विवाहित बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से बाहर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति की नीति में केवल तलाकशुदा या परित्यक्ता बेटियों को पात्र मानकर अन्य विवाहित बेटियों को बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन है।अदालत ने स्पष्ट किया कि बेटी और बेटे के बीच इस प्रकार का भेदभाव असंवैधानिक है। जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ ने बिहार सरकार की 10 दिसंबर 2014 की नीति की संबंधित शर्त को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द किया।अदालत ने उस महिला की अपील स्वीकार कर ली, जिसकी अनुकंपा...
जेलों की निगरानी के लिए हर जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' गठित करें: सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे मॉडल प्रिजन मैनुअल, 2016 के अनुसार प्रत्येक जिले में 'बोर्ड ऑफ विजिटर्स' (BoV) का गठन करें, जिसकी अध्यक्षता संबंधित जिले के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (Principal District Judge) करेंगे।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ जेलों में जाति, लिंग, दिव्यांगता आदि के आधार पर भेदभाव से जुड़े स्वतः संज्ञान (सुओ मोटू) मामले की सुनवाई कर रही थी, जो सुकन्या शांता फैसले के अनुपालन से संबंधित...
TASMAC भ्रष्टाचार मामला: सुप्रीम कोर्ट ने वी. सेंथिल बालाजी की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और विधायक वी. सेंथिल बालाजी को राहत देते हुए TASMAC भ्रष्टाचार मामले में उनकी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने उन्हें जांच में सहयोग करने, पासपोर्ट जमा करने और गवाहों को प्रभावित या साक्ष्यों से छेड़छाड़ नहीं करने का निर्देश दिया।चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की खंडपीठ बालाजी की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने मद्रास हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी है।बालाजी की ओर...




















