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कैडर समाप्ति के आधार पर पात्र कर्मचारी को वर्क-चार्ज लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी के पक्ष में वर्क-चार्ज (Work-Charged) दर्जा पाने का अधिकार पहले ही उत्पन्न हो चुका है तो बाद में वर्क-चार्ज कैडर/स्थापना को समाप्त किए जाने के आधार पर राज्य सरकार उसे उक्त लाभ से वंचित नहीं कर सकती।जस्टिस रंजन शर्मा ने अपने फैसले में कहा,“जब याचिकाकर्ता ने 01.01.2003 से आठ वर्ष की निरंतर सेवा पूर्ण कर वर्क-चार्ज दर्जा पाने का अधिकार अर्जित कर लिया था, तब अगस्त 2005 में वर्क-चार्ज स्थापना को समाप्त किए जाने को ऐसा आधार नहीं बनाया जा सकता,...
दुर्भाग्यपूर्ण: दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में अंधाधुंध स्थगन की संस्कृति पर जताई चिंता, भविष्य में बदलाव की जताई उम्मीद
दिल्ली हाईकोर्ट ने अदालतों में बार-बार और बिना ठोस कारण के स्थगन मांगे जाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया।न्यायालय ने कहा कि समय के साथ एक ऐसी संस्कृति विकसित हो गई है, जिसमें यह गलत अपेक्षा बन गई कि किसी भी मामले में केवल मांग करने पर ही स्थगन मिल जाएगा।जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उन्हें आशा है कि भविष्य में अदालतों में स्थगन मांगने की यह प्रवृत्ति बदलेगी।उन्होंने कहा कि स्थगन इस तरह मांगे जा रहे हैं, जैसे यह एक स्वाभाविक...
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शराब घोटाला मामले में चैतन्य बघेल को दी जमानत
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बहुचर्चित शराब घोटाले से जुड़े दो मामलों में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के पुत्र चैतन्य बघेल को जमानत दी।ये मामले वर्ष 2019 से 2023 के बीच कथित रूप से संचालित एक शराब सिंडिकेट घोटाले से संबंधित हैं, जिसमें राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान का आरोप है।मामले की शुरुआत 17 जनवरी 2024 को एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) और आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज FIR से हुई थी। इसमें अवैध शराब बिक्री, होलोग्राम की जालसाजी और कमीशनखोरी के जरिए...
अंतरिम राहत से इनकार के बाद अनिल अंबानी ने मीडिया के खिलाफ मानहानि का मुकदमा वापस लिया
रिलायंस समूह के चेयरमैन और उद्योगपति अनिल अंबानी ने कथित मानहानिकारक रिपोर्टिंग को लेकर मीडिया संस्थानों के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में दायर अपना दीवानी वाद वापस ले लिया।यह मुकदमा उन रिपोर्टों के संबंध में दायर किया गया था, जिनमें उनकी कंपनियों पर 41,000 करोड़ रुपये से अधिक के कथित घोटाले के आरोप लगाए गए थे।कड़कड़डूमा अदालत के सीनियर सिविल जज विवेक बेनीवाल ने अनिल अंबानी की ओर से दायर वाद को वापस लेने की अनुमति दी साथ ही उन्हें उसी कारण पर नया मुकदमा दायर करने की स्वतंत्रता भी प्रदान की।अदालत...
हाईकोर्ट वीकली राउंड अप : पिछले सप्ताह के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
देश के विभिन्न हाईकोर्ट में पिछले सप्ताह (29 दिसंबर, 2025 से 02 जनवरी, 2026) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं हाईकोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह हाईकोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।पहला प्रमोशन छोड़ देने वाला कर्मचारी एक साल के अंदर उस पर दोबारा विचार करने का दावा नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जूनियर असिस्टेंट इंदु शर्मा की रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने भाषा और संस्कृति विभाग में अपने जूनियर्स को सीनियर असिस्टेंट के पद पर...
सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप : सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र
सुप्रीम कोर्ट में पिछले सप्ताह (29 दिसंबर, 2025 से 02 जनवरी, 2026 तक) तक क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट वीकली राउंड अप। पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।किरायेदार मकान मालिक को यह नहीं बता सकता कि उसे बिज़नेस शुरू करने के लिए दूसरी प्रॉपर्टी चुननी चाहिए: सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कोई किरायेदार मकान मालिक को यह नहीं बता सकता कि कौन-सी जगह मकान मालिक की सही ज़रूरत के लिए सही मानी जानी चाहिए, और न ही किरायेदार इस बात पर ज़ोर दे सकता है कि...
2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 3 [51-75]
हर साल की इस तरह इस साल भी लाइव लॉ आपने अंत की ओर बढ़ते वर्ष, 2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण निर्णयों की सूची लेकर आया है। आइये जानते हैं, सुप्रीम कोर्ट ने इस बीते वर्ष में किन अहम मुद्दों पर परिवर्तनकारी, रोचक और समाज-सुधार के क्षेत्र में अहम फ़ैसले दिए। प्रस्तुत है इन 100 फैसलों की दूसरी सूची- पार्ट-351.498A की FIR में दो महीने तक नहीं होगी गिरफ्तारी, मामले परिवार कल्याण समितियों को सौंपे जाएं: सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के दिशानिर्देशों को बरकरार रखासुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक...
सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप : दिसंबर, 2025
सुप्रीम कोर्ट में दिसंबर, 2025 में क्या कुछ हुआ, जानने के लिए देखते हैं सुप्रीम कोर्ट मंथली राउंड अप। दिसंबर महीने के सुप्रीम कोर्ट के कुछ खास ऑर्डर/जजमेंट पर एक नज़र।बयान को 'डाइंग डिक्लेरेशन' मानने के लिए मृत्यु का आसन्न होना आवश्यक नहीं : सुप्रीम कोर्टसुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार (4 दिसंबर) को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि सिर्फ इस आधार पर कि बयान दर्ज करते समय मृत्यु आसन्न नहीं थी, किसी कथन को dying declaration (मरणोपरांत कथन) मानने से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने मृतक महिला के ससुराल...
पहला प्रमोशन छोड़ देने वाला कर्मचारी एक साल के अंदर उस पर दोबारा विचार करने का दावा नहीं कर सकता: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने रिटायर्ड जूनियर असिस्टेंट इंदु शर्मा की रिट याचिका खारिज की, जिसमें उन्होंने भाषा और संस्कृति विभाग में अपने जूनियर्स को सीनियर असिस्टेंट के पद पर प्लेसमेंट और प्रमोशन को चुनौती दी थी।जस्टिस रंजन शर्मा ने टिप्पणी की:“अगर किसी कर्मचारी को ऊंचे पद पर प्रमोट किया जाता है और वह कर्मचारी अपना प्रमोशन लेने से मना कर देता है या छोड़ देता है तो उस कर्मचारी पर पहले प्रमोशन से मना करने की तारीख से एक साल की अवधि तक या जब तक अगली वैकेंसी नहीं आती, जो भी बाद में हो, तब तक दोबारा...
एक ही तथ्यों पर 'आपराधिक न्यास भंग' और 'धोखाधड़ी' साथ-साथ लागू नहीं हो सकते: ओडिशा हाईकोर्ट
ओडिशा हाईकोर्ट ने दोहराया है कि एक ही तथ्यों के आधार पर एक ही मामले में 'आपराधिक न्यास भंग' (Criminal Breach of Trust) और 'धोखाधड़ी' (Cheating) दोनों अपराधों को एक साथ लागू नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के अपराध में झूठे या भ्रामक प्रतिनिधित्व के समय से ही आपराधिक मंशा मौजूद होना आवश्यक है, जबकि आपराधिक न्यास भंग के मामले में प्रारंभिक मंशा आपराधिक नहीं होती — वहाँ पहले वैध रूप से संपत्ति सौंपी जाती है और बाद में उसका दुरुपयोग किया जाता है।जस्टिस राधा कृष्ण पटनायक की पीठ ने JMFC...
मद्रास हाईकोर्ट ने DGCA से पूछा — क्या इंडिगो को थकान प्रबंधन मानकों से मिली छूट बढ़ाई जाएगी?
मद्रास हाईकोर्ट ने नागरिक उड्डयन महानिदेशक (DGCA) से यह स्पष्ट करने के लिए कहा है कि क्या इंडिगो एयरलाइंस का संचालन करने वाली इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड को थकान संबंधी (Fatigue) मानकों के पालन से दी गई छूट को आगे भी बढ़ाया जाएगा। न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायण ने चेन्नई निवासी द्वारा दायर एक याचिका पर DGCA से जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें इस छूट को अवैध, निरस्त करने योग्य और नागरिक उड्डयन आवश्यकताओं (CAR) के अनुरूप नहीं बताया गया है।अदालत ने आदेश में कहा,“श्री ए.आर.एल. सुंदरसन ने यह...
स्टाम्प शुल्क निर्धारण के लिए यूपी जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम लागू नहीं: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भारतीय स्टाम्प अधिनियम, 1899 के तहत भूमि के बाजार मूल्य का निर्धारण करने के लिए उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1950 (UPZALR Act) को आधार नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने कहा कि दोनों कानूनों के उद्देश्य अलग-अलग हैं। जमींदारी उन्मूलन अधिनियम स्टांप शुल्क निर्धारण को नियंत्रित नहीं करता।जस्टिस सैयद क़मर हसन रिज़वी ने यह अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि UPZALR Act के तहत धारा 143 की अधिसूचना अधिकतम एक सहायक कारक हो सकती है, लेकिन इसके आधार पर ही...
लापरवाही नेकनीयती नहीं: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कम कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने की याचिका खारिज की
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सतीश कुमार की याचिका खारिज की और ट्रायल कोर्ट के उस आदेश में दखल देने से इनकार किया, जिसमें स्पेसिफिक परफॉर्मेंस के डिक्री में कम कोर्ट फीस जमा करने के लिए समय बढ़ाने से मना कर दिया गया।कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता नेकनीयती के कारण या लापरवाही न होने की बात साबित करने में नाकाम रहा। इसलिए वह भारत के संविधान के अनुच्छेद 227 के तहत विवेकाधीन राहत का हकदार नहीं है।जस्टिस अजय मोहन गोयल ने टिप्पणी की,“आवेदन के साथ कोई भी दस्तावेज़ नहीं लगाया गया या यह दिखाने के लिए कोई...
सर्विस रिकॉर्ड के बिना खराब प्रतिष्ठा के आधार पर लगाए गए आरोपों से समय से पहले रिटायरमेंट का आदेश कायम नहीं रह सकता: जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी को सिर्फ़ उसकी खराब प्रतिष्ठा के बारे में अस्पष्ट और बिना सबूत के आरोपों के आधार पर समय से पहले रिटायर नहीं किया जा सकता, खासकर जब ऐसे ऑब्ज़र्वेशन सर्विस रिकॉर्ड के किसी ठोस सबूत से समर्थित न हों।जस्टिस संजीव कुमार और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने समय से पहले रिटायरमेंट का आदेश रद्द करने वाले रिट कोर्ट का फैसला बरकरार रखा।कोर्ट ने अपने सामने रखे गए रिकॉर्ड की जांच की और पाया कि स्क्रीनिंग कमेटी और सक्षम अथॉरिटी ने कर्मचारी के FIR में...
प्रतीक्षा सूची में नाम होने से नियुक्ति का अटल अधिकार नहीं बनता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि प्रतीक्षा सूची (वेटिंग लिस्ट) में शामिल अभ्यर्थी को नियुक्ति का कोई पूर्ण या अटल अधिकार प्राप्त नहीं होता और न ही किसी चयन प्रक्रिया की प्रतीक्षा सूची को अनिश्चित काल तक जीवित रखा जा सकता है।जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने यह टिप्पणी सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) भर्ती से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की। अदालत ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि प्रतीक्षा सूची केवल सीमित अवधि और सीमित उद्देश्य के लिए होती है और इससे नियुक्ति का स्वतः अधिकार उत्पन्न...
विदेशी आय को सीधे भारतीय मुद्रा में बदलकर भरण–पोषण तय नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया फैसले में स्पष्ट किया कि पति की विदेशी आय को यांत्रिक तरीके से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर पत्नी के भरण–पोषण की राशि तय नहीं की जा सकती। अदालत ने कहा कि केवल इस आधार पर कि पति विदेश में कमाता है, उसकी आय को सीधे रुपये में बदलकर भारतीय अदालतों द्वारा विकसित फार्मूलों को लागू करना उचित नहीं होगा जब तक कि मामले की परिस्थितियों पर समुचित रूप से विचार न किया जाए।जस्टिस अमित महाजन ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जिसमें पति और पत्नी दोनों ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को चुनौती...
दिल्ली हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए जॉन डो ऑर्डर पास किया
दिल्ली हाईकोर्ट ने आंध्र प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री पवन कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स की रक्षा के लिए एक जॉन डो अंतरिम आदेश पारित किया।जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा ने कहा कि प्रतिवादी कल्याण के नाम, शक्ल, आवाज़ और इमेज का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना, सीधे या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के ज़रिए, कमर्शियल फायदे के लिए सामान बेचने के लिए कर रहे थे।कोर्ट ने कहा कि उल्लंघन करने वाले प्रतिवादियों द्वारा उनकी विशेषताओं का ऐसा अनधिकृत इस्तेमाल, पहली नज़र में, कल्याण के पर्सनैलिटी राइट्स का उल्लंघन है।इसमें...
पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिले अनुभव को हेडमास्टर पद के लिए एलिजिबिलिटी में नहीं गिना जा सकता: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हाल ही में कहा कि पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर मिला अनुभव रेगुलर टीचर के अनुभव के बराबर नहीं है। ऐसी पार्ट-टाइम सर्विस उम्मीदवार को हेडमास्टर के पद पर नियुक्ति के लिए तब तक एलिजिबल नहीं बनाएगी, जब तक कि कानून में खास तौर पर इसका प्रावधान न हो।जस्टिस मंजू रानी चौहान ने कहा,“अगर भर्ती के नियमों में खास तौर पर रेगुलर सर्विस में असिस्टेंट टीचर के तौर पर टीचिंग अनुभव की ज़रूरत है तो सिर्फ़ पार्ट-टाइम इंस्ट्रक्टर के तौर पर हासिल किया गया अनुभव, जिसमें परमानेंट होने, प्रशासनिक...
गुजरात हाईकोर्ट ने नगर पालिका को आवारा सांड की टक्कर से मरने वाले मोटरसाइकिल सवार के परिवार को मुआवज़ा देने का निर्देश बरकरार रखा
गुजरात हाईकोर्ट ने वडोदरा नगर निगम को 2007 में आवारा सांड की टक्कर से मरने वाले मोटरसाइकिल सवार के परिवार को हर्जाने के तौर पर 9% सालाना ब्याज के साथ ₹4,84,473 देने का निर्देश देने वाला आदेश बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि यह दुर्घटना निगम की लापरवाही के कारण हुई, क्योंकि उसने सार्वजनिक सड़कों और गलियों को आवारा पशुओं से मुक्त नहीं रखा था।फैयाज हुसैन नज़ीरअहमद अंसारी बनाम अहमदाबाद नगर निगम मामले में कोऑर्डिनेट बेंच के फैसले का हवाला देते हुए जस्टिस एम.के. ठक्कर ने अपने आदेश में रेस इप्सा लोक्विटुर...
कस्टडी के फैसले माता-पिता के जेंडर पर नहीं, बच्चे के सबसे अच्छे हित पर आधारित होते हैं, बच्चों को माता-पिता की समान रूप से ज़रूरत होती है: केरल हाईकोर्ट
केरल हाईकोर्ट ने कहा कि शादी से जुड़े कस्टडी के मुकदमों में शामिल बच्चों को समाज के आदर्श नागरिक के रूप में उनकी मानसिक और शारीरिक विकास और परवरिश के लिए दोनों माता-पिता के सपोर्ट की बहुत ज़रूरत होती है।जस्टिस देवन रामचंद्रन और जस्टिस पी. कृष्णा कुमार की वेकेशन बेंच माता-पिता द्वारा नाबालिग बच्चे की कस्टडी को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर विचार कर रही थी।बेंच की अध्यक्षता कर रहे जस्टिस देवन रामचंद्रन ने कहा कि बच्चों को दोनों माता-पिता की ज़रूरत होती है।उन्होंने आगे कहा,“बच्चों की कस्टडी की...







![2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 3 [51-75] 2025 के सुप्रीम कोर्ट के 100 महत्वपूर्ण फैसले - पार्ट 3 [51-75]](https://hindi.livelaw.in/h-upload/2025/12/28/500x300_643235-100importantjudgmentsof2025part3.jpg)











