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तलाशी के दौरान परिसर बंद होने पर उसे सील करने का अधिकार नहीं: ED ने हाईकोर्ट के समक्ष स्वीकार किया
तलाशी के दौरान परिसर बंद होने पर उसे सील करने का अधिकार नहीं: ED ने हाईकोर्ट के समक्ष स्वीकार किया

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मद्रास हाईकोर्ट के समक्ष स्वीकार किया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के अनुसार तलाशी के समय परिसर बंद होने पर उसे सील करने का अधिकार उसके पास नहीं है।जस्टिस एम एस रमेश और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण की खंडपीठ फिल्म निर्माता आकाश भास्करन और व्यवसायी विक्रम रविंद्रन द्वारा उनके आवास और कार्यालय पर की गई ED की तलाशी के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी और इसे अवैध घोषित करने की मांग कर रही थी। आरोप लगाया गया कि ED ने आवासीय फ्लैट और कार्यालय को सील कर दिया...

सिर्फ सांप्रदायिक झड़प में शामिल होना यूपी गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए काफी नहीं, आदतन अपराधी होने के सबूत जरूरी : सुप्रीम कोर्ट
सिर्फ सांप्रदायिक झड़प में शामिल होना यूपी गैंगस्टर एक्ट लगाने के लिए काफी नहीं, आदतन अपराधी होने के सबूत जरूरी : सुप्रीम कोर्ट

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यूपी गैंगस्टर्स और असामाजिक गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1986 (Gangsters Act) जैसे कठोर राज्य कानून केवल असामाजिक गतिविधि की एक घटना में शामिल होने के लिए व्यक्तियों पर लागू नहीं किए जा सकते, जब तक कि पूर्व या चल रहे समन्वित आपराधिक आचरण को दर्शाने वाले साक्ष्य न हों।अदालत ने कहा,"केवल कई आरोपियों को सूचीबद्ध करना, उनकी संगठनात्मक भूमिका, कमांड संरचना या पूर्व या निरंतर समन्वित आपराधिक गतिविधियों के सबूतों को प्रदर्शित किए बिना गिरोह की सदस्यता स्थापित करने के...

हाईकोर्ट ने 3 साल बाद बंगाल में मनरेगा योजना को संभावित रूप से लागू करने का केंद्र को दिया निर्देश
हाईकोर्ट ने 3 साल बाद बंगाल में मनरेगा योजना को संभावित रूप से लागू करने का केंद्र को दिया निर्देश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने गबन के आरोपों पर लगभग तीन साल के अंतराल के बाद 1 अगस्त, 2025 से पश्चिम बंगाल राज्य में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) योजना के संभावित कार्यान्वयन का निर्देश दिया।चीफ जस्टिस टीएस शिवगनम और जस्टिसा चैताली चटर्जी (दास) की खंडपीठ केंद्र सरकार द्वारा धन के गबन के आरोपों पर मनरेगा योजना के तहत दिहाड़ी मजदूरों को बकाया भुगतान न करने के मामले की सुनवाई कर रही थी।योजना के कार्यान्वयन का निर्देश देते हुए चीफ जस्टिस ने मौखिक रूप से टिप्पणी की,"ये सभी...

सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज चुकाने के लिए बाल विवाह के लिए मजबूर नाबालिग लड़की को दी सुरक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने कर्ज चुकाने के लिए बाल विवाह के लिए मजबूर नाबालिग लड़की को दी सुरक्षा

सुप्रीम कोर्ट ने जबरदस्ती शादी से बच निकल भागने वाली बिहार की नाबालिग लड़की और भागने में मदद करने वाली उसकी सहेली को पुलिस सुरक्षा प्रदान की।नाबालिग लड़की और उसकी सहेली कथित तौर पर बिहार के 33 वर्षीय ठेकेदार जय शंकर से शादी कर ली थी, जिसके बाद वह अपने माता-पिता द्वारा लिए गए वित्तीय कर्ज को चुकाने के लिए भाग गई थी।याचिकाकर्ता 16 वर्षीय लड़की है। वह बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत अपनी शादी को रद्द करने की भी मांग कर रही है। उसने ठेकेदार, प्रतिवादी नंबर 4 के हाथों शारीरिक शोषण का आरोप लगाया...

राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएं 211 से 216: संपत्ति विभाजन के विशेष प्रावधान, साझा संरचना और राजस्व वितरण
राजस्थान भू राजस्व अधिनियम, 1956 की धाराएं 211 से 216: संपत्ति विभाजन के विशेष प्रावधान, साझा संरचना और राजस्व वितरण

धारा 211 – एक सह स्वामी के हिस्से में दूसरे द्वारा बनाई गई इमारतों, बागों या बगीचों का न्यायसंगत पुनर्वितरणजब संपत्ति का विभाजन किया जा रहा हो, और किसी सह स्वामी के हिस्से में ऐसी जमीन आ रही हो जिस पर दूसरे सह स्वामी ने अपना आवास, भवन, बगीचे, वृक्षारोपण या अन्य सुधार अपने खर्च पर किया है, तो उस सुधारकर्ता को उस जमीन का अधिकार बना रहने दिया जाएगा। हालाँकि वह जमीन दूसरे सह स्वामी के हिस्से में आती है, लेकिन उसे कुछ स्थायी किराया देना होगा जिसे 'ग्राउंड रेंट' कहते हैं। इसमें कलेक्टर ही तय करेगा कि...

गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अरविंद दातार को ED समन की निंदा की, वकीलों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए CJI से हस्तक्षेप की मांग की
गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन ने अरविंद दातार को ED समन की निंदा की, वकीलों की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए CJI से हस्तक्षेप की मांग की

गुजरात हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन (GHAA) ने 17 जून को बार रूम में आयोजित अपनी विशेष सामान्य बैठक में एकमत से प्रस्ताव पारित कर सीनियर एडवोकेट अरविंद पी. दातार को प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा समन जारी किए जाने की कड़ी निंदा की।बता दें यह समन दातार द्वारा केयर हेल्थ इंश्योरेंस को पूर्व चेयरपर्सन रश्मि सलूजा को दिए गए ESOP पर दी गई कानूनी सलाह को लेकर जारी किया गया था।अब यह समन वापस ले लिया गया है। हालांकि, एसोसिएशन ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की कार्रवाई वकालत पेशे की स्वतंत्रता को कमजोर...

सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति को अतार्किक स्तर तक नहीं खींचा जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने 33 एकड़ ज़मीन और HIG हाउस वाले व्यक्ति की याचिका खारिज की
सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति को अतार्किक स्तर तक नहीं खींचा जा सकता : सुप्रीम कोर्ट ने 33 एकड़ ज़मीन और HIG हाउस वाले व्यक्ति की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने 17 जून को एक विशेष अनुमति याचिका (SLP) खारिज की, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देती थी। हाईकोर्ट के इस आदेश में याचिकाकर्ता की सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति की मांग को ठुकरा दिया गया था।जस्टिस उज्जल भुयान और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों को खारिज करते हुए सवाल उठाया कि इस प्रकार के मामलों में सहानुभूति के आधार पर नियुक्ति की मांग कैसे की जा सकती है।जस्टिस भुयान ने टिप्पणी की,“आप सहानुभूति नियुक्तियों को अतार्किक सीमा तक नहीं खींच सकते। आप...

दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपुताना राइफल्स के सैनिकों के लिए फुटओवर ब्रिज निर्माण की अंतिम योजना मांगी, सैनिक रोज़ाना गंदे नाले से होकर गुजरने को मजबूर
दिल्ली हाईकोर्ट ने राजपुताना राइफल्स के सैनिकों के लिए फुटओवर ब्रिज निर्माण की अंतिम योजना मांगी, सैनिक रोज़ाना गंदे नाले से होकर गुजरने को मजबूर

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को शहर के संबंधित प्राधिकरणों से राजपुताना राइफल्स के सैनिकों के लिए फुटओवर ब्रिज निर्माण की अंतिम योजना मांगी। बता दें, ये सैनिक हर सुबह अपनी बैरकों से परेड ग्राउंड तक मार्च करते हुए एक गंदे नाले से होकर गुजरने को मजबूर हैं।जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह अरोड़ा की खंडपीठ ने लोक निर्माण विभाग (PWD) दिल्ली कैंटोनमेंट बोर्ड और ट्रैफिक पुलिस को निर्देश दिया कि वे संयुक्त बैठक कर इस फुटओवर ब्रिज के तत्काल निर्माण का समाधान निकालें।कोर्ट ने यह भी कहा कि...

सुप्रीम कोर्ट ने महिला राजनेता पर वीडियो मामले में पत्रकार को दी अंतरिम अग्रिम जमानत
सुप्रीम कोर्ट ने महिला राजनेता पर वीडियो मामले में पत्रकार को दी अंतरिम अग्रिम जमानत

सुप्रीम कोर्ट ने केरल के पत्रकार टी.पी. नंदकुमार द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें उन्होंने अपने यूट्यूब चैनल क्राइम ऑनलाइन पर महिला राजनेता के खिलाफ कथित रूप से मानहानिकारक वीडियो प्रकाशित करने के मामले में राहत की मांग की थी।जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की अवकाशकालीन खंडपीठ ने नंदकुमार को अंतरिम राहत देते हुए कहा कि यदि उनकी गिरफ्तारी होती है तो उन्हें ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत और बॉन्ड भरने पर रिहा किया जाएगा, जिसकी शर्तें जांच अधिकारी की संतुष्टि...

हतोत्साहित करने वाला: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु ADGP जयराम के निलंबन पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट के गिरफ्तारी आदेश को बताया चौंकाने वाला
हतोत्साहित करने वाला: सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु ADGP जयराम के निलंबन पर उठाए सवाल, हाईकोर्ट के गिरफ्तारी आदेश को बताया चौंकाने वाला

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार से यह सवाल किया कि अपहरण के मामले में कथित संलिप्तता को लेकर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADGP) एच.एम. जयराम को निलंबित करना क्यों आवश्यक था।सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ ने यह टिप्पणी की, जब वह जयराम द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मद्रास हाईकोर्ट द्वारा उनकी गिरफ्तारी के निर्देश को चुनौती दी गई थी।खंडपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि जब जयराम जांच में सहयोग कर रहे हैं तो फिर उन्हें निलंबित करने की क्या आवश्यकता...

बिना चेक नंबर, तारीख और राशि वाले बैंक स्लिप को NI Act की धारा 146 के तहत साक्ष्य नहीं माना जा सकता: केरल हाईकोर्ट
बिना चेक नंबर, तारीख और राशि वाले बैंक स्लिप को NI Act की धारा 146 के तहत साक्ष्य नहीं माना जा सकता: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने यह निर्णय दिया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट, 1881 (NI Act) की धारा 146 के अंतर्गत यदि किसी चेक के अनादरण (डिशऑनर) को साबित करना है तो बैंक द्वारा जारी की गई स्लिप में चेक की संख्या, तारीख और राशि स्पष्ट रूप से उल्लेखित होनी चाहिए। यदि ये महत्वपूर्ण विवरण अनुपस्थित हैं तो उस मेमो को चेक अनादरण के प्रारंभिक साक्ष्य के रूप में नहीं माना जा सकता।जस्टिस ए. बदरुद्दीन ने यह टिप्पणी उस समय की, जब उन्होंने चेक बाउंस मामले में दिए गए एक बरी करने के आदेश को रद्द किया।शिकायतकर्ता ने NI...

लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार बंद होने के बाद, मध्यस्थता अधिनियम की धारा 8 के तहत आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट
लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार बंद होने के बाद, मध्यस्थता अधिनियम की धारा 8 के तहत आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

दिल्‍ली हाईकोर्ट की जस्टिस शालिंदर कौर और जस्टिस नवीन चावला की पीठ ने माना कि एक बार लिखित बयान दाखिल करने का अधिकार समाप्त हो जाने के बाद, मध्यस्थता और सुलह अधिनियम की धारा 8 के तहत मध्यस्थता के लिए संदर्भ मांगने वाला आवेदन स्वीकार्य नहीं है। तथ्यवाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 की धारा 13 के तहत यह नियमित प्रथम अपील जिला न्यायाधीश, वाणिज्यिक न्यायालय-06, दक्षिण-पूर्व जिला, साकेत न्यायालय, नई दिल्ली द्वारा पारित दिनांक 25.11.2024 के निर्णय को चुनौती देती है। प्रतिवादी (विद्वान जिला न्यायाधीश...