सुप्रीम कोर्ट
कॉर्पोरेट देनदार के खिलाफ बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' का दावा किया जा सकता है, भले ही समाधान योजना भविष्य के निपटारों पर रोक लगाती हो: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि हालांकि इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड, 2016 के तहत स्वीकृत समाधान योजना में शामिल न किए गए दावे समाप्त हो जाते हैं, फिर भी मध्यस्थता की कार्यवाही में बचाव के तौर पर 'सेट-ऑफ' (दावों की आपसी भरपाई) का सीमित दावा किया जा सकता है, बशर्ते इससे कोई सकारात्मक वसूली न हो।जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की खंडपीठ ने वेस्ट बंगाल पावर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के खिलाफ उजास एनर्जी लिमिटेड द्वारा दायर अपील आंशिक रूप से स्वीकार की। इसके साथ ही खंडपीठ ने...
कर्ज़ चुकाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करना आत्महत्या के लिए उकसाना नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्ज़दार को अपना पैसा वापस करने के लिए फ़ोन करना, किसी कर्ज़ देने वाले पर आत्महत्या के लिए उकसाने का केस चलाने का आधार नहीं हो सकता।जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने एक कर्ज़ देने वाले के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए उकसाने (IPC की धारा 306) का मामला रद्द करते हुए कहा,"अगर कोई कर्ज़ देने वाला अपना पैसा वापस पाने के लिए कर्ज़दार को फ़ोन करता है तो यह एक क़ानूनी काम है। इसलिए सिर्फ़ इस आधार पर कर्ज़ देने वाले पर केस नहीं चलाया जा सकता।"इस मामले में कर्ज़ देने वाले...
फिल्म फ्लॉप हो सकती है; निवेश पर लाभ न मिलने से धोखाधड़ी नहीं बनती: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि केवल इसलिए कि किसी फिल्म में किया गया निवेश लाभ नहीं दे पाया, उसके आधार पर धोखाधड़ी (Section 420 IPC) का आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि फिल्म निर्माण स्वभावतः एक जोखिमपूर्ण व्यावसायिक गतिविधि है, जिसमें लाभ की कोई निश्चितता नहीं होती।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति फिल्म में निवेश कर लाभ में हिस्सेदारी के आधार पर पैसा लगाता है, तो वह शून्य रिटर्न का जोखिम भी स्वीकार करता है। केवल लाभ न मिलना...
सुप्रीम कोर्ट ने 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई बोर्ड केस' में 'उद्योग' की परिभाषा सही होने पर फ़ैसला सुरक्षित रखा
सुप्रीम कोर्ट ने 'बेंगलुरु वॉटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड बनाम ए. राजप्पा' (1978) मामले में तत्कालीन जस्टिस वी.के. कृष्णा अय्यर द्वारा दी गई "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा पर पुनर्विचार करने के मामले में अपना फ़ैसला सुरक्षित रख लिया।चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा, जस्टिस दीपांकर दत्ता, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस जॉयमाल्य बागची, जस्टिस आलोक अराधे और जस्टिस विपुल एम. पंचोली को मिलाकर बनी एक बेंच ने इस...
पोस्ट-डेटेड चेक का डिसऑनर होना ही धोखाधड़ी के लिए बेईमान इरादे का अनुमान लगाने के लिए काफी नहीं: सुप्रीम कोर्ट
भारतीय दंड संहिता (IPC) के तहत धोखाधड़ी के दायरे को स्पष्ट करते हुए महत्वपूर्ण फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पोस्ट-डेटेड चेक का डिसऑनर होना, अपने आप में चेक जारी करने वाले (Drawer) के बेईमान इरादे का अनुमान लगाने के लिए काफी नहीं है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि धोखाधड़ी के लिए आपराधिक दायित्व के लिए, लेन-देन की शुरुआत में ही कपटपूर्ण इरादे का सबूत होना जरूरी है। इसका अनुमान केवल बाद में वादा पूरा न कर पाने से नहीं लगाया जा सकता।जस्टिस पामिडीघंतम श्री नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच...
सेवा के दौरान शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट के बाद भी जारी रह सकती है, अगर नियम इसकी इजाज़त दें: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि अगर सेवा नियम/कानून इसकी इजाज़त देते हैं तो किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट से पहले शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने के बाद भी जारी रखी जा सकती है, और वेतन में कटौती जैसे दंड, पेंशन लाभों की फिर से गणना करके लागू किए जा सकते हैं।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने कहा,"...यह बात तय है कि अगर मौजूदा सेवा नियम/कानून किसी अधिकारी/कर्मचारी के रिटायरमेंट की उम्र पूरी होने से पहले उसके खिलाफ शुरू की...
Consumer Protection Act | बैंक में जमा रखना 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं, सिर्फ इसलिए कि उस पर ब्याज मिलता है: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (19 मार्च) को कहा कि बैंक में जमा राशि पर सिर्फ ब्याज मिलने से ही कोई लेन-देन अपने-आप "व्यावसायिक" नहीं हो जाता, जिससे किसी व्यक्ति को "उपभोक्ता" की परिभाषा से बाहर रखा जा सके; बल्कि, यह जांचना ज़रूरी है कि क्या जमा राशि का किसी लाभ कमाने वाली गतिविधि से कोई करीबी और सीधा संबंध है।जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस मनोज मिश्रा की बेंच ने साफ किया कि बैंक में अतिरिक्त पैसे जमा करना, सिर्फ इसलिए 'व्यावसायिक उद्देश्य' नहीं माना जाएगा, क्योंकि उस पर ब्याज मिलता है। बल्कि, जब...
FIR रद्द करने की याचिका को मेरिट पर सुनना जरूरी, पुलिस को निर्देश देकर निपटाना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एफआईआर रद्द करने (quashing) की याचिकाओं को हाईकोर्ट द्वारा मेरिट पर तय किया जाना अनिवार्य है और केवल पुलिस को अर्नेश कुमार बनाम बिहार राज्य (2014) के दिशा-निर्देशों का पालन करने का निर्देश देकर याचिका का निस्तारण करना न्यायसंगत नहीं है।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की खंडपीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बिना मामले के तथ्यों और कानून का परीक्षण किए, केवल पुलिस को गिरफ्तारी संबंधी दिशानिर्देशों का पालन करने को कहकर...
बिना प्रभावी सुनवाई का अवसर दिए विदेशी तलाक डिक्री मान्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी विदेशी अदालत द्वारा दिया गया तलाक का डिक्री तब तक भारत में मान्य नहीं होगा, जब तक कि दूसरे पक्ष को उस कार्यवाही में प्रभावी और सार्थक रूप से भाग लेने का अवसर न दिया गया हो।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें अमेरिकी अदालत द्वारा दिए गए तलाक के आदेश को मान्यता दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि पति को अमेरिकी कार्यवाही में ना तो प्रभावी सुनवाई का अवसर मिला और ना ही उसने उसमें सार्थक भागीदारी...
अपीलीय अदालत को MACT मुआवज़े में हल्के में दखल नहीं देना चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को फैसला सुनाया कि अपीलीय अदालतें मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (MACT) द्वारा तय की गई विकलांगता और मुआवज़े के आकलन में तब तक दखल नहीं दे सकतीं, जब तक कि वे सबूतों का पूरी तरह से फिर से मूल्यांकन न करें और स्पष्ट तथा ठोस कारण न बताएं।जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने टिप्पणी की,"...जब कोई अपीलीय अदालत मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण द्वारा विधिवत दर्ज किए गए तथ्यों के निष्कर्षों में दखल देती है, खासकर विकलांगता के आकलन और कमाई की क्षमता में...
ID Act के तहत 'उद्योग' की परिभाषा से दान और पेशे को बाहर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट में इंदिरा जयसिंह की दलील
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (18 मार्च) को बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड बनाम ए राजप्पा (1978) में तत्कालीन जस्टिस वी. के. कृष्णा अय्यर द्वारा दी गई "उद्योग" की विस्तृत परिभाषा के संबंध में एक संदर्भ पर सुनवाई जारी रखी।सीनियर वकील इंदिरा जयसिंह (1978 के फैसले का समर्थन करते हुए) ने प्रस्तुत किया कि अब निरस्त औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 रोजगार की सुरक्षा के लिए एक लाभकारी कानून था। उन्होंने कहा कि यह एक पूर्व-संवैधानिक कानून था जिसे इंग्लैंड में हो रहे औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि में तैयार...
2 उम्मीदवारों वाला चुनाव रद्द हो जाए तो नए चुनाव की ज़रूरत नहीं, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को विजेता घोषित किया जाए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां किसी चुनाव में सिर्फ़ दो उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया हो, वहां जीतने वाले उम्मीदवार का चुनाव रद्द होने पर नए चुनाव की ज़रूरत नहीं होती; इसके बजाय, दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार को ही विजेता घोषित किया जाना चाहिए।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने ओडिशा हाईकोर्ट का फ़ैसला रद्द किया, जिसमें जीतने वाले उम्मीदवार का पंचायत समिति अध्यक्ष के तौर पर चुनाव रद्द होने के बाद नए चुनाव का आदेश दिया गया था।यह विवाद ओडिशा की डेलंग पंचायत समिति के अध्यक्ष पद के लिए 2022...
'शादी के ऐसे टूटने' (Irretrievable Breakdown) के आधार पर विदेशी तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अमेरिका (USA) की किसी अदालत द्वारा शादी के ऐसे टूटने (जिसे ठीक न किया जा सके) के आधार पर दिया गया तलाक़ का फ़ैसला भारत में लागू नहीं होगा।ऐसा इसलिए है, क्योंकि भारतीय क़ानून के तहत शादी के ऐसे टूटने को तलाक़ का आधार नहीं माना जाता है। इस मामले में दोनों पक्षकारों की शादी हिंदू विवाह अधिनियम (HMA) के तहत हुई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा,"...अमेरिकी अदालत ने शादी के ऐसे टूटने के आधार पर तलाक़ का फ़ैसला दिया था। यह आधार HMA के तहत मान्य नहीं है, जो...
BNSS की धारा 173(3) अस्पष्ट और संदिग्ध आरोपों पर FIR के मशीनी रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सुरक्षा कवच: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (BNSS) की धारा 173(3) का उद्देश्य अस्पष्ट, अनुमानित या संदिग्ध आरोपों के आधार पर FIR के मशीनी रजिस्ट्रेशन को रोकना है, भले ही ऐसे आरोपों को संज्ञेय अपराधों के रूप में ही क्यों न पेश किया गया हो।दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) व्यवस्था से हुए विधायी बदलाव को रेखांकित करते हुए कोर्ट ने समझाया कि BNSS की धारा 173(3) अपराधों की कुछ श्रेणियों में FIR के रजिस्ट्रेशन से पहले एक अतिरिक्त प्रक्रियात्मक फिल्टर (छानबीन की प्रक्रिया) लागू करती है।यह...
जालसाजी के मामले में FIR रद्द करना, जब हैंडराइटिंग एक्सपर्ट की राय बाकी हो, गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का फैसला रद्द किया। इस फैसले में हाईकोर्ट ने एक FIR रद्द की थी, जिसमें जालसाजी, धोखाधड़ी और संपत्ति के गलत इस्तेमाल की बड़ी साज़िश का आरोप लगाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाई कोर्ट ने जल्दबाजी में काम किया, जबकि जांच - जिसमें विवादित दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच भी शामिल थी - अभी भी चल रही थी।शिकायतकर्ता शरला बाज़लील और हिमाचल प्रदेश राज्य द्वारा दायर अपीलों को स्वीकार करते हुए जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने FIR को बहाल किया और जांच...
हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट से पहले FIR रद्द करना गलत: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसले में कहा कि जालसाजी (फर्जीवाड़ा) से जुड़े मामलों में जब हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट लंबित हो तब FIR रद्द करना जल्दबाजी और अनुचित कदम है।अदालत ने हिमाचल प्रदेश हाइकोर्ट का फैसला रद्द किया, जिसमें जांच पूरी होने से पहले ही FIR खारिज कर दी गई।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने शिकायतकर्ता और राज्य सरकार की अपील स्वीकार करते हुए FIR बहाल की और जांच एजेंसी को जल्द-से-जल्द जांच पूरी करने का निर्देश दिया।अदालत ने कहा,“जब FIR में जालसाजी के आरोप हों और...
डाइंग डिक्लेरेशन पर सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: डॉक्टर की राय पुलिस से अधिक विश्वसनीय
सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु पूर्व दिए गए बयान (डाइंग डिक्लेरेशन) की विश्वसनीयता तय करते समय डॉक्टर की राय को प्राथमिकता दी जाएगी, न कि पुलिस अधिकारी के आकलन को।अदालत ने इसी आधार पर एक पति की हत्या के मामले में सजा को बरकरार रखा।जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस एस. वी. एन. भट्टी की खंडपीठ ने कर्नाटक हाइकोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी पति की अपील खारिज कर दी।आरोपी को अपनी पत्नी की हत्या (धारा 302) और क्रूरता (धारा 498ए) के अपराध में दोषी ठहराया गया।मामले...
गोद लेना भी प्रजनन अधिकार का हिस्सा: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मातृत्व केवल जैविक नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा कि गोद लेना (अडॉप्शन) भी व्यक्ति के प्रजनन और निर्णय लेने की स्वतंत्रता का हिस्सा है, जो अनुच्छेद 21 के तहत संरक्षित है।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने स्पष्ट किया कि परिवार बनाने का अधिकार केवल जैविक तरीके तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी अधिकार का समान और वैध रूप है।अदालत ने कहा,“प्रजनन स्वतंत्रता केवल बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है। गोद लेना भी परिवार बनाने और माता-पिता बनने के अधिकार का समान रूप से महत्वपूर्ण...
दिव्यांगों के लिए ऊपरी सीमा तय नहीं कर सकता राज्य: सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला, 90% दिव्यांग वकील की नियुक्ति का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने दिव्यांगजनों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण फैसला देते हुए कहा कि दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 केवल न्यूनतम पात्रता (फ्लोर) तय करता है लेकिन राज्य को यह अधिकार नहीं देता कि वह अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को बाहर करने के लिए कोई ऊपरी सीमा (सीलिंग) तय करे।जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने हिमाचल प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि 90% दिव्यांग वकील को सहायक जिला अटॉर्नी (ADA) के पद पर नियुक्त किया जाए।मामला उस भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा था, जिसमें दिव्यांग...
'बैंक ग्राहक के निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य है': सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड पार्टी को गलत तरीके से पैसे भेजने के लिए बैंक को ज़िम्मेदार ठहराया
इस बात पर ज़ोर देते हुए कि बैंकों को ग्राहक के निर्देशों का सख्ती से पालन करना चाहिए, सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसला सुनाया कि कोई भी बैंक अपने ग्राहक द्वारा दिए गए आदेश के विपरीत एकतरफ़ा रूप से पैसे कहीं और नहीं भेज सकता। कोर्ट ने केनरा बैंक की उस ज़िम्मेदारी को भी सही ठहराया, जिसके तहत उसने गलती से किसी तीसरे पक्ष को 100,000 अमेरिकी डॉलर भेज दिए।जस्टिस जे.बी. पारदीवाला और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने बैंक की अपील खारिज की। बेंच ने मद्रास हाईकोर्ट का फ़ैसला बरकरार रखा, जिसमें बैंक को इस गलत ट्रांसफर...



















